पूर्वोत्तर भारत की राजनीति में एक बार फिर बड़ा संदेश देते हुए Himanta Biswa Sarma ने दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। राजधानी Guwahati में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इस समारोह को सिर्फ शपथ ग्रहण कार्यक्रम नहीं बल्कि पूर्वोत्तर में NDA की राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।
इस बार की खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों ने असमिया भाषा में शपथ ली। इससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान और क्षेत्रीय अस्मिता को मजबूत संदेश देने की कोशिश की गई। समारोह के दौरान बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे, जिन्होंने “जय आई असम” और “भारत माता की जय” के नारों से माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया।
असम विधानसभा चुनाव के बाद लगातार यह चर्चा थी कि क्या बीजेपी फिर से हिमंता बिस्वा सरमा पर भरोसा जताएगी या नेतृत्व में बदलाव होगा। लेकिन पार्टी हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया कि पूर्वोत्तर में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर सरमा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यही कारण रहा कि उन्हें लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमंता बिस्वा सरमा ने पिछले कार्यकाल में जिस तरह प्रशासनिक पकड़ दिखाई, उसने बीजेपी नेतृत्व का भरोसा और मजबूत किया। कानून व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और धार्मिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर उनकी आक्रामक राजनीति ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रभावशाली नेता बना दिया है।
शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी के साथ सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया। नई कैबिनेट में दो मंत्री बीजेपी से और दो मंत्री सहयोगी दलों से शामिल किए गए। इससे साफ संकेत मिला कि NDA गठबंधन असम में सामूहिक नेतृत्व के साथ आगे बढ़ना चाहता है। सहयोगी दलों के नेताओं ने भी मंच से बीजेपी नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि असम अब विकास और स्थिरता की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमंता बिस्वा सरमा को बधाई देते हुए कहा कि असम विकास, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक गौरव के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर अब दिल्ली से दूर नहीं बल्कि देश के विकास का अहम केंद्र बन चुका है। मोदी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार आने वाले वर्षों में असम में इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और उद्योग पर बड़ा निवेश करेगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी मंच से विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि असम की जनता ने विकास और स्थिरता के नाम पर वोट दिया है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार ने राज्य में लंबे समय से चली आ रही कई समस्याओं का समाधान किया है। शाह ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा मजबूत हुई है और अवैध घुसपैठ पर भी कार्रवाई तेज हुई है।
नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार, बाढ़ नियंत्रण और औद्योगिक विकास को लेकर मानी जा रही है। हर साल असम के कई जिलों में बाढ़ से भारी नुकसान होता है। ऐसे में लोगों की उम्मीद है कि नई सरकार इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में तेजी से काम करेगी।
राज्य में युवाओं के बीच रोजगार को लेकर भी बड़ी उम्मीदें हैं। चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और पर्यटन सेक्टर में लाखों रोजगार पैदा करने का वादा किया था। अब देखना होगा कि नई सरकार इन वादों को कितनी तेजी से जमीन पर उतार पाती है।
हिमंता बिस्वा सरमा की राजनीतिक यात्रा भी काफी दिलचस्प रही है। कभी कांग्रेस में अहम भूमिका निभाने वाले सरमा ने बाद में बीजेपी का दामन थामा और देखते ही देखते पूर्वोत्तर राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हो गए। उनकी रणनीतिक क्षमता का असर सिर्फ असम ही नहीं बल्कि दूसरे पूर्वोत्तर राज्यों में भी देखने को मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी आने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। ऐसे में हिमंता बिस्वा सरमा की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। वह संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर पार्टी के लिए मजबूत चेहरा बने हुए हैं।
शपथ ग्रहण समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। असम के पारंपरिक नृत्य और संगीत ने समारोह को खास बना दिया। मंच को असमिया संस्कृति के प्रतीकों से सजाया गया था, जिससे पूरे आयोजन में स्थानीय पहचान की झलक साफ दिखाई दी।
सोशल मीडिया पर भी यह समारोह पूरे दिन ट्रेंड करता रहा। बीजेपी समर्थकों ने इसे “नए असम की शुरुआत” बताया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए। हालांकि राजनीतिक माहौल में फिलहाल बीजेपी उत्साह से भरी नजर आ रही है।
नई कैबिनेट में शामिल मंत्रियों के विभागों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि वित्त, गृह और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग अनुभवी नेताओं को दिए जा सकते हैं। वहीं सहयोगी दलों को भी प्रभावशाली मंत्रालय मिलने की संभावना है ताकि गठबंधन संतुलन बना रहे।
असम की राजनीति में क्षेत्रीय पहचान हमेशा अहम मुद्दा रही है। ऐसे में सभी मंत्रियों का असमिया भाषा में शपथ लेना सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। बीजेपी यह दिखाना चाहती है कि वह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के साथ खड़ी है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार हिमंता सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर विशेष फोकस कर सकती है। सड़क, रेलवे और एयर कनेक्टिविटी को लेकर कई बड़े प्रोजेक्ट पहले से चल रहे हैं। केंद्र सरकार भी पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
पर्यटन सेक्टर को लेकर भी सरकार की बड़ी योजनाएं सामने आ सकती हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क, ब्रह्मपुत्र नदी और धार्मिक स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इससे स्थानीय रोजगार और व्यापार दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
विपक्षी दलों ने हालांकि नई सरकार पर कई सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी सिर्फ बड़े आयोजन और प्रचार पर ध्यान दे रही है जबकि आम जनता महंगाई और बेरोजगारी से परेशान है। विपक्ष ने यह भी कहा कि सरकार को स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
इसके बावजूद शपथ ग्रहण समारोह में जिस तरह का उत्साह देखने को मिला, उससे साफ है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं में नई सरकार को लेकर भारी जोश है। पार्टी अब पूर्वोत्तर में अपने राजनीतिक विस्तार को और तेज करना चाहती है।
असम के लोगों की नजर अब नई सरकार के पहले 100 दिनों पर रहेगी। जनता यह देखना चाहती है कि चुनावी वादों को पूरा करने की दिशा में सरकार कितनी तेजी से कदम उठाती है। खासकर युवाओं, किसानों और छोटे व्यापारियों को नई नीतियों से काफी उम्मीदें हैं।
राजनीतिक रूप से यह शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ असम तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसे राष्ट्रीय राजनीति के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बीजेपी पूर्वोत्तर को अपनी सबसे मजबूत राजनीतिक प्रयोगशाला के रूप में देख रही है।
आने वाले समय में हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार किन फैसलों से जनता का भरोसा जीतती है और विपक्ष को किस तरह जवाब देती है, इस पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी। फिलहाल इतना तय है कि असम की राजनीति में हिमंता युग अभी खत्म नहीं हुआ है बल्कि और मजबूत होकर सामने आया है।
