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ट्रम्प से विवाद के बीच मेलोनी UN महासभा नहीं जाएंगी, 15 साल बाद इटली के PM की गैरमौजूदगी

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी इस साल न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UN General Assembly में शामिल नहीं होंगी। मेलोनी की अनुपस्थिति ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ उनके संबंधों में हाल के महीनों में सार्वजनिक तनाव देखने को मिला है। हालांकि, मेलोनी ने अपनी अनुपस्थिति की आधिकारिक वजह व्यस्त कार्यक्रम और इटली में निपटाए जाने वाले कई महत्वपूर्ण मामलों को बताया है। उनकी जगह इटली के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी संयुक्त राष्ट्र में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।

मेलोनी का UN महासभा में शामिल नहीं होना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि करीब 15 वर्षों से इटली के किसी प्रधानमंत्री की हाई-लेवल UN General Debate से ऐसी अनुपस्थिति नहीं हुई थी। हालांकि 2020 में कोरोना महामारी के कारण संयुक्त राष्ट्र महासभा का आयोजन बड़े पैमाने पर वर्चुअल तरीके से हुआ था। इस बार इटली पूरी तरह महासभा से दूर नहीं है, बल्कि सरकार की ओर से विदेश मंत्री ताजानी वहां मौजूद हैं।

मेलोनी ने अपनी गैर-मौजूदगी को व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से जोड़ते हुए कहा है कि हाल के समय में वह लगातार कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शामिल हुई हैं और अब इटली में कई महत्वपूर्ण dossiers पर ध्यान देना जरूरी है। इतालवी सरकार के सूत्रों ने भी कहा कि यह फैसला UN से दूरी बनाने का संकेत नहीं है। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र इटली के लिए एक महत्वपूर्ण संस्था है और उनकी सरकार UN की भूमिका को महत्वपूर्ण मानती है।

मेलोनी की अनुपस्थिति की खबर ऐसे समय सामने आई है जब न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा का हाई-लेवल सप्ताह चल रहा है। इस वर्ष UNGA में युद्ध, वैश्विक सुरक्षा, मध्य पूर्व, यूक्रेन, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका जैसे कई बड़े मुद्दे चर्चा में हैं। इटली ने भी इन विषयों पर अपनी प्राथमिकताएं पहले ही स्पष्ट की थीं। इतालवी विदेश मंत्रालय के अनुसार इटली यूक्रेन, मध्य पूर्व और होर्मुज क्षेत्र के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा, उर्वरक उपलब्धता, समुद्री आवाजाही, अफ्रीका, critical minerals और UN सुधार जैसे मुद्दों पर ध्यान दे रहा है।

मेलोनी की अनुपस्थिति का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ उनके हालिया संबंध हैं। दोनों नेताओं के बीच पहले काफी नजदीकी दिखाई देती थी। 2025 में ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के समय मेलोनी उन चुनिंदा यूरोपीय नेताओं में थीं जिनके साथ ट्रम्प के संबंधों को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना गया। लेकिन 2026 में ईरान और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए।

जून 2026 में ट्रम्प और मेलोनी के बीच विवाद तब और चर्चा में आया जब ट्रम्प ने दावा किया कि मेलोनी ने उनके साथ फोटो लेने की इच्छा जताई थी। मेलोनी ने इस दावे पर आपत्ति जताई और इटली की सरकार ने भी ट्रम्प की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। इस विवाद के बाद दोनों नेताओं के संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में काफी चर्चा हुई।

इसी वजह से मेलोनी का UN महासभा में नहीं जाना कई रिपोर्टों में ट्रम्प से संभावित आमने-सामने की मुलाकात से बचने के संदर्भ में भी देखा गया है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। मेलोनी ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा कि वह ट्रम्प से विवाद के कारण न्यूयॉर्क नहीं जा रही हैं। उनका बताया कारण व्यस्त कार्यक्रम और इटली में कई जरूरी मामलों पर ध्यान देना है। इसलिए ट्रम्प विवाद को reported context के रूप में देखना चाहिए, न कि अनुपस्थिति का आधिकारिक कारण।

