देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूरी तरह सक्रिय होता नजर आ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी से लेकर जम्मू-कश्मीर तक लगभग 1500 किलोमीटर लंबी मानसूनी पट्टी (Monsoon Rain Band) बन गई है। सैटेलाइट तस्वीरों में साफ दिखाई दे रही यह विशाल बादलों की श्रृंखला आने वाले दिनों में उत्तर भारत के मौसम को पूरी तरह बदल सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 1 जुलाई से 4 जुलाई के बीच कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह मानसून पट्टी उत्तर बंगाल की खाड़ी से शुरू होकर बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर तक फैली हुई है। यह सिस्टम मानसून को और सक्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके दक्षिण की ओर खिसकने के साथ उत्तर भारत में गरज-चमक और तेज बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार मानसून अब देश के 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंच चुका है। कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा रही है, जबकि कुछ इलाकों में अगले कुछ दिनों के दौरान अच्छी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
1 जुलाई से 4 जुलाई के बीच दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और आसपास के इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। कई स्थानों पर गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं की भी संभावना है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन, चट्टान गिरने और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं हो सकती हैं। वहीं मैदानी इलाकों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और स्थानीय स्तर पर बाढ़ की स्थिति बनने की आशंका है।
दिल्ली, चंडीगढ़, लखनऊ, देहरादून, शिमला और श्रीनगर जैसे शहरों में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश होने का अनुमान है। तापमान में भी 3 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलेगी।
मानसून की यह सक्रियता किसानों के लिए राहत लेकर आई है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और अन्य खरीफ फसलों की बुआई में तेजी आने की उम्मीद है। कई राज्यों में किसान लंबे समय से अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे थे।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कई दिनों तक होने वाली भारी बारिश खेतों में जलभराव भी पैदा कर सकती है। इसलिए किसानों को स्थानीय कृषि विभाग और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार ही सिंचाई और खेती से जुड़े निर्णय लेने चाहिए।
मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि मानसून ट्रफ (Monsoon Trough) भारत के मानसून की सबसे महत्वपूर्ण प्रणालियों में से एक होती है। जब यह उत्तर या दक्षिण की ओर खिसकती है, तो अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता बदल जाती है। वर्तमान में इसकी स्थिति उत्तर भारत के लिए अनुकूल मानी जा रही है।
सैटेलाइट चित्रों में दिखाई देने वाली 1500 किलोमीटर लंबी बादलों की यह पट्टी दर्शाती है कि बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी उत्तर भारत की ओर पहुंच रही है। यही कारण है कि कई राज्यों में एक साथ व्यापक वर्षा की संभावना बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारी बारिश के दौरान लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए। जलभराव वाले क्षेत्रों में वाहन चलाते समय सावधानी बरतनी चाहिए और बिजली गिरने की स्थिति में खुले मैदानों तथा पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए।
पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में भारी बारिश या भूस्खलन का अलर्ट जारी हो, तो यात्रा स्थगित करना सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जल निकासी व्यवस्था, बिजली आपूर्ति और ट्रैफिक संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन ने भी संबंधित एजेंसियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की सक्रियता जुलाई के पहले सप्ताह तक बनी रह सकती है। यदि वर्तमान सिस्टम मजबूत बना रहता है तो उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है।
देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की अच्छी प्रगति से जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ने, भूजल पुनर्भरण और कृषि गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि लगातार भारी बारिश वाले क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता होगी।
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