मध्यप्रदेश बजट 2026-27 में इस बार विकास की सबसे बड़ी तस्वीर इंदौर और उज्जैन के नाम रही। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि औद्योगिक, धार्मिक और शहरी बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट और सबसे बड़ा वित्तीय आवंटन इन्हीं दो शहरों को मिलेगा। बजट दस्तावेज़ों के अनुसार इंदौर–पीथमपुर आर्थिक कॉरिडोर के लिए 2360 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि उज्जैन में एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए 1000 करोड़ रुपये की बड़ी राशि तय की गई है।
यह आवंटन केवल सड़कों या पुलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े औद्योगिक क्लस्टर, पर्यटन, शहरी परिवहन, सिंचाई और सामाजिक बुनियादी ढांचे के कई आयाम भी शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि इन परियोजनाओं से न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
इंदौर–पीथमपुर आर्थिक कॉरिडोर को राज्य की औद्योगिक रीढ़ माना जा रहा है। पीथमपुर पहले से ही ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित है। 2360 करोड़ रुपये के निवेश से लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड यूनिट्स और एमएसएमई सेक्टर को सीधा फायदा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर माल परिवहन की लागत घटाएगा और उद्योगों के लिए कनेक्टिविटी आसान करेगा।
उज्जैन में 1000 करोड़ का एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट धार्मिक पर्यटन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। महाकाल लोक और आसपास के धार्मिक स्थलों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए यातायात दबाव कम करने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
बजट में इंदौर संभाग को 350 करोड़ के फ्लाईओवर और कई प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण का भी प्रावधान मिला है। औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाली 63 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए अलग से राशि रखी गई है। इससे माल ढुलाई तेज होगी और शहर के भीतर यातायात का दबाव घटेगा।
रीवा–शहडोल क्षेत्र में सड़क और पुल निर्माण के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन इलाकों में ग्रामीण कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया गया है ताकि कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में आसानी हो।
भोपाल और ग्वालियर–चंबल क्षेत्र में भी सिंचाई और शहरी विकास परियोजनाओं को बढ़ावा मिला है। बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट्स के लिए अतिरिक्त फंडिंग दी गई है, जिससे किसानों को सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
राज्य सरकार का कहना है कि बजट का फोकस ‘कनेक्टिविटी और कैपिटल इन्वेस्टमेंट’ पर है। सड़क, पुल, सिंचाई, शहरी विकास और औद्योगिक कॉरिडोर पर खर्च बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को गति देने की रणनीति अपनाई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार इतने बड़े पैमाने पर पूंजीगत व्यय से राज्य की जीडीपी वृद्धि दर में सुधार संभव है। निर्माण गतिविधियों में तेजी आने से सीमेंट, स्टील, ट्रांसपोर्ट और रियल एस्टेट सेक्टर को भी लाभ मिलेगा।
हालांकि विपक्ष ने बढ़ते कर्ज को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए राज्य पर ऋण का बोझ बढ़ सकता है। सरकार ने जवाब दिया है कि पूंजीगत निवेश भविष्य में राजस्व बढ़ाने में मदद करेगा और दीर्घकाल में कर्ज का अनुपात संतुलित रहेगा।
उद्योग जगत ने बजट का स्वागत किया है। इंदौर के उद्योग संगठनों ने कहा कि आर्थिक कॉरिडोर से निर्यात बढ़ेगा और नए निवेश आकर्षित होंगे। उज्जैन के व्यापारिक संगठनों ने एलिवेटेड रोड को धार्मिक पर्यटन के लिए गेम-चेंजर बताया है।
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो राज्य की लॉजिस्टिक लागत 10-15% तक घट सकती है। इससे मध्यप्रदेश ‘लैंड-लॉक्ड स्टेट’ की छवि से बाहर निकलकर बेहतर कनेक्टिविटी वाला राज्य बन सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी सड़क और सिंचाई परियोजनाओं का असर दिखेगा। किसानों को मंडियों तक बेहतर पहुंच मिलेगी और फसल की लागत घटेगी।
शहरी विकास योजनाओं के तहत स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, बस टर्मिनल अपग्रेड और नई कॉलोनियों के लिए आधारभूत ढांचे पर भी खर्च बढ़ाया गया है।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 2026-27 तक इंदौर–उज्जैन बेल्ट को औद्योगिक और धार्मिक पर्यटन का संयुक्त हब बनाया जाए।
निष्कर्षतः मध्यप्रदेश बजट 2026-27 में इंदौर और उज्जैन को सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट और पैसा देकर सरकार ने विकास की नई दिशा तय की है। 2360 करोड़ का आर्थिक कॉरिडोर और 1000 करोड़ का एलिवेटेड रोड न केवल क्षेत्रीय विकास को गति देंगे, बल्कि राज्य की समग्र अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक असर डाल सकते हैं।
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