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चेस ओलिंपियाड में भारत की गोल्ड की दौड़: उज्बेकिस्तान-2 को 3.5-0.5 से हराया, हंगरी से आखिरी मुकाबला

भारत ने 46वें फिडे चेस ओलिंपियाड 2026 में अपने अभियान को एक बार फिर मजबूत किया है। समरकंद में खेले जा रहे ओलिंपियाड के 10वें और पेनल्टीमेट राउंड में भारतीय पुरुष टीम ने उज्बेकिस्तान-2 को 3.5-0.5 से हराकर गोल्ड मेडल की दौड़ में खुद को बनाए रखा। भारत की इस बड़ी जीत में आर. प्रज्ञानानंदा, निहाल सरीन और डी. गुकेश ने अपनी-अपनी बाजियां जीतीं, जबकि अर्जुन एरिगैसी का मुकाबला ड्रॉ रहा।

इस जीत के बाद भारत के खाते में 17 मैच पॉइंट हो गए और टीम अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गई। मेजबान उज्बेकिस्तान की मुख्य टीम 18 मैच पॉइंट के साथ पहले स्थान पर रही। यानी भारत और गोल्ड के बीच सिर्फ एक मैच पॉइंट का अंतर था। जर्मनी, यूक्रेन और हंगरी 16-16 मैच पॉइंट के साथ भारत के पीछे मौजूद थे।

भारत के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि टूर्नामेंट के बीच में उज्बेकिस्तान के खिलाफ मिली हार ने टीम को काफी पीछे कर दिया था। इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार मजबूत प्रदर्शन करते हुए वापसी की और अब टीम के पास आखिरी राउंड में गोल्ड के लिए चुनौती पेश करने का मौका था।

हालांकि, आखिरी राउंड में भारत का मुकाबला हंगरी से होना था, जबकि शीर्ष पर मौजूद उज्बेकिस्तान का सामना यूक्रेन से होना था। गोल्ड के समीकरण में भारत को अपना मुकाबला जीतने के साथ-साथ उज्बेकिस्तान के नतीजे पर भी निर्भर रहना था।

उज्बेकिस्तान-2 के खिलाफ भारत का दबदबा

10वें राउंड में भारत और उज्बेकिस्तान-2 के बीच मुकाबला चार बोर्ड पर खेला गया। शुरुआत से ही भारतीय खिलाड़ियों ने मैच पर पकड़ बनाने की कोशिश की। सबसे पहले निहाल सरीन ने अपने मुकाबले में अच्छी स्थिति बनाई और फिर उसे जीत में बदल दिया। इसके बाद डी. गुकेश ने भी अपने मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को एक और जीत दिलाई।

तीसरे निर्णायक परिणाम के रूप में प्रज्ञानानंदा ने टॉप बोर्ड पर जाखोंगिर वाहिदोव को हराया। इसके बाद भारत की टीम का स्कोर 3-0 हो गया और मुकाबला पूरी तरह भारतीय टीम के नियंत्रण में दिखाई देने लगा। चौथे बोर्ड पर अर्जुन एरिगैसी के पास भी जीत का मौका आया था, लेकिन वह अपनी बढ़त को जीत में नहीं बदल सके और बाजी ड्रॉ पर समाप्त हुई। इस तरह भारत ने मुकाबला 3.5-0.5 से अपने नाम किया।

प्रज्ञानानंदा और निहाल की जीत ने टीम को शुरुआत में ही जरूरी बढ़त दिला दी थी। वहीं गुकेश की जीत ने भारत के स्कोर को 3-0 तक पहुंचा दिया। अर्जुन की बाजी अगर भारत के पक्ष में जाती तो टीम 4-0 से भी जीत सकती थी, लेकिन ड्रॉ के बावजूद 3.5-0.5 का स्कोर बेहद मजबूत रहा।

भारतीय टीम के लिए इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि अलग-अलग बोर्ड पर खिलाड़ियों ने जिम्मेदारी संभाली। जहां प्रज्ञानानंदा ने टॉप बोर्ड पर जीत हासिल की, वहीं निहाल और गुकेश ने भी अपने मुकाबले जीतकर टीम को महत्वपूर्ण मैच पॉइंट दिलाए।

