बॉलीवुड अभिनेता Ranbir Kapoor की आने वाली फिल्म ‘रामायण’ 2026 की सबसे चर्चित भारतीय फिल्मों में शामिल है। फिल्म में रणबीर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि Yash रावण के किरदार में दिखाई देंगे। भगवान राम जैसे पूजनीय चरित्र के लिए रणबीर की कास्टिंग घोषित होने के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें समर्थन के साथ आलोचना और ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। अब रणबीर ने पहली बार इस बहस पर विस्तार से अपनी बात रखी है।
सैन डिएगो कॉमिक-कॉन 2026 में फिल्म की टीम के साथ पहुंचे रणबीर ने कहा कि भगवान राम को निभाने का अवसर मिलने पर उनके मन में शुरुआत में खुद भी सवाल था कि क्या वह इस भूमिका के योग्य हैं। हालांकि बाद में उन्होंने किरदार को निभाने के लिए अपनी नीयत, विश्वास और तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया। रणबीर के मुताबिक भगवान राम को लेकर हर व्यक्ति की अपनी कल्पना और धारणा हो सकती है, इसलिए किसी एक अभिनेता के चेहरे को इस चरित्र का अंतिम रूप नहीं माना जा सकता।
उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर ‘रामायण’ और इसकी स्टारकास्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
फिल्म को लेकर सबसे ज्यादा बहस रणबीर कपूर की कास्टिंग पर ही रही है। रणबीर पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाते दिखाई दिए हैं। खासकर ‘एनिमल’ में उनके हिंसक और ग्रे-शेड वाले किरदार के बाद कुछ दर्शकों ने सवाल उठाया था कि वही अभिनेता भगवान राम की शांत और मर्यादित छवि को पर्दे पर कैसे पेश करेंगे। ऑनलाइन चर्चाओं में यह सवाल लंबे समय से दिखाई देता रहा है।
रणबीर का मानना है कि किसी अभिनेता की पिछली फिल्में उसके अगले किरदार को परिभाषित नहीं करतीं। अभिनय का काम ही अलग-अलग व्यक्तित्वों और परिस्थितियों को पर्दे पर विश्वसनीय तरीके से पेश करना है।
भगवान राम का किरदार निभाने की चुनौती हालांकि किसी सामान्य फिल्मी चरित्र जैसी नहीं है।
रामायण करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ी है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में रामायण की कथा पीढ़ियों से पढ़ी, सुनी और मंचित की जाती रही है। ऐसे में जब किसी बड़े बजट की फिल्म में भगवान राम को पर्दे पर दिखाया जाता है, तो दर्शकों की अपेक्षाएं केवल अभिनय या मनोरंजन तक सीमित नहीं रहतीं।
लोग अभिनेता के चेहरे, संवाद बोलने के तरीके, शारीरिक भाषा, पोशाक और यहां तक कि भाव-भंगिमा को भी बेहद बारीकी से देखते हैं।
रणबीर ने इसी जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए कहा कि शुरुआत में उनके मन में भी यह सवाल आया था कि क्या वह भगवान राम का किरदार निभाने के योग्य हैं। बाद में उन्होंने इस भूमिका को अपनी व्यक्तिगत योग्यता की परीक्षा के बजाय सही नीयत और विश्वास के साथ निभाने की जिम्मेदारी के रूप में देखना शुरू किया।
यही बात उनके सह-कलाकार यश ने भी कही।
फिल्म में रावण का किरदार निभा रहे यश ने रणबीर की खुलकर तारीफ की। सैन डिएगो कॉमिक-कॉन के दौरान यश ने कहा कि भगवान राम की भूमिका निभाना आसान नहीं है और रणबीर ने इसके लिए बहुत मेहनत की है।
यश ने रणबीर की performance को “marvellous” बताते हुए कहा कि दर्शक फिल्म में भगवान राम का ऐसा चित्रण देखेंगे जिसमें नीयत और त्याग की भावना दिखाई देगी।
यश ने कास्टिंग को लेकर हो रही आलोचना पर एक और दिलचस्प बात कही।