मेलोनी की जगह एंटोनियो ताजानी का प्रतिनिधित्व करना भी महत्वपूर्ण है। ताजानी न केवल इटली के विदेश मंत्री हैं बल्कि उप प्रधानमंत्री भी हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में इटली की भागीदारी को लेकर स्पष्ट किया कि मेलोनी की अनुपस्थिति का मतलब संयुक्त राष्ट्र से इटली की दूरी नहीं है। उनके अनुसार इटली UN को वैश्विक शांति और सहयोग के लिए महत्वपूर्ण संस्था मानता है।

इटली की सरकार ने यह भी बताया है कि वह UN के विभिन्न कार्यक्रमों और चर्चाओं में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक इटली की प्राथमिकताओं में यूक्रेन और मध्य पूर्व के संकट के साथ होर्मुज क्षेत्र की सुरक्षा भी शामिल है। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा और critical minerals जैसे आर्थिक एवं रणनीतिक विषयों को भी महत्व दिया जा रहा है।

UN महासभा में मेलोनी की अनुपस्थिति ऐसे समय हुई है जब कई प्रमुख वैश्विक नेता भी व्यक्तिगत रूप से न्यूयॉर्क नहीं पहुंचे हैं। 2026 की महासभा में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मौजूद हैं, जबकि रूस और चीन के शीर्ष नेता व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए हैं और उनके देशों का प्रतिनिधित्व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है।

इससे यह भी पता चलता है कि किसी नेता का UNGA में व्यक्तिगत रूप से मौजूद न होना हमेशा किसी संस्था या अंतरराष्ट्रीय मंच से दूरी का सीधा संकेत नहीं होता। कई बार घरेलू राजनीतिक, प्रशासनिक या अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के कारण नेता अपनी जगह दूसरे वरिष्ठ मंत्री को प्रतिनिधित्व के लिए भेजते हैं।

मेलोनी की अनुपस्थिति को लेकर इटली के भीतर भी राजनीतिक चर्चा हुई है। सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि प्रधानमंत्री का लगातार अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शामिल होना और फिर घरेलू मामलों को संभालना जरूरी है। सितंबर की शुरुआत में इतालवी मीडिया ने रिपोर्ट किया था कि मेलोनी पहले ही कई अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों में हिस्सा ले चुकी थीं और उन्होंने आने वाले अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में कुछ प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री को सौंपने की नीति का संकेत दिया था।

यह फैसला इटली की विदेश नीति के लिहाज से भी ध्यान खींचता है। मेलोनी के नेतृत्व में इटली ने अमेरिका और यूरोप के बीच संबंधों में संतुलन बनाने की कोशिश की है। ट्रम्प के साथ उनके शुरुआती संबंध अपेक्षाकृत मजबूत माने जाते थे, लेकिन बाद में कुछ मुद्दों पर दोनों की सार्वजनिक स्थिति अलग दिखाई दी। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार 2026 में ईरान युद्ध को लेकर भी दोनों के बीच मतभेद उभरे थे।

हालांकि मेलोनी और ट्रम्प के बीच मतभेद होने के बावजूद दोनों देशों के बीच संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। अमेरिका और इटली NATO के सदस्य हैं और दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार और यूरोपीय-अटलांटिक सहयोग जैसे कई साझा मुद्दे हैं। इसलिए किसी एक UN कार्यक्रम में मेलोनी की अनुपस्थिति को पूरे अमेरिका-इटली संबंधों का अंतिम संकेत मानना उचित नहीं होगा।

UN महासभा में इटली की भागीदारी की बात करें तो ताजानी ने साफ कहा है कि इटली संयुक्त राष्ट्र को महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने यह भी कहा कि इटली UN के भीतर कई मुद्दों पर सक्रिय है। इसका मतलब है कि मेलोनी की व्यक्तिगत अनुपस्थिति के बावजूद इतालवी सरकार अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगे बढ़ा रही है।

इस साल की UN महासभा में मध्य पूर्व का संकट प्रमुख विषयों में शामिल है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने 22 सितंबर को महासभा को संबोधित किया और ईरान से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्थिति रखी। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा हुई।

ऐसे अंतरराष्ट्रीय माहौल में इटली के लिए भी मध्य पूर्व और यूरोपीय सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इटली ने विशेष रूप से होर्मुज क्षेत्र और समुद्री आवाजाही को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है, इसलिए इटली की विदेश नीति में इसका स्थान महत्वपूर्ण हो सकता है।

मेलोनी की अनुपस्थिति का एक और पहलू यह है कि इस बार उन्हें ट्रम्प के साथ किसी संभावित UNGA बैठक या अनौपचारिक बातचीत का सामना नहीं करना पड़ेगा। मीडिया रिपोर्टों ने इस पहलू को दोनों नेताओं के हालिया विवाद के संदर्भ में प्रमुखता दी है। लेकिन यह कहना कि मेलोनी केवल ट्रम्प से बचने के लिए UNGA में नहीं गईं, उपलब्ध सार्वजनिक बयानों से स्थापित तथ्य नहीं है।

राजनीतिक नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंध अक्सर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन सरकारों के बीच संबंध केवल व्यक्तिगत मुलाकातों पर निर्भर नहीं होते। अमेरिका और इटली के बीच संस्थागत और रणनीतिक संबंध कई स्तरों पर चलते हैं। NATO, यूरोपीय संघ, व्यापार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रहता है।

इटली की तरफ से UN में ताजानी की मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विदेश मंत्री अंतरराष्ट्रीय बैठकों में सरकार की आधिकारिक विदेश नीति को प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे मेलोनी की अनुपस्थिति के बावजूद इटली के हित और प्राथमिकताएं UN के मंच पर रखी जा रही हैं।

मेलोनी की अनुपस्थिति से जुड़ी 15 साल वाली बात भी ध्यान देने योग्य है। रिपोर्टों के अनुसार लगभग 15 वर्षों के दौरान किसी इतालवी प्रधानमंत्री ने UN General Assembly के हाई-लेवल डिबेट से इस तरह अनुपस्थिति नहीं दर्ज कराई थी। 2020 का वर्ष अलग था क्योंकि कोविड-19 महामारी के दौरान UNGA का आयोजन बड़े पैमाने पर वर्चुअल तरीके से हुआ था।

इसलिए 2026 में मेलोनी का न्यूयॉर्क नहीं जाना इटली की राजनीतिक और कूटनीतिक खबरों में महत्वपूर्ण घटना बन गया है। यह केवल एक प्रधानमंत्री की यात्रा रद्द होने की खबर नहीं है, बल्कि इसके साथ घरेलू व्यस्तता, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, अमेरिका के साथ संबंध और संयुक्त राष्ट्र में इटली की भूमिका जैसे कई पहलू जुड़े हैं।

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार मेलोनी ने अपनी अनुपस्थिति के लिए व्यस्त कार्यक्रम और इटली में जरूरी मामलों को वजह बताया है। दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे ट्रम्प के साथ हालिया सार्वजनिक विवाद के संदर्भ में भी देखा है। दोनों बातों को अलग-अलग समझना जरूरी है। एक आधिकारिक रूप से बताई गई वजह है, जबकि दूसरी राजनीतिक और कूटनीतिक context में की गई रिपोर्टिंग है।

इटली के विदेश मंत्री ताजानी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति को संयुक्त राष्ट्र से इटली की दूरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार इटली UN को शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण संस्था मानता है।

आने वाले दिनों में यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और इटली के संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और क्या मेलोनी तथा ट्रम्प के बीच किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सीधी मुलाकात होती है। फिलहाल दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के रणनीतिक संबंध बने हुए हैं।

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http://इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने 2026 UN महासभा में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।

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