>

पुतिन से पहले पहुंचता है उनका टॉयलेट? जिनपिंग की स्पेशल कार, BRICS समिट की हाई सिक्योरिटी

नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था अपने चरम पर पहुंच गई है। 11 से 13 सितंबर 2026 तक होने वाले इस बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया के कई प्रभावशाली नेता और उनके प्रतिनिधिमंडल राजधानी पहुंच रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने सुरक्षा तैयारियों को और भी संवेदनशील बना दिया है। दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बलों, NSG, SWAT और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर ऐसा बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया है, जिसमें एयरपोर्ट से लेकर होटल और भारत मंडपम तक हर महत्वपूर्ण हिस्से को कवर किया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 25,000 से 30,000 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है और विदेशी नेताओं के आने-जाने के लिए काफिलों की कई बार रिहर्सल भी हो चुकी है।

इसी बीच सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों में व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद असामान्य बात फिर चर्चा में है—कहा जाता है कि रूसी राष्ट्रपति के विदेशी दौरों में उनका निजी पोर्टेबल टॉयलेट या उससे जुड़ा विशेष प्रोटोकॉल भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहता है। कुछ रिपोर्टों में तो यहां तक दावा किया गया है कि पुतिन के इस्तेमाल किए गए जैविक कचरे को भी विदेशी धरती पर छोड़ने के बजाय वापस रूस ले जाने की व्यवस्था की जाती है। यह दावा नया नहीं है और पहले भी फ्रांस, सऊदी अरब तथा अन्य विदेशी यात्राओं के संदर्भ में रिपोर्ट हो चुका है। हालांकि इसे भारत में 2026 BRICS समिट के दौरान किसी आधिकारिक भारतीय बयान से प्रमाणित व्यवस्था मानना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टें इसे रूसी सुरक्षा प्रोटोकॉल से जुड़ा मीडिया दावा बताती हैं।

पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था की चर्चा सिर्फ उनके कथित टॉयलेट प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं है। रूसी राष्ट्रपति की विदेशी यात्राओं के दौरान भोजन, वाहनों, मेडिकल सुविधाओं और निजी सुरक्षा को लेकर भी बेहद कड़े प्रोटोकॉल की रिपोर्टें सामने आती रही हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार उनके साथ विशेष सुरक्षा टीम और भोजन की जांच से जुड़ी व्यवस्थाएं भी रहती हैं। 2025 में उनकी भारत यात्रा के दौरान भी उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ऐसी ही कई रिपोर्टें सामने आई थीं। हालांकि इन सभी दावों में यह अंतर समझना जरूरी है कि कुछ व्यवस्थाओं की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से हुई है, जबकि कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्टों या सुरक्षा सूत्रों पर आधारित है।

अब बात शी जिनपिंग की करें तो चीन के राष्ट्रपति की सुरक्षा भी सामान्य VVIP सुरक्षा से काफी अलग स्तर की बताई जा रही है। BRICS समिट के लिए चीनी सुरक्षा टीम पहले ही दिल्ली पहुंच चुकी है। रिपोर्टों के मुताबिक जिनपिंग के ठहरने वाले होटल में चीनी सुरक्षा अधिकारी और उपकरण पहले से पहुंच चुके हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर होटल, आसपास के क्षेत्र और यात्रा व्यवस्था की तैयारी की गई है। इतना ही नहीं, रिपोर्टों में कहा गया है कि चीन और रूस दोनों अपने कुछ सुरक्षित/बख्तरबंद काफिले के वाहनों को विमान से भारत लाने की तैयारी में रहे हैं। इसका मकसद विदेशी नेता की सुरक्षा और परिचित सुरक्षा प्रोटोकॉल को यात्रा के दौरान बनाए रखना है।

