Advertisement

पैरास्पीक डिवाइस: एआई से दिव्यांगों की आवाज़ होगी साफ, एआई समिट में छात्र का कमाल

नई दिल्ली में आयोजित एआई समिट के तीसरे दिन एक ऐसा इनोवेशन सामने आया, जिसने न केवल तकनीकी विशेषज्ञों बल्कि आम लोगों का भी ध्यान खींचा। गुरुग्राम के 17 वर्षीय छात्र प्रणेत ने ‘पैरास्पीक’ नामक एक एआई आधारित डिवाइस पेश किया है, जो बोलने में कठिनाई झेल रहे दिव्यांग व्यक्तियों की अस्पष्ट आवाज़ को साफ और समझने योग्य शब्दों में बदल देता है।

यह तकनीक विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जा रही है, जिन्हें भाषण संबंधी विकार (स्पीच डिसऑर्डर), लकवा या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के कारण साफ बोलने में परेशानी होती है। पैरास्पीक रियल-टाइम में आवाज़ को प्रोसेस कर स्पष्ट टेक्स्ट और ऑडियो आउटपुट में बदलता है, जिससे सामने वाला व्यक्ति आसानी से समझ सके।

कैसे काम करता है ‘पैरास्पीक’?

पैरास्पीक एक पहनने योग्य (Wearable) डिवाइस है, जिसे गले या कॉलर के पास लगाया जाता है। यह डिवाइस उपयोगकर्ता की आवाज़ के कंपन (vibration) और ध्वनि संकेतों को कैप्चर करता है। इसके बाद एआई एल्गोरिद्म इन संकेतों का विश्लेषण कर उन्हें साफ शब्दों में परिवर्तित कर देता है।

इसमें मशीन लर्निंग मॉडल का उपयोग किया गया है, जिसे अलग-अलग उच्चारण पैटर्न पर प्रशिक्षित किया गया है। यही वजह है कि यह डिवाइस विभिन्न भाषाई विविधताओं और अलग-अलग बोलने के अंदाज़ को पहचानकर सटीक आउटपुट देने में सक्षम है।

डिवाइस का एक मोबाइल ऐप से भी कनेक्शन है, जिससे परिवार या देखभाल करने वाले लोग संवाद को टेक्स्ट रूप में देख सकते हैं।

दिव्यांगों के लिए क्यों है यह गेम चेंजर?

भारत में लाखों लोग स्पीच डिसऑर्डर से प्रभावित हैं। ऐसे लोगों के लिए रोजमर्रा की बातचीत भी चुनौती बन जाती है। पैरास्पीक जैसी तकनीक उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अब तक स्पीच थेरेपी और सहायक उपकरणों के माध्यम से ही समाधान तलाशे जाते थे, लेकिन रियल-टाइम एआई ट्रांसलेशन के जरिए संवाद को आसान बनाना एक नई पहल है। इससे शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन में भागीदारी बढ़ सकती है।

एआई समिट में युवाओं की चमक

एआई समिट में केवल पैरास्पीक ही नहीं, बल्कि कई अन्य इनोवेशन भी चर्चा में रहे। युवाओं ने एआई आधारित फायर सेंसर, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, कृषि के लिए ड्रोन टेक्नोलॉजी और कैंसर स्क्रीनिंग प्लेटफॉर्म जैसे प्रोजेक्ट पेश किए।

इन सभी प्रोजेक्ट्स का मकसद समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान निकालना है। विशेष रूप से स्वास्थ्य और दिव्यांग सहायता से जुड़े प्रोजेक्ट्स को काफी सराहना मिली।

तकनीक और संवेदनशीलता का संगम

पैरास्पीक केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) की दिशा में एक कदम है। अक्सर दिव्यांग लोग संवाद की कमी के कारण अलग-थलग महसूस करते हैं। यह डिवाइस उन्हें आत्मविश्वास और सम्मान के साथ संवाद करने का अवसर देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी तकनीकों को सरकारी और निजी संस्थानों में प्रोत्साहन मिले, तो लाखों लोगों का जीवन स्तर सुधर सकता है।

भविष्य की संभावनाएँ

प्रणेत का लक्ष्य इस डिवाइस को और अधिक सटीक और सस्ता बनाना है, ताकि यह आम लोगों की पहुंच में आ सके। भविष्य में इसमें मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट, इमोशन डिटेक्शन और क्लाउड-बेस्ड डेटा एनालिटिक्स जैसी सुविधाएं जोड़ी जा सकती हैं।

यदि बड़े स्तर पर उत्पादन और निवेश मिलता है, तो पैरास्पीक वैश्विक बाजार में भी अपनी पहचान बना सकता है।

सरकार और उद्योग की भूमिका

एआई आधारित इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और उद्योग जगत की भागीदारी महत्वपूर्ण है। स्टार्टअप्स को फंडिंग, मेंटरशिप और रिसर्च सपोर्ट देने से ऐसे प्रोजेक्ट्स तेजी से विकसित हो सकते हैं।

एआई समिट में कई निवेशकों ने ऐसे सामाजिक प्रभाव वाले स्टार्टअप्स में रुचि दिखाई है। इससे उम्मीद है कि पैरास्पीक जैसे प्रोजेक्ट्स को जल्द ही व्यावसायिक रूप मिलेगा।

प्रणेत का ‘पैरास्पीक’ केवल एक डिवाइस नहीं, बल्कि एक उम्मीद है—उन लोगों के लिए जो अपनी बात साफ तौर पर नहीं कह पाते। एआई की मदद से संवाद की इस बाधा को दूर करना तकनीक की मानवीय दिशा को दर्शाता है।

एआई समिट में युवाओं के इनोवेशन ने यह साबित कर दिया है कि भारत में प्रतिभा और तकनीक का संगम समाज को नई दिशा दे सकता है। यदि ऐसे प्रयासों को निरंतर समर्थन मिला, तो आने वाले समय में एआई न केवल उद्योग बल्कि मानव जीवन को भी अधिक सशक्त बनाएगा।

http://paraspeak-ai-device-for-disabled-speech-india

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *