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अमेरिका से जंग के बीच न्यूयॉर्क जाएंगे ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन, US ने दिया UNGA वीजा

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति में चर्चा तेज कर दी है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन अगले सप्ताह अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर जाएंगे और संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल सेशन को संबोधित करेंगे। अमेरिकी प्रशासन ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के मुख्य सदस्यों को अमेरिका आने के लिए वीजा देने की पुष्टि की है। इस प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं और दोनों देश 2026 में जारी सैन्य संघर्ष में आमने-सामने हैं। इसके बावजूद अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में होने वाली महासभा की बैठक में ईरानी प्रतिनिधिमंडल को हिस्सा लेने की अनुमति दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि यह फैसला संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के रूप में अमेरिका की जिम्मेदारियों के अनुरूप है।

पेजेशकियन के लिए यह अमेरिका की एक असाधारण यात्रा होगी, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच सामान्य राजनयिक संबंध नहीं हैं। इसके बावजूद ईरान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य देश है और न्यूयॉर्क में उसका स्थायी UN मिशन मौजूद है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को भाग लेने के लिए विशेष व्यवस्था और मेजबान देश की जिम्मेदारियां लागू होती हैं।

रिपोर्टों के अनुसार इस साल ईरानी प्रतिनिधिमंडल पिछले साल की तुलना में छोटा रखा गया है। अमेरिका ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के लिए न्यूयॉर्क में आवाजाही और खरीदारी से जुड़ी कुछ पाबंदियां भी रखी हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ईरानी अधिकारियों पर अमेरिका में सामान्य यात्रा के बजाय UN कार्यक्रम में भाग लेने से संबंधित सीमित व्यवस्था लागू रहेगी।

पेजेशकियन के संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण देने की उम्मीद है। Reuters के अनुसार 81वीं UN General Assembly की हाई-लेवल वीक में उनका भाषण बुधवार को निर्धारित है। इस साल महासभा में दुनिया के कई बड़े मुद्दों पर चर्चा होगी, जिनमें अमेरिका-ईरान संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दा, जलवायु परिवर्तन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषय शामिल हैं।

अब इस खबर का सबसे दिलचस्प हिस्सा है—जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है, तो ईरान के राष्ट्रपति अमेरिका के अंदर न्यूयॉर्क कैसे जा सकते हैं? और अगर वह अमेरिका पहुंचते हैं तो उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं की जा सकती?

इसका जवाब संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय और मेजबान देश के बीच हुए विशेष समझौते में मिलता है। 1947 का UN Headquarters Agreement अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय आने वाले सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के आवागमन को लेकर विशेष जिम्मेदारियां देता है। समझौते की Section 11 में कहा गया है कि अमेरिकी संघीय, राज्य या स्थानीय अधिकारी UN Headquarters District आने-जाने वाले सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के transit में बाधा नहीं डालेंगे।

इस समझौते की एक खास बात Section 12 में है। इसमें कहा गया है कि Section 11 की व्यवस्था इस बात से प्रभावित नहीं होगी कि संबंधित सदस्य देश और अमेरिका के बीच संबंध कैसे हैं। यानी अमेरिका और किसी UN member state के बीच तनावपूर्ण या शत्रुतापूर्ण संबंध होने मात्र से UN Headquarters में उसके प्रतिनिधि के पहुंचने के अधिकार खत्म नहीं हो जाते।

इसी वजह से ईरान और अमेरिका के बीच गंभीर राजनीतिक तथा सैन्य तनाव होने के बावजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल को UN General Assembly में आने की अनुमति दी जा रही है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी अपने फैसले को host-country obligations के संदर्भ में बताया है।

यहां यह समझना जरूरी है कि इसका मतलब यह नहीं है कि ईरानी राष्ट्रपति को अमेरिका में कहीं भी स्वतंत्र रूप से घूमने की पूरी अनुमति मिल गई है। अमेरिकी प्रशासन ईरानी प्रतिनिधिमंडल की न्यूयॉर्क में गतिविधियों और यात्रा पर विशेष प्रतिबंध लगा सकता है। वास्तव में रिपोर्टों के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर पहले से ही कड़े travel restrictions लागू हैं और UN कार्यक्रम के अलावा उनकी आवाजाही सीमित रहती है।

अमेरिका ने ईरानी अधिकारियों के लिए luxury goods की खरीद पर भी प्रतिबंध जारी रखने की बात कही है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार ईरानी UN mission officials और visiting officials पर ऐसी पाबंदियां लागू हैं। इस साल प्रतिनिधिमंडल को पिछले वर्ष की तुलना में छोटा भी रखा गया है।

अब सवाल आता है कि क्या अमेरिका चाहे तो पेजेशकियन को गिरफ्तार कर सकता है?