यहां “जिनपिंग की स्पेशल कार” वाली बात को भी सही संदर्भ में समझना जरूरी है। शी जिनपिंग के लिए चीन में विशेष सरकारी वाहनों का इस्तेमाल पहले से जाना जाता है और उनकी यात्राओं में सुरक्षित वाहन व्यवस्था रहती है। BRICS 2026 से जुड़ी हालिया रिपोर्टों में विशेष रूप से यह सामने आया है कि चीन और रूस के नेता अपने कुछ काफिले के वाहन विमान के जरिए भारत ला सकते हैं। इसलिए यह कहना ज्यादा सही होगा कि जिनपिंग के साथ विशेष सुरक्षित वाहन और काफिले की व्यवस्था जुड़ी है, न कि बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी खास कार मॉडल को BRICS 2026 की आधिकारिक कार घोषित कर दिया जाए।

दिल्ली में सुरक्षा का सबसे बड़ा हिस्सा सिर्फ राष्ट्राध्यक्षों की निजी सुरक्षा नहीं है। पूरे शहर को एक बड़े सुरक्षा ग्रिड में बांटकर काम किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 30,000 सुरक्षाकर्मी विभिन्न जिम्मेदारियों में लगाए गए हैं। इनमें दिल्ली पुलिस के लगभग 15,000 कर्मी और बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बल शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में लगभग 200 अर्धसैनिक कंपनियों की तैनाती का भी उल्लेख है। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस को अलग से बड़े पैमाने पर लगाया गया है ताकि विदेशी नेताओं के काफिलों की आवाजाही के दौरान सामान्य यातायात और VVIP मूवमेंट के बीच समन्वय बना रहे।

BRICS समिट के मुख्य आयोजन स्थल भारत मंडपम को भी बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया है। यहां NSG कमांडो, दिल्ली पुलिस SWAT और अन्य विशेष सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक 100 से अधिक NSG कमांडो को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है और आपात स्थिति से निपटने के लिए कई मॉक ड्रिल भी की गई हैं। पिछले दिनों काफिलों की आवाजाही को लेकर भी रिहर्सल की गई, ताकि वास्तविक कार्यक्रम के दौरान किसी भी तरह की देरी या भ्रम की स्थिति कम से कम हो।

सुरक्षा व्यवस्था का एक अहम हिस्सा एंटी-ड्रोन सिस्टम भी है। आधुनिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में ड्रोन से संभावित खतरे को देखते हुए कार्यक्रम स्थल और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाती है। दिल्ली में BRICS समिट के लिए भी एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए गए हैं। इसके साथ ही 500 से अधिक CCTV कैमरों और दूसरे निगरानी माध्यमों की मदद से लगातार नजर रखने की रिपोर्ट सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में चेहरे की पहचान जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का भी उल्लेख है।

होटल सुरक्षा को लेकर भी विशेष तैयारी की गई है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और बड़े प्रतिनिधिमंडलों को दिल्ली के अलग-अलग हाई-सिक्योरिटी होटलों में ठहराया जा रहा है। खास तौर पर शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति के लिए अलग-अलग सुरक्षा व्यवस्थाओं की रिपोर्ट सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों ने होटल कर्मचारियों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन भी कराया है। जिन हिस्सों में राष्ट्राध्यक्षों की आवाजाही या ठहराव होना है, वहां पुलिस और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है।

होटल के बाहर की सुरक्षा के साथ-साथ अंदर की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। राष्ट्राध्यक्षों के कमरे या उनके आसपास के हिस्सों में जाने वाले कर्मचारियों और दूसरे लोगों की जांच की जाती है। रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली और संबंधित कर्मचारियों के गृह राज्यों में भी सत्यापन किया गया है। यह व्यवस्था इसलिए जरूरी होती है क्योंकि किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में खतरा केवल सड़क या सार्वजनिक स्थान से नहीं माना जाता; होटल, आयोजन स्थल और यात्रा के दौरान कई अलग-अलग सुरक्षा स्तर बनाए जाते हैं।