उनके मुताबिक भगवान राम जैसी महान शख्सियत को निभाने के लिए किसी भी इंसान के पास पूरी तरह वैसी दिव्य विशेषताएं होने का दावा नहीं किया जा सकता। इसलिए महत्वपूर्ण यह है कि कलाकार उस किरदार को किस नीयत, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ निभाता है।
यश का यह बयान रणबीर की कास्टिंग का स्पष्ट समर्थन माना जा रहा है।
दोनों कलाकार पर्दे पर एक-दूसरे के सबसे बड़े विरोधी के रूप में दिखाई देंगे।
एक तरफ रणबीर भगवान राम।
दूसरी तरफ यश रावण।
लेकिन असल जिंदगी में दोनों एक-दूसरे के अभिनय की तारीफ करते दिखाई दे रहे हैं।
रणबीर ने भी यश को रावण के किरदार के लिए सही चुनाव बताया। उन्होंने कहा कि इस भूमिका के लिए ऐसे अभिनेता की जरूरत थी जिसके व्यक्तित्व में खास तरह का aura और stardom हो।
रणबीर के मुताबिक यश ने रावण को अपने swag, aura और ईमानदारी के साथ जीवंत किया है। रणबीर ने खुद को यश के काम का प्रशंसक बताते हुए कहा कि रावण जैसे किरदार के लिए उनकी मौजूदगी जरूरी थी।
इससे फिल्म में राम और रावण के बीच होने वाले टकराव को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।
हालांकि एक दिलचस्प जानकारी यह भी सामने आई है कि फिल्म के बहुप्रतीक्षित राम-रावण face-off की शूटिंग अभी पूरी नहीं हुई थी। रणबीर ने हालिया बातचीत में बताया कि दोनों कलाकारों के बीच मुख्य confrontation sequence की शूटिंग बाकी थी।
इससे पता चलता है कि फिल्म के बड़े हिस्से तैयार होने के बावजूद कुछ महत्वपूर्ण sequences पर काम जारी है।
‘रामायण’ का निर्देशन Nitesh Tiwari कर रहे हैं। नितेश इससे पहले ‘दंगल’ और ‘छिछोरे’ जैसी सफल फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं।
फिल्म में भगवान राम और रावण के अलावा माता सीता की भूमिका Sai Pallavi निभा रही हैं।
वहीं सनी देओल हनुमान के किरदार से जुड़े हैं।
रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में दिखाई देंगे।
इस तरह निर्माताओं ने अलग-अलग भारतीय फिल्म इंडस्ट्री से बड़े कलाकारों को एक साथ लाकर इसे pan-India ही नहीं बल्कि global-scale project बनाने की कोशिश की है।
फिल्म के visuals और VFX भी इसकी चर्चा की बड़ी वजह हैं।
‘रामायण’ जैसी कथा को बड़े पर्दे पर उतारने में केवल actors और sets पर्याप्त नहीं होते। अयोध्या, वनवास, लंका, युद्ध और कथा से जुड़े दिव्य तथा पौराणिक दृश्यों को विश्वसनीय तरीके से पेश करने के लिए बड़े स्तर पर visual effects की जरूरत होती है।
फिल्म के VFX का काम DNEG से जुड़ा है, जो दुनिया की प्रमुख visual-effects कंपनियों में गिनी जाती है।
पहले सामने आए promotional material में भी निर्माताओं ने फिल्म को IMAX और DNEG के साथ प्रमुखता से पेश किया है।
इसके अलावा फिल्म के संगीत को लेकर भी काफी उत्सुकता है।
प्रोजेक्ट से भारतीय संगीतकार A. R. Rahman और हॉलीवुड के प्रसिद्ध composer Hans Zimmer जुड़े हुए हैं।
दो अलग-अलग cinematic traditions से आने वाले इतने बड़े composers का एक भारतीय पौराणिक फिल्म के लिए साथ आना अपने आप में चर्चा का विषय बना हुआ है।
लेकिन तकनीक और स्टारकास्ट के बावजूद फिल्म के सामने सबसे बड़ी चुनौती कहानी के प्रति संवेदनशीलता ही रहेगी।
रामायण पर भारत में पहले भी कई फिल्में और टीवी सीरियल बन चुके हैं।
दर्शकों के एक बड़े वर्ग के मन में रामानंद सागर की ‘रामायण’ के भगवान राम की छवि आज भी गहराई से मौजूद है। इसलिए किसी नए अभिनेता के लिए उस किरदार को अपनाना आसान नहीं होता।
