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होर्मुज से मुंबई पहुंचा तेल टैंकर, जंग के बीच भारत को बड़ी राहत

मध्य-पूर्व में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत के लिए राहत की एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। लंबे समय से अनिश्चितता और जोखिम के माहौल के बीच आखिरकार कच्चा तेल लेकर एक बड़ा टैंकर सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि यह टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हुए मुंबई पहुंचा है और इसके साथ ही ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंता में कुछ हद तक कमी आई है। इस घटनाक्रम को भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण तेल आपूर्ति की वैश्विक श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी।

जानकारी के अनुसार यह टैंकर लाइबेरिया के झंडे वाला जहाज है, जिसने लगभग 1.35 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर भारत की ओर यात्रा शुरू की थी। विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। इस रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार गुजरता है। ऐसे में जब इस क्षेत्र में युद्ध या तनाव की स्थिति बनती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ जाती है।

हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई देशों को तेल आपूर्ति प्रभावित होने का डर था। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। लेकिन इस टैंकर के सुरक्षित भारत पहुंचने से यह संकेत मिला है कि तेल आपूर्ति की प्रक्रिया अभी भी जारी है और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रयासरत है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात पर निर्भर करता है। इसलिए यदि मध्य-पूर्व में किसी प्रकार की अस्थिरता पैदा होती है तो उसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

बताया जा रहा है कि यह टैंकर 1 मार्च को सऊदी अरब के रस तनुरा बंदरगाह से रवाना हुआ था। इसके बाद 8 से 9 मार्च के बीच यह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के संवेदनशील हिस्से से होकर गुजरा। इस दौरान जहाज के कप्तान ने सुरक्षा कारणों से एक महत्वपूर्ण फैसला लिया। जहाज का AIS ट्रांसपोंडर बंद कर दिया गया ताकि इसकी लोकेशन सार्वजनिक रूप से ट्रैक न हो सके।

AIS सिस्टम आमतौर पर जहाजों की पहचान और उनकी स्थिति को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरते समय कई बार जहाज अपनी सुरक्षा के लिए इसे बंद कर देते हैं ताकि संभावित खतरे से बचा जा सके।

बताया जा रहा है कि जहाज ने कुछ समय बाद फिर से ट्रैकिंग सिस्टम चालू किया और इसके बाद 12 मार्च को यह मुंबई के जवाहर द्वीप टर्मिनल पर पहुंच गया। इस टैंकर के पहुंचने के बाद भारत में तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कुछ हद तक कम हुई है।

विदेश मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत इस समय कई देशों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि तेल आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आए। बताया जा रहा है कि होर्मुज मार्ग से आने वाले लगभग 20 और टैंकरों को लेकर भी बातचीत जारी है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि तेल आपूर्ति के विभिन्न स्रोत बने रहें। यदि किसी एक क्षेत्र में संकट पैदा हो जाए तो दूसरे विकल्पों से आपूर्ति जारी रखी जा सके।

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश की है। देश सऊदी अरब, इराक, यूएई, रूस और अमेरिका जैसे कई देशों से तेल आयात करता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित न हो।

हालांकि मध्य-पूर्व अब भी भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति क्षेत्र बना हुआ है। इस क्षेत्र से भारत को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल मिलता है। इसलिए यहां होने वाली किसी भी राजनीतिक या सैन्य गतिविधि का असर सीधे भारत पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। यदि किसी कारण से यह मार्ग बंद हो जाए तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी संकट पैदा हो सकता है।

हाल ही में ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने भी इस क्षेत्र को लेकर सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो होर्मुज जलमार्ग को बंद किया जा सकता है। हालांकि इस तरह का कदम उठाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है क्योंकि इससे कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होगी।

भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सरकार के उच्च स्तर पर कई बैठकें हो चुकी हैं जिनमें ऊर्जा सुरक्षा को लेकर रणनीति बनाई जा रही है। बताया जा रहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो भारत अपने रणनीतिक तेल भंडार का भी उपयोग कर सकता है।

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार किसी भी देश के लिए आपातकालीन स्थिति में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। भारत ने विशाखापत्तनम, मंगलूरू और पाडुर जैसे स्थानों पर बड़े तेल भंडार बनाए हैं ताकि संकट की स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।

इस बीच घरेलू बाजार में भी तेल आपूर्ति की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। ऊर्जा कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखें और किसी प्रकार की कमी न होने दें।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर तेल बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है। इसलिए भारत को दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी ताकि भविष्य में ऊर्जा संकट से बचा जा सके।

इसके लिए सरकार नवीकरणीय ऊर्जा पर भी जोर दे रही है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हाइड्रोजन जैसे विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम की जा सके।

हालांकि फिलहाल पेट्रोलियम उत्पाद अभी भी देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं। इसलिए कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करना भारत के लिए प्राथमिकता बना हुआ है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में यदि मध्य-पूर्व की स्थिति स्थिर रहती है तो तेल आपूर्ति सामान्य बनी रह सकती है। लेकिन यदि तनाव बढ़ता है तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।

फिलहाल मुंबई पहुंचा यह टैंकर भारत के लिए राहत की खबर माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिला है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति की प्रक्रिया जारी है और भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है।

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