पुतिन की सुरक्षा के मामले में रिपोर्टों के अनुसार रूसी सुरक्षा अधिकारी पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। चीनी सुरक्षा टीम भी जिनपिंग के आने से पहले होटल और संबंधित व्यवस्था का निरीक्षण कर चुकी है। इससे यह समझ आता है कि विदेशी नेताओं की सुरक्षा केवल भारत की एजेंसियों के भरोसे नहीं रहती, बल्कि संबंधित देश की अपनी सुरक्षा टीम भी पहले से व्यवस्था का हिस्सा बनती है। भारतीय एजेंसियां स्थानीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और समन्वय संभालती हैं, जबकि विदेशी सुरक्षा दल अपने नेता के निजी सुरक्षा प्रोटोकॉल से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

काफिले की बात करें तो यहां भी सामान्य VVIP मूवमेंट से कहीं ज्यादा तैयारी की गई है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के लिए मोटरकेड पहले से तय किए जाते हैं। कौन-सा वाहन आगे रहेगा, कौन-से वाहन सुरक्षा घेरे में होंगे और किन स्थानों से काफिला गुजरेगा—इन सबका अभ्यास किया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक एयरपोर्ट से होटल और होटल से भारत मंडपम तक काफिलों की रिहर्सल पहले ही की जा चुकी है। खास तौर पर चीन और रूस के प्रतिनिधिमंडलों के काफिले बड़े होने की संभावना बताई गई है।

यही वजह है कि BRICS समिट के दौरान दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था भी सामान्य दिनों से अलग रखी गई है। रिपोर्टों में लगभग 35 ऐसे मार्गों का उल्लेख है जहां समिट से जुड़े कार्यक्रमों के कारण यातायात प्रभावित हो सकता है। करीब 22 डायवर्जन पॉइंट की पहचान की गई है। प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और सार्वजनिक परिवहन, खासकर मेट्रो का उपयोग करने की सलाह दी है।

दिल्ली को हाई-सिक्योरिटी जोन में बदलने का असर आम लोगों पर भी दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में बैरिकेडिंग, रूट डायवर्जन और पुलिस तैनाती बढ़ गई है। BRICS के दौरान सार्वजनिक जीवन को सामान्य बनाए रखने और VVIP मूवमेंट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है। AP की रिपोर्ट के अनुसार समिट को देखते हुए दिल्ली में ट्रैफिक व्यवधान और आम लोगों को होने वाली असुविधा को लेकर भी चर्चा हो रही है। प्रशासन ने लोगों से यात्रा की योजना पहले बनाने को कहा है।

सुरक्षा व्यवस्था का एक और महत्वपूर्ण पहलू एयरपोर्ट है। पुतिन और जिनपिंग जैसे नेताओं के लिए एयर फोर्स स्टेशन पालम के इस्तेमाल की रिपोर्ट सामने आई है। उनके विमान उतरने से लेकर काफिले के रवाना होने तक सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल रहता है। रिपोर्टों के मुताबिक पुतिन के 11 सितंबर और जिनपिंग के 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचने की उम्मीद बताई गई थी। दोनों नेताओं की यात्राओं के कारण एयरपोर्ट से लेकर चाणक्यपुरी और भारत मंडपम तक सुरक्षा ग्रिड को विशेष रूप से सक्रिय रखा गया है।

पुतिन के मामले में एक खास बात यह भी है कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दुनिया भर में कई वर्षों से असाधारण किस्से सामने आते रहे हैं। कथित “poop suitcase” उनमें सबसे ज्यादा चर्चित है। रिपोर्टों के अनुसार रूसी सुरक्षा अधिकारी विदेश यात्रा के दौरान उनके जैविक कचरे को वापस रूस ले जाने की व्यवस्था करते हैं ताकि किसी विदेशी एजेंसी को उनके स्वास्थ्य या जैविक जानकारी का विश्लेषण करने का मौका न मिले। Paris Match से जुड़ी पुरानी रिपोर्टों का हवाला देते हुए कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय मीडिया संस्थानों ने इस बारे में लिखा है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक रिपोर्टेड सुरक्षा प्रोटोकॉल है, जिसकी हर यात्रा और हर देश में मौजूदगी की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