इसका सीधा जवाब किसी एक लाइन में देना उचित नहीं होगा, क्योंकि गिरफ्तारी का सवाल अमेरिकी घरेलू कानून, अंतरराष्ट्रीय कानून, UN Headquarters Agreement और संबंधित व्यक्ति की कानूनी स्थिति पर निर्भर करता है। लेकिन वर्तमान घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अमेरिका ने उन्हें UNGA में भाग लेने के लिए वीजा दिया है और उनकी यात्रा को आधिकारिक UN कार्यक्रम से जोड़ा है।

इसके अलावा, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में पेजेशकियन के खिलाफ अमेरिका में ऐसा कोई सार्वजनिक अमेरिकी गिरफ्तारी आदेश या warrant सामने नहीं आया है जिसके आधार पर उन्हें UNGA में पहुंचते ही गिरफ्तार किए जाने की स्थिति बनती हो। इसलिए केवल अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चलने को उनकी गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं माना जा सकता।

यहां एक और महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसी विदेशी नेता के खिलाफ राजनीतिक आरोप, प्रतिबंध या अंतरराष्ट्रीय विवाद होना और उसके खिलाफ अमेरिका में लागू होने वाला criminal arrest warrant होना अलग-अलग बातें हैं। किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए संबंधित jurisdiction में कानूनी आधार की जरूरत होती है।

इसी कारण UNGA में आने वाले विदेशी नेताओं के मामले में diplomatic और international-law protections महत्वपूर्ण हो जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के लिए विशेष transit arrangements भी इसी व्यापक diplomatic framework का हिस्सा हैं।

UN Headquarters Agreement का Section 13 भी महत्वपूर्ण है। इसमें कहा गया है कि जिन लोगों पर Section 11 के तहत privileges लागू होते हैं, उनके लिए अमेरिकी immigration laws इस तरह लागू नहीं किए जाने चाहिए कि उनके UN Headquarters जाने के अधिकार में बाधा आए। जब ऐसे लोगों को visa की जरूरत होती है, तो agreement के तहत visas को बिना charge और यथाशीघ्र देने की व्यवस्था की गई है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर विदेशी नेता को अमेरिका के पूरे क्षेत्र में unrestricted immunity मिल जाती है। UN Headquarters Agreement मुख्य रूप से UN Headquarters District तक पहुंच और उससे संबंधित official travel को लेकर विशेष व्यवस्था करता है। अमेरिकी विदेश विभाग के ऐतिहासिक कानूनी विश्लेषण में भी यह अंतर बताया गया है कि अमेरिका की बाध्यता मुख्य रूप से UN Headquarters तक प्रतिनिधियों की पहुंच से जुड़ी है, न कि उन्हें पूरे अमेरिकी क्षेत्र में unrestricted access देने से।

यानी पेजेशकियन का न्यूयॉर्क दौरा मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक कार्यक्रम से जुड़ा है। अमेरिका ने उनकी यात्रा की अनुमति इसी framework के तहत दी है।

यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उसी UNGA के लिए अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अमेरिका आने का वीजा नहीं दिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बाद में अब्बास को वीडियो के जरिए संबोधित करने की अनुमति देने के लिए प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव के पक्ष में 152 देशों ने मतदान किया, जबकि 3 ने विरोध किया और 4 ने मतदान नहीं किया।

इस तरह 2026 की UNGA से पहले अमेरिका के visa decisions ने अलग-अलग UN member और observer entities के प्रतिनिधियों को लेकर अलग परिस्थितियां पैदा की हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल को प्रवेश की अनुमति मिली है, जबकि फिलिस्तीनी नेतृत्व को व्यक्तिगत रूप से न्यूयॉर्क आने की अनुमति नहीं मिली।

ईरान के मामले में अमेरिका ने कहा है कि उसका core delegation UN General Assembly High-Level Week में शामिल हो सकेगा। Reuters के अनुसार इसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल पर यात्रा संबंधी प्रतिबंध जारी रहेंगे।

