भारतीय सिनेमा के लिए 22 सितंबर 2026 का दिन बेहद खास रहा। गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में आयोजित 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के कलाकारों और फिल्म निर्माताओं को सम्मानित किया। इस समारोह में बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया। कार्तिक आर्यन ने यह पुरस्कार मलयालम अभिनेता ममूटी के साथ साझा किया, जिन्हें ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया था। वहीं ‘आर्टिकल 370’ के लिए यामी गौतम को बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार मिला। समारोह का सबसे बड़ा सम्मान दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को मिला, जिन्हें भारतीय सिनेमा में उनके पांच दशक से अधिक लंबे योगदान के लिए वर्ष 2024 का दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया।
कार्तिक आर्यन के लिए यह सम्मान इसलिए भी खास है क्योंकि ‘चंदू चैंपियन’ में उन्होंने भारत के पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाया था। फिल्म में एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी दिखाई गई है, जिसने जीवन में कई मुश्किलों का सामना करने के बाद खेल की दुनिया में देश का नाम रोशन किया। कार्तिक को इस भूमिका के लिए अपने शरीर, फिटनेस और अभिनय शैली पर काफी मेहनत करनी पड़ी थी। फिल्म रिलीज होने से पहले ही उनकी शारीरिक तैयारी और ट्रांसफॉर्मेशन काफी चर्चा में आ गया था।
कार्तिक ने इस फिल्म के लिए लंबे समय तक ट्रेनिंग की थी। उन्होंने अपने शरीर में बड़ा बदलाव किया और अपने किरदार के मुताबिक एथलेटिक लुक हासिल किया। बाद में उन्होंने बताया कि इस सफर के दौरान उनका वजन करीब 90 किलो से घटकर 72 किलो तक पहुंचा था, यानी उन्होंने लगभग 18 किलो वजन कम किया। 2026 में फिल्म की दूसरी सालगिरह के मौके पर भी कार्तिक ने इस परिवर्तन को याद किया और बताया कि यह फिल्म उनके लिए बेहद खास रही।
यहां यह समझना जरूरी है कि कार्तिक की फिटनेस यात्रा केवल वजन कम करने तक सीमित नहीं थी। ‘चंदू चैंपियन’ में उनका किरदार एक एथलीट का था, इसलिए सिर्फ पतला दिखना पर्याप्त नहीं था। उन्हें शरीर को इस तरह तैयार करना था कि वह एक प्रशिक्षित खिलाड़ी जैसा दिखाई दे। फिल्म में बॉक्सिंग और अन्य खेल गतिविधियों से जुड़े दृश्य भी थे, इसलिए उन्हें लंबे समय तक ट्रेनिंग करनी पड़ी। 2024 में उनके जिम वर्कआउट के वीडियो भी सामने आए थे, जिनमें वह 15 किलो वजन के साथ पुल-अप्स करते नजर आए थे।
कार्तिक ने इस फिल्म के लिए जिस तरह की शारीरिक तैयारी की, उसका असर फिल्म के पर्दे पर भी दिखाई दिया। उनका ट्रांसफॉर्मेशन दर्शकों के लिए फिल्म की सबसे चर्चित चीजों में से एक बन गया। उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर अपनी बॉडी फैट में आए बदलाव की जानकारी साझा की थी। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने करीब डेढ़ साल की अवधि में अपने शरीर को किरदार के अनुरूप तैयार किया और बॉडी फैट को काफी कम किया।
‘चंदू चैंपियन’ का निर्देशन कबीर खान ने किया था। फिल्म में कार्तिक आर्यन ने मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाया। मुरलीकांत पेटकर भारत के पैरालंपिक खेल इतिहास में महत्वपूर्ण नाम हैं और उन्होंने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता था। फिल्म ने उनके जीवन और संघर्ष को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया। कार्तिक के लिए यह भूमिका इसलिए भी चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि उन्हें वास्तविक व्यक्ति की कहानी के साथ-साथ उसके संघर्ष और खेल भावना को भी अभिनय के जरिए दर्शाना था।
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के विजेताओं की घोषणा पहले ही 18 जुलाई 2026 को की गई थी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन और ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए ममूटी को बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिला। ‘आर्टिकल 370’ को बेस्ट फीचर फिल्म चुना गया और इसी फिल्म के लिए यामी गौतम को बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान मिला।
इसके बाद 22 सितंबर को पुरस्कारों का आधिकारिक समारोह आयोजित किया गया। इस बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड समारोह दिल्ली में नहीं बल्कि गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में हुआ। यह भी इस समारोह की खास बात रही। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार समारोह में भारतीय सिनेमा के कलाकारों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्तिक आर्यन जब पुरस्कार लेने पहुंचे तो यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 2011 में ‘प्यार का पंचनामा’ से की थी। इसके बाद ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’, ‘लुका छुपी’, ‘पति पत्नी और वो’, ‘भूल भुलैया 2’ और ‘सत्यप्रेम की कथा’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन ‘चंदू चैंपियन’ उनके लिए एक अलग तरह की भूमिका थी, जिसमें उन्हें एक वास्तविक खिलाड़ी की कहानी को पर्दे पर निभाना था।
