देश में इस बार गर्मी का सीजन शुरू होते ही जिस तेजी से एसी और फ्रिज की बिक्री बढ़ने की उम्मीद थी, वह अचानक थम गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह बनी है बेमौसम बारिश, जिसने बाजार की रफ्तार को धीमा कर दिया है। आमतौर पर मार्च से जून के बीच कूलिंग प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ती है, लेकिन इस बार मौसम के उलटफेर ने कंपनियों की रणनीति ही बदल दी है।
उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान बढ़ने के बजाय गिर गया, जिससे लोगों ने एसी और फ्रिज खरीदने का प्लान टाल दिया। रिटेलर्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में बिक्री में करीब 10-15% तक की गिरावट दर्ज की गई है। खासकर छोटे शहरों और कस्बों में इसका ज्यादा असर देखने को मिला है।
इस स्थिति ने कंपनियों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ गोदामों में पुराना स्टॉक जमा है, तो दूसरी तरफ नई इन्वेंट्री आने वाली है। ऐसे में कंपनियां पुराने स्टॉक को निकालने के लिए 2% से 11% तक डिस्काउंट दे रही हैं।
हालांकि, यह राहत ज्यादा समय तक नहीं रहने वाली। इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में एसी और फ्रिज की कीमतों में 5% से 10% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं, जिनका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
सबसे बड़ा कारण है कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी। एसी और फ्रिज बनाने में इस्तेमाल होने वाला कॉपर और एल्यूमीनियम पिछले कुछ समय में महंगा हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉपर की कीमत में करीब 40% तक उछाल आया है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है।
इसके अलावा, सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण कई देशों से आने वाले पार्ट्स की सप्लाई बाधित हुई है। इससे कंपनियों की लागत और बढ़ गई है।
रुपये की कमजोरी भी एक अहम कारण है। जब रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो आयातित सामान महंगा हो जाता है। इससे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है।
नई एनर्जी रेटिंग नीतियां भी कीमत बढ़ने की एक वजह बन रही हैं। सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के तहत एसी और फ्रिज को ज्यादा ऊर्जा दक्ष बनाना जरूरी है। इसके लिए कंपनियों को नई तकनीक और बेहतर कंपोनेंट्स का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है।
हालांकि, इन नए नियमों का एक सकारात्मक पहलू भी है। नए 5-स्टार रेटिंग वाले एसी और फ्रिज पुराने मॉडल्स की तुलना में लगभग 10% ज्यादा बिजली बचाते हैं। यानी शुरुआत में कीमत ज्यादा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में उपभोक्ताओं को फायदा होगा।
कंपनियों के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ स्टॉक क्लियर करना है और दूसरी तरफ बढ़ती लागत को भी संभालना है। यही वजह है कि बाजार में एक तरफ डिस्काउंट मिल रहा है, तो दूसरी तरफ कीमतें बढ़ाने की तैयारी भी चल रही है।
रिटेलर्स का कहना है कि अगर अप्रैल और मई में तापमान तेजी से बढ़ता है, तो मांग फिर से बढ़ सकती है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी जल्दी लागू की जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल एसी और फ्रिज तक सीमित नहीं है। वॉशिंग मशीन और अन्य घरेलू उपकरणों की कीमतों में भी 5% तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
एफएमसीजी सेक्टर भी इससे अछूता नहीं है। पैकेजिंग और कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण रोजमर्रा के सामान की कीमतों में 1-3% तक का इजाफा हो सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं को ज्यादा सोच-समझकर खरीदारी करनी होगी। जहां एक तरफ ऑफर्स और डिस्काउंट मिल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कीमतें बढ़ने की संभावना भी बनी हुई है।
कुल मिलाकर, बेमौसम बारिश ने फिलहाल बाजार की रफ्तार को धीमा कर दिया है, लेकिन आने वाले महीनों में गर्मी बढ़ते ही मांग और कीमत दोनों में तेजी देखने को मिल सकती है।
यह स्थिति इस बात का उदाहरण है कि मौसम, वैश्विक राजनीति और आर्थिक कारक किस तरह मिलकर बाजार को प्रभावित करते हैं।













Leave a Reply