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डीवाई चंद्रचूड़ रूस की ओर से Arbitrator नियुक्त: Oschadbank से यूक्रेन विवाद क्या है?

पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवाद में रूस की ओर से नियुक्त arbitrator यानी मध्यस्थ की भूमिका निभाने जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने उन्हें यूक्रेन के सरकारी बैंक Oschadbank के साथ चल रहे investment treaty dispute में अपना arbitrator नियुक्त किया है। मामला यूक्रेन के उन इलाकों में बैंक की संपत्तियों और कारोबार को हुए कथित नुकसान से जुड़ा है, जिन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस के नियंत्रण या कब्जे में जाने की बात कही गई है।

यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डीवाई चंद्रचूड़ भारत के पूर्व Chief Justice of India रह चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय कानूनी मामलों में उनकी विशेषज्ञता तथा प्रतिष्ठा है। इस मामले में उनकी भूमिका किसी राजनीतिक बातचीत में रूस और यूक्रेन के बीच “मध्यस्थ” के तौर पर नहीं है। वह arbitral tribunal के एक सदस्य यानी arbitrator के रूप में रूस द्वारा चुने गए हैं। इस अंतर को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि arbitration और diplomatic mediation दो अलग प्रक्रियाएं हैं।

मामला यूक्रेन के सरकारी बैंक Oschadbank ने रूस के खिलाफ शुरू किया है। बैंक का आरोप है कि रूस के कारण उसे यूक्रेन के चार क्षेत्रों—Donetsk, Luhansk, Kherson और Zaporizhzhia—में अपनी महत्वपूर्ण संपत्तियों और operations का नुकसान हुआ। Oschadbank ने अप्रैल 2026 में इस विवाद को लेकर औपचारिक international arbitration proceedings शुरू करने की जानकारी दी थी।

बैंक ने रूस के खिलाफ यह कार्रवाई 1998 के Russia-Ukraine Bilateral Investment Treaty के तहत शुरू की है। इस treaty का उद्देश्य दोनों देशों के निवेशकों के निवेश को कुछ कानूनी सुरक्षा देना था। Oschadbank का कहना है कि युद्ध और रूस के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों और गतिविधियों के नुकसान के कारण उसके निवेश अधिकार प्रभावित हुए हैं।

अब इस arbitration में रूस की ओर से डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति इस मामले को और महत्वपूर्ण बना देती है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार यह तीन सदस्यीय arbitral tribunal होगा। एक arbitrator claimant यानी Oschadbank की ओर से और एक Russia की ओर से नियुक्त किया गया है, जबकि tribunal की अध्यक्षता अलग arbitrator कर सकता है। अंतिम फैसला किसी एक arbitrator की व्यक्तिगत राय से नहीं बल्कि tribunal की प्रक्रिया और लागू कानूनी नियमों के आधार पर होगा।

इस पूरी कहानी को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि Oschadbank कौन है। Oschadbank यूक्रेन का state-owned bank है और देश के financial system में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। युद्ध शुरू होने के बाद बैंक ने रूस के खिलाफ अलग-अलग jurisdictions में कानूनी कार्रवाई के जरिए अपने नुकसान की भरपाई मांगने की कोशिश की है।

Oschadbank पहले भी रूस के खिलाफ international arbitration में जीत हासिल कर चुका है। Crimea से जुड़े पुराने विवाद में tribunal ने बैंक के पक्ष में 1.1113 अरब डॉलर का compensation award किया था। बैंक के अनुसार interest सहित उसकी recovery claim बाद में करीब 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई।

यह पुराना मामला 2014 में Crimea के रूस द्वारा annexation के बाद Oschadbank की वहां की assets से जुड़ा था। UNCTAD के Investment Dispute Settlement Navigator के अनुसार उस मामले में tribunal ने Russia द्वारा indirect expropriation यानी अप्रत्यक्ष रूप से निवेश के अधिग्रहण का निष्कर्ष निकाला था और Oschadbank के पक्ष में लगभग 1.111 अरब डॉलर का award दिया था।

Oschadbank अब युद्ध के बाद हुए नए नुकसान के लिए अलग arbitration proceeding चला रहा है। जुलाई 2025 में बैंक ने Russia को formal Notice of Dispute भेजा था। बैंक के मुताबिक यह Donetsk, Luhansk, Kherson और Zaporizhzhia क्षेत्रों में assets और operations के नुकसान से संबंधित था।

बैंक ने अप्रैल 2026 में कहा कि उसने इस नए मामले में formal arbitration proceedings शुरू कर दी हैं। उसके अनुसार रूस के खिलाफ claim 1998 के bilateral investment treaty के तहत है और मामला tribunal के गठन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

यहीं से डीवाई चंद्रचूड़ की भूमिका सामने आती है। रिपोर्ट के अनुसार रूस ने उन्हें अपने arbitrator के रूप में चुना है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस की ओर से उन्हें पहले भी इस तरह की भूमिका के लिए approach किया गया था, लेकिन उन्होंने पहले उन approaches को स्वीकार नहीं किया था। इस बार उन्होंने नियुक्ति स्वीकार की है।

इस नियुक्ति का मतलब यह नहीं है कि चंद्रचूड़ रूस के पक्ष में फैसला देंगे। Arbitrator का काम किसी पक्ष का वकील बनना नहीं होता। वह tribunal का हिस्सा होता है और उसे मामले की दलीलों, दस्तावेजों, treaty provisions और लागू arbitration rules के आधार पर स्वतंत्र रूप से विचार करना होता है।

इसी कारण “रूस के लिए मध्यस्थ” जैसे headline को भी सावधानी से समझना चाहिए। ज्यादा सटीक शब्द होगा कि रूस ने डीवाई चंद्रचूड़ को अपना arbitrator नियुक्त किया है। “मध्यस्थ” शब्द आम पाठक के लिए आसान है, लेकिन कानूनी रूप से arbitration में arbitrator और mediation में mediator की भूमिका अलग होती है।

Mediation में neutral mediator पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश करता है और सामान्यतः खुद binding फैसला नहीं देता। Arbitration में arbitrator tribunal का हिस्सा होता है और tribunal dispute पर legally significant award जारी कर सकता है, जो लागू नियमों और enforcement framework के अधीन होता है।

Oschadbank और Russia के बीच मौजूदा विवाद भी इसी तरह की international investment arbitration प्रक्रिया है।

इस मामले का एक बड़ा सवाल यह है कि विवादित संपत्तियां किन क्षेत्रों में थीं। Oschadbank के अनुसार नुकसान Donetsk, Luhansk, Kherson और Zaporizhzhia में हुआ है। बैंक का कहना है कि वहां assets और operations का नुकसान रूस की कार्रवाई से हुआ।

इन चारों क्षेत्रों का रूस-यूक्रेन युद्ध में बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक और राजनीतिक महत्व है। रूस ने इन क्षेत्रों को अपने क्षेत्र का हिस्सा घोषित किया है, लेकिन यूक्रेन और बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं रूस के इन दावों को मान्यता नहीं देतीं। इसलिए वहां की property, sovereignty और investment rights से जुड़े विवाद बेहद जटिल कानूनी प्रश्न पैदा करते हैं।

International investment arbitration में केवल यह सवाल नहीं होता कि कोई asset किस जगह मौजूद था। Tribunal को यह भी देखना पड़ता है कि संबंधित treaty क्या protection देती है, investment कब किया गया था, किस कार्रवाई से नुकसान हुआ और claimant को compensation का कानूनी अधिकार बनता है या नहीं।

इसी वजह से Oschadbank का नया मामला पुराने Crimea case से जुड़ा होने के बावजूद पूरी तरह अलग proceeding है।

पुराने Crimea मामले में Oschadbank ने 2016 में arbitration शुरू की थी और tribunal ने 2018 में बैंक के पक्ष में award दिया था। इसके बाद Russia ने award को चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन अलग-अलग jurisdictions में enforcement और judicial proceedings जारी रहे।

फरवरी 2026 में Oschadbank ने बताया था कि वह पुराने award को enforce करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बैंक के मुताबिक France में Russian assets की seizure से जुड़ी कार्रवाई भी हुई थी और United Kingdom, United States, Finland तथा Czech Republic में recognition/enforcement proceedings चल रही थीं।

यही वजह है कि नया arbitration केवल एक नया compensation claim नहीं है। इसके पीछे कई सालों से चल रही international legal battle की पृष्ठभूमि भी है।

Oschadbank का कहना है कि रूस से compensation हासिल करने के लिए वह अलग-अलग देशों की courts और international arbitration mechanisms का इस्तेमाल कर रहा है। बैंक का तर्क है कि युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए international law और investment protection mechanisms के तहत compensation की मांग की जा सकती है।

