दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन ने साउथ जोन के खिलाफ अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे फाइनल के दूसरे दिन ईस्ट जोन ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इस पारी के सबसे बड़े नायक कप्तान ईशान किशन रहे, जिन्होंने 334 गेंदों का सामना करते हुए शानदार 270 रन बनाए। उनकी मैराथन पारी में 30 चौके और 7 छक्के शामिल रहे। उनके अलावा विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र ने 101 रन की आक्रामक शतकीय पारी खेली।
ईस्ट जोन ने दूसरे दिन की शुरुआत मजबूत स्थिति से की थी। पहले दिन का खेल खत्म होने पर टीम का स्कोर 385 रन पर 4 विकेट था और कप्तान ईशान किशन 111 रन बनाकर नाबाद थे। उनके साथ कुमार कुशाग्र 63 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे। दूसरे दिन दोनों बल्लेबाजों ने अपनी-अपनी पारियों को आगे बढ़ाया और साउथ जोन के गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया।
दूसरे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण ईशान किशन का दोहरा शतक रहा। उन्होंने 270 गेंदों में 200 रन पूरे किए और इसके बाद भी बल्लेबाजी जारी रखी। आखिरकार उनकी पारी 270 रन पर जाकर समाप्त हुई। इस दौरान उन्होंने लंबे समय तक चेन्नई की गर्म और उमस भरी परिस्थितियों में बल्लेबाजी की। उनकी पारी इतनी लंबी रही कि एक समय थकान के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर भी जाना पड़ा, लेकिन बाद में वह दोबारा क्रीज पर लौटे और अपनी टीम के लिए बड़ा स्कोर खड़ा करने में योगदान दिया।
ईशान की 270 रन की पारी केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रही, बल्कि दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन के लिए ऐतिहासिक प्रदर्शन भी बन गई। वह दलीप ट्रॉफी के फाइनल में दोहरा शतक लगाने वाले चुनिंदा बल्लेबाजों में शामिल हो गए। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वह दलीप ट्रॉफी फाइनल में दोहरा शतक लगाने वाले पांचवें बल्लेबाज बने। ईस्ट जोन की ओर से किसी बल्लेबाज का फाइनल में दोहरा शतक लगाना भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
ईशान ने अपनी पारी की शुरुआत अपेक्षाकृत नियंत्रित अंदाज में की थी, लेकिन जैसे-जैसे पारी आगे बढ़ी, उनका आक्रामक अंदाज भी दिखाई देने लगा। साउथ जोन के स्पिनरों के खिलाफ उन्होंने लगातार रन बनाए और खराब गेंदों को सीमा रेखा के बाहर भेजा। पहले दिन ही उन्होंने शतक पूरा करके ईस्ट जोन को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया था। दूसरे दिन उनका लक्ष्य सिर्फ दोहरा शतक बनाना नहीं था, बल्कि टीम को ऐसा स्कोर देना था जिससे फाइनल में साउथ जोन पर दबाव बनाया जा सके।
दूसरी ओर कुमार कुशाग्र ने भी कप्तान का बेहतरीन साथ दिया। पहले दिन 63 रन पर नाबाद रहने वाले कुशाग्र ने दूसरे दिन अपना शतक पूरा किया। उन्होंने 101 रन की पारी 132 गेंदों में खेली, जिसमें 8 चौके और 5 छक्के शामिल थे। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता साफ दिखाई दी। जब साउथ जोन के गेंदबाज ईशान को रोकने की कोशिश कर रहे थे, तब कुशाग्र ने दूसरे छोर से तेजी से रन बनाकर दबाव बनाए रखा।
