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NEET 2027 परीक्षा 5-6 दिन चल सकती है, CBT मोड में होगी; करीब 1000 परीक्षा केंद्रों की तैयारी

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के आयोजन का तरीका 2027 से पूरी तरह बदल सकता है। केंद्र सरकार और परीक्षा एजेंसी से जुड़ी तैयारियों के अनुसार, NEET-UG 2027 को पेन-पेपर मोड के बजाय Computer Based Test यानी CBT मोड में आयोजित करने की योजना है। इसके साथ ही परीक्षा को एक दिन में कराने के बजाय करीब 5 से 6 दिनों में अलग-अलग शिफ्ट में आयोजित किया जा सकता है। देशभर में करीब 1,000 परीक्षा केंद्र तैयार करने की योजना पर भी काम चल रहा है।

यह बदलाव लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। अभी तक NEET-UG की पहचान एक ऐसी परीक्षा के रूप में रही है, जिसमें लाखों छात्र एक ही दिन और लगभग एक ही समय पर OMR शीट के जरिए प्रश्नों के उत्तर देते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर उम्मीदवारों को कंप्यूटर स्क्रीन पर सवाल पढ़ने होंगे और माउस की मदद से सही विकल्प चुनना होगा।

मई 2026 में National Testing Agency ने Supreme Court of India को बताया था कि केंद्र से परामर्श के बाद वह अगले साल से NEET-UG को CBT मोड में आयोजित करने के लिए तैयार है। अब ताजा रिपोर्टों में परीक्षा को 5-6 दिनों में करीब 1,000 केंद्रों पर आयोजित करने की संभावित व्यवस्था सामने आई है।

हालांकि छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। परीक्षा की तारीख, शिफ्ट, प्रश्नपत्रों की संख्या, normalization method और final exam pattern जैसी विस्तृत जानकारी आधिकारिक सूचना बुलेटिन में स्पष्ट होगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में 5-6 दिन और करीब 1,000 केंद्रों वाली व्यवस्था को सरकारी तैयारियों और संभावित योजना के रूप में बताया गया है।

NEET परीक्षा में बदलाव की यह तैयारी पेपर लीक और परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर उठे सवालों के बाद हो रही है। 2026 की परीक्षा से जुड़े पेपर लीक विवाद के बाद मूल परीक्षा रद्द हुई और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई। इस घटनाक्रम के बाद परीक्षा प्रणाली और NTA के कामकाज में बड़े बदलाव की मांग तेज हुई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार NTA के “टॉप टू बॉटम” पुनर्गठन की तैयारी कर रही है।

NEET जैसी परीक्षा में सुरक्षा का सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि इसके जरिए देशभर के मेडिकल कॉलेजों में MBBS और दूसरे undergraduate medical courses में प्रवेश का रास्ता तय होता है। लाखों उम्मीदवार कई वर्षों तक इसकी तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की विश्वसनीयता और परिणाम प्रक्रिया पर भरोसा बेहद महत्वपूर्ण है।

CBT व्यवस्था में पारंपरिक तरीके से छपे हुए प्रश्नपत्रों को देशभर में हजारों केंद्रों तक पहुंचाने की जरूरत कम हो सकती है। प्रश्न डिजिटल माध्यम से सुरक्षित सिस्टम में उपलब्ध कराए जा सकते हैं। उम्मीदवार को निर्धारित कंप्यूटर टर्मिनल मिलता है और परीक्षा शुरू होने के तय समय पर स्क्रीन पर प्रश्न दिखाई देते हैं। NTA के CBT परिचय दस्तावेज में भी इस मूल प्रक्रिया को समझाया गया है।

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि परीक्षा एक ही दिन में कराने का दबाव कम किया जा सकेगा। NEET में उम्मीदवारों की संख्या बहुत बड़ी होने के कारण सभी छात्रों को एक साथ CBT सुविधा उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। इसी वजह से परीक्षा को 5 से 6 दिनों और कई शिफ्टों में आयोजित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

