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IIT ग्रेजुएट ने नौकरी छोड़ शुरू किया Coffee Business, ₹13 लाख से 95+ Stores तक पहुंची कहानी

भारत में कॉफी पीना लंबे समय तक सिर्फ एक पेय नहीं बल्कि एक तरह का प्रीमियम अनुभव माना जाता रहा है। बड़े शहरों में किसी अच्छे कैफे में बैठकर कॉफी पीने के लिए लोग अक्सर ₹200 से ₹400 या उससे ज्यादा खर्च करने को तैयार रहते हैं। इस कीमत में सिर्फ कॉफी की कीमत शामिल नहीं होती, बल्कि कैफे की जगह, किराया, इंटीरियर, बैठने की सुविधा, स्टाफ और पूरे ambience का खर्च भी जुड़ा होता है। लेकिन बिहार के भागलपुर से आने वाले IIT (ISM) धनबाद के पूर्व छात्र अभिजीत आनंद ने इसी मॉडल को चुनौती देने का फैसला किया। उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ी और ऐसा कॉफी बिजनेस शुरू किया जिसमें महंगे और बड़े कैफे के बजाय छोटे, कम जगह वाले और grab-and-go आउटलेट्स पर फोकस किया गया। आज उनका ब्रांड abcoffee 95 से ज्यादा कंपनी-ओन्ड आउटलेट्स तक पहुंच चुका है और यह कहानी भारत में affordable specialty coffee के बढ़ते बाजार की मिसाल बन गई है।

अभिजीत आनंद ने IIT (ISM) धनबाद से पढ़ाई की और इसके बाद करीब साढ़े आठ साल तक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया। इस दौरान उनका काम केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने रोमानिया, UAE, सऊदी अरब, बांग्लादेश और अमेरिका जैसे देशों में भी काम किया। यानी उनके पास नौकरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार और कॉर्पोरेट सिस्टम का अच्छा अनुभव था। आम तौर पर इतनी अच्छी नौकरी और करियर के बाद लोग उसी रास्ते पर आगे बढ़ना पसंद करते हैं, लेकिन अभिजीत के मन में अपना बिजनेस शुरू करने का विचार लगातार मजबूत होता गया। आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़कर entrepreneurship की राह चुन ली।

दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने नौकरी छोड़ते ही जल्दबाजी में कोई कैफे नहीं खोल दिया। भारत लौटने के बाद उन्होंने पहले यह समझने की कोशिश की कि आखिर भारतीय ग्राहक कॉफी पर कितना खर्च करना चाहते हैं और बाजार में वास्तविक समस्या क्या है। 2021 में भारत लौटने के बाद उन्होंने करीब 20 शहरों और 12 राज्यों की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने लगभग 10 हजार लोगों से बातचीत की, जिनमें ग्राहक, कैफे संचालक और कॉफी से जुड़े लोग शामिल थे। उन्होंने कॉफी मार्केट, ग्राहकों की पसंद, कीमतों और मौजूदा कैफे मॉडल को करीब से समझने की कोशिश की। इस रिसर्च से उन्हें एक ऐसा gap दिखाई दिया, जिसने आगे चलकर abcoffee की नींव रखी।

अभिजीत ने महसूस किया कि भारत में अच्छी कॉफी की मांग मौजूद है, लेकिन specialty coffee को अक्सर luxury या occasional experience की तरह पेश किया जाता है। ग्राहक को अच्छी कॉफी चाहिए, लेकिन वह हर दिन ₹250 या ₹300 खर्च करके बड़े कैफे में बैठना जरूरी नहीं समझता। दूसरी तरफ छोटे शहरों और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए भी ऐसी कॉफी उपलब्ध कराने का अवसर मौजूद था, जिसे रोजमर्रा की आदत बनाया जा सके। यही सोच abcoffee के बिजनेस मॉडल का आधार बनी।

उनका सवाल बेहद साधारण लेकिन बिजनेस की नजर से महत्वपूर्ण था—अगर लोगों को अच्छी कॉफी चाहिए तो उन्हें इसके लिए बड़े और महंगे कैफे में जाने की जरूरत क्यों हो? इसी सोच से उन्होंने छोटे आउटलेट्स का मॉडल तैयार किया। इसका मकसद था कि महंगी real estate और बड़े seating area पर खर्च कम किया जाए और उस बचत का फायदा ग्राहक को कीमत और उत्पाद की गुणवत्ता में दिया जाए। abcoffee को इसी grab-and-go मॉडल के साथ शुरू किया गया, जिसमें ग्राहक कॉफी ऑर्डर करता है, उसे जल्दी से तैयार किया जाता है और वह उसे लेकर आगे बढ़ सकता है।