ईशान किशन और कुमार कुशाग्र के बीच पांचवें विकेट के लिए 230 रन की साझेदारी हुई। यही साझेदारी मैच के दूसरे दिन की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक रही। इस साझेदारी के दौरान ईस्ट जोन ने 500 और फिर 600 रन का आंकड़ा पार किया। साउथ जोन के गेंदबाजों के सामने लगातार दो दिन तक एक मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप मौजूद रहा और उन्हें लंबे समय तक मैदान पर रहना पड़ा।
कुशाग्र का शतक पूरा होने के बाद ईस्ट जोन की पारी को एक और मजबूती मिली। हालांकि वह 101 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन तब तक टीम का स्कोर बहुत बड़ा हो चुका था। ईशान भी कुछ समय बाद 270 रन बनाकर पवेलियन लौटे। दोनों प्रमुख बल्लेबाजों के आउट होने के बावजूद ईस्ट जोन के निचले क्रम ने भी साउथ जोन को जल्दी राहत नहीं दी।
अनुकूल रॉय ने 45 रन की उपयोगी पारी खेली। उन्होंने करीब 98 गेंदों का सामना किया और ईस्ट जोन की पारी को स्थिरता दी। इसके बाद मोहम्मद शमी ने भी 28 रन की तेज पारी खेली। मोहम्मद शमी की पारी में चार चौके शामिल रहे। वहीं मोहम्मद कौनेन कुरैशी ने 40 रन बनाकर टीम के स्कोर को 700 के पार पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आखिरकार 163 ओवर की बल्लेबाजी के बाद ईस्ट जोन की पूरी टीम 708 रन पर ऑलआउट हो गई।
ईस्ट जोन का 708 रन का स्कोर साउथ जोन के लिए बेहद बड़ी चुनौती है। खासकर इसलिए क्योंकि फाइनल मुकाबले में अभी काफी क्रिकेट बाकी है। ईस्ट जोन के बल्लेबाजों ने दो दिनों में लंबी बल्लेबाजी करके साउथ जोन के गेंदबाजों को थका दिया है। अब बारी ईस्ट जोन के गेंदबाजों की होगी कि वे इस विशाल स्कोर का फायदा उठाकर साउथ जोन के बल्लेबाजों पर दबाव बनाएं।
साउथ जोन के गेंदबाजों के लिए दूसरा दिन बेहद कठिन रहा। भारत के तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज भी इस पारी में खास प्रभाव नहीं छोड़ सके। उन्होंने 25 ओवर गेंदबाजी की और 140 रन खर्च किए, लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। सपाट पिच और बल्लेबाजी के लिए अच्छी परिस्थितियों ने गेंदबाजों के लिए मुश्किलें बढ़ा दीं।
साउथ जोन की तरफ से सबसे ज्यादा गेंदबाजी का भार स्पिनर त्रिपुराना विजय पर रहा। उन्होंने 42 ओवर गेंदबाजी की और 4 विकेट हासिल किए, लेकिन इसके लिए उन्हें 180 रन खर्च करने पड़े। श्रेस गोपाल ने भी 42 ओवर किए और दो विकेट लिए। चामा मिलिंद ने 21 ओवर में दो विकेट हासिल किए। यानी साउथ जोन के लगभग सभी प्रमुख गेंदबाजों को लंबे स्पेल डालने पड़े।
इसका असर अब मैच के अगले चरण में देखने को मिल सकता है। 163 ओवर तक मैदान पर रहने के बाद साउथ जोन के खिलाड़ियों को अब बल्लेबाजी करते समय भी शारीरिक थकान से जूझना पड़ सकता है। दूसरी ओर ईस्ट जोन के गेंदबाजों के पास 708 रन की बढ़त के कारण अधिक आक्रामक रणनीति अपनाने का मौका होगा।
इस फाइनल में ईशान किशन की कप्तानी भी चर्चा में है। उन्होंने बल्लेबाजी से तो टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया ही, मैदान पर अपनी टीम को लगातार संभालते भी दिखाई दिए। पहले दिन 111 रन की नाबाद पारी और दूसरे दिन 270 रन तक पहुंचना बताता है कि उन्होंने फाइनल में कप्तानी की जिम्मेदारी को बल्लेबाजी के स्तर पर भी बखूबी निभाया है।