करीब 1,000 केंद्रों का नेटवर्क तैयार करना आसान काम नहीं होगा। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर पर्याप्त संख्या में काम करने वाले कंप्यूटर, स्थिर बिजली आपूर्ति, backup power, सुरक्षित local network, प्रशिक्षित staff, surveillance और technical support की जरूरत होगी। किसी उम्मीदवार के कंप्यूटर में तकनीकी खराबी होने पर replacement system और अतिरिक्त समय से जुड़े स्पष्ट नियम भी आवश्यक होंगे।

ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों के लिए परीक्षा केंद्र तक पहुंच भी महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। अगर केंद्रों की संख्या सीमित रही और उम्मीदवारों को अपने जिले या राज्य से बहुत दूर जाना पड़ा तो यात्रा और रहने का खर्च बढ़ सकता है। इसलिए 1,000 केंद्रों की संभावित योजना में geographical distribution सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक होगी।

CBT मोड का दूसरा बड़ा सवाल अलग-अलग शिफ्टों की निष्पक्षता है। अगर परीक्षा 5 या 6 दिनों तक चलेगी तो स्वाभाविक रूप से अलग-अलग question sets की जरूरत होगी। ऐसे में छात्रों के बीच यह सवाल उठ सकता है कि किसी शिफ्ट का पेपर आसान और किसी का कठिन हुआ तो ranking कैसे तय की जाएगी।

अभी तक NEET-UG मुख्य रूप से single-session examination के रूप में आयोजित होती रही है। Multi-shift CBT व्यवस्था में score normalization या equating mechanism की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन 2027 के लिए कौन-सा तरीका अपनाया जाएगा, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी final information bulletin और exam rules में ही स्पष्ट होगी। छात्रों को इस विषय में सोशल मीडिया के अनुमान के बजाय आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।

NEET उम्मीदवारों की तैयारी पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ेगा। पेन-पेपर परीक्षा में छात्र प्रश्नपत्र पर निशान लगाकर, rough work करके और OMR sheet भरकर परीक्षा देते रहे हैं। CBT में उन्हें स्क्रीन पर प्रश्न पढ़ने, options चुनने, question navigation panel का उपयोग करने और unanswered तथा review questions को manage करने की आदत डालनी होगी।

इसका मतलब यह नहीं है कि Biology, Physics और Chemistry की मूल तैयारी का महत्व कम हो जाएगा। परीक्षा का माध्यम बदलने से concept knowledge की जरूरत समाप्त नहीं होती। लेकिन परीक्षा देने की तकनीक जरूर बदल सकती है। छात्रों को लंबे समय तक स्क्रीन पर concentration बनाए रखने और digital interface पर समय का सही उपयोग करने की practice करनी होगी।

CBT में उम्मीदवार आम तौर पर किसी प्रश्न का उत्तर चुन सकते हैं, अगले सवाल पर जा सकते हैं और interface के नियमों के अनुसार सवाल को review के लिए mark कर सकते हैं। हालांकि NEET 2027 के लिए final navigation rules क्या होंगे, यह आधिकारिक exam instructions जारी होने पर ही निश्चित होगा।

छात्रों के लिए अभी से computer familiarity बढ़ाना उपयोगी हो सकता है। खासकर ऐसे उम्मीदवार जो नियमित रूप से desktop computer का इस्तेमाल नहीं करते, उन्हें mouse handling, scrolling और basic on-screen navigation की practice करनी चाहिए। इसके लिए महंगे coaching package की जरूरत नहीं है; basic computer familiarity और नियमित mock tests काफी उपयोगी हो सकते हैं।

सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती परीक्षा की cyber security भी होगी। Pen-and-paper examination में physical question paper leakage का खतरा होता है, जबकि digital examination में server security, access control, authentication और network integrity से जुड़े अलग प्रकार के जोखिम होते हैं। इसलिए केवल परीक्षा को कंप्यूटर पर ले जाना पर्याप्त नहीं होगा; पूरे digital system की सुरक्षा भी मजबूत करनी होगी।

