तमिलनाडु की राजनीति में सरकार गठन को लेकर सस्पेंस लगातार बढ़ता जा रहा है। Vijay को अब तक 116 विधायकों का समर्थन मिलने की खबर सामने आई है, लेकिन बहुमत के लिए अभी भी दो विधायकों की जरूरत बताई जा रही है।
इसी वजह से आज होने वाला शपथ ग्रहण समारोह फिलहाल रद्द कर दिया गया है।
राजनीतिक गलियारों में यह मामला अब सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है।
विजय की पार्टी ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या तक पहुंचने में अभी भी थोड़ी दूरी बाकी है।
सूत्रों के मुताबिक, समर्थन जुटाने के लिए लगातार राजनीतिक बातचीत जारी है।
हालांकि अभी तक अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
तमिलनाडु की राजनीति में यह स्थिति बेहद दिलचस्प मानी जा रही है, क्योंकि यहां हर विधायक का समर्थन बेहद अहम हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में छोटे दल और निर्दलीय विधायक काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सरकार गठन में केवल चुनाव जीतना ही काफी नहीं होता, बल्कि बहुमत साबित करना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
विजय के समर्थकों को उम्मीद थी कि आज शपथ ग्रहण समारोह होगा, लेकिन संख्या पूरी न होने की वजह से कार्यक्रम टालना पड़ा।
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है।
कुछ लोग इसे राजनीतिक रणनीति बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अस्थिर स्थिति का संकेत मान रहे हैं।
विजय के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह उनकी राजनीतिक यात्रा का निर्णायक मोड़ हो सकता है।
फिल्म इंडस्ट्री से राजनीति में आए विजय ने बहुत कम समय में बड़ी लोकप्रियता हासिल की है।
उनकी सभाओं और प्रचार अभियानों में भारी भीड़ देखने को मिली थी, जिसने उन्हें मजबूत राजनीतिक चेहरा बना दिया।
लेकिन अब असली परीक्षा सरकार गठन और स्थिर बहुमत की है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ घंटे और दिन बेहद अहम हो सकते हैं।
अगर विजय बहुमत का आंकड़ा हासिल कर लेते हैं, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
वहीं अगर समर्थन जुटाने में देरी होती है, तो राजनीतिक समीकरण बदल भी सकते हैं।
फिलहाल सभी की नजरें उन दो विधायकों पर टिकी हुई हैं, जिनका समर्थन सरकार के भविष्य को तय कर सकता है।
कुल मिलाकर तमिलनाडु में सरकार गठन का यह ड्रामा राजनीति, रणनीति और सत्ता संतुलन का बड़ा उदाहरण बन गया है।