नई फिल्म को पुरानी प्रस्तुतियों की नकल भी नहीं बनना है और इतनी अलग भी नहीं होना है कि दर्शकों को मूल कथा की भावना खोती हुई लगे।
यही संतुलन रणबीर कपूर के अभिनय के सामने सबसे बड़ी परीक्षा हो सकता है।
सोशल मीडिया पर उनकी कास्टिंग के खिलाफ उठी आपत्तियों में उनकी पिछली फिल्मों का बार-बार जिक्र हुआ है। खास तौर पर ‘एनिमल’ के बाद कुछ लोगों का कहना था कि उस तरह का किरदार निभाने वाले अभिनेता को भगवान राम के रूप में स्वीकार करना मुश्किल होगा।
लेकिन अभिनय के लिहाज से देखें तो किसी अभिनेता का पिछला किरदार उसके अगले किरदार के लिए योग्यता या अयोग्यता तय नहीं करता।
एक ही अभिनेता खलनायक, रोमांटिक हीरो, ऐतिहासिक व्यक्ति और धार्मिक चरित्र—सभी निभा सकता है।
अंतिम फैसला इस बात पर होता है कि पर्दे पर उसका प्रदर्शन कितना विश्वसनीय है।
रणबीर के सामने भी यही स्थिति है।
फिल्म रिलीज होने से पहले उनकी कास्टिंग को लेकर राय बन सकती है, लेकिन उनके भगवान राम के चित्रण का वास्तविक मूल्यांकन पूरी फिल्म देखने के बाद ही संभव होगा।
यश ने भी इसी संदर्भ में दर्शकों से फिल्म देखने के बाद निर्णय करने का संकेत दिया है।
उनके अनुसार रणबीर ने भूमिका के लिए बहुत मेहनत और त्याग किया है।
यह ‘त्याग’ केवल अभिनय से जुड़ा शब्द नहीं माना जा रहा।
फिल्म के लिए रणबीर की physical preparation, lifestyle और look को लेकर पिछले काफी समय से रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर उनसे जुड़ी कई अपुष्ट बातें भी वायरल हुई हैं, इसलिए केवल आधिकारिक या विश्वसनीय रूप से पुष्टि की गई जानकारी को ही तथ्य माना जाना चाहिए।
फिल्म के निर्माताओं की कोशिश भी यही दिखाई देती है कि promotional campaign को केवल बड़े स्टार्स तक सीमित न रखा जाए।
सैन डिएगो कॉमिक-कॉन में ‘रामायण’ को पेश करना इसी global strategy का हिस्सा है।
Comic-Con दुनिया के सबसे चर्चित pop-culture events में शामिल है और यहां बड़े Hollywood franchises, fantasy projects और entertainment properties अपनी झलक पेश करते हैं।
ऐसे मंच पर भारतीय रामायण की कहानी को पेश करना निर्माताओं के global ambitions दिखाता है।
फिल्म की कहानी भले भारत की सबसे प्रसिद्ध कथाओं में से एक हो, लेकिन makers इसे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक भी पहुंचाना चाहते हैं।
इसके लिए presentation महत्वपूर्ण होगी।
दुनिया के ऐसे दर्शक जिन्होंने रामायण की कहानी पहले कभी नहीं पढ़ी, उनके लिए फिल्म को characters और उनकी motivations खुद समझानी होंगी।
भगवान राम केवल protagonist नहीं हैं।
उनके चरित्र के साथ कर्तव्य, मर्यादा, त्याग और धर्म जैसे विचार जुड़े हैं।
रावण भी केवल एक सामान्य cinematic villain नहीं है। कथा में वह विद्वान और शक्तिशाली राजा है, लेकिन उसका अहंकार और उसके कर्म उसके पतन की वजह बनते हैं।
यही कारण है कि Yash की casting भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
KGF फिल्मों के बाद Yash की पहचान एक बड़े screen-presence वाले actor के रूप में बनी है।
रावण को ऐसे अभिनेता की जरूरत थी जो राम के सामने खड़ा होने पर cinematic level पर समान रूप से प्रभावशाली दिखाई दे।
रणबीर ने खुद कहा कि इस भूमिका के लिए Yash के aura और stardom की जरूरत थी।
इस तरह फिल्म का मुख्य conflict केवल अच्छाई और बुराई के दो सपाट किरदारों के बीच नहीं बल्कि दो बेहद प्रभावशाली personalities के बीच दिखाने की कोशिश हो सकती है।
निर्देशक नितेश तिवारी ने फिल्म को दो भागों में बनाने का फैसला किया है।
उनके मुताबिक रामायण जैसी विशाल कथा को एक फिल्म में समेटने के बजाय दो हिस्सों में बताने से characters और emotions को ज्यादा जगह दी जा सकती है। उन्होंने संकेत दिया है कि पहला भाग एक बड़े cliffhanger पर समाप्त होगा।
Ramayana: Part One को दिवाली 2026 के दौरान सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना है।
दूसरा भाग दिवाली 2027 के लिए निर्धारित है।
यानी निर्माताओं ने कहानी को एक साल के अंतर पर दो बड़े cinematic events की तरह पेश करने की योजना बनाई है।
पहले भाग की सफलता दूसरे भाग के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होगी।
अगर दर्शकों को रणबीर का राम, साई पल्लवी की सीता और यश का रावण पसंद आता है तो दूसरे भाग के लिए anticipation कई गुना बढ़ सकती है।
लेकिन अगर characters के presentation को लेकर विवाद पैदा होता है तो makers के लिए चुनौती भी बढ़ सकती है।
इसका उदाहरण भारतीय सिनेमा पहले देख चुका है।
रामायण पर आधारित पिछली कुछ बड़े बजट की प्रस्तुतियों में visual presentation और character design को लेकर काफी विवाद हुआ था। ऐसे में नई ‘रामायण’ के makers पर दर्शकों की अपेक्षाओं का अतिरिक्त दबाव है।
इस बार दर्शक केवल बड़े VFX से प्रभावित नहीं होंगे।
उन्हें authenticity चाहिए।
Characters में भावनात्मक गहराई चाहिए।
संवादों में गरिमा चाहिए।
और सबसे महत्वपूर्ण, वे चाहते हैं कि कथा के धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व का सम्मान किया जाए।
यश ने Comic-Con में इसी ‘intent’ को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक सही नीयत और सही टीम होने पर बाकी चीजें अपनी जगह आ सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि technical स्तर पर makeup से लेकर looks तक कई चुनौतियां थीं, लेकिन टीम ने कहानी को authentic तरीके से पेश करने के लिए पूरी कोशिश की।
रणबीर के बयान में भी यही विचार दिखाई देता है।
जब उनसे पूछा गया कि उनकी कास्टिंग को लेकर हो रही आलोचना को वह किस तरह देखते हैं, तो उन्होंने विरोध करने वालों को गलत बताने के बजाय यह स्वीकार किया कि भगवान राम को लेकर हर व्यक्ति की अपनी धारणा हो सकती है।
यह इस विषय पर अपेक्षाकृत संतुलित प्रतिक्रिया है।
क्योंकि भगवान राम की छवि किसी फिल्म निर्माता या अभिनेता द्वारा बनाई गई नहीं है।
कई शताब्दियों से अलग-अलग भाषाओं, ग्रंथों, चित्रों, लोककथाओं, नाटकों, रामलीलाओं, टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में उन्हें अलग-अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
इसलिए दर्शकों के मन में पहले से मौजूद छवि को कोई एक अभिनेता पूरी तरह बदल नहीं सकता।
रणबीर की चुनौती उस छवि की नकल करने की बजाय अपने अभिनय में चरित्र के मूल गुणों को विश्वसनीय बनाना होगी।
उनके लिए एक और चुनौती उनके अपने star persona से बाहर निकलना है।
अगर दर्शक पर्दे पर भगवान राम के बजाय ‘Ranbir Kapoor’ को ही देखते रहें तो character का प्रभाव कमजोर हो सकता है।
इसके लिए body language, आवाज, संवाद, expressions और costume सभी को एक साथ काम करना होगा।
यही कारण है कि casting पर उठे सवालों का सबसे मजबूत जवाब interview नहीं बल्कि फिल्म ही दे सकती है।
Yash की तारीफ रणबीर के लिए निश्चित रूप से सकारात्मक समर्थन है, लेकिन अंतिम फैसला दर्शकों के हाथ में होगा।
