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12 साल में रोबोट, 16 में AI कंपनी के बॉस: पिता को ₹2 लाख सैलरी, लाखों को ट्रेनिंग

आमतौर पर 16 साल की उम्र में बच्चे 11वीं या 12वीं कक्षा की पढ़ाई, बोर्ड परीक्षा और अपने भविष्य के करियर को लेकर सोच रहे होते हैं। लेकिन केरल के राउल जॉन अजू की कहानी इस सामान्य तस्वीर से बिल्कुल अलग है। महज 16 साल की उम्र में वह 12वीं कक्षा में पढ़ाई करने के साथ-साथ AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा अपना स्टार्टअप चला रहे हैं। उनकी पहचान एक ऐसे युवा टेक इनोवेटर के रूप में बनी है, जिसने कम उम्र में ही AI को सिर्फ इस्तेमाल करने के बजाय उसके जरिए अलग-अलग प्रोडक्ट और समाधान बनाने की कोशिश शुरू कर दी थी।

राउल की कहानी का सबसे ज्यादा चर्चा में आने वाला हिस्सा यह है कि उन्होंने अपनी कंपनी में अपने पिता को भी नियुक्त किया है और रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें हर महीने करीब 2 लाख रुपये वेतन देते हैं। यह बात पहली नजर में काफी असामान्य लग सकती है कि एक 16 साल का छात्र अपने पिता को सैलरी दे रहा है, लेकिन राउल के मुताबिक इसके पीछे सिर्फ पारिवारिक रिश्ता नहीं बल्कि अनुभव और सीखने की वजह भी है। उनके पिता अजू जोसेफ को Amazon, Adobe, Wipro और IBM जैसी बड़ी कंपनियों में काम करने का अनुभव रहा है। राउल के लिए यह अनुभव किसी किताब या ऑनलाइन वीडियो से तुरंत हासिल करना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने अपने पिता के अनुभव को अपनी कंपनी के लिए इस्तेमाल करने का फैसला किया।

राउल जॉन अजू के सफर की शुरुआत AI कंपनी से नहीं, बल्कि वीडियो एडिटिंग और टेक्नोलॉजी के प्रति उनकी जिज्ञासा से हुई। रिपोर्टों के अनुसार, जब उनके पिता Adobe में काम करने लगे, तब राउल को कंपनी के प्रीमियम क्रिएटिव टूल्स इस्तेमाल करने का मौका मिला। यहीं से उन्होंने टेक्नोलॉजी को सिर्फ मनोरंजन या सामान्य इस्तेमाल की चीज के तौर पर देखने के बजाय यह समझने की कोशिश शुरू की कि इसके पीछे काम कैसे होता है और इससे नया क्या बनाया जा सकता है।

बताया जाता है कि राउल ने करीब 9 साल की उम्र में खुद से AI के बारे में सीखना शुरू किया। उस समय उनकी उम्र इतनी कम थी कि ज्यादातर बच्चों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक बहुत जटिल तकनीकी विषय होता। लेकिन राउल ने धीरे-धीरे इसके बारे में पढ़ना, प्रयोग करना और अलग-अलग डिजिटल टूल्स को समझना शुरू किया। उनके लिए सीखने का तरीका केवल किताबों तक सीमित नहीं रहा। वह प्रयोग करके यह देखने लगे कि किसी तकनीक का वास्तविक दुनिया में इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है।

इसके करीब तीन साल बाद उनकी यह जिज्ञासा एक वास्तविक प्रोजेक्ट में बदल गई। 12 साल की उम्र में राउल ने स्कूल के साइंस प्रोजेक्ट के लिए MeBot नाम का रोबोट बनाया। यही वह प्रोजेक्ट था जिसने उनके टेक्नोलॉजी सफर को एक अलग दिशा दी। रोबोट बनाना केवल एक स्कूल प्रोजेक्ट पूरा करना नहीं था, बल्कि इससे यह भी दिखाई दिया कि राउल तकनीक को केवल इस्तेमाल करने की बजाय खुद कुछ बनाने में रुचि रखते हैं।