ईरान के लिए यह यात्रा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि पेजेशकियन को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर सीधे दुनिया के नेताओं को संबोधित करने का अवसर मिलेगा। उनका भाषण ऐसे समय होगा जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष, परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय चर्चा में हैं।

हालांकि पेजेशकियन अपने भाषण में क्या कहेंगे, इसका अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच सदस्य देशों को अपनी सरकार की नीतियां और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपना पक्ष रखने का अवसर देता है।

इस साल UN General Assembly का theme “Restoring Trust, Managing Transformation: A United Nations That Delivers for All” है। महासभा में AI governance से लेकर युद्धों और जलवायु परिवर्तन तक कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी।

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष को देखते हुए पेजेशकियन का भाषण विशेष अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित कर सकता है। लेकिन UNGA में किसी नेता का भाषण अपने आप में अमेरिकी नीति या किसी युद्ध के परिणाम को बदलने वाला कानूनी आदेश नहीं होता। यह मुख्य रूप से सदस्य देशों के बीच diplomatic communication का मंच है।

ईरान के प्रतिनिधिमंडल पर travel restrictions भी इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अमेरिका ने पहले से ईरानी अधिकारियों की न्यूयॉर्क में आवाजाही को सीमित रखा है। रिपोर्टों के अनुसार ऐसे अधिकारियों को UN परिसर और निर्धारित क्षेत्रों तक सीमित रखने की नीति लंबे समय से लागू रही है।

इसका अर्थ यह हुआ कि पेजेशकियन के अमेरिका पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें अमेरिका के किसी भी शहर में स्वतंत्र रूप से यात्रा करने की अनुमति होगी। उनका दौरा मुख्य रूप से UN General Assembly और उससे जुड़े आधिकारिक कार्यक्रमों के आसपास केंद्रित रहेगा।

यह व्यवस्था UN Headquarters की विशेष international status से जुड़ी है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय अमेरिकी territory के भीतर है, लेकिन UN और अमेरिका के बीच विशेष कानूनी arrangements के कारण वहां member-state representatives की official participation के लिए अलग नियम लागू होते हैं।

1947 के agreement में यह भी स्पष्ट किया गया है कि UN Headquarters किसी ऐसे व्यक्ति के लिए सामान्य refuge नहीं बनना चाहिए जो अमेरिकी federal, state या local law के तहत गिरफ्तारी से बच रहा हो। यानी Headquarters Agreement को “हर व्यक्ति के लिए गिरफ्तारी से पूर्ण सुरक्षा” के रूप में समझना गलत होगा।

यही कारण है कि “पेजेशकियन अमेरिका नहीं पहुंच सकते” या “वह पहुंचते ही गिरफ्तार हो जाएंगे”—दोनों तरह के सीधे निष्कर्ष उपलब्ध कानूनी ढांचे को बहुत सरल बना देते हैं। वास्तविक स्थिति यह है कि अमेरिका ने उन्हें आधिकारिक UN कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी है और उनकी यात्रा विशेष UN-host-country arrangements के तहत हो रही है।

गिरफ्तारी के सवाल में यह भी देखना पड़ता है कि क्या संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अमेरिका में कोई लागू warrant, criminal case या extradition request है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में पेजेशकियन के खिलाफ ऐसा कोई सार्वजनिक अमेरिकी arrest warrant सामने नहीं आया है। इसलिए केवल ईरान के साथ युद्ध या अमेरिका की ईरान नीति के आधार पर गिरफ्तारी की बात करना तथ्यात्मक रूप से पर्याप्त नहीं होगा।

दूसरी ओर अगर किसी विदेशी नेता के खिलाफ किसी देश का घरेलू criminal warrant मौजूद हो, तो स्थिति अलग हो सकती है। फिर diplomatic status, head-of-state immunity, UN privileges और संबंधित treaties का विश्लेषण करना पड़ता है। इसलिए किसी भी विदेशी नेता की गिरफ्तारी का सवाल व्यक्ति-विशेष के कानूनी status और लागू कानून पर निर्भर करता है।

पेजेशकियन की मौजूदा यात्रा में अमेरिका का visa जारी करना स्वयं एक महत्वपूर्ण तथ्य है। अमेरिकी प्रशासन ने यह निर्णय संघर्ष के बावजूद लिया है। State Department ने इसे host-country obligations के अनुरूप बताया है।

इस फैसले से यह भी पता चलता है कि युद्ध और diplomatic channels हमेशा पूरी तरह एक-दूसरे को खत्म नहीं करते। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के बावजूद संयुक्त राष्ट्र जैसे multilateral institution में दोनों पक्षों के representatives की मौजूदगी की व्यवस्था बनी हुई है।