गुकेश ने फिर दिखाया शानदार फॉर्म

विश्व चैंपियन डी. गुकेश इस ओलिंपियाड में भारत के सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उज्बेकिस्तान-2 के खिलाफ भी उन्होंने अपने मुकाबले में जीत दर्ज की।

गुकेश ने ऑर्टिक निग्मातोव को हराया। ChessBase India की रिपोर्ट के अनुसार इस जीत के बाद गुकेश ने टूर्नामेंट में 10 मैचों से 8.5 अंक कर लिए थे।

गुकेश के प्रदर्शन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि टीम प्रतियोगिता में हर आधा अंक महत्वपूर्ण होता है। चेस ओलिंपियाड में किसी एक खिलाड़ी की जीत या हार का असर पूरी टीम के मैच पॉइंट पर पड़ता है। ऐसे में आखिरी बोर्ड से लगातार जीत निकालना भारतीय टीम के लिए बड़ा फायदा रहा।

इस ओलिंपियाड में गुकेश को भारत की लाइनअप में चौथे बोर्ड पर भी खेलते देखा गया। यह रणनीति कई मुकाबलों में कारगर रही। उनकी लगातार जीत ने भारत को कई राउंड में महत्वपूर्ण अंक दिलाए।

उज्बेकिस्तान-2 के खिलाफ भी गुकेश ने सफेद मोहरों से खेलते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी की गलती का फायदा उठाया और मुकाबला अपने नाम किया। इससे भारत का स्कोर 3-0 हो गया और टीम को एक बड़ी जीत की स्थिति मिल गई।

प्रज्ञानानंदा ने टॉप बोर्ड पर दिलाई बड़ी जीत

भारत के लिए टॉप बोर्ड पर आर. प्रज्ञानानंदा की जीत भी बेहद महत्वपूर्ण रही। उनका मुकाबला उज्बेकिस्तान-2 के जाखोंगिर वाहिदोव से हुआ।

मुकाबले की शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। प्रज्ञानानंदा ने धीरे-धीरे स्थिति पर पकड़ बनाई और आखिरकार बाजी अपने नाम कर ली।

ChessBase India के मुताबिक वाहिदोव ने आक्रामक तरीके से खेल शुरू किया था, जिससे उनकी स्थिति में कुछ कमजोरियां पैदा हुईं। प्रज्ञानानंदा ने इन कमजोरियों का फायदा उठाते हुए अंत में रूक एंडगेम में मुकाबला जीत लिया।

प्रज्ञानानंदा की यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि टॉप बोर्ड पर मिलने वाली जीत का टीम के मनोबल पर सीधा असर पड़ता है। मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ पहला निर्णायक अंक मिलने से बाकी बोर्ड पर खेलने वाले खिलाड़ियों को भी सकारात्मक स्थिति मिलती है।

भारत के लिए टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा का प्रदर्शन लगातार महत्वपूर्ण रहा है। इससे पहले उन्होंने नीदरलैंड्स के शीर्ष खिलाड़ी अनिश गिरी को भी हराया था।

इससे भारतीय टीम के पास अलग-अलग बोर्ड पर मैच पलटने की क्षमता बनी रही।

निहाल सरीन ने भी जीता मुकाबला

भारत की 3.5-0.5 की जीत में निहाल सरीन का योगदान भी अहम रहा। उनका मुकाबला उज्बेकिस्तान-2 के मुखम्मदजोहिद सुयारोव से हुआ।

निहाल ने शुरुआत से ही बेहतर स्थिति हासिल की। ChessBase India की रिपोर्ट के मुताबिक उनके प्रतिद्वंद्वी की एक गलती के बाद निहाल ने अतिरिक्त प्यादा हासिल किया और इसके बाद खेल को तकनीकी तरीके से जीत की ओर ले गए।

यह जीत निहाल के लिए खास थी क्योंकि इससे कुछ राउंड पहले मुख्य उज्बेकिस्तान टीम के खिलाफ उनके मुकाबले में हुई गलती भारत को महंगी पड़ी थी। उस मैच में निहाल मजबूत स्थिति में होने के बावजूद बाजी हार गए थे और भारत को उज्बेकिस्तान के खिलाफ टीम मैच गंवाना पड़ा था।