MeBot के बाद उनका प्रयोग रुका नहीं। समय के साथ उन्होंने कई AI आधारित टूल्स और प्रोजेक्ट्स पर काम किया। अलग-अलग रिपोर्टों में राउल से जुड़े 15 से अधिक AI प्रोडक्ट्स का उल्लेख किया गया है। इनमें MeBot के अलावा RESQ AI, ZapGap, Investo AI और FeedFye जैसे नाम शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स की खास बात यह बताई जाती है कि राउल का फोकस केवल यह दिखाना नहीं था कि वह AI बना सकते हैं, बल्कि वह तकनीक को किसी वास्तविक समस्या के समाधान के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करते रहे।

यही सोच आगे चलकर उनके स्टार्टअप की नींव बनी। राउल ने AIRealm Technologies नाम की कंपनी के जरिए अपने अलग-अलग AI प्रोजेक्ट्स को एक ब्रांड के तहत लाने की कोशिश की। उनकी कंपनी की वेबसाइट के अनुसार राउल इसके Founder और CEO हैं, जबकि उनके पिता अजू जोसेफ कंपनी में Co-Founder की भूमिका निभाते हैं और ऑपरेशंस, बिजनेस स्ट्रैटेजी तथा पार्टनरशिप से जुड़े काम संभालते हैं।

राउल के लिए कंपनी बनाना केवल कम उम्र में बिजनेस शुरू करने की कहानी नहीं है। इसका एक बड़ा हिस्सा AI शिक्षा से भी जुड़ा है। उनकी पहल ThinkCraft Academy के जरिए छात्रों और अन्य लोगों को AI सीखने और इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग देने की कोशिश की जाती है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि राउल की पहल से करीब 5 लाख शिक्षार्थियों को AI की ट्रेनिंग मिल चुकी है। वहीं ThinkCraft की मौजूदा ऐप लिस्टिंग इससे भी अधिक, 7 लाख से ज्यादा लोगों को सिखाने का दावा करती है। इसलिए अलग-अलग समय के आंकड़ों में अंतर दिखाई दे सकता है, लेकिन यह स्पष्ट है कि उनकी AI शिक्षा पहल का पहुंच स्तर काफी बड़ा हो चुका है।

यहां राउल की कहानी का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है। वह AI को केवल इंजीनियरों या कंप्यूटर साइंस के छात्रों तक सीमित तकनीक के रूप में नहीं देखते। उनकी कोशिश है कि सामान्य छात्र भी AI को समझें और रोजमर्रा की पढ़ाई, काम तथा भविष्य के करियर में उसका इस्तेमाल करना सीखें। इसी उद्देश्य से ThinkCraft को अपेक्षाकृत छोटे-छोटे lessons और practical activities के साथ तैयार किया गया है, ताकि सीखने वाला केवल वीडियो देखकर आगे न बढ़े बल्कि किसी चीज को खुद करके भी समझे।

राउल की उम्र को देखते हुए उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह भी है कि उन्होंने सीखने और सिखाने के बीच की दूरी कम की है। एक तरफ वह खुद 12वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वह AI से जुड़े प्रोजेक्ट्स और ट्रेनिंग पर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि उनकी कहानी सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी से जुड़े प्लेटफॉर्म्स पर चर्चा का विषय बनी है।

पिता को कंपनी में नौकरी देने का फैसला भी इसी कहानी का दिलचस्प हिस्सा है। आमतौर पर युवा स्टार्टअप फाउंडर अपने से ज्यादा उम्र के अनुभवी लोगों से सलाह लेते हैं, लेकिन राउल ने अपने ही पिता के लंबे कॉर्पोरेट अनुभव को कंपनी के अंदर लाने का फैसला किया। रिपोर्टों के अनुसार, उनके पिता को हर महीने 2 लाख रुपये का वेतन दिया जाता है। यह व्यवस्था राउल के लिए एक तरह से अनुभव हासिल करने का जरिया भी है, क्योंकि बिजनेस चलाने, क्लाइंट्स के साथ काम करने, ऑपरेशंस संभालने और कॉर्पोरेट दुनिया को समझने में वर्षों लग सकते हैं।

राउल के पिता के पास Amazon, Adobe, Wipro और IBM जैसी कंपनियों में काम करने का अनुभव बताया जाता है। राउल का मानना है कि ऐसा अनुभव रातोंरात हासिल नहीं किया जा सकता। AI टूल बनाना और कंपनी चलाना दो अलग-अलग चीजें हैं। एक अच्छा तकनीकी प्रोडक्ट बन जाने के बाद भी उसे लोगों तक पहुंचाना, टीम तैयार करना, बिजनेस मॉडल बनाना और ग्राहकों की जरूरत समझना जरूरी होता है। ऐसे में उनके पिता का अनुभव उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

राउल की कहानी को केवल “16 साल का बच्चा कंपनी चला रहा है” के नजरिए से देखना शायद अधूरा होगा। इसके पीछे कई साल की लगातार सीखने की प्रक्रिया दिखाई देती है। उन्होंने 9 साल की उम्र के आसपास AI के बारे में सीखना शुरू किया, 12 साल की उम्र में रोबोट बनाया और इसके बाद अलग-अलग AI प्रोजेक्ट्स पर काम किया। यानी सफलता अचानक नहीं आई बल्कि छोटी उम्र से लगातार प्रयोग और सीखने की प्रक्रिया के बाद यह मुकाम सामने आया।

उनकी कहानी का दूसरा बड़ा पहलू यह है कि उन्होंने टेक्नोलॉजी को समस्या समाधान से जोड़ने की कोशिश की। आज AI के दौर में बहुत से लोग केवल नए AI टूल का इस्तेमाल करना सीख रहे हैं, लेकिन राउल का रास्ता कुछ अलग रहा। उन्होंने खुद यह सोचने की कोशिश की कि AI का उपयोग किसी वास्तविक समस्या के लिए कैसे किया जा सकता है। यही वजह है कि उनके प्रोजेक्ट्स में शिक्षा, जानकारी, सेवाओं और अलग-अलग उपयोगी कार्यों से जुड़े प्रयोग दिखाई देते हैं।

राउल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। 2026 के India AI Impact Summit के दौरान उन्होंने AI और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बात की। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने AI और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े एक UN-organised panel में opening address भी दिया। इसी दौरान उनकी मुलाकात संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres से भी हुई। यह किसी स्कूल छात्र के लिए असाधारण अनुभव माना जा सकता है, खासकर तब जब वह उसी समय अपनी पढ़ाई भी जारी रख रहा हो।

राउल की उपलब्धियों में सरकारों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े AI विचारों पर बातचीत भी शामिल रही है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने Kerala और Dubai की सरकारों के सामने AI को सार्वजनिक सेवाओं में इस्तेमाल करने से जुड़े विचारों पर सलाह दी है। हालांकि ऐसी सलाह को किसी सरकारी नियुक्ति या आधिकारिक सरकारी पद के रूप में नहीं समझना चाहिए। यह उनके AI क्षेत्र में बढ़ते सार्वजनिक और अंतरराष्ट्रीय संपर्क का हिस्सा है।

आज AI की दुनिया तेजी से बदल रही है। ऐसे समय में राउल जैसे युवा यह दिखाते हैं कि टेक्नोलॉजी सीखने की शुरुआत के लिए हमेशा कॉलेज की डिग्री का इंतजार जरूरी नहीं है। इसका मतलब यह नहीं कि औपचारिक शिक्षा महत्वहीन हो गई है। बल्कि राउल की कहानी यह बताती है कि स्कूल की पढ़ाई के साथ अपनी रुचि के क्षेत्र में अतिरिक्त सीखना भी संभव है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा छोड़ी नहीं है। वह 12वीं कक्षा के कॉमर्स छात्र हैं और इसके साथ टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।

