abworldnews

Mr. Ashish

चीन आबादी बढ़ाने के लिए ले रहा IVF तकनीक का सहारा, घटती जन्मदर से सरकार चिंतित

चीन आज एक बड़ी जनसांख्यिकीय चुनौती का सामना कर रहा है। कभी दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश रहा चीन अब घटती जन्मदर और तेजी से बूढ़ी होती जनसंख्या की समस्या से जूझ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में चीन की सरकार ने आबादी बढ़ाने के लिए कई नीतियां लागू की हैं, लेकिन इसके बावजूद जन्मदर में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

इसी स्थिति को देखते हुए अब चीन में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक यानी आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। सरकार और स्वास्थ्य संस्थान इस तकनीक को प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि उन दंपतियों की मदद की जा सके जिन्हें प्राकृतिक रूप से संतान प्राप्ति में कठिनाई हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में जन्मदर में गिरावट केवल सामाजिक बदलाव का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे आर्थिक और जीवनशैली से जुड़े कई कारण भी हैं।

शहरी जीवन की बढ़ती लागत, करियर पर अधिक ध्यान और देर से शादी की प्रवृत्ति ने परिवार नियोजन के पैटर्न को बदल दिया है।

पहले जहां चीन में कम उम्र में विवाह और अधिक बच्चे होना सामान्य बात थी, वहीं अब युवा पीढ़ी देर से शादी कर रही है और कई दंपति केवल एक बच्चा ही चाहते हैं।

चीन की जनसंख्या नीति का इतिहास भी इस स्थिति से जुड़ा हुआ है।

दशकों तक लागू रही “वन-चाइल्ड पॉलिसी” ने देश की जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित तो किया, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभाव अब सामने आ रहे हैं।

इस नीति के कारण कई परिवारों ने केवल एक ही बच्चा पैदा किया, जिससे अब देश में युवाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम हो गई है।

जबकि बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है।

इसके परिणामस्वरूप भविष्य में श्रमबल की कमी और आर्थिक विकास पर दबाव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए चीन की सरकार ने पहले दो-बच्चे और फिर तीन-बच्चे की नीति को मंजूरी दी।

लेकिन इन नीतियों के बावजूद जन्मदर में बहुत अधिक वृद्धि नहीं हो पाई।

इसलिए अब सरकार चिकित्सा तकनीकों का सहारा लेकर जन्मदर बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

आईवीएफ तकनीक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आई है।

आईवीएफ प्रक्रिया में महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है, जिसे बाद में महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।

यह तकनीक उन दंपतियों के लिए उपयोगी होती है जिन्हें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में कठिनाई होती है।

चीन में पिछले कुछ वर्षों में आईवीएफ क्लीनिकों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

देश के कई बड़े शहरों में आधुनिक प्रजनन केंद्र स्थापित किए गए हैं जहां विशेषज्ञ डॉक्टर और वैज्ञानिक इस तकनीक के माध्यम से उपचार प्रदान करते हैं।

सरकार ने कुछ क्षेत्रों में इस उपचार की लागत को कम करने के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की है।

रिपोर्टों के अनुसार चीन में लाखों दंपति ऐसे हैं जो आईवीएफ तकनीक के जरिए संतान प्राप्ति की कोशिश कर रहे हैं।

इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीक के सहारे जन्मदर में बड़ी वृद्धि करना आसान नहीं होगा।

इसके पीछे सामाजिक और आर्थिक कारण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

कई युवा दंपति बच्चों की परवरिश से जुड़ी बढ़ती लागत के कारण अधिक बच्चे नहीं चाहते।

शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की बढ़ती कीमतें भी परिवारों के निर्णय को प्रभावित करती हैं।

इसके अलावा कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व और करियर के बीच संतुलन बनाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार जन्मदर बढ़ाना चाहती है तो उसे परिवारों को व्यापक आर्थिक और सामाजिक समर्थन प्रदान करना होगा।

इसमें सस्ती शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और माता-पिता के लिए कार्यस्थल पर अनुकूल नीतियां शामिल हो सकती हैं।

दुनिया के कई विकसित देशों में भी घटती जन्मदर एक गंभीर समस्या बन चुकी है।

जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी सरकारें आबादी बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं।

लेकिन वहां भी जन्मदर में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक समाज में जनसंख्या वृद्धि केवल सरकारी नीतियों से नियंत्रित नहीं होती, बल्कि इसके पीछे सामाजिक और आर्थिक बदलाव भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।

चीन के मामले में यह चुनौती और भी बड़ी है क्योंकि देश की आबादी बहुत विशाल है और आर्थिक संरचना तेजी से बदल रही है।

यदि जन्मदर लंबे समय तक कम बनी रहती है तो भविष्य में श्रमबल की कमी और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

इसीलिए चीन की सरकार अब हर संभव उपाय अपनाने की कोशिश कर रही है ताकि देश की जनसंख्या संरचना संतुलित बनी रहे।

आईवीएफ तकनीक इस प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक आंशिक समाधान हो सकता है।

दीर्घकालिक रूप से जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए व्यापक सामाजिक और आर्थिक नीतियों की आवश्यकता होगी।

फिलहाल चीन में जन्मदर को बढ़ाने की दिशा में यह एक नया प्रयोग माना जा रहा है।

आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन प्रयासों का देश की जनसंख्या और अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है।

http://china-ivf-population-growth

ईरान युद्ध में ट्रंप की रणनीति पर सवाल, वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर बड़ा असर संभव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *