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काशी विश्वनाथ में रंगभरी एकादशी से शुरू हुई होली, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

रंगभरी एकादशी के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित Kashi Vishwanath Temple में आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। बाबा विश्वनाथ के दरबार में इस दिन से होली के उत्सव की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक फैल गईं। घंटों तक “हर हर महादेव” के जयकारों के बीच मंदिर परिसर गुलाल और पुष्पों की खुशबू से महक उठा।

रंगभरी एकादशी का धार्मिक महत्व बेहद खास है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर विवाह के बाद भगवान शिव पहली बार माता पार्वती के साथ काशी लौटे थे। उसी उल्लास की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन बाबा को गुलाल अर्पित कर भक्त अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सुबह से ही तैनात रहे। सीसीटीवी निगरानी, बैरिकेडिंग और अलग-अलग प्रवेश-निकास मार्गों के जरिए व्यवस्था को सुचारु रखा गया।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर रंगभरी एकादशी का आयोजन देखने को मिला। चौड़ी सड़कों और विशाल परिसर ने श्रद्धालुओं को काफी सुविधा दी। कॉरिडोर के जरिए गंगा घाट से सीधे मंदिर तक पहुंचना आसान हो गया है, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी है।

मंदिर में विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा विश्वनाथ को चांदी के सिंहासन पर विराजमान कर अबीर-गुलाल और पुष्पों से अलंकृत किया गया। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। इसके बाद भक्तों ने गुलाल अर्पित कर होली के गीतों के साथ उत्सव मनाया।

स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक फाग और काशी की लोकधुनों पर प्रस्तुति दी। ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मंदिर परिसर में रंगों की बौछार के बीच श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आए।

वाराणसी के व्यापारियों के लिए भी यह अवसर खास रहा। होली से पहले इस पर्व के कारण बाजारों में रौनक बढ़ गई। गुलाल, पूजा सामग्री और मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ देखी गई। होटल और गेस्ट हाउसों में बुकिंग फुल रही, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिला।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक पर्यटन भारत की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे न केवल आस्था का केंद्र सशक्त हुआ है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

रंगभरी एकादशी के साथ ही काशी में होली का रंग चढ़ने लगता है। आने वाले दिनों में गंगा घाटों और गलियों में फाग गीतों की गूंज सुनाई देगी। काशी की होली अपनी अलग पहचान रखती है—यहां रंगों के साथ भक्ति और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिलता है।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और अफवाहों से बचें। स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।

कुल मिलाकर, रंगभरी एकादशी पर काशी विश्वनाथ मंदिर में उमड़ा जनसैलाब आस्था, संस्कृति और उत्सव का प्रतीक बन गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि काशी की जीवंत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाता है।

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