उनकी कहानी माता-पिता के लिए भी एक अलग संदेश देती है। बच्चों की रुचि अगर तकनीक, रोबोटिक्स, कोडिंग या AI में है तो उसे केवल परीक्षा और अंक के नजरिए से देखना जरूरी नहीं। सही मार्गदर्शन और सुरक्षित वातावरण मिलने पर बच्चे अपनी रुचि के क्षेत्र में काफी आगे जा सकते हैं। हालांकि हर बच्चे से यह उम्मीद करना भी सही नहीं होगा कि वह 16 साल की उम्र में स्टार्टअप शुरू करे। राउल की कहानी असाधारण है और इसे सामान्य सफलता का पैमाना नहीं बनाना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कम उम्र में उपलब्धि हासिल करने की दौड़ के बजाय सीखने की आदत विकसित करना ज्यादा जरूरी है। AI जैसे क्षेत्र में रोज नई तकनीक, नए मॉडल और नए टूल सामने आ रहे हैं। इसलिए आज जो सीखा गया है वह कुछ महीनों बाद बदल भी सकता है। ऐसे में राउल की कहानी का सबसे उपयोगी सबक यह हो सकता है कि उन्होंने कम उम्र में ही सीखने, प्रयोग करने और चीजें बनाने की आदत विकसित कर ली।

राउल जॉन अजू की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें तीन अलग-अलग चीजें एक साथ दिखाई देती हैं—कम उम्र में टेक्नोलॉजी सीखना, वास्तविक प्रोडक्ट बनाना और उस ज्ञान को दूसरों तक पहुंचाना। 12 साल की उम्र में बनाया गया MeBot उनके शुरुआती सफर का प्रतीक बना, जबकि 16 साल की उम्र में AI स्टार्टअप चलाना उनके अगले चरण को दिखाता है। पिता को कंपनी में शामिल कर 2 लाख रुपये मासिक वेतन देना उनके बिजनेस मॉडल का सबसे चर्चित हिस्सा है, जबकि लाखों लोगों को AI ट्रेनिंग देने का दावा उनकी शिक्षा पहल की पहुंच को दिखाता है।

आज जब AI भारत के छात्रों, कंपनियों और नौकरियों की दुनिया को तेजी से बदल रहा है, राउल जैसे युवा इनोवेटर एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा करते हैं—क्या आने वाली पीढ़ी AI को केवल इस्तेमाल करेगी या खुद इसके नए समाधान बनाएगी? राउल का अब तक का सफर दूसरी दिशा की ओर इशारा करता है। उन्होंने पहले तकनीक सीखी, फिर रोबोट बनाया, उसके बाद AI टूल्स तैयार किए और अब उसी ज्ञान को दूसरे लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

फिलहाल राउल के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी उम्र नहीं बल्कि इस शुरुआती सफलता को लंबे समय तक बनाए रखना है। स्टार्टअप बनाना एक बात है और उसे वर्षों तक सफलतापूर्वक चलाना दूसरी। जैसे-जैसे उनकी कंपनी और प्रोडक्ट्स बढ़ेंगे, उन्हें तकनीकी गुणवत्ता, सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी, बिजनेस ऑपरेशंस और टीम मैनेजमेंट जैसी चुनौतियों का भी सामना करना होगा। यदि वह अपनी पढ़ाई, सीखने और बिजनेस के बीच संतुलन बनाए रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में उनकी यात्रा और भी दिलचस्प हो सकती है।

राउल जॉन अजू की कहानी का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है कि उम्र सीखने की शुरुआत तय नहीं करती। 9 साल की उम्र में AI के बारे में जिज्ञासा, 12 साल में पहला रोबोट और 16 साल में अपनी AI कंपनी—यह सफर दिखाता है कि किसी बच्चे की छोटी सी जिज्ञासा सही दिशा में लगातार मेहनत के साथ बड़े प्रोजेक्ट में बदल सकती है। हालांकि हर बच्चे का रास्ता अलग होगा, लेकिन सवाल पूछना, प्रयोग करना, असफलताओं से सीखना और अपनी बनाई चीज को वास्तविक समस्या के समाधान से जोड़ना किसी भी युवा के लिए उपयोगी आदत हो सकती है।

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http://12 साल की उम्र में MeBot रोबोट बनाने वाले Raul John Aju अब AI स्टार्टअप चला रहे हैं।

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