कार्तिक के राष्ट्रीय पुरस्कार की कहानी में उनकी फिटनेस तैयारी भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी फिल्म के लिए अभिनेता का वजन कम करना या बढ़ाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक की तैयारी लंबे समय तक चली। उन्होंने नियमित ट्रेनिंग, डाइट और खेल से जुड़ी शारीरिक गतिविधियों पर काम किया। उनकी ट्रेनिंग में ताकत, फिटनेस और एथलेटिक मूवमेंट को महत्व दिया गया। 2024 में उनके वर्कआउट से जुड़ी रिपोर्टों में 15 किलो वजन के साथ पुल-अप्स करने का भी उल्लेख हुआ था।
कार्तिक की इस तैयारी की चर्चा इसलिए भी हुई क्योंकि उन्होंने फिल्म के लिए अपनी सामान्य स्क्रीन इमेज से अलग रूप अपनाया। आम तौर पर उन्हें रोमांटिक और कॉमेडी फिल्मों के लिए ज्यादा जाना जाता रहा है, लेकिन ‘चंदू चैंपियन’ में उन्हें एक स्पोर्ट्स ड्रामा के गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदार में देखा गया। फिल्म में उनके शरीर का बदलाव सिर्फ दिखावे के लिए नहीं बल्कि किरदार की कहानी के अनुरूप था।
इस फिल्म के जरिए मुरलीकांत पेटकर की कहानी भी बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंची। खेल जगत में मुरलीकांत पेटकर का नाम भारत के शुरुआती पैरालंपिक गोल्ड मेडल विजेताओं में लिया जाता है। उनके जीवन में संघर्ष, दुर्घटना, पुनर्वास और खेल की ओर लौटने जैसी कई घटनाएं शामिल रही हैं। यही वजह है कि फिल्म की कहानी में प्रेरणा और संघर्ष दोनों प्रमुख तत्व रहे।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने के बाद कार्तिक की मेहनत को आधिकारिक स्तर पर भी पहचान मिली। हालांकि पुरस्कार केवल अभिनेता की शारीरिक तैयारी के लिए नहीं बल्कि पूरी भूमिका और अभिनय के लिए दिया गया। राष्ट्रीय पुरस्कार की जूरी ने ‘चंदू चैंपियन’ में उनके प्रदर्शन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में चुना। कार्तिक ने यह सम्मान ममूटी के साथ साझा किया।
इस साल का राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह अनंत नाग के लिए भी ऐतिहासिक रहा। भारतीय सिनेमा में पांच दशक से अधिक समय तक काम करने वाले अनंत नाग को वर्ष 2024 का दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 सितंबर को उन्हें यह सम्मान दिया। भारत सरकार ने इससे पहले 16 सितंबर को उनके नाम की घोषणा की थी।
अनंत नाग का करियर कन्नड़ सिनेमा से शुरू हुआ और उन्होंने हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में काम किया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है। उनके करियर में कन्नड़, हिंदी, तेलुगु, मलयालम, तमिल और मराठी सिनेमा की फिल्में शामिल हैं। टेलीविजन की दुनिया में ‘मालगुडी डेज’ से भी उन्हें व्यापक पहचान मिली।
अनंत नाग की शिक्षा को लेकर भी उनकी जीवन कहानी का एक दिलचस्प पहलू सामने आता है। उनके पुराने इंटरव्यू और उनके लिखे संस्मरणों के अनुसार उनकी शुरुआती पढ़ाई कर्नाटक के अलग-अलग स्थानों में हुई। मुंबई आने के बाद उन्होंने स्कूल की पढ़ाई जारी रखी, लेकिन शिक्षा का सफर पारंपरिक तरीके से पूरा नहीं हुआ। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि 11वीं कक्षा के दौरान उन्हें कोंकणी नाटक में अभिनय का अवसर मिला था और इसी तरह उनका थिएटर से जुड़ाव आगे बढ़ा।
इसलिए “अनंत नाग 11वीं तक ही पढ़े” जैसी लाइन को पूरी तरह सटीक बनाने के लिए यह कहना बेहतर है कि उनकी औपचारिक स्कूली शिक्षा 11वीं के आसपास रही और उसी समय उनका थिएटर की ओर झुकाव बढ़ा। उपलब्ध पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि 11वीं के दौरान उन्हें कोंकणी नाटक में अभिनय का प्रस्ताव मिला था। यह उनके जीवन का वह मोड़ था जिसने आगे चलकर उनके अभिनय करियर को दिशा दी।
अनंत नाग ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत कन्नड़ फिल्म ‘संकल्प’ से की थी। इसके बाद हिंदी फिल्म ‘अंकुर’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में प्रवेश किया। आने वाले वर्षों में उन्होंने अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम किया और कई तरह के किरदार निभाए। भारत सरकार के अनुसार उनका करियर पांच दशकों से अधिक समय तक फैला हुआ है।
दादा साहब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। अनंत नाग को यह सम्मान उनके लंबे और विविधतापूर्ण योगदान के लिए दिया गया। राष्ट्रपति की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में भी उनके अभिनय की स्वाभाविकता, संयम और प्रामाणिकता का उल्लेख किया गया।
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद अनंत नाग ने इस सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया। PIB की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अपने लंबे सफर को याद करते हुए थिएटर से लेकर फिल्मों तक की यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने अपने सम्मान को अपने सहयोगियों, दर्शकों और समर्थकों के साथ जोड़ा।
इस बार के नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में केवल कार्तिक आर्यन और अनंत नाग ही चर्चा में नहीं रहे। ‘आर्टिकल 370’ को बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला और यामी गौतम ने इसी फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान हासिल किया। ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए कार्तिक आर्यन के साथ संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर चुना गया। राजकुमार पेरियासामी को ‘अमरन’ के लिए बेस्ट डायरेक्टर का पुरस्कार मिला।
‘कalki 2898 AD’ को बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट का सम्मान मिला। ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए रणदीप हुड्डा को बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का पुरस्कार मिला। इस तरह 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में हिंदी, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और अन्य भाषाओं की फिल्मों को भी अलग-अलग श्रेणियों में सम्मान मिला।
कार्तिक आर्यन के लिए इस पुरस्कार का महत्व उनके करियर के लिहाज से भी देखा जा रहा है। राष्ट्रीय पुरस्कार किसी अभिनेता के लिए केवल एक ट्रॉफी नहीं बल्कि उसके प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर मिली औपचारिक मान्यता होती है। ‘चंदू चैंपियन’ के जरिए कार्तिक ने एक वास्तविक खेल व्यक्तित्व की कहानी को पर्दे पर निभाया और इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में सम्मान मिला।
उनकी फिटनेस यात्रा भी इस फिल्म की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। हालांकि सोशल मीडिया पर अक्सर वजन कम करने की अलग-अलग संख्या बताई जाती है, हालिया रिपोर्टों में कार्तिक के हवाले से 90 किलो से 72 किलो तक आने यानी लगभग 18 किलो वजन कम करने की बात सामने आई है। इसलिए 15 किलो के बजाय 18 किलो का आंकड़ा वर्तमान उपलब्ध रिपोर्टों से ज्यादा मेल खाता है।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि किसी अभिनेता की वजन घटाने की प्रक्रिया को सामान्य लोगों के लिए सीधे फिटनेस मॉडल नहीं माना जाना चाहिए। फिल्म कलाकारों की ट्रेनिंग विशेषज्ञों की निगरानी में होती है और उनकी डाइट, व्यायाम तथा शूटिंग शेड्यूल पेशेवर टीम द्वारा तय किया जा सकता है। कार्तिक की फिल्मी तैयारी को उसी संदर्भ में देखना उचित है।
‘चंदू चैंपियन’ की कहानी और कार्तिक का प्रदर्शन दोनों मिलकर इस राष्ट्रीय पुरस्कार तक पहुंचे। फिल्म में एक ऐसे व्यक्ति की कहानी दिखाई गई जिसने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद खेल में अपनी पहचान बनाई। कार्तिक ने इस भूमिका के लिए अपने अभिनय के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी खुद को बदलने की कोशिश की। राष्ट्रीय पुरस्कार ने इस मेहनत को एक महत्वपूर्ण पहचान दी।
दूसरी तरफ अनंत नाग को मिला दादा साहब फाल्के सम्मान भारतीय सिनेमा में उनके लंबे सफर की आधिकारिक मान्यता है। एक ऐसे अभिनेता जिन्होंने थिएटर, कन्नड़ सिनेमा, हिंदी फिल्मों और टेलीविजन तक कई माध्यमों में काम किया, उन्हें उनके पूरे करियर के योगदान के लिए देश के सर्वोच्च फिल्म सम्मान से नवाजा गया।
22 सितंबर को हुए इस समारोह ने भारतीय सिनेमा की दो अलग-अलग पीढ़ियों को एक मंच पर ला दिया। एक तरफ कार्तिक आर्यन जैसे अपेक्षाकृत युवा अभिनेता को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, वहीं दूसरी तरफ कई दशकों से अभिनय कर रहे अनंत नाग को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस वजह से इस साल का समारोह फिल्म इंडस्ट्री के लिए खास महत्व रखता है।
नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की यह कहानी बताती है कि भारतीय सिनेमा में अलग-अलग पीढ़ियों और भाषाओं के कलाकारों को एक ही राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिल रहा है। कार्तिक आर्यन के लिए यह उनके अभिनय करियर की एक बड़ी उपलब्धि है, जबकि अनंत नाग के लिए यह उनके दशकों लंबे सिनेमाई सफर का सर्वोच्च सम्मान है।
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