भारत में सामाजिक कार्य और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को समय-समय पर विभिन्न मंचों के माध्यम से सम्मानित किया जाता है। इसी क्रम में देश की जानी-मानी समाजसेवी और Nita Ambani को कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा प्रतिष्ठित ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उनके द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों को मान्यता देने के रूप में देखा जा रहा है।
भुवनेश्वर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए ऐसे प्रयास बेहद जरूरी हैं, जो जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन को बेहतर बनाते हैं। नीता अंबानी लंबे समय से अपने फाउंडेशन के माध्यम से ऐसे ही कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
रिलायंस फाउंडेशन के जरिए उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया है, खासकर उन बच्चों के लिए जो सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं। आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और वहां के बच्चों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करने के प्रयासों को इस सम्मान के पीछे एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में नीता अंबानी ने कहा कि हर बच्चे को अवसर मिलना चाहिए ताकि वह अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सके। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण साधन है और इसके माध्यम से ही स्थायी परिवर्तन संभव है।
उन्होंने आदिवासी छात्रों के बारे में विशेष रूप से बात करते हुए कहा कि उनमें अपार क्षमता होती है, जरूरत सिर्फ उन्हें सही दिशा और अवसर देने की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा के माध्यम से ही किसी भी समाज को सशक्त बनाया जा सकता है।
कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, जिसे KISS के नाम से भी जाना जाता है, आदिवासी बच्चों के लिए शिक्षा और आवास की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जाना जाता है। यह संस्थान देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुका है। यहां हजारों छात्र-छात्राएं मुफ्त शिक्षा प्राप्त करते हैं और अपने भविष्य को संवारने का प्रयास करते हैं।
इस सम्मान समारोह में यह भी बताया गया कि पिछले वर्षों में इस पुरस्कार को कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों को भी दिया जा चुका है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह अवॉर्ड केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान रखता है।
नीता अंबानी के कार्यों का दायरा केवल शिक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, खेल और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके प्रयासों के कारण कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मान समाज में सकारात्मक संदेश देने का काम करते हैं। इससे अन्य लोग भी प्रेरित होते हैं और सामाजिक कार्यों में भागीदारी बढ़ती है।
भारत में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR के तहत कई कंपनियां समाज के लिए काम कर रही हैं, लेकिन कुछ पहलें ऐसी होती हैं जो अपने प्रभाव और व्यापकता के कारण अलग पहचान बना लेती हैं। रिलायंस फाउंडेशन की पहलें भी इसी श्रेणी में आती हैं।
नीता अंबानी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि हमें समाज के उन वर्गों तक पहुंचना चाहिए जो अब तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहे हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यदि हम सभी मिलकर प्रयास करें तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
इस अवसर पर मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी उनके कार्यों की सराहना की और कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास आने वाले समय में देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आदिवासी छात्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों को विशेष रूप से सराहा गया। यह भी कहा गया कि ऐसे प्रयासों से न केवल छात्रों का भविष्य सुधरता है बल्कि पूरे समाज का विकास होता है।
कार्यक्रम के दौरान कई छात्रों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे शिक्षा ने उनके जीवन को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें यह अवसर नहीं मिला होता, तो शायद वे अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते।
इस तरह के आयोजनों से यह संदेश जाता है कि समाज में बदलाव लाने के लिए केवल सरकार ही नहीं बल्कि निजी संस्थाएं और व्यक्ति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अंत में यह कहा जा सकता है कि नीता अंबानी को मिला यह सम्मान न केवल उनके कार्यों की सराहना है बल्कि यह उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा भी है जो समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं।













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