abcoffee का पहला आउटलेट जून 2022 में मुंबई के वर्सोवा इलाके में शुरू हुआ। इसके लिए अभिजीत ने अपनी बचत से लगभग ₹13 लाख लगाए। शुरुआत किसी बड़े निवेशक या बहुत बड़ी टीम के साथ नहीं हुई थी। वह खुद आउटलेट पर मौजूद रहते थे, ग्राहकों से बात करते थे, ऑपरेशन संभालते थे और बिजनेस के छोटे-बड़े कामों को समझते थे। शुरुआती दौर में उन्हें करीब 18 घंटे प्रतिदिन तक काम करना पड़ा। यह वह समय था जब उनके पास न बड़ा ब्रांड था और न ही आज जैसी पहचान।

पहले महीने की कमाई करीब ₹1 लाख रही। इतनी कम शुरुआती बिक्री के बावजूद उन्होंने बिजनेस बंद नहीं किया। बल्कि ग्राहकों से मिले feedback को समझा और यह पता लगाने की कोशिश की कि कौन-सी चीज लोगों को दोबारा दुकान तक ला सकती है। शुरुआत में करीब 1,000 कप प्रति महीने बिकने वाले इस बिजनेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज advertising नहीं बल्कि word-of-mouth बनी। शुरुआती ग्राहकों ने जब कॉफी और अनुभव को पसंद किया तो धीरे-धीरे दूसरे ग्राहक भी आने लगे। इस तरह एक छोटे आउटलेट से ब्रांड की पहचान बननी शुरू हुई।

यहीं पर abcoffee का सबसे बड़ा बिजनेस सबक सामने आता है। कंपनी ने बड़े कैफे खोलकर ग्राहक को लंबे समय तक बैठाने के बजाय ज्यादा ग्राहकों तक तेजी से पहुंचने का मॉडल चुना। छोटे आउटलेट का मतलब था कम जगह, कम real estate cost और ज्यादा locations खोलने की क्षमता। ग्राहक को महंगे ambience के बजाय कॉफी और convenience पर फोकस मिलता है। यानी बिजनेस ने कैफे की “space economy” को बदलकर “volume and convenience” की दिशा में ले जाने की कोशिश की।

आज abcoffee के करीब 95 से ज्यादा कंपनी-ओन्ड आउटलेट्स बताए जा रहे हैं। ये दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में मौजूद हैं। अलग-अलग हालिया अपडेट में outlet count 95+ से लेकर 100+ के आसपास भी बताया गया है, क्योंकि कंपनी लगातार नए स्टोर खोल रही है। इसलिए किसी एक तारीख के संदर्भ में outlet count बदल सकता है।

यह विस्तार केवल स्टोर की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इतने बड़े नेटवर्क को चलाने के लिए product consistency, employee training, supply chain और technology की जरूरत होती है। उपलब्ध कंपनी से जुड़े विवरण के अनुसार abcoffee की टीम तीन लोगों से बढ़कर सैकड़ों कर्मचारियों तक पहुंची है। करीब 468 कर्मचारियों की टीम में बड़ी संख्या barista partners की बताई गई है। कंपनी ने अलग-अलग शहरों में training centres भी बनाए हैं और प्रत्येक barista के लिए लगभग 14 दिन की training का मॉडल बताया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि मुंबई में बनी कॉफी का स्वाद और दिल्ली या बेंगलुरु में मिलने वाली कॉफी के बीच ज्यादा अंतर न हो।

कॉफी की कीमत भी इस बिजनेस मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। abcoffee के अधिकांश beverages की कीमत करीब ₹119 से ₹209 के बीच बताई गई है। यानी ब्रांड का लक्ष्य premium quality को comparatively affordable price पर उपलब्ध कराना है। मेन्यू में केवल traditional coffee ही नहीं, बल्कि matcha, protein drinks, seasonal beverages, coolers और café bites जैसे विकल्प भी शामिल हैं। इस तरह कंपनी ने केवल कॉफी बेचने के बजाय ग्राहक की रोजमर्रा की beverage habit बनाने की कोशिश की है।

इस मॉडल का असर कप बिक्री के आंकड़ों में भी दिखाई देता है। शुरुआत में जहां करीब 1,000 कप प्रति महीने बिकते थे, वहीं हालिया उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कंपनी करीब 3.5 लाख कप प्रति महीने बेच रही है। कुल मिलाकर 45 लाख से ज्यादा और कुछ हालिया अपडेट में 50 लाख से ज्यादा cups बिकने की जानकारी दी गई है। आंकड़ों में यह अंतर रिपोर्ट की तारीख और cumulative sales की गणना के कारण हो सकता है, लेकिन दोनों ही स्थिति में शुरुआती 1,000 कप प्रति महीने से लाखों कप तक पहुंचना बिजनेस की तेज growth को दिखाता है।