फिल्म का पहला विस्तृत promotional material सामने आने के बाद रणबीर के look को लेकर प्रतिक्रियाएं पहले की तुलना में काफी मिश्रित से सकारात्मक होती दिखाई दी हैं। ऑनलाइन fan communities में उनके भगवान राम के look की तारीफ करने वाली प्रतिक्रियाएं भी बड़ी संख्या में सामने आई हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि casting debate खत्म हो गई है।
लेकिन अब चर्चा केवल “रणबीर को क्यों लिया?” से आगे बढ़कर “रणबीर इस किरदार को कैसे निभाएंगे?” पर पहुंचती दिखाई दे रही है।
यही फिल्म के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है।
अब दर्शकों को वास्तविक performance का इंतजार है।
इसी तरह Yash के रावण को लेकर भी उत्सुकता बढ़ रही है।
KGF में उनकी भारी आवाज, लंबी स्क्रीन presence और larger-than-life personality ने उन्हें pan-India star बनाया था।
रावण के किरदार में वही intensity किस रूप में दिखाई देती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
रणबीर और Yash ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे की तारीफ करके यह भी संकेत दिया है कि फिल्म में दोनों characters को मजबूत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश हुई है।
राम को महान दिखाने के लिए रावण को कमजोर करना कहानी के cinematic conflict को कमजोर कर सकता है।
इसी तरह रावण के spectacle पर इतना जोर देना कि राम की शांति और मर्यादा फीकी लगे, वह भी समस्या हो सकती है।
इसलिए दोनों performances का संतुलन फिल्म के लिए महत्वपूर्ण होगा।
‘रामायण’ की टीम के सामने शायद यही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है—एक ऐसी कथा को आधुनिक cinema के scale पर पेश करना जिसे दर्शक पहले से जानते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें सिनेमाघर में नया अनुभव देना।
रणबीर कपूर की casting को लेकर हुई trolling इस चुनौती का शुरुआती संकेत है।
उनका जवाब भी इसी जिम्मेदारी को स्वीकार करता दिखाई देता है।
शुरुआत में उनके मन में खुद सवाल था—क्या वह इसके योग्य हैं?
अब उन्होंने भूमिका निभा ली है और फिल्म रिलीज की तरफ बढ़ रही है।
Yash उनके समर्थन में खड़े हैं और कह रहे हैं कि रणबीर ने भगवान राम के किरदार के लिए जबरदस्त मेहनत की है।
दूसरी तरफ रणबीर रावण के रूप में Yash के aura और performance की तारीफ कर रहे हैं।
इसलिए आने वाले महीनों में ‘रामायण’ की चर्चा केवल उसके विशाल बजट या VFX तक सीमित नहीं रहने वाली।
सबसे बड़ा सवाल वही होगा जो शुरुआत से पूछा जा रहा है—
क्या दर्शक रणबीर कपूर को भगवान राम के रूप में स्वीकार करेंगे?
इसका जवाब न सोशल मीडिया ट्रोलिंग दे सकती है, न interviews और न promotional posters।
इसका जवाब सिनेमाघरों में फिल्म देखने वाले दर्शक देंगे।
फिलहाल इतना साफ है कि रणबीर खुद इस किरदार की जिम्मेदारी को समझते हैं और उनके साथ रावण की भूमिका निभा रहे Yash ने उनके portrayal का मजबूती से समर्थन किया है।
दिवाली 2026 में जब ‘Ramayana: Part One’ सिनेमाघरों में पहुंचेगी, तब पता चलेगा कि नितेश तिवारी और उनकी टीम भारत की सबसे प्रसिद्ध कथाओं में से एक को बड़े पर्दे पर किस तरह जीवंत करती है।
Imtiaz Ali on Rockstar Sequel: ‘रॉकस्टार 2’ नहीं बनाएंगे, नई फिल्म में दिखेगा अधूरा प्यार
http://Ranbir Kapoor as Lord Ram and Yash as Ravana in Nitesh Tiwari Ramayana 2026