UN General Assembly का यही मूल उद्देश्य भी है कि गंभीर मतभेदों और संघर्षों के बावजूद member states को एक ही मंच पर अपने विचार रखने का अवसर मिले।

पेजेशकियन के न्यूयॉर्क पहुंचने के बाद उनकी सुरक्षा अमेरिकी authorities और UN security arrangements के तहत होगी। UNGA के दौरान दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी न्यूयॉर्क में मौजूद रहेंगे। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही बेहद व्यापक रहती है।

अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अनुमति देते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि delegation पर restrictions बनी रहेंगी। इसका मतलब है कि visa मिलना unrestricted entry या सामान्य tourism visa जैसा नहीं है। यह मुख्य रूप से official UN participation से जुड़ा प्रवेश है।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल के लिए यह दौरा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति पेजेशकियन को संयुक्त राष्ट्र में ईरान का पक्ष रखने का अवसर मिलेगा, जबकि अमेरिका अपने host-country obligations को पूरा करते हुए उनकी यात्रा को सीमित शर्तों के साथ अनुमति दे रहा है।

आने वाले दिनों में पेजेशकियन का भाषण, अमेरिका-ईरान के बीच संभावित बातचीत और अन्य देशों के नेताओं के साथ उनकी diplomatic meetings पर अंतरराष्ट्रीय नजर रहेगी। Reuters के अनुसार इस साल UNGA के दौरान अमेरिका और खाड़ी देशों के नेताओं के बीच ईरान से जुड़े postwar issues पर बातचीत की योजना भी है।

इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए तीन बातें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। पहली, अमेरिका ने ईरान के core UN delegation को वीजा दिया है। दूसरी, पेजेशकियन UN General Assembly को संबोधित करने के लिए न्यूयॉर्क जाने वाले हैं। तीसरी, उनका दौरा सामान्य अमेरिकी यात्रा नहीं बल्कि UNGA participation से जुड़ी विशेष diplomatic व्यवस्था के तहत है।

जहां तक गिरफ्तारी की बात है, उपलब्ध जानकारी के आधार पर पेजेशकियन की गिरफ्तारी का कोई घोषित अमेरिकी आदेश सामने नहीं आया है। इसके अलावा UN Headquarters Agreement member-state representatives को UN headquarters तक पहुंच के संबंध में विशेष protections देता है। इसलिए केवल अमेरिका-ईरान युद्ध को उनकी गिरफ्तारी का कानूनी आधार मानना सही नहीं होगा।

हालांकि UN Headquarters Agreement को blanket immunity समझना भी गलत होगा। समझौते में अमेरिकी कानूनों के तहत कुछ परिस्थितियों और UN headquarters के नियमों से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं। इसलिए किसी भी संभावित गिरफ्तारी की कानूनी स्थिति specific facts पर निर्भर करेगी।

फिलहाल सबसे स्पष्ट तथ्य यही है कि अमेरिका ने पेजेशकियन और उनके मुख्य प्रतिनिधिमंडल को UNGA में शामिल होने की अनुमति दी है। यह निर्णय अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बावजूद संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के रूप में अमेरिका की treaty obligations के संदर्भ में लिया गया है।, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होंगे। अमेरिका ने उन्हें और ईरान के मुख्य प्रतिनिधिमंडल को वीजा दिया है। उनके दौरे पर travel और अन्य restrictions रहेंगी। उनकी गिरफ्तारी का सवाल केवल राजनीतिक तनाव से तय नहीं होता; इसके लिए अमेरिकी कानून, किसी संभावित warrant, international law और UN Headquarters Agreement जैसे कानूनी पहलुओं को देखना जरूरी है। वर्तमान में उपलब्ध जानकारी में उनके खिलाफ कोई सार्वजनिक अमेरिकी arrest warrant नहीं बताया गया है।

इस घटना से एक बार फिर स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में युद्ध और कूटनीति एक साथ चल सकते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जारी होने के बावजूद दोनों देशों के प्रतिनिधि संयुक्त राष्ट्र जैसे multilateral मंच पर मौजूद रह सकते हैं। पेजेशकियन का न्यूयॉर्क दौरा इसी जटिल diplomatic framework का उदाहरण है।

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http://ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को UN General Assembly में शामिल होने के लिए अमेरिका ने वीजा दिया है।

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