ऐसे में उज्बेकिस्तान-2 के खिलाफ निहाल की वापसी भारत के लिए महत्वपूर्ण रही।

टीम खेलों में किसी खिलाड़ी की पिछली बाजी का असर अगली बाजी पर पड़ सकता है, लेकिन निहाल ने इस मुकाबले में मजबूत खेल दिखाकर टीम को निर्णायक अंक दिलाया।

अर्जुन के पास था 4-0 का मौका

भारत और उज्बेकिस्तान-2 के बीच मुकाबले में एक समय ऐसा भी आया जब भारतीय टीम 4-0 की जीत के करीब दिखाई दे रही थी।

अर्जुन एरिगैसी ने अब्दिमालिक अब्दिसालिमोव के खिलाफ खेलते हुए अच्छी स्थिति हासिल की थी। रिपोर्टों के अनुसार अर्जुन के पास जीत की संभावना थी, लेकिन वह सही continuation नहीं खोज सके। आखिरकार मुकाबला ड्रॉ हो गया।

अगर अर्जुन यह मुकाबला जीत लेते तो भारत का स्कोर 4-0 होता। हालांकि, 3.5-0.5 की जीत भी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही क्योंकि ओलिंपियाड की अंक तालिका में मैच पॉइंट और टाईब्रेक दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अर्जुन इससे पहले टूर्नामेंट में कुछ मुकाबलों में ड्रॉ कर चुके थे। ऐसे में टीम को उनसे निर्णायक जीत की उम्मीद थी, लेकिन इस राउंड में उनके आधे अंक ने भी भारत को बड़ी टीम जीत दिलाने के लिए पर्याप्त साबित किया।

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच गोल्ड की लड़ाई

10वें राउंड के बाद गोल्ड मेडल की लड़ाई मुख्य रूप से भारत और मेजबान उज्बेकिस्तान के बीच दिखाई दे रही थी।

उज्बेकिस्तान की मुख्य टीम ने भी अपने मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया और आर्मेनिया को 3.5-0.5 से हराया। इस जीत के बाद उज्बेकिस्तान के 18 मैच पॉइंट हो गए और वह भारत से एक अंक आगे रहा।

भारत के पास 17 मैच पॉइंट थे। जर्मनी, यूक्रेन और हंगरी 16-16 अंक पर थे। यानी आखिरी राउंड से पहले सिर्फ एक मैच पॉइंट के अंतर में गोल्ड की स्थिति बदल सकती थी।

ओलिंपियाड की टीम प्रतियोगिता में जीत के लिए 2 मैच पॉइंट मिलते हैं, ड्रॉ पर 1 और हार पर 0 मैच पॉइंट मिलता है। इसलिए आखिरी राउंड में हर टीम के लिए परिणाम बेहद महत्वपूर्ण था।

भारत के सामने हंगरी की चुनौती थी, जबकि उज्बेकिस्तान को यूक्रेन का सामना करना था। यही दोनों मुकाबले गोल्ड की तस्वीर तय करने वाले थे।

गोल्ड के लिए क्या था समीकरण?

आखिरी राउंड से पहले भारत के लिए समीकरण सीधा था लेकिन आसान नहीं था।

अगर भारत हंगरी को हरा देता और उज्बेकिस्तान यूक्रेन से हार जाता, तो भारत 19 मैच पॉइंट तक पहुंच जाता और उज्बेकिस्तान 18 पर रह जाता। ऐसी स्थिति में भारत गोल्ड जीत सकता था।

अगर भारत हंगरी को हराता और उज्बेकिस्तान का मुकाबला ड्रॉ रहता, तो दोनों टीमों के 19 मैच पॉइंट हो सकते थे। ऐसी स्थिति में टाईब्रेक नियम निर्णायक हो सकते थे। FIDE और टूर्नामेंट के नियमों के अनुसार टीमों के बराबर मैच पॉइंट होने पर निर्धारित टाईब्रेक मानदंड का इस्तेमाल किया जाता है।

वहीं अगर उज्बेकिस्तान जीत जाता, तो भारत के लिए सिर्फ अपना मैच जीतना पर्याप्त नहीं होता। इसलिए भारत को अपने प्रदर्शन के साथ-साथ उज्बेकिस्तान और यूक्रेन के मैच पर भी नजर रखनी थी।

यही वजह थी कि 10वें राउंड की जीत के बाद भी भारत का गोल्ड पूरी तरह उसके अपने हाथ में नहीं था।

हंगरी के खिलाफ आखिरी राउंड क्यों अहम था?