ईशान के लिए यह पारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ समय से उनके प्रदर्शन और भारतीय टीम में वापसी की संभावनाओं को लेकर चर्चा होती रही है। घरेलू क्रिकेट में लंबे समय तक बल्लेबाजी करके बड़ी पारी खेलने की क्षमता दिखाना उनके लिए सकारात्मक संकेत है। दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट में 270 रन बनाना निश्चित रूप से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने वाला प्रदर्शन है। हालांकि केवल एक पारी के आधार पर भारतीय टीम में चयन की गारंटी नहीं मानी जा सकती।
ईशान की बल्लेबाजी में एक खास बात यह भी रही कि उन्होंने केवल आक्रामक शॉट्स पर निर्भर रहने के बजाय लंबी पारी के लिए जरूरी धैर्य भी दिखाया। 334 गेंदों तक क्रीज पर रहना प्रथम श्रेणी क्रिकेट में मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की मजबूती मांगता है। टी20 क्रिकेट के लिए पहचाने जाने वाले बल्लेबाज के रूप में ईशान ने इस पारी से यह दिखाने की कोशिश की कि वह लंबे प्रारूप में भी बड़ी पारियां खेल सकते हैं।
यह पारी उनके प्रथम श्रेणी करियर के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। ईशान ने इससे पहले रणजी ट्रॉफी में दिल्ली के खिलाफ 273 रन की बड़ी पारी खेली थी। अब 270 रन की इस पारी के साथ उन्होंने फिर दिखाया है कि जब उन्हें लंबी पारी खेलने का मौका मिलता है तो वह बड़े स्कोर में बदल सकते हैं।
कुमार कुशाग्र के लिए भी यह फाइनल खास है। युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज ने 101 रन बनाकर न केवल अपना शतक पूरा किया, बल्कि ईस्ट जोन की विशाल पहली पारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कप्तान के साथ 230 रन की साझेदारी करना उनके आत्मविश्वास के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।
इस मुकाबले में पहले दिन भी ईस्ट जोन की बल्लेबाजी काफी मजबूत रही थी। सलामी बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन ने 72 रन बनाए, जबकि शिखर मोहन ने 85 रन की पारी खेली। वैभव सूर्यवंशी, जिनकी बल्लेबाजी देखने के लिए चेन्नई में बड़ी संख्या में प्रशंसक पहुंचे थे, ने 44 रन बनाए थे। इस तरह ईस्ट जोन के शीर्ष क्रम से लेकर मध्य क्रम तक लगभग सभी बल्लेबाजों ने योगदान दिया।
वैभव सूर्यवंशी की 44 रन की पारी भले ही बड़ी नहीं रही, लेकिन फाइनल से पहले और मैच के पहले दिन उनके नाम को लेकर काफी उत्साह था। युवा बल्लेबाज ने आक्रामक शुरुआत की, लेकिन बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सके। इसके बाद ईशान किशन ने पारी को संभाला और दूसरे दिन पूरी तरह मैच का केंद्र बन गए।
फाइनल के पहले दिन ईस्ट जोन ने 79 ओवर में 385 रन बनाए थे। उस समय ईशान 111 और कुशाग्र 63 रन बनाकर नाबाद थे। इसका मतलब था कि दूसरे दिन ईस्ट जोन के पास पहले से ही मजबूत आधार मौजूद था। दोनों बल्लेबाजों ने उस आधार का पूरा फायदा उठाया और टीम को 700 से ज्यादा के स्कोर तक पहुंचाया।
अब साउथ जोन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 708 रन के जवाब में अच्छी शुरुआत करने की है। अगर साउथ जोन शुरुआती विकेट गंवा देता है तो ईस्ट जोन के गेंदबाजों को मैच पर पूरी तरह नियंत्रण बनाने का मौका मिल जाएगा। लेकिन अगर साउथ जोन के सलामी बल्लेबाज और शीर्ष क्रम लंबे समय तक टिक जाते हैं तो मुकाबले में वापसी की संभावना बनी रह सकती है।