दूसरी तरफ Russia इस तरह के claims और proceedings में अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करता रहा है और अलग-अलग arbitration awards को चुनौती देता रहा है। मौजूदा मामले में tribunal को दोनों पक्षों की दलीलें सुननी होंगी।

इस केस में डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति भारत के लिए भी चर्चा का विषय है। भारत के पूर्व CJI के रूप में उन्होंने नवंबर 2024 तक Supreme Court का नेतृत्व किया था। retirement के बाद वह legal और public discussions में सक्रिय रहे हैं। International arbitration में उनकी नियुक्ति उनके judicial और legal experience की अंतरराष्ट्रीय recognition के रूप में भी देखी जा सकती है।

चंद्रचूड़ ने अपने judicial career के दौरान arbitration और alternative dispute resolution की भूमिका पर भी बात की थी। उनका मानना रहा है कि commercial disputes के लिए arbitration और mediation जैसे mechanisms अदालतों के बोझ को कम करने और विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इस मामले में उनका अनुभव खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि यह साधारण commercial dispute नहीं है। इसमें international investment treaty, sovereign state, wartime assets, expropriation और compensation जैसे जटिल कानूनी मुद्दे शामिल हैं।

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि arbitration tribunal में arbitrator की नियुक्ति अक्सर parties की agreed procedure के तहत होती है। दोनों पक्ष अपने-अपने arbitrator चुन सकते हैं और tribunal का अध्यक्ष या presiding arbitrator तय प्रक्रिया के अनुसार नियुक्त किया जा सकता है।

इसका उद्देश्य यह होता है कि दोनों parties को अपने मामले को tribunal के सामने रखने का अवसर मिले और अंततः एक structured legal process के तहत विवाद का समाधान हो।

Oschadbank के नए case में tribunal का गठन होने के बाद procedural hearings, jurisdictional objections, evidence और merits से जुड़े मुद्दे सामने आ सकते हैं। अगर Russia jurisdiction या treaty applicability को चुनौती देता है तो tribunal को पहले यह तय करना पड़ सकता है कि case सुनने का अधिकार उसे है या नहीं।

अगर tribunal jurisdiction स्वीकार करता है तो आगे यह सवाल आएगा कि Russia ने treaty के तहत किसी obligation का उल्लंघन किया या नहीं और अगर किया है तो Oschadbank को कितना compensation मिलना चाहिए।

यह प्रक्रिया कई वर्षों तक भी चल सकती है। International arbitration में बड़े sovereign disputes में evidence और jurisdiction से जुड़े सवाल काफी समय लेते हैं।

इसके अलावा award आने के बाद भी legal battle समाप्त होना जरूरी नहीं है। हारने वाला पक्ष कुछ limited grounds पर award को challenge करने की कोशिश कर सकता है और जीतने वाले पक्ष को award enforce कराने के लिए अलग-अलग देशों की courts का सहारा लेना पड़ सकता है।

Oschadbank के पुराने Crimea case ने यही दिखाया है। Tribunal award के बाद Russia ने judicial challenges किए और Oschadbank को कई देशों में enforcement actions आगे बढ़ाने पड़े।

Russia के खिलाफ awards की enforcement एक अलग चुनौती है क्योंकि sovereign immunity और state assets की सुरक्षा जैसे कानूनी मुद्दे सामने आते हैं। Oschadbank ने भी कहा है कि Russia sovereign immunity का हवाला देता है और उसके assets को identify तथा enforce करना जटिल है।

नए मामले में भी यदि Oschadbank को compensation मिलता है तो उसे वास्तविक रूप से recover करने के लिए अलग legal steps की जरूरत पड़ सकती है।

इस पूरे विवाद का आर्थिक असर भी बड़ा हो सकता है। युद्ध के कारण यूक्रेन में हजारों businesses और financial institutions की assets प्रभावित हुई हैं। अगर international arbitration के जरिए compensation के रास्ते मजबूत होते हैं तो दूसरे Ukrainian companies भी इसी तरह के legal claims लेकर सामने आ सकती हैं।

Oschadbank ने खुद कहा है कि उसका मामला दूसरे Ukrainian state-owned और private companies के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है, जो युद्ध के दौरान अपने investments और assets खो चुकी हैं।

हालांकि हर कंपनी का मामला अलग होगा। किसी दूसरे business को केवल Oschadbank के award के आधार पर automatic compensation नहीं मिल सकता। उसे अपनी treaty rights, investment, नुकसान और jurisdiction को अलग से साबित करना होगा।

