रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच 5 सितंबर 2026 को एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कीव पर रूसी हवाई हमलों को 72 घंटे के लिए रोकने का आदेश दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के तहत मॉस्को पहुंच चुके हैं। इसके बाद दोनों अमेरिकी प्रतिनिधियों के यूक्रेन की राजधानी कीव जाने की भी योजना है।
इस घटनाक्रम को रूस-यूक्रेन युद्ध में एक महत्वपूर्ण लेकिन सीमित कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। हालांकि इसे पूरी तरह से युद्धविराम या रूस और यूक्रेन के बीच स्थायी सीजफायर समझना अभी जल्दबाजी होगी। मौजूदा जानकारी के मुताबिक पुतिन का आदेश खास तौर पर कीव पर हमलों को तीन दिनों के लिए रोकने से संबंधित है। युद्ध के दूसरे इलाकों में सैन्य गतिविधियां पूरी तरह खत्म होने की घोषणा नहीं हुई है।
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि पुतिन ने 5 सितंबर की आधी रात से तीन दिनों के लिए कीव पर हमले नहीं करने का निर्देश दिया है। यह रोक अमेरिकी विशेष दूतों की यात्रा के दौरान लागू रहेगी। विटकॉफ और कुशनर पहले मॉस्को पहुंचे हैं और इसके बाद उनके कीव जाने की उम्मीद है। इस दौरान अमेरिकी पक्ष रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को समाप्त करने के लिए एक नए शांति प्रस्ताव पर चर्चा करना चाहता है।
इस पूरे घटनाक्रम में जेरेड कुशनर की मौजूदगी खास तौर पर चर्चा में है। कुशनर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद हैं और इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक पहलों में शामिल रहे हैं। इस बार वह स्टीव विटकॉफ के साथ रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के मिशन पर हैं। ट्रंप ने कहा है कि दोनों प्रतिनिधि युद्ध खत्म करने के उद्देश्य से एक ठोस प्रस्ताव लेकर आगे बढ़ रहे हैं, हालांकि प्रस्ताव की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
मॉस्को पहुंचने पर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का संपर्क रूस की ओर से राष्ट्रपति के विशेष प्रतिनिधि किरिल दिमित्रिएव से हुआ। इसके बाद पुतिन के साथ बैठक की संभावना भी सामने आई। रूस और अमेरिका के बीच बातचीत का यह दौर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में युद्ध रोकने की कोशिशों के बावजूद रूस और यूक्रेन के बीच बुनियादी मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है।
अमेरिका की कोशिश सिर्फ तीन दिन की हमले की रोक तक सीमित नहीं है। असली उद्देश्य एक ऐसी बातचीत का रास्ता तैयार करना है जिसमें पहले सैन्य गतिविधियों को कम किया जाए और फिर युद्ध समाप्त करने की शर्तों पर चर्चा हो। डोनाल्ड ट्रंप लगातार रूस और यूक्रेन के बीच समझौता कराने की कोशिश करते रहे हैं। उनके प्रशासन की ओर से पहले भी विशेष दूतों के जरिए मॉस्को और कीव के बीच बातचीत का प्रयास किया गया है। अब विटकॉफ और कुशनर की यात्रा को उसी कूटनीतिक प्रयास की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि रूस और यूक्रेन के बीच सबसे बड़ी समस्या अभी भी वही है—क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा गारंटी और यूक्रेन की भविष्य की सैन्य स्थिति। रूस की मांगों में यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों पर अपने दावे को स्वीकार कराना और यूक्रेन की NATO सदस्यता की संभावनाओं को खत्म करना शामिल रहा है। यूक्रेन इन मांगों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और इसे अपनी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता से जोड़ता है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच इन मुद्दों पर बड़ा अंतर अभी भी मौजूद है।
यही वजह है कि तीन दिन की यह रोक अपने आप में युद्ध खत्म होने का संकेत नहीं मानी जा सकती। यह ज्यादा से ज्यादा बातचीत के लिए एक अस्थायी माहौल बनाने का प्रयास है। अगर इस दौरान रूस और यूक्रेन दोनों तरफ से हमलों में कमी रहती है और बातचीत में कोई ठोस प्रगति होती है, तो आगे लंबी अवधि के युद्धविराम की संभावना बन सकती है। लेकिन यदि तीन दिन बाद फिर से बड़े हमले शुरू हो जाते हैं तो यह पहल केवल एक अस्थायी कूटनीतिक विराम तक सीमित रह सकती है।