ईस्ट जोन की गेंदबाजी में मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार जैसे अनुभवी तेज गेंदबाज मौजूद हैं। शमी ने बल्ले से भी 28 रन का योगदान दिया और अब गेंद से टीम को शुरुआती सफलता दिलाने की जिम्मेदारी उन पर होगी। ईस्ट जोन के लिए 708 रन के बाद सबसे जरूरी चीज यह होगी कि वह साउथ जोन को लंबे समय तक बल्लेबाजी न करने दे।
फाइनल की स्थिति को देखते हुए ईस्ट जोन स्पष्ट रूप से मजबूत स्थिति में है। हालांकि प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सिर्फ एक बड़ी पारी से मैच खत्म नहीं होता। चेपॉक की पिच पर परिस्थितियां बदल सकती हैं और साउथ जोन के बल्लेबाज अगर धैर्य के साथ खेलते हैं तो वे बड़े स्कोर की ओर बढ़ सकते हैं। इसलिए ईस्ट जोन के लिए गेंदबाजी में अनुशासन बेहद जरूरी होगा।
ईशान किशन की 270 रन की पारी ने इस मुकाबले को पहले ही यादगार बना दिया है। 334 गेंदों में 270 रन, 30 चौके और 7 छक्के—ये आंकड़े उनकी पारी की आक्रामकता और लंबाई दोनों बताते हैं। इसके साथ कुमार कुशाग्र का 101 रन का शतक और निचले क्रम के उपयोगी योगदान ने ईस्ट जोन को 708 रन तक पहुंचा दिया।
दिलचस्प बात यह है कि ईशान किशन 270 रन बनाकर भी दलीप ट्रॉफी फाइनल के व्यक्तिगत सर्वोच्च स्कोर का रिकॉर्ड नहीं बना सके। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वह इस रिकॉर्ड से चूक गए। हालांकि 270 रन की पारी अपने आप में इतनी बड़ी है कि उनका नाम दलीप ट्रॉफी फाइनल की सबसे शानदार पारियों में शामिल हो गया है।
ईस्ट जोन ने भी 708 रन बनाकर एक विशाल स्कोर खड़ा किया है। साउथ जोन के गेंदबाजों ने 163 ओवर तक गेंदबाजी की और अब उनकी टीम को मैदान पर बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभालनी होगी। मैच के अगले दिन यह पता चलेगा कि क्या साउथ जोन इस पहाड़ जैसे स्कोर का जवाब दे पाता है या ईस्ट जोन के गेंदबाज फाइनल को एकतरफा दिशा में ले जाते हैं।
फिलहाल मुकाबले में बढ़त पूरी तरह ईस्ट जोन के पास दिखाई दे रही है। कप्तान ईशान किशन की 270 रन की मैराथन पारी ने टीम को ऐसा स्कोर दे दिया है जिसके सामने साउथ जोन को लंबी और बेहद अनुशासित बल्लेबाजी करनी होगी। कुमार कुशाग्र के शतक ने इस बढ़त को और मजबूत किया है। अब फाइनल का अगला अध्याय साउथ जोन की बल्लेबाजी से तय होगा।
ईशान किशन के लिए यह पारी व्यक्तिगत रूप से भी एक बड़ा संदेश है। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने दिखाया है कि वह सिर्फ तेज रन बनाने वाले सीमित ओवरों के बल्लेबाज नहीं हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में घंटों बल्लेबाजी करके बड़ा स्कोर बनाने की क्षमता भी रखते हैं। अगर वह इस प्रदर्शन की निरंतरता बनाए रखते हैं तो आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा और तेज हो सकती है।
फिलहाल चेन्नई के चेपॉक में दलीप ट्रॉफी फाइनल का सबसे बड़ा नाम ईशान किशन हैं। 270 रन की पारी, 708 रन का टीम स्कोर और साउथ जोन के सामने विशाल चुनौती—ईस्ट जोन ने फाइनल के दूसरे दिन पूरी तरह अपना दबदबा बना लिया है। अब देखना होगा कि साउथ जोन इस दबाव से कैसे निकलता है और क्या वह 708 रन के जवाब में ऐसा स्कोर बना पाता है जिससे फाइनल में मुकाबला जीवित रहे।