इस दावे के पीछे जो तर्क बताया जाता है वह सिर्फ स्वच्छता या सुविधा से जुड़ा नहीं है। सुरक्षा विशेषज्ञों और रिपोर्टों में जैविक नमूनों से किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी या DNA जैसी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की संभावना का उल्लेख किया जाता है। किसी राष्ट्राध्यक्ष के मामले में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी राजनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से संवेदनशील मानी जा सकती है। इसी कारण कथित रूप से उनके निजी कचरे और व्यक्तिगत वस्तुओं तक को नियंत्रित रखने की कोशिश की जाती है। हालांकि इस पूरे विषय में कई मीडिया रिपोर्टें हैं और इसे पक्के सरकारी तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

पुतिन के अलावा शी जिनपिंग की सुरक्षा को लेकर भी चीन की अपनी कड़ी व्यवस्था रहती है। जिनपिंग की विदेश यात्राओं में उनकी सुरक्षा टीम पहले से संबंधित देश में पहुंचती है और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल करती है। BRICS 2026 के मामले में भी ऐसी तैयारी की खबर है। उनके लिए विशेष सुरक्षित वाहन और काफिले की व्यवस्था की जा रही है। रिपोर्टों में कहा गया है कि चीन और रूस दोनों के सुरक्षा दल अपने कुछ वाहनों और सुरक्षा उपकरणों के साथ पहले से दिल्ली में सक्रिय हैं।

BRICS समिट में सिर्फ पुतिन और जिनपिंग ही हाई-प्रोफाइल नेता नहीं हैं। 11 सदस्य देशों और पार्टनर देशों के प्रतिनिधि भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। इसलिए सुरक्षा का दायरा केवल दो राष्ट्रपतियों तक सीमित नहीं है। अलग-अलग देशों के नेताओं और मंत्रियों को अलग-अलग होटलों में ठहराने की व्यवस्था की गई है। उनके लिए अलग सुरक्षा दल, वाहन और रूट प्लान तैयार किए गए हैं। इसी वजह से दिल्ली पुलिस को कई अलग-अलग सुरक्षा सेक्टर में काम करना पड़ रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था को सेक्टरों में बांटने का काम भी किया गया है और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। कुछ अधिकारी आयोजन स्थल पर तैनात हैं, जबकि दूसरे अधिकारी होटलों और काफिलों की सुरक्षा का समन्वय कर रहे हैं। इस तरह किसी एक जगह पर सुरक्षा व्यवस्था कमजोर न हो और किसी भी घटना की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके, इसके लिए अलग-अलग स्तर बनाए गए हैं।

दिल्ली पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सुरक्षा कड़ी रखते हुए आम नागरिकों की परेशानी कम से कम हो। यही कारण है कि प्रशासन ने सार्वजनिक परिवहन को चालू रखने, ट्रैफिक डायवर्जन की जानकारी देने और जरूरी सेवाओं की आवाजाही को बनाए रखने पर जोर दिया है। हालांकि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित होना लगभग तय है।

BRICS 2026 का महत्व केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। इस सम्मेलन में भारत, रूस, चीन और दूसरे सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, वैश्विक शासन, तकनीक और भू-राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत होनी है। पुतिन और जिनपिंग की मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों नेताओं के भारत के साथ अलग-अलग रणनीतिक संबंध हैं। जिनपिंग की यात्रा भारत-चीन संबंधों में हाल के सुधार के बीच हो रही है, जबकि पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच भारत-रूस संबंधों पर अहम बातचीत की उम्मीद है। Reuters के अनुसार जिनपिंग की भारत यात्रा सात साल बाद हो रही है और भारत-चीन संबंधों में कुछ सुधार के बावजूद दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी अभी बनी हुई है।