इस बीच यूक्रेन की तरफ से भी संकेत दिए गए हैं कि अमेरिकी प्रतिनिधियों की यात्रा के दौरान वह हवाई हमलों को रोकने के लिए तैयार है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के मॉस्को और कीव दौरे से पहले सुरक्षा को लेकर दोनों देशों से आश्वासन मांगे गए थे। अमेरिकी पक्ष चाहता था कि यूक्रेन मॉस्को पर हमले से बचे और रूस की ओर से कीव पर हमले रोके जाएं, ताकि विटकॉफ और कुशनर की यात्रा सुरक्षित तरीके से हो सके।
यह कदम ऐसे समय आया है जब कीव पर रूसी हमलों में हाल के दिनों में तेजी देखी गई है। 4 सितंबर को रूस के एक ड्रोन हमले में यूक्रेन की सुरक्षा सेवा SBU के मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया था। इस हमले में कई लोग घायल हुए। यह घटना अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के मॉस्को और कीव दौरे से ठीक पहले हुई, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था।
दूसरी तरफ यूक्रेन भी रूसी सैन्य और आर्थिक ठिकानों पर ड्रोन हमले करता रहा है। हाल की घटनाओं में रूस के तेल भंडारण और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। इस तरह दोनों देशों के बीच लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइल हमले युद्ध के पांचवें वर्ष में भी जारी हैं। ऐसे माहौल में केवल एक शहर पर तीन दिन की रोक को व्यापक युद्धविराम में बदलना एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती होगी।
कीव के लिए यह तीन दिन इसलिए भी अहम हैं क्योंकि राजधानी पिछले कुछ समय से लगातार ड्रोन हमलों के दबाव में है। Reuters के अनुसार, शहर में रात के साथ-साथ दिन के समय भी ड्रोन हमलों का खतरा बढ़ा है। हमलों से बिजली व्यवस्था, परिवहन और आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है। मेट्रो सेवाओं में रुकावट और स्कूलों में बच्चों को सुरक्षा व्यवस्था के बीच पढ़ाई करने जैसी परिस्थितियां युद्ध के मानवीय प्रभाव को दिखाती हैं।
ऐसे में यदि 72 घंटे तक कीव पर बड़े हवाई हमले नहीं होते हैं, तो स्थानीय नागरिकों को अस्थायी राहत मिल सकती है। लेकिन विशेषज्ञों के लिए असली सवाल यह होगा कि इस विराम के बाद क्या होता है। क्या रूस और यूक्रेन एक लंबी अवधि के सीजफायर पर सहमत होते हैं? क्या दोनों पक्ष मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए औपचारिक समझौता करते हैं? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि विवादित क्षेत्रों को लेकर दोनों पक्ष किस तरह समझौते की दिशा में बढ़ेंगे?
अमेरिका के लिए भी यह बातचीत आसान नहीं होगी। ट्रंप प्रशासन को एक तरफ रूस को बातचीत की मेज पर बनाए रखना है, वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन को ऐसा समझौता स्वीकार करने के लिए तैयार करना है जिसमें उसकी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े सवालों का समाधान हो। पहले के प्रयासों में भी यही समस्या सामने आती रही है कि युद्ध रोकने के सामान्य उद्देश्य पर सहमति की बात तो होती है, लेकिन शांति समझौते की वास्तविक शर्तों पर दोनों पक्ष अलग-अलग स्थिति में खड़े हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया प्रयास के बारे में कहा है कि उनके विशेष दूत शांति के लिए एक ठोस प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं। हालांकि उस प्रस्ताव के सभी बिंदु सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच क्षेत्रीय विवाद, सुरक्षा गारंटी और NATO से जुड़े सवालों को किस फॉर्मूले से हल करने की कोशिश करेगा।
पुतिन की तरफ से भी हाल के दिनों में शांति समझौते की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। उन्होंने अमेरिका और चीन जैसे देशों के संपर्क तथा संभावित कूटनीतिक रास्तों का उल्लेख करते हुए बातचीत की संभावना पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। लेकिन इसके साथ ही रूस ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी समझौते में मौजूदा सैन्य और क्षेत्रीय स्थिति को ध्यान में रखना होगा।