कंपनी की revenue growth भी इस कहानी को और दिलचस्प बनाती है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार FY25 में abcoffee का revenue करीब ₹5 करोड़ था, जो FY26 में बढ़कर करीब ₹20 करोड़ तक पहुंचा। कंपनी फिलहाल लगभग ₹75 करोड़ के annual recurring revenue run rate पर चलने की बात कही गई है और FY27 में ₹100 करोड़ revenue का लक्ष्य रखा गया है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ARR run rate और actual annual revenue एक ही चीज नहीं होते। ARR का मतलब मौजूदा गति के आधार पर सालाना अनुमान होता है, जबकि financial year का actual revenue पूरे साल के वास्तविक कारोबार से तय होता है।

abcoffee की कहानी में funding भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन चुकी है। हालिया जानकारी के मुताबिक कंपनी ने करीब ₹61 करोड़ का pre-Series B funding round जुटाया है। इस funding round का नेतृत्व Kliff Ventures ने किया और इसमें Hero Enterprise Partner Ventures, Merisis Venture Fund और Stride Ventures सहित निवेशकों की भागीदारी बताई गई है। इस तरह की funding कंपनी को नए शहरों में विस्तार, technology, supply chain, hiring और नए outlets खोलने में मदद कर सकती है।

हालांकि funding मिलने के बाद भी इस बिजनेस की मूल कहानी वही है—छोटे आउटलेट और तेज execution। किसी भी retail या food business के लिए केवल पैसा मिलना सफलता की गारंटी नहीं है। हर नए outlet के साथ location selection, rent, staffing, inventory, equipment, quality control और customer demand जैसे सवाल जुड़े होते हैं। खास तौर पर coffee business में repeat customer बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर कोई ग्राहक एक बार कॉफी पीकर दोबारा नहीं आता तो केवल नए customers हासिल करने के लिए marketing cost बढ़ती जाएगी। इसलिए abcoffee के लिए repeat consumption और daily habit बनाना सबसे महत्वपूर्ण रणनीति में से एक है।

अभिजीत की कहानी की खास बात यह भी है कि उन्होंने समस्या को केवल “कॉफी महंगी है” तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि महंगी कॉफी क्यों है। बड़े कैफे की जगह, किराया, ambience, staff और operational expenses सब मिलकर final price बढ़ाते हैं। इसलिए उन्होंने कीमत कम करने के लिए केवल coffee beans की लागत घटाने की कोशिश नहीं की, बल्कि पूरे business format को बदलने की कोशिश की। यही वजह है कि छोटे आउटलेट का विचार उनके बिजनेस मॉडल का केंद्रीय हिस्सा बना।

इस मॉडल को देखकर यह समझा जा सकता है कि startup हमेशा किसी बिल्कुल नई चीज का आविष्कार करने से नहीं बनता। कई बार मौजूदा बाजार में मौजूद चीज को अलग तरीके से उपलब्ध कराना भी बड़ा अवसर बन सकता है। भारत में कॉफी पहले से मौजूद थी, कैफे पहले से मौजूद थे और बड़े coffee brands भी मौजूद थे। अभिजीत ने इनमें से किसी को खत्म करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने एक अलग सवाल पूछा—क्या specialty coffee को छोटे format और ज्यादा affordable price पर बेचा जा सकता है?

यही सवाल धीरे-धीरे abcoffee की पहचान बन गया। इसका मतलब यह भी है कि इस कहानी से छोटे कारोबार शुरू करने वालों को एक महत्वपूर्ण सीख मिलती है। शुरुआत में हर बिजनेस के पास बड़ी टीम, बड़ी दुकान या बड़ा investment होना जरूरी नहीं है। अगर business model स्पष्ट हो और ग्राहक की वास्तविक समस्या समझ में आ जाए तो छोटा pilot भी काफी उपयोगी साबित हो सकता है। अभिजीत ने पहले outlet में खुद काम करके customers को समझा और उसी अनुभव से आगे के processes बनाने शुरू किए।

उनकी यात्रा का दूसरा महत्वपूर्ण सबक है कि IIT या अच्छी नौकरी अपने आप में सफलता की गारंटी नहीं है। IIT की पढ़ाई और corporate experience ने निश्चित रूप से उन्हें skills और exposure दिया, लेकिन startup की असली परीक्षा तब शुरू हुई जब उन्होंने अपनी बचत लगाकर पहला outlet खोला और शुरुआती महीनों में अपेक्षाकृत कम revenue देखा। उस समय किसी बड़ी corporate salary की सुरक्षा नहीं थी। उन्हें खुद customer service से लेकर operations तक कई काम करने पड़े।