CBT के पक्ष में एक तर्क यह है कि printed paper की handling chain छोटी की जा सकती है। परंपरागत परीक्षा में paper setting से लेकर printing, storage, transportation और centre delivery तक कई चरण होते हैं। हर अतिरिक्त चरण सुरक्षा की एक नई चुनौती पैदा कर सकता है। Digital delivery system इन physical stages को कम कर सकता है, लेकिन इसके बदले मजबूत encryption और access control की आवश्यकता बढ़ जाती है।

NEET 2027 की संभावित व्यवस्था के साथ NTA के पुनर्गठन की खबर भी महत्वपूर्ण है। ताजा रिपोर्टों में कहा गया है कि सरकार एजेंसी की पूरी operational structure में बदलाव पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य exam planning, centre management, security और accountability को मजबूत करना बताया जा रहा है।

हाल में एक संसदीय समिति से जुड़ी रिपोर्ट में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं को कई चरणों में कराने और NTA को वैधानिक दर्जा देने जैसी सिफारिशों का भी उल्लेख हुआ है। समिति ने साथ ही यह माना कि CBT मोड में जाने पर छात्रों को होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यह बिंदु महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत में digital access समान नहीं है। बड़े शहरों में पढ़ने वाले छात्र computer-based mock tests से परिचित हो सकते हैं, लेकिन छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में ऐसे उम्मीदवार भी हैं जिनकी तैयारी मुख्य रूप से किताब, notebook और offline test series पर आधारित है।

इसलिए अगर NEET 2027 CBT में होती है तो mock-test infrastructure को व्यापक बनाना जरूरी होगा। परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को वास्तविक interface से मिलते-जुलते official practice tests उपलब्ध कराना उपयोगी होगा। इससे पहली बार computer पर परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों का तनाव कम हो सकता है।

परीक्षा केंद्रों की गुणवत्ता में समानता भी बड़ी चुनौती होगी। एक उम्मीदवार को आधुनिक air-conditioned computer lab और दूसरे को खराब keyboard या धीमे system वाला centre मिलना निष्पक्ष व्यवस्था के लिए समस्या बन सकता है। इसलिए technical standards, audit और grievance mechanism स्पष्ट होना चाहिए।

कंप्यूटर खराब होने की स्थिति में क्या होगा, परीक्षा के बीच बिजली चली जाए तो timer कैसे manage होगा, candidate response कितनी जल्दी save होगा और server disruption की स्थिति में क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी—ये सभी प्रश्न छात्रों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

CBT आधारित दूसरी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं के अनुभव से NEET के लिए lessons लिए जा सकते हैं। लेकिन NEET की scale और medical admission में इसकी निर्णायक भूमिका इसे अलग बनाती है। इसलिए नई व्यवस्था का implementation बहुत सावधानी से करना होगा।

NEET परीक्षा में multiple days की व्यवस्था छात्रों के लिए कुछ फायदे भी ला सकती है। एक ही दिन देशभर में विशाल संख्या में centres manage करने के बजाय resources को कई दिनों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे अच्छे computer centres की उपलब्धता बढ़ सकती है और monitoring बेहतर तरीके से की जा सकती है।

इसके बावजूद अलग-अलग shifts की comparability पर छात्रों का भरोसा बनाना जरूरी होगा। अगर normalization अपनाया जाता है तो उसकी methodology पारदर्शी होनी चाहिए। उम्मीदवारों को यह समझ आना चाहिए कि raw marks और final score में कोई बदलाव कैसे और क्यों किया गया।

2027 में परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपनी academic preparation जारी रखें। CBT को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन digital mock practice को धीरे-धीरे तैयारी का हिस्सा बनाया जा सकता है। Official notification आने से पहले syllabus या marking scheme में किसी बदलाव की अफवाह पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

