पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच गोलाबारी और सैन्य हलचल की खबरों ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने बयान दिया है कि वे इस संघर्ष को रुकवाने के लिए पहल करेंगे। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है
सीमा विवाद मुख्य रूप से ड्यूरंड लाइन को लेकर है, जो ब्रिटिश काल में खींची गई थी। अफगानिस्तान लंबे समय से इस सीमा को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करता। हाल के घटनाक्रम में अफगान तालिबान बलों द्वारा सीमा के नजदीक गतिविधियां तेज करने और पाकिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं।
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि उनकी चौकियों पर हमले किए गए, जबकि अफगान पक्ष का दावा है कि पहले गोलीबारी पाकिस्तान की ओर से हुई। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों में दहशत का माहौल है।
अफगानिस्तान में सत्ता संभालने के बाद से तालिबान और पाकिस्तान के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पाकिस्तान ने पहले तालिबान शासन का समर्थन किया था, लेकिन अब सीमा पार आतंकी गतिविधियों और सुरक्षा चिंताओं को लेकर तनाव बढ़ गया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती है, तो यह दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है।
डोनाल्ड ट्रंप ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि यदि उन्हें मौका मिला तो वे दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर शांति स्थापित करने की कोशिश करेंगे। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी पहल को आधिकारिक समर्थन मिलेगा या नहीं।
भू-राजनीतिक दृष्टि से यह क्षेत्र पहले ही संवेदनशील रहा है। अफगानिस्तान में अमेरिका की वापसी के बाद शक्ति संतुलन बदला है। पाकिस्तान पर भी अंतरराष्ट्रीय दबाव है कि वह चरमपंथी गतिविधियों पर लगाम लगाए।
विश्लेषकों का कहना है कि सीमा पर बढ़ता तनाव आर्थिक और मानवीय संकट को भी जन्म दे सकता है। व्यापार मार्ग बाधित होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, नागरिकों का विस्थापन भी संभव है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर संघर्षविराम उल्लंघन का आरोप लगाया है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन और ईरान जैसे देशों ने शांति बनाए रखने की अपील की है। दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए यह जरूरी है कि दोनों देश संवाद का रास्ता अपनाएं।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने भी स्थिति पर चिंता जताई है और संयम बरतने का आग्रह किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास तेज नहीं किए गए, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
फिलहाल सीमा पर हालात तनावपूर्ण हैं, लेकिन पूर्ण युद्ध जैसी स्थिति नहीं बनी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या बातचीत से समाधान निकलता है या संघर्ष और बढ़ता है।
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