आज जब 95+ outlets और करोड़ों रुपये के revenue की बात होती है तो शुरुआत के वे दिन आसानी से नजरअंदाज हो जाते हैं। लेकिन किसी भी successful retail chain के पीछे पहले एक ऐसा outlet होता है जहां founder को यह साबित करना पड़ता है कि customer उसके product के लिए दोबारा पैसा खर्च करेगा। abcoffee के मामले में भी यही हुआ। पहले outlet से मिले अनुभव को repeatable system में बदलना और फिर उसे कई locations पर लागू करना growth का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

कंपनी का अगला लक्ष्य और भी बड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार FY27 में ₹100 करोड़ revenue हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए outlets की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ existing stores की productivity और customer frequency भी महत्वपूर्ण होगी। अगर कंपनी अपने छोटे-format model को अलग-अलग शहरों में सफलतापूर्वक दोहरा पाती है तो इसका expansion काफी तेज हो सकता है। लेकिन इसके साथ quality control और employee training को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा।

आज भारत में युवा ग्राहक coffee को केवल सुबह का पेय नहीं मानता। कॉलेज, ऑफिस, meetings, work-from-café culture, fitness और socialising के कारण coffee consumption के कई नए occasions बन रहे हैं। इसी बदलाव ने affordable coffee chains के लिए बड़ा market बनाया है। abcoffee इसी बदलती आदत को target करने की कोशिश कर रहा है—ऐसी कॉफी जिसे ग्राहक रोज खरीद सके, न कि सिर्फ किसी खास मौके पर।

अभिजीत आनंद की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने एक established corporate career से निकलकर ऐसा बिजनेस चुना जिसमें शुरुआती समय में सफलता की कोई गारंटी नहीं थी। उन्होंने पहले बाजार को समझा, फिर customer problem खोजी, अपनी savings लगाकर पहला outlet शुरू किया और खुद ground level पर काम किया। करीब चार साल के भीतर business ने 95+ outlets, लाखों cups की monthly sales और करोड़ों रुपये के revenue run rate तक पहुंचने का दावा किया है।

यह कहानी उन युवाओं के लिए भी दिलचस्प है जो नौकरी और बिजनेस के बीच फैसला करने की सोच रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को नौकरी छोड़कर startup शुरू कर देना चाहिए। बल्कि असली सीख यह है कि अगर कोई व्यक्ति entrepreneurship चुनना चाहता है तो उसे पहले market research, customer need, unit economics और business model को समझना चाहिए। अभिजीत ने भी सीधे दुकान खोलने से पहले 20 शहरों में जाकर हजारों लोगों से बात की थी। यही तैयारी आगे के फैसलों का आधार बनी।

आज abcoffee की पहचान एक ऐसे Indian coffee startup के रूप में बन रही है जो premium specialty coffee को छोटे format और comparatively affordable price के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है। इसकी यात्रा ₹13 लाख की शुरुआती personal investment से शुरू हुई और अब कंपनी बड़े funding round, 95+ outlets और ₹75 करोड़ के ARR run rate जैसे पड़ावों तक पहुंच चुकी है।

अंत में अभिजीत आनंद की कहानी का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है कि बिजनेस का मौका हमेशा किसी ऐसी चीज में नहीं होता जो बाजार में मौजूद ही न हो। कई बार सबसे बड़ा अवसर वहीं छिपा होता है जहां लोग पहले से पैसा खर्च कर रहे होते हैं, लेकिन किसी वजह से वह चीज उनके लिए convenient या affordable नहीं होती। abcoffee ने कॉफी के इसी gap को पहचानने की कोशिश की। बड़े और महंगे कैफे की जगह छोटे आउटलेट, लंबे बैठने के अनुभव की जगह quick service और occasional luxury की जगह daily habit—इन्हीं तीन विचारों ने इस ब्रांड की growth story को आकार दिया।

एक IIT graduate ने corporate career को पीछे छोड़कर जिस छोटे से कॉफी outlet से शुरुआत की थी, वह आज दर्जनों नहीं बल्कि 95 से ज्यादा stores वाला business बन चुका है। अब नजर इस बात पर होगी कि abcoffee अपने अगले चरण में कितनी तेजी से नए शहरों तक पहुंचता है और क्या ₹100 करोड़ revenue का लक्ष्य हासिल कर पाता है। अगर कंपनी अपने affordable specialty coffee और grab-and-go मॉडल को उसी operational discipline के साथ आगे बढ़ाती है, तो यह कहानी भारत के तेजी से बदलते coffee और quick-service business landscape की बड़ी success stories में शामिल हो सकती है।

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http://IIT ग्रेजुएट अभिजीत आनंद और abcoffee का कॉफी बिजनेस

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