युद्ध के दौरान संपत्ति के नुकसान और international law के बीच संबंध आने वाले वर्षों में वैश्विक legal system के लिए भी महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।

इसमें केवल Russia और Ukraine ही नहीं बल्कि France, UK, US और दूसरे देशों की courts भी भूमिका निभा सकती हैं, खासकर जब arbitral awards को enforce करने की कोशिश की जाती है।

Oschadbank के पुराने award से जुड़े मामलों में France और दूसरे jurisdictions में proceedings इसका उदाहरण हैं।

नए arbitration में डीवाई चंद्रचूड़ की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण रहेगी क्योंकि tribunal के सभी सदस्यों को impartiality और independence के standards के तहत काम करना होगा। Arbitrator के लिए किसी पक्ष के प्रति व्यक्तिगत समर्थन से अलग रहकर legal issues पर निर्णय करना आवश्यक होता है।

यहां यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि चंद्रचूड़ रूस की सरकार के कर्मचारी या राजनीतिक प्रतिनिधि नहीं बने हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार वह इस specific investment arbitration में Russia-appointed arbitrator हैं।

इसलिए इस खबर को “भारत के पूर्व CJI रूस के लिए काम करेंगे” जैसे राजनीतिक अर्थ में पेश करना भ्रामक हो सकता है। अधिक सटीक रूप से कहा जाए तो वह एक international arbitral tribunal में Russia द्वारा चुने गए arbitrator की भूमिका निभाएंगे।

भारत के कानूनी क्षेत्र में भी international arbitration का महत्व लगातार बढ़ रहा है। भारतीय lawyers और retired judges को international disputes में arbitrator के रूप में नियुक्त किया जाना भारत की legal expertise की global recognition को दिखा सकता है।

चंद्रचूड़ के मामले में यह नियुक्ति इसलिए खास है क्योंकि वह हाल तक भारत की सर्वोच्च अदालत के प्रमुख रहे हैं और संवैधानिक तथा commercial law के कई महत्वपूर्ण मामलों का हिस्सा रहे हैं।

अब दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि Oschadbank और Russia के बीच नया arbitration किस दिशा में जाता है।

अगर tribunal Oschadbank के claims को स्वीकार करता है तो compensation का सवाल सामने आएगा। अगर Russia के objections सफल होते हैं तो claim jurisdiction या merits के स्तर पर कमजोर हो सकता है। फिलहाल किसी अंतिम परिणाम की भविष्यवाणी करना सही नहीं होगा।

यह भी याद रखना जरूरी है कि Oschadbank की ओर से Russia पर लगाए गए “assets seize” या expropriation के आरोप बैंक के दावे हैं। किसी नए arbitration में अंतिम कानूनी निष्कर्ष tribunal की सुनवाई और evidence के आधार पर ही आएगा। Oschadbank ने अपने आधिकारिक बयान में रूस पर Donetsk, Luhansk, Kherson और Zaporizhzhia में assets और operations के नुकसान का आरोप लगाया है।

इसी तरह पुराने Crimea case में tribunal ने indirect expropriation का निष्कर्ष निकाला था और Oschadbank के पक्ष में compensation award किया था।

इसलिए मौजूदा मामले को पुराने case से जोड़कर समझना उपयोगी है, लेकिन दोनों proceedings को एक ही मामला मानना गलत होगा।

कुल मिलाकर, पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ का रूस की ओर से arbitrator के रूप में नियुक्त होना भारत और अंतरराष्ट्रीय कानूनी जगत दोनों के लिए बड़ी खबर है। विवाद यूक्रेन के सरकारी बैंक Oschadbank और रूस के बीच है तथा चार यूक्रेनी क्षेत्रों में बैंक की संपत्तियों और operations को हुए नुकसान से संबंधित है। अप्रैल 2026 में Oschadbank ने इस नए international arbitration की शुरुआत की थी।

यह मामला आने वाले समय में international investment law, wartime property claims और sovereign assets की enforcement के लिए भी महत्वपूर्ण precedent बन सकता है। हालांकि tribunal का final फैसला आने में समय लग सकता है और अभी यह कहना संभव नहीं है कि किस पक्ष के दावे स्वीकार होंगे।

डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति से इस केस पर भारत में भी नजर रहेगी। लेकिन उनकी भूमिका को राजनीतिक मध्यस्थ के बजाय Russia-appointed arbitrator के रूप में समझना सबसे सही होगा।


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http://पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ रूस-यूक्रेन Oschadbank arbitration case

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