यूक्रेन की स्थिति भी स्पष्ट है। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की लगातार सुरक्षा गारंटी और अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा को प्राथमिकता देते रहे हैं। यूक्रेन के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि किसी जल्दबाजी वाले समझौते के बाद रूस को दोबारा सैन्य कार्रवाई करने का मौका न मिले। इसलिए कीव केवल अस्थायी सीजफायर के बजाय ऐसी व्यवस्था चाहता है जिसमें भविष्य की सुरक्षा को लेकर मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी हो।
इस बीच अमेरिका के लिए जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ की संयुक्त भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। विटकॉफ पहले से रूस-यूक्रेन वार्ता में ट्रंप प्रशासन के प्रमुख चेहरों में रहे हैं, जबकि कुशनर की मौजूदगी इस मिशन को अतिरिक्त राजनीतिक महत्व देती है। दोनों का मॉस्को जाना और उसके बाद कीव जाना यह संकेत देता है कि अमेरिका कम से कम इस समय दोनों पक्षों के साथ सीधे संपर्क बनाए रखना चाहता है।
हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा जोखिम यह है कि युद्ध के मैदान में घटनाएं कूटनीतिक प्रयासों से तेज गति से बदल सकती हैं। यदि किसी बड़े हमले में भारी नुकसान होता है या कोई ऐसा सैन्य घटनाक्रम सामने आता है जिससे दोनों देशों का भरोसा टूटता है, तो बातचीत फिर से पटरी से उतर सकती है। पिछले कई दौर की वार्ताओं में भी यही समस्या देखने को मिली है कि राजनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रहने के बावजूद जमीन पर सैन्य संघर्ष चलता रहा।
इसलिए आने वाले 72 घंटे को रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए एक टेस्ट पीरियड की तरह देखा जा सकता है। यदि रूस की ओर से कीव पर हमले रुकते हैं और यूक्रेन भी अमेरिकी प्रतिनिधियों की यात्रा के दौरान हवाई हमलों में संयम बरतता है, तो दोनों पक्षों के बीच विश्वास बनाने का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण अवसर पैदा हो सकता है। इसके बाद अमेरिका लंबी अवधि के युद्धविराम का प्रस्ताव आगे बढ़ा सकता है।
लेकिन यह भी साफ समझना जरूरी है कि तीन दिन की हमले की रोक युद्ध का अंत नहीं है। यह एक सीमित और अस्थायी कदम है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म करने के लिए क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा गारंटी, NATO, प्रतिबंध, भविष्य की सैन्य व्यवस्था और पुनर्निर्माण जैसे कई कठिन मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। इसलिए अभी यह कहना कि रूस-यूक्रेन युद्ध पूरी तरह खत्म होने जा रहा है, सही नहीं होगा।
फिलहाल दुनिया की नजर मॉस्को में होने वाली बातचीत और उसके बाद अमेरिकी प्रतिनिधियों की कीव यात्रा पर है। यदि पुतिन और अमेरिकी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत से कोई ठोस फॉर्मूला निकलता है और जेलेंस्की की सरकार उस पर बातचीत के लिए तैयार होती है, तो यह युद्ध को रोकने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। लेकिन यदि क्षेत्रीय मुद्दों पर कोई समझौता नहीं बनता, तो तीन दिन की यह रोक केवल अस्थायी राहत बनकर रह सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मौजूदा घोषणा को “रूस अगले तीन दिन पूरे यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा” के रूप में नहीं समझना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आदेश मुख्य रूप से कीव पर रूसी हमलों को 72 घंटे रोकने का है। इसी अवधि में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मॉस्को तथा कीव में बातचीत करेंगे।
अगर यह अस्थायी विराम सफल रहता है और दोनों पक्ष बातचीत के दौरान किसी बड़े समझौते की दिशा में बढ़ते हैं, तो आगे युद्धविराम की अवधि बढ़ाने की संभावना बन सकती है। लेकिन अभी शांति समझौते की घोषणा नहीं हुई है और रूस तथा यूक्रेन के बीच कई बुनियादी मुद्दे पहले की तरह विवादित हैं। इसलिए आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत के साथ-साथ जमीन पर सैन्य गतिविधियों पर भी पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
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