भारत का आखिरी मुकाबला हंगरी से तय हुआ था। हंगरी 16 मैच पॉइंट के साथ शीर्ष पांच में था और खुद भी मेडल की दौड़ में था।

यानी भारत के सामने ऐसी टीम थी जो केवल औपचारिक मुकाबला खेलने नहीं उतरने वाली थी। हंगरी के पास भी टूर्नामेंट के अंतिम दौर में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका था।

ChessBase India के अनुसार भारत और हंगरी का मुकाबला 11वें राउंड की शीर्ष जोड़ी में शामिल था। उसी राउंड में उज्बेकिस्तान का सामना यूक्रेन से होना था।

इस स्थिति में भारत के खिलाड़ियों को चारों बोर्ड पर संतुलित प्रदर्शन करना जरूरी था। केवल एक या दो बोर्ड पर जीत हासिल करना पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि टीम मैच का अंतिम परिणाम सभी बोर्ड के नतीजों से तय होता है।

भारत की तरफ से गुकेश, प्रज्ञानानंदा, अर्जुन और निहाल जैसे खिलाड़ियों पर विशेष नजर थी।

भारत की टीम में गहराई बनी रही

इस ओलिंपियाड में भारतीय टीम की एक खास बात उसकी मजबूत लाइनअप रही है।

विश्व चैंपियन गुकेश के अलावा प्रज्ञानानंदा और अर्जुन एरिगैसी जैसे खिलाड़ी दुनिया के शीर्ष स्तर पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। निहाल सरीन भी लंबे समय से भारत के मजबूत ग्रैंडमास्टर्स में शामिल हैं।

इस तरह भारत के पास सिर्फ एक स्टार खिलाड़ी पर निर्भर रहने के बजाय चारों बोर्ड पर मजबूत विकल्प मौजूद थे।

यही वजह है कि किसी एक बोर्ड पर ड्रॉ या हार होने के बावजूद टीम दूसरे बोर्ड पर जीत हासिल करके मैच का परिणाम अपने पक्ष में कर सकती थी।

उज्बेकिस्तान-2 के खिलाफ मुकाबला इसका उदाहरण रहा। अर्जुन की बाजी ड्रॉ हुई, लेकिन प्रज्ञानानंदा, निहाल और गुकेश की जीत ने भारत को 3.5 अंक दिला दिए।

पिछले ओलिंपियाड में भारत ने जीता था गोल्ड

भारत की मौजूदा टीम के सामने एक और बड़ी जिम्मेदारी थी—2024 के प्रदर्शन को दोहराने की।

भारत ने 2024 में बुडापेस्ट में हुए चेस ओलिंपियाड के ओपन सेक्शन में गोल्ड मेडल जीता था। इससे पहले 2022 में चेन्नई में भी भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया था।

इसलिए 2026 में भारत के सामने अपने खिताब को बचाने की चुनौती थी।

समरकंद में भारतीय टीम ने शुरुआत में मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन छठे राउंड में मेजबान उज्बेकिस्तान के खिलाफ मिली हार ने गोल्ड की राह मुश्किल कर दी। उस मुकाबले में भारत की टीम को 2.5-1.5 से हार का सामना करना पड़ा था।

इसके बाद भारत ने वापसी की और लगातार महत्वपूर्ण मैचों में मजबूत परिणाम हासिल किए।

10वें राउंड में उज्बेकिस्तान-2 पर 3.5-0.5 की जीत उसी वापसी का हिस्सा रही।

चेस ओलिंपियाड में हर आधा अंक क्यों महत्वपूर्ण है?

