भारत और रूस के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक रिश्तों को लेकर एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिली है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सितंबर में भारत आने की संभावना मजबूत हो गई है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 24 अगस्त 2026 को मॉस्को में पुतिन से मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत संदेश उन्हें सौंपा। इस दौरान जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आगामी SCO Summit में पुतिन से मिलने की उम्मीद कर रहे हैं और इसके बाद भारत में होने वाले BRICS Summit में उनका स्वागत करना चाहते हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब भारत और रूस के बीच व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु सहयोग और रक्षा समेत कई क्षेत्रों में संबंध लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। जयशंकर ने पुतिन के साथ बातचीत में कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग काफी तेजी से बढ़ा है। रूस की ओर से भी भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुतिन की भारत यात्रा को लेकर सिर्फ सामान्य कूटनीतिक चर्चा नहीं हो रही, बल्कि BRICS Summit के संदर्भ में उनकी मौजूदगी की संभावना पहले से सामने आ चुकी है। मई 2026 में रूस की ओर से संकेत दिया गया था कि पुतिन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit में शामिल होंगे।
अब जयशंकर की ताजा मॉस्को यात्रा और पुतिन के साथ हुई बातचीत ने इस संभावित यात्रा को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
जयशंकर 23-24 अगस्त को रूस की आधिकारिक यात्रा पर थे। इस दौरान उन्होंने भारत-रूस Inter-Governmental Commission on Trade, Economic, Scientific, Technological and Cultural Cooperation यानी IRIGC-TEC की 27वीं बैठक की सह-अध्यक्षता की। इसके अलावा उनकी रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बातचीत हुई।
पुतिन के साथ मुलाकात में जयशंकर ने प्रधानमंत्री मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं और उनका निजी संदेश सौंपा। इसके बाद उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग के कई क्षेत्रों का उल्लेख किया। इनमें व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा और अन्य आर्थिक एवं रणनीतिक मुद्दे शामिल हैं।
जयशंकर ने साफ तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आगामी SCO Summit में पुतिन से मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। इसके बाद मोदी भारत में BRICS Summit के लिए रूसी राष्ट्रपति का स्वागत करना चाहते हैं। दोनों नेताओं की वार्षिक भारत-रूस बैठक भी आपसी सुविधा के अनुसार आगे होने की बात कही गई है।
इससे भारत-रूस संबंधों में आने वाले कुछ सप्ताह काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं। पहले SCO Summit और उसके बाद BRICS Summit में दोनों नेताओं की मुलाकात की संभावना है।
अगर पुतिन सितंबर में नई दिल्ली आते हैं तो यह उनकी 2026 में भारत की एक और महत्वपूर्ण यात्रा होगी। पुतिन इससे पहले दिसंबर 2025 में 23वें India-Russia Annual Summit के लिए भारत आए थे। उस यात्रा में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया था।
भारत के लिए पुतिन की संभावित यात्रा केवल एक द्विपक्षीय बैठक नहीं होगी। इस समय भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में होने वाला Summit संगठन के भविष्य की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
BRICS पिछले कुछ वर्षों में अपने विस्तार के कारण पहले की तुलना में बड़ा समूह बन चुका है। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सदस्य देशों के बीच व्यापार, वित्त, विकास, ऊर्जा, वैश्विक शासन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत और रूस BRICS के संस्थापक प्रमुख देशों में शामिल हैं और दोनों देशों ने इस मंच पर लंबे समय से सहयोग किया है। 2025 की India-Russia Annual Summit के संयुक्त बयान में भी दोनों देशों ने BRICS साझेदारी को मजबूत करने और expanded BRICS में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। रूस ने 2026 की भारतीय BRICS अध्यक्षता के लिए पूर्ण समर्थन जताया था।
इसलिए पुतिन की संभावित भारत यात्रा को bilateral relations के साथ-साथ BRICS diplomacy के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
भारत और रूस के रिश्तों में ऊर्जा क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। पिछले वर्षों में रूस भारत के प्रमुख crude oil suppliers में शामिल रहा है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच nuclear energy और fertilizers को लेकर भी सहयोग जारी है।
जयशंकर ने पुतिन के साथ बातचीत में इन्हीं क्षेत्रों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का आर्थिक सहयोग काफी महत्वपूर्ण तरीके से बढ़ा है।
उर्वरक का मुद्दा भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए fertilizer supply अहम है। रूस भारत के लिए प्रमुख fertilizer suppliers में से एक है। ऐसे में दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में स्थिर आपूर्ति और व्यापार पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।
परमाणु ऊर्जा भी भारत-रूस संबंधों का एक पुराना और रणनीतिक क्षेत्र है। रूस ने भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दोनों देशों के बीच civil nuclear cooperation लंबे समय से चल रहा है।
रक्षा सहयोग भी दोनों देशों के रिश्तों का पारंपरिक आधार रहा है। भारत और रूस ने कई दशकों में aircraft, missiles, helicopters, tanks और naval systems समेत कई क्षेत्रों में सहयोग किया है। हाल के वर्षों में भारत ने अपनी defence procurement policy में diversification और domestic manufacturing पर जोर बढ़ाया है, लेकिन रूस अभी भी भारत की defence ecosystem में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है।
ऐसे में पुतिन और मोदी की अगली बैठक में defence cooperation भी व्यापक रणनीतिक बातचीत का हिस्सा हो सकता है, हालांकि किसी specific agreement की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
रूस और भारत के बीच व्यापार में भी हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पुतिन ने जयशंकर से मुलाकात के दौरान भारत-रूस व्यापार में वृद्धि का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत ध्यान को दिया।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। रूस से भारत की energy और अन्य imports काफी बढ़ी हैं, जबकि भारत से रूस को होने वाला export comparatively कम रहा है।
दोनों देश अब trade balance सुधारने और Indian exports बढ़ाने के रास्ते तलाश रहे हैं। Pharmaceuticals, agriculture products, machinery, chemicals, textiles और अन्य क्षेत्रों में भारतीय exports बढ़ाने की संभावनाओं पर बातचीत हो सकती है।
जयशंकर की मॉस्को यात्रा का मुख्य उद्देश्य भी केवल राजनीतिक संवाद नहीं था। IRIGC-TEC की बैठक में आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इससे पता चलता है कि भारत-रूस संबंधों को केवल defence और oil तक सीमित रखने के बजाय व्यापक आर्थिक partnership की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
भारत के लिए रूस के साथ संबंधों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दोनों देशों के बीच पश्चिमी देशों के साथ अलग-अलग संबंधों के बावजूद रणनीतिक संवाद जारी है।
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं, जबकि साथ ही यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों के साथ भी अपने strategic partnerships को मजबूत किया है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि उसके विदेश संबंध किसी एक देश के खिलाफ नहीं बल्कि उसके राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं।
पुतिन की संभावित भारत यात्रा इसी स्वतंत्र विदेश नीति के संदर्भ में भी देखी जाएगी।
दूसरी तरफ रूस के लिए भारत के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना एशिया में उसकी diplomatic position के लिए महत्वपूर्ण है। पश्चिमी देशों के साथ रूस के संबंधों में लंबे समय से तनाव है और ऐसे माहौल में भारत जैसे बड़े देश के साथ strategic partnership Moscow के लिए विशेष महत्व रखती है।
BRICS Summit इस संवाद के लिए एक बड़ा मंच उपलब्ध कराएगा।
इस साल SCO Summit भी दोनों नेताओं की मुलाकात का संभावित पहला अवसर हो सकता है। जयशंकर ने खुद पुतिन से कहा कि मोदी आगामी SCO Summit में उनसे मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।
SCO और BRICS दोनों मंचों पर भारत और रूस की भागीदारी महत्वपूर्ण है। हालांकि दोनों संगठनों का उद्देश्य और agenda अलग है। SCO का फोकस मुख्य रूप से Eurasian regional cooperation, security और economic issues पर है, जबकि BRICS का दायरा global economic governance और emerging economies के सहयोग तक विस्तृत है।
इसलिए दोनों बैठकों में अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत की संभावना रहेगी।
मोदी-पुतिन की संभावित मुलाकात में Ukraine war भी एक महत्वपूर्ण विषय हो सकता है। भारत लगातार रूस-यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान और बातचीत एवं कूटनीति के जरिए रास्ता निकालने की बात करता रहा है।
भारत ने युद्ध के दौरान रूस और Ukraine दोनों के साथ संवाद बनाए रखा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई मौकों पर कहा है कि युद्ध का समाधान बातचीत और diplomacy से होना चाहिए।
अगर पुतिन भारत आते हैं तो दोनों नेता Ukraine conflict, global security और बदलते geopolitical environment पर भी चर्चा कर सकते हैं। हालांकि आगामी बैठक का आधिकारिक agenda अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुआ है।
अमेरिका और रूस के बीच संबंधों की स्थिति भी भारत-रूस संबंधों पर अप्रत्यक्ष असर डालती है। भारत एक तरफ अमेरिका के साथ strategic partnership मजबूत कर रहा है, वहीं रूस के साथ अपने पारंपरिक संबंध बनाए रखता है।
यह भारत की multi-alignment diplomacy का उदाहरण है।
पुतिन की भारत यात्रा की एक और वजह BRICS के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी है। BRICS में नए सदस्य जुड़ने के बाद संगठन का global economic और political weight बढ़ा है। भारत चाहता है कि BRICS का इस्तेमाल developing countries की आवाज को मजबूत करने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग को आगे बढ़ाने के लिए किया जाए।
रूस भी BRICS को पश्चिमी देशों के प्रभाव से अलग एक व्यापक international platform के रूप में देखता है।
लेकिन भारत और रूस की प्राथमिकताओं में पूरी समानता जरूरी नहीं है। भारत BRICS को किसी anti-Western alliance के रूप में नहीं देखता। नई दिल्ली का जोर inclusive और multipolar global order पर है।