ऐसे में विदेशी नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ किसी संभावित हमले से बचाने का मामला नहीं है। यह राजनयिक प्रोटोकॉल, संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा, स्वास्थ्य और निजी सुरक्षा, सुरक्षित परिवहन तथा मेजबान देश की जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। पुतिन के कथित टॉयलेट प्रोटोकॉल से लेकर जिनपिंग के विशेष सुरक्षित वाहनों तक, ये सभी बातें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि दुनिया के शीर्ष नेताओं की विदेश यात्राएं सामान्य राजकीय यात्रा से कितनी अलग होती हैं।

BRICS समिट के दौरान दिल्ली में 500 से ज्यादा CCTV कैमरे, एंटी-ड्रोन सिस्टम, NSG कमांडो, SWAT, अर्धसैनिक बल, हजारों पुलिसकर्मी और कई स्तरों वाली होटल तथा काफिला सुरक्षा तैनात है। इसके साथ ही विदेशी सुरक्षा दल अपने नेताओं के निजी प्रोटोकॉल को संभाल रहे हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिन खबरों में पुतिन का टॉयलेट और जिनपिंग की स्पेशल कार चर्चा में है, वे सुरक्षा व्यवस्था के सिर्फ छोटे हिस्से हैं। असली सुरक्षा तंत्र इससे कहीं बड़ा है—एयरपोर्ट से होटल तक सुरक्षित आवाजाही, होटल की कई स्तरों वाली सुरक्षा, आयोजन स्थल की निगरानी, काफिले की रिहर्सल, एंटी-ड्रोन सिस्टम, CCTV निगरानी, स्थानीय और विदेशी सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और किसी भी आपात स्थिति के लिए मॉक ड्रिल। यही कारण है कि BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान कुछ दिनों के लिए पूरी राजधानी का सुरक्षा ढांचा लगभग एक अलग मोड में चला जाता है।

इसलिए “पुतिन से पहले पहुंच जाता है उनका टॉयलेट” वाली लाइन भले ही सबसे ज्यादा चौंकाने वाली हो, लेकिन इसे खबर का पक्का आधिकारिक तथ्य मानने के बजाय पुराने मीडिया रिपोर्टों में सामने आए कथित रूसी सुरक्षा प्रोटोकॉल के रूप में देखना चाहिए। इसी तरह “जिनपिंग स्पेशल कार साथ लाते हैं” का मतलब उनके विदेशी दौरों में इस्तेमाल होने वाले विशेष सुरक्षित वाहनों और काफिले से है; BRICS 2026 में किसी खास कार मॉडल के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि अलग से उपलब्ध नहीं है। असली खबर यह है कि दिल्ली ने दुनिया के कई शीर्ष नेताओं की मेजबानी के लिए अभूतपूर्व स्तर की बहुस्तरीय सुरक्षा तैयार की है और पुतिन-जिनपिंग जैसे नेताओं के लिए उनके अपने सुरक्षा दल और वाहन व्यवस्था भी भारतीय सुरक्षा तंत्र के साथ मिलकर काम कर रही है।

पुतिन BRICS समिट के लिए भारत आएंगे, 11 सितंबर को PM मोदी से मुलाकात; जानें एजेंडा

http://BRICS समिट 2026 में पुतिन और शी जिनपिंग की सुरक्षा व्यवस्था

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जेल लौटने से पहले राम रहीम की रूबरू नाइट में भारी भीड़, मंच पर किया डांस; पुलिस की मौजूदगी पर सवाल DRDO का 30kW Laser Weapon: 5km तक ड्रोन को निशाना बनाने की क्षमता, प्रोडक्शन की तैयारी Trump UN Speech Today: राष्ट्रपति ट्रम्प का कुछ देर में UN में भाषण, 2025 के टेलीप्रॉम्प्टर विवाद से 2018 की हंसी तक तारा सुतारिया का छलका दर्द: फिल्मों से रिप्लेस किए जाने पर होती थी तकलीफ, खुद से करती थीं सवाल पाकिस्तान में 20 घंटे चली मुठभेड़, 8 आतंकी ढेर; मस्जिद पर विस्फोटक कार से हमला