CBT मोड से परीक्षा के विषयों की तैयारी का आधार नहीं बदलता। Physics में numerical problem solving, Chemistry में concepts और reactions की समझ तथा Biology में NCERT-based detailed study अभी भी तैयारी के केंद्र में रहेगी, जब तक आधिकारिक syllabus या pattern में कोई बदलाव घोषित नहीं होता।

2027 के बदलावों का प्रभाव coaching industry पर भी पड़ सकता है। Offline OMR tests की जगह computer-based test series की मांग बढ़ सकती है। Coaching centres को भी computer labs और online mock infrastructure बढ़ाना पड़ सकता है।

इसके साथ ही students के लिए एक सकारात्मक पहलू यह हो सकता है कि वे अपनी test-taking analytics को बेहतर तरीके से समझ सकें। Digital mock tests के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि किस section में कितना समय लगा, कितने questions छोड़े गए और किस तरह की गलतियां बार-बार हो रही हैं।

हालांकि वास्तविक NEET 2027 परीक्षा में कौन-सी सुविधाएं होंगी, यह अभी आधिकारिक detailed bulletin के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए candidates को संभावित बदलाव और confirmed rule के बीच अंतर समझना चाहिए।

ताजा रिपोर्टों का सबसे बड़ा संकेत यही है कि सरकार 2026 के पेपर लीक विवाद के बाद पुरानी परीक्षा व्यवस्था में केवल छोटे सुधार नहीं, बल्कि बड़े structural changes पर विचार कर रही है। CBT mode, multi-day exam, करीब 1,000 centres और NTA restructuring इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा बताए जा रहे हैं।

NEET 2027 के उम्मीदवारों के लिए आने वाले महीने महत्वपूर्ण होंगे। परीक्षा की आधिकारिक तारीख, registration schedule, city allocation policy, shift system और detailed CBT instructions जारी होने पर ही पूरी तस्वीर साफ होगी।

अगर 5-6 दिन वाली व्यवस्था लागू होती है तो यह NEET के इतिहास के सबसे बड़े operational changes में से एक होगा। एक दिन में OMR आधारित परीक्षा से multi-day digital examination की ओर बदलाव लाखों छात्रों, परीक्षा एजेंसी, schools, universities और technology infrastructure सभी के लिए बड़ी परीक्षा होगी।

इस बदलाव की सफलता केवल paper leak रोकने से नहीं मापी जाएगी। यह भी देखना होगा कि परीक्षा ग्रामीण और शहरी छात्रों के लिए समान रूप से accessible है या नहीं, technical failures का समाधान कितना प्रभावी है और अलग-अलग shifts के बीच fairness कैसे सुनिश्चित की जाती है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि NEET-UG 2027 को लेकर परीक्षा व्यवस्था बड़े बदलाव की दिशा में बढ़ रही है। NTA ने सुप्रीम कोर्ट में CBT के लिए अपनी तैयारी बताई थी और अब रिपोर्टों में 5-6 दिनों में करीब 1,000 centres पर परीक्षा कराने की योजना सामने आई है।

छात्रों के लिए सही रणनीति यही होगी कि वे Biology, Physics और Chemistry की मजबूत तैयारी के साथ धीरे-धीरे CBT mock tests की practice शुरू करें। Official notification आने के बाद अपनी रणनीति को final pattern के अनुसार अपडेट करें।

NEET जैसी बड़ी परीक्षा में बदलाव का उद्देश्य केवल technology बदलना नहीं होना चाहिए। असली लक्ष्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाना है जिस पर छात्र, अभिभावक और संस्थान भरोसा कर सकें। 2026 के विवाद के बाद 2027 की परीक्षा इसी भरोसे को दोबारा मजबूत करने की एक बड़ी परीक्षा होगी।


NEET री-एग्जाम तक लॉकडाउन में रहेंगे प्रश्नपत्र तैयार करने वाले एक्सपर्ट्स, मोबाइल और मुलाकात पर रोक

http://NEET 2027 CBT Exam, NEET Computer Based Test Centre

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