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न ईंधन महंगा होगा, न लॉकडाउन: पेट्रोल-डीजल पर सरकार का बड़ा फैसला

दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे हालात, ग्लोबल ऑयल मार्केट को लगातार प्रभावित कर रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे समय में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए आम जनता को राहत देने की कोशिश की है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि न तो ईंधन की कीमतों में बड़ा उछाल आने दिया जाएगा और न ही किसी तरह का लॉकडाउन लगाया जाएगा।

हाल ही में लिए गए फैसलों के तहत पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली विशेष एक्साइज ड्यूटी में कटौती की गई है। यह कटौती लगभग ₹10 प्रति लीटर तक की गई है, जिसका सीधा असर यह होगा कि ईंधन की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी थीं और इससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा था।

सरकार का मानना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालती है। परिवहन लागत बढ़ने से हर चीज महंगी हो जाती है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए एक्साइज ड्यूटी घटाकर कीमतों को नियंत्रण में रखने की कोशिश की गई है। इससे न सिर्फ पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहेंगे, बल्कि महंगाई पर भी काबू पाया जा सकेगा।

इसके साथ ही सरकार ने डीजल के निर्यात और एटीएफ (एविएशन टरबाइन फ्यूल) पर विंडफॉल टैक्स लगाने का भी फैसला लिया है। डीजल निर्यात पर ₹21.5 प्रति लीटर और एटीएफ पर ₹29.5 प्रति लीटर का टैक्स लगाया गया है। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के अंदर ईंधन की कमी न हो और घरेलू बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनी रहे।

सरकार के इन फैसलों के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85-88% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। लेकिन एक्साइज ड्यूटी में कटौती और निर्यात पर टैक्स लगाने जैसे कदमों से सरकार ने संतुलन बनाने की कोशिश की है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने से सरकार को सालाना लगभग ₹1.75 लाख करोड़ का नुकसान होगा। हालांकि, सरकार का मानना है कि यह नुकसान आम जनता को राहत देने और अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए जरूरी है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता से उद्योगों और व्यापार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में किसी तरह का लॉकडाउन लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाया था, इसलिए अब सरकार ऐसे किसी कदम से बचना चाहती है। वित्त मंत्री ने राज्यसभा में स्पष्ट कहा कि सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन लॉकडाउन जैसी स्थिति नहीं बनने दी जाएगी।

प्रधानमंत्री ने भी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है। उन्होंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की और निर्देश दिए कि जरूरी कदम समय पर उठाए जाएं। सरकार का फोकस इस बात पर है कि देश में ऊर्जा की उपलब्धता बनी रहे और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

कमर्शियल एलपीजी को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इसकी आपूर्ति बढ़ाकर 70% तक कर दी गई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी। पहले यह आपूर्ति करीब 50% थी, जिसे अब बढ़ाकर अधिक किया गया है। इससे बाजार में गैस की कमी नहीं होगी और कीमतों पर भी नियंत्रण रहेगा।

इसके अलावा सरकार ने घरेलू स्तर पर भी कई उपाय किए हैं। जैसे कि वैकल्पिक स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाना, नई सप्लाई चेन विकसित करना और रणनीतिक भंडारण को मजबूत करना। भारत अब सिर्फ पारंपरिक सप्लायर देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों से भी तेल खरीद रहा है।

ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता के बावजूद भारत ने अपने स्तर पर स्थिति को संभालने की कोशिश की है। शेयर बाजार और रुपये पर भी इसका असर देखा गया है, लेकिन सरकार के कदमों से निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे ही संतुलित फैसले लिए जाते रहे, तो भारत इस चुनौती से आसानी से निकल सकता है।

आम जनता के लिए यह राहत की खबर है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल नहीं आएगा। इससे दैनिक जीवन पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव कम होगा। ट्रांसपोर्ट, खेती, उद्योग और घरेलू खर्च—हर क्षेत्र में इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात कब बदल जाएं, यह कहना मुश्किल है। इसलिए सरकार को लगातार सतर्क रहना होगा और समय-समय पर नीतियों में बदलाव करना होगा। लेकिन फिलहाल के लिए सरकार के ये फैसले राहत देने वाले हैं।

अगर व्यापक नजरिए से देखा जाए तो यह सिर्फ ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने का मामला नहीं है, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने की रणनीति है। सरकार ने एक तरफ जहां राजस्व में नुकसान उठाने का फैसला किया है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता और उद्योगों को राहत देने की कोशिश की है।

इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि सरकार आने वाले समय में भी ऐसे कदम उठाती रहेगी, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी होती रहें और आर्थिक संतुलन बना रहे। आम लोगों के लिए फिलहाल यही सबसे बड़ी राहत है कि न तो ईंधन महंगा होगा और न ही लॉकडाउन जैसी स्थिति पैदा होगी।

सरकार का बड़ा बयान: देश में लॉकडाउन नहीं लगेगा, LPG प्रोडक्शन 40% बढ़ा

http://petrol-diesel-price-india-no-increase-no-lockdown

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