चेस ओलिंपियाड व्यक्तिगत टूर्नामेंट से अलग होता है। यहां एक खिलाड़ी की जीत से पूरी टीम को एक बोर्ड पॉइंट मिलता है, लेकिन अंतिम टीम परिणाम मैच में हासिल कुल स्कोर के आधार पर तय होता है।

चार बोर्ड के मैच में 4-0, 3.5-0.5, 3-1 और 2.5-1.5 जैसे स्कोर बन सकते हैं।

इसके बाद टीम को मैच पॉइंट मिलते हैं। इस वजह से बड़े अंतर से जीतना कई बार टाईब्रेक में भी मदद कर सकता है।

भारत ने उज्बेकिस्तान-2 को 3.5-0.5 से हराकर न केवल मैच जीता बल्कि अपने टाईब्रेक की स्थिति को भी मजबूत किया। हालांकि, गोल्ड के लिए केवल अपना स्कोर पर्याप्त नहीं था क्योंकि उज्बेकिस्तान मुख्य टीम पहले ही 18 मैच पॉइंट तक पहुंच चुकी थी।

यही वजह थी कि आखिरी राउंड से पहले भारत की नजर अपने मुकाबले के साथ-साथ उज्बेकिस्तान-यूक्रेन मैच पर भी थी।

भारत के लिए समरकंद अभियान का महत्व

समरकंद में आयोजित 46वां चेस ओलिंपियाड भारतीय शतरंज के लिए एक और महत्वपूर्ण मंच रहा। भारत की पुरुष टीम में युवा और अनुभवी प्रतिभा का मिश्रण देखने को मिला।

गुकेश विश्व चैंपियन के रूप में टूर्नामेंट में उतरे। प्रज्ञानानंदा और अर्जुन एरिगैसी ने भी टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। निहाल सरीन ने भी कई मुकाबलों में टीम को अंक दिलाए।

भारत का प्रदर्शन इस बात का संकेत रहा कि देश के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है।

महत्वपूर्ण बात यह भी रही कि टीम ने मुश्किल दौर के बाद वापसी की। उज्बेकिस्तान के खिलाफ मिली हार के बाद टीम ने खुद को संभाला और अगले राउंड में जरूरी जीत हासिल की।

अपडेट: यह खबर 10वें राउंड के बाद की स्थिति पर आधारित है। 27 सितंबर को खेले गए 11वें और अंतिम राउंड में भारत और हंगरी का मुकाबला 2-2 से ड्रॉ रहा। भारत के लिए अर्जुन एरिगैसी ने जीत दर्ज की, जबकि डी. गुकेश को हंगरी के ग्लेब डुडिन से हार मिली; बाकी दो बाजियां ड्रॉ रहीं। दूसरी ओर उज्बेकिस्तान ने यूक्रेन को 2.5-1.5 से हराकर टूर्नामेंट का गोल्ड मेडल जीत लिया। भारत ने 18 मैच पॉइंट के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया।

इस तरह 10वें राउंड के बाद भारत जिस गोल्ड रेस में था, वह आखिरी राउंड के परिणाम के बाद सिल्वर मेडल पर समाप्त हुई। भारत ने हालांकि ओलिंपियाड में अपना मजबूत प्रदर्शन जारी रखा और 2026 में भी पोडियम पर जगह बनाई।

भारत ने ओपन सेक्शन में सिल्वर के अलावा महिला वर्ग में भी ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया और कुल मिलाकर Nona Gaprindashvili Trophy बरकरार रखी। यह लगातार तीसरा ओलिंपियाड था जिसमें भारत ने यह ट्रॉफी जीती।

इस पूरे अभियान में उज्बेकिस्तान के खिलाफ 3.5-0.5 की जीत भारत के लिए सबसे अहम मुकाबलों में से एक रही। उस जीत ने टीम को आखिरी राउंड तक गोल्ड की दौड़ में बनाए रखा था। हालांकि अंतिम परिणाम भारत के पक्ष में गोल्ड के रूप में नहीं आया, लेकिन टीम ने 11 राउंड में 18 मैच पॉइंट हासिल कर सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

भारतीय शतरंज के लिए यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि गुकेश, प्रज्ञानानंदा, अर्जुन और निहाल जैसे खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय टीम प्रतियोगिता में अपनी भूमिका निभाई। समरकंद का यह प्रदर्शन आने वाले बड़े टीम और व्यक्तिगत टूर्नामेंटों के लिए भारतीय शतरंज की प्रतिस्पर्धी क्षमता को भी दिखाता है।


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http://चेस ओलिंपियाड 2026 में भारत ने उज्बेकिस्तान-2 को 3.5-0.5 से हराकर गोल्ड की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत की थी।

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