आज के समय में रिलेशनशिप में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है भरोसा और इनसिक्योरिटी। कई बार पार्टनर को लगता है कि उनके रिश्ते में कोई तीसरा व्यक्ति दूरी पैदा कर सकता है। ऐसी ही स्थिति तब बनती है जब किसी व्यक्ति का बचपन का दोस्त उसके वर्तमान रिश्ते में तनाव की वजह बन जाए।
कई लोगों को यह समस्या फेस करनी पड़ती है कि उनका बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड उनके पुराने दोस्त को लेकर असहज महसूस करने लगता है। शुरुआत में छोटी-छोटी बातें बाद में बड़े झगड़ों और भावनात्मक दबाव का कारण बन सकती हैं।
अगर आपका बॉयफ्रेंड आपसे कह रहा है कि अपने बचपन के दोस्त से दूरी बना लो या दोस्ती खत्म कर दो, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि उसकी इनसिक्योरिटी की वजह क्या है।
Insecurity अक्सर डर, तुलना या रिश्ते को खोने की चिंता से जुड़ी होती है। कई बार व्यक्ति बिना किसी गलत इरादे के भी ओवरप्रोटेक्टिव या पजेसिव व्यवहार करने लगता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी रिश्ते में भरोसा सबसे मजबूत आधार माना जाता है। अगर रिश्ते में लगातार शक या कंट्रोल करने की कोशिश हो, तो यह धीरे-धीरे मानसिक तनाव बढ़ा सकता है।
आपको यह समझना होगा कि बचपन की दोस्ती और रोमांटिक रिश्ता दोनों अलग-अलग भावनात्मक स्थान रखते हैं। हर करीबी दोस्ती का मतलब प्रेम संबंध नहीं होता।
Friendship इंसान की भावनात्मक जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। पुराने दोस्त कई बार व्यक्ति की पहचान और यादों से गहराई से जुड़े होते हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे मामलों में सबसे पहले शांत और ईमानदार बातचीत करनी चाहिए। गुस्से या बहस के बजाय पार्टनर की भावनाओं को समझने की कोशिश जरूरी होती है।
अगर आपका बॉयफ्रेंड असुरक्षित महसूस कर रहा है, तो उससे खुलकर पूछें कि आखिर उसे किस बात का डर है। क्या उसे लगता है कि आप दोस्त को ज्यादा प्राथमिकता देती हैं? या उसे आपके रिश्ते में दूरी महसूस हो रही है?
Communication किसी भी स्वस्थ रिश्ते की सबसे जरूरी कुंजी मानी जाती है। बिना सही संवाद के गलतफहमियां तेजी से बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि रिश्ते में सीमाएं तय करना भी जरूरी होता है। अगर दोस्ती की वजह से पार्टनर को बार-बार असहजता हो रही है, तो दोनों को मिलकर संतुलन बनाना चाहिए।
हालांकि केवल पार्टनर के कहने पर किसी पुराने और भरोसेमंद दोस्त से रिश्ता तोड़ देना हमेशा सही समाधान नहीं माना जाता। इससे भविष्य में पछतावा या भावनात्मक खालीपन महसूस हो सकता है।
Emotional Health पर रिश्तों का सीधा असर पड़ता है। लगातार दबाव या कंट्रोल वाली स्थिति व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशान कर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक हेल्दी रिलेशनशिप में व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान और रिश्तों का सम्मान होना चाहिए। पार्टनर का उद्देश्य आपको अकेला करना नहीं बल्कि सुरक्षित महसूस करना होना चाहिए।
अगर आपका दोस्त और आपका व्यवहार पूरी तरह सम्मानजनक और स्पष्ट है, तो धीरे-धीरे बॉयफ्रेंड का भरोसा बढ़ाया जा सकता है। कई बार समय के साथ इनसिक्योरिटी कम होने लगती है।
Trust किसी भी लंबे और मजबूत रिश्ते का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है।
कुछ रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि पार्टनर और दोस्त को एक-दूसरे से मिलवाना और सामान्य बातचीत करवाना भी मददगार हो सकता है। इससे अनजानपन और गलत धारणाएं कम हो सकती हैं।
अगर आपका बॉयफ्रेंड हर समय आपको कंट्रोल करने की कोशिश करता है, दोस्तों से दूरी बनाने के लिए दबाव डालता है या लगातार शक करता है, तो यह रिश्ते में असंतुलन का संकेत भी हो सकता है।
Possessiveness अगर बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी रिश्ते में “या तो दोस्ती चुनो या प्यार” जैसी स्थिति लंबे समय में तनाव पैदा कर सकती है। बेहतर तरीका संतुलन और पारदर्शिता माना जाता है।
आपको यह तय करना होगा कि कौन-से रिश्ते आपके लिए भावनात्मक रूप से स्वस्थ और सम्मानजनक हैं। ऐसा समाधान जरूरी है जिसमें आपकी खुशी, सम्मान और मानसिक शांति बनी रहे।
Psychology से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ रिश्तों में व्यक्ति को अपनी पहचान और सामाजिक संबंध बनाए रखने की आजादी मिलनी चाहिए।
अगर बातचीत के बाद भी स्थिति लगातार खराब होती जाए और भावनात्मक दबाव बढ़े, तो रिलेशनशिप काउंसलर की मदद लेना भी अच्छा विकल्प हो सकता है।
कई बार तीसरे व्यक्ति की निष्पक्ष सलाह रिश्ते में गलतफहमियों को कम करने में मदद करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्यार और दोस्ती दोनों साथ चल सकते हैं, बशर्ते रिश्तों में सम्मान और भरोसा बना रहे।
फिलहाल सबसे जरूरी बात यही मानी जाती है कि किसी भी फैसले को दबाव में लेने के बजाय समझदारी, संवाद और आत्मसम्मान के साथ लिया जाए।
रिलेशनशिप टिप्स: पार्टनर इंटीमेट होना चाहता है, लेकिन आप तैयार नहीं—क्या करें?
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