यही कारण है कि भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान रूस के साथ cooperation के साथ-साथ अन्य सदस्य देशों के साथ भी संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
पुतिन की यात्रा में bilateral summit की संभावना भी महत्वपूर्ण होगी। अगर दोनों नेता सितंबर में अलग से मुलाकात करते हैं तो annual India-Russia Summit की दिशा भी स्पष्ट हो सकती है।
2025 में दोनों नेताओं की वार्षिक बैठक भारत में हुई थी। दोनों देशों के बीच annual summit mechanism कई वर्षों से strategic partnership का एक महत्वपूर्ण institutional pillar रहा है।
जयशंकर ने पुतिन को यह भी बताया कि दोनों नेताओं की annual summit आगे आपसी सुविधा के अनुसार हो सकती है। इससे संकेत मिलता है कि इस साल एक और formal bilateral meeting की संभावना बनी हुई है।
पुतिन की यात्रा के दौरान कई agreements या MoUs की संभावना पर भी नजर रहेगी, लेकिन अभी किसी specific deal की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
व्यापार बढ़ाने के लिए payment mechanisms, logistics, shipping connectivity और export diversification जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
भारत और रूस के बीच direct connectivity बढ़ाने की कोशिशें भी चलती रही हैं। International North-South Transport Corridor और Chennai-Vladivostok maritime corridor जैसे projects दोनों देशों के बीच connectivity सुधारने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा हैं।
अगर व्यापार को energy imports से आगे बढ़ाकर ज्यादा balanced बनाना है तो logistics और payment systems का सुधार जरूरी होगा।
रक्षा क्षेत्र में भी भारत का जोर अब Make in India और technology transfer पर बढ़ रहा है। इसलिए भविष्य के India-Russia defence cooperation में केवल finished weapons की खरीद के बजाय joint production, technology cooperation और local manufacturing जैसे विषय अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
पुतिन और मोदी की बैठक में इन व्यापक मुद्दों पर चर्चा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन final agenda आधिकारिक तौर पर सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
भारत में पुतिन की पिछली यात्रा दिसंबर 2025 में हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने India-Russia strategic partnership को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। दोनों देशों ने BRICS, SCO और अन्य multilateral forums में सहयोग जारी रखने की बात भी कही थी।
2026 में भारत की BRICS chairship इस partnership को एक नया multilateral dimension देती है।
अगर पुतिन सितंबर में नई दिल्ली आते हैं तो इस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर होगी। खासकर अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे प्रमुख देशों के लिए भी यह यात्रा महत्वपूर्ण diplomatic signal होगी।
हालांकि भारत के लिए इसका मूल उद्देश्य अपने national interests के अनुरूप रूस के साथ संबंधों को आगे बढ़ाना होगा।
भारत के सामने इस समय energy security, defence modernization, technology access, fertilizer supply और export growth जैसी कई चुनौतियां हैं। रूस इन क्षेत्रों में कुछ महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने वाला partner है।
साथ ही भारत को अमेरिका, यूरोप, Japan, Australia और Middle East के साथ अपने संबंधों को भी संतुलित रखना है। इसलिए New Delhi की diplomacy का बड़ा test यही है कि वह अलग-अलग शक्तियों के बीच अपने strategic space को बनाए रखे।
पुतिन की संभावित यात्रा इस diplomacy का एक और उदाहरण बन सकती है।
फिलहाल 24 अगस्त की जयशंकर-पुतिन बैठक से यह साफ है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क जारी है। जयशंकर ने मोदी का personal message पुतिन को सौंपा और भारत में BRICS Summit के लिए उन्हें आमंत्रित करने की बात कही।
रूस की ओर से पहले ही सितंबर के BRICS Summit में पुतिन की भागीदारी को लेकर संकेत दिए जा चुके हैं। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को BRICS Summit प्रस्तावित है।
इसलिए अब सबसे बड़ा सवाल यात्रा की संभावना से ज्यादा यह है कि मोदी-पुतिन मुलाकात में कौन-कौन से बड़े फैसले होते हैं।
क्या भारत-रूस व्यापार को संतुलित करने के लिए नई पहल होगी? क्या energy cooperation का विस्तार होगा? क्या defence manufacturing में नए agreements होंगे? क्या Ukraine conflict पर दोनों देशों के बीच कोई नई बातचीत होगी? और BRICS के भविष्य को लेकर भारत और रूस की रणनीति कितनी समान होगी?
इन सवालों के जवाब सितंबर की बैठकों में सामने आ सकते हैं।
फिलहाल भारत और रूस ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि दोनों देशों की strategic partnership बदलते वैश्विक समीकरणों के बावजूद जारी है।
जयशंकर की मॉस्को यात्रा और पुतिन को मोदी का संदेश इस partnership की ताजा कड़ी है। अगर पुतिन सितंबर में नई दिल्ली पहुंचते हैं, तो BRICS Summit के साथ उनकी मोदी से होने वाली मुलाकात भारत-रूस संबंधों और व्यापक वैश्विक कूटनीति के लिए इस साल की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक हो सकती है।
पुतिन सितंबर में आएंगे भारत? मोदी से जल्द मुलाकात, जयशंकर ने दिया BRICS Summit का न्योता
http://प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत रूस बैठक
