वैश्विक तेल संकट के बीच जहां कई देश महंगाई और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं, वहीं China पर इसका असर अपेक्षाकृत कम देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे चीन की लंबी अवधि की ऊर्जा रणनीति और दूरदर्शी नीतियां हैं, जो उसने लगभग दो दशक पहले ही तैयार कर ली थीं।
चीन ने करीब 20 साल पहले ही संभावित ऊर्जा संकट को ध्यान में रखते हुए अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) बनाना शुरू कर दिया था। इन भंडारों में लाखों बैरल कच्चा तेल संग्रहित किया गया है, जिसे आपात स्थिति में उपयोग किया जा सकता है।
इस रणनीति का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ीं, तब चीन को तत्काल बाहरी आपूर्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ा। इससे उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव कम रहा।
चीन ने केवल तेल भंडारण पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर भी तेजी से काम किया। सोलर और विंड एनर्जी के क्षेत्र में उसने बड़े पैमाने पर निवेश किया है। आज चीन दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादकों में से एक है।
इसके अलावा चीन ने बिजली उत्पादन के नए तरीके अपनाए हैं। कोयला, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा का संतुलित उपयोग करके उसने अपनी ऊर्जा जरूरतों को विविध बनाया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा के विविध स्रोत होने से किसी एक संसाधन पर निर्भरता कम हो जाती है। यही कारण है कि तेल संकट के बावजूद चीन की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई।
चीन की एक और खास रणनीति यह रही कि उसने केमिकल और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में भी आत्मनिर्भरता की दिशा में काम किया। कई ऐसे उत्पाद, जिनके लिए अन्य देश आयात पर निर्भर हैं, चीन खुद ही उत्पादन करता है।
इससे उसे वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं से काफी हद तक बचाव मिला। जब अन्य देशों को कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ा, तब चीन अपेक्षाकृत स्थिर बना रहा।
चीन की सरकार ने लंबे समय तक योजनाबद्ध तरीके से निवेश किया। इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा क्षेत्र में किए गए इन निवेशों का लाभ आज उसे मिल रहा है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि चीन की यह स्थिति पूरी तरह जोखिम मुक्त नहीं है। यदि संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर वहां भी देखने को मिल सकता है।
फिर भी चीन का मॉडल अन्य देशों के लिए एक उदाहरण बन गया है। यह दिखाता है कि यदि समय रहते योजना बनाई जाए और संसाधनों का सही प्रबंधन किया जाए, तो बड़े संकटों का सामना किया जा सकता है।
भारत जैसे देशों के लिए भी यह एक सीख हो सकती है। ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान देना और रणनीतिक भंडार बनाना भविष्य में मददगार साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर चीन की दूरदर्शी नीतियों और मजबूत रणनीति ने उसे वैश्विक तेल संकट के प्रभाव से काफी हद तक बचाए रखा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य देश इस मॉडल से क्या सीख लेते हैं।













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