बॉलीवुड अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा आज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक जाना-पहचाना नाम हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। पर्दे पर स्टाइलिश और आत्मविश्वासी नजर आने वाले सिद्धार्थ ने अपने करियर के शुरुआती दिनों में आर्थिक परेशानियों, अनिश्चितता और लगातार कोशिशों का सामना किया। एक समय ऐसा भी था जब उनके हाथ से पहली फिल्म निकल गई थी और जिस प्रोजेक्ट से उन्हें बॉलीवुड में शुरुआत करने की उम्मीद थी, वह आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद उन्होंने मुंबई में रुककर फिल्म इंडस्ट्री को करीब से समझने और अपने काम को सीखने का फैसला किया।
सिद्धार्थ ने अलग-अलग बातचीत में अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया है कि मुंबई में शुरुआती समय में जिंदगी काफी साधारण थी। वह और उनके साथ रहने वाले लोग सीमित साधनों में गुजारा करते थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन दिनों वह सुबह उठकर अंडे और ब्रेड का इंतजाम करते थे। बाद के एक इंटरव्यू में उन्होंने यह भी बताया कि शकरकंद उनका “पेटेंट ब्रेकफास्ट” हुआ करता था, क्योंकि वह सस्ता था और उन्हें प्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट के लिए उपयोगी लगता था।
उनकी कहानी का दिलचस्प हिस्सा यह है कि शुरुआती असफलता के बावजूद उन्होंने मुंबई छोड़ने का फैसला नहीं किया। जिस फिल्म से उनका एक्टिंग करियर शुरू हो सकता था, उसके बंद होने के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को समझने के लिए असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया। इसी रास्ते से वह करण जौहर की फिल्म My Name Is Khan की टीम का हिस्सा बने। बाद में उन्हें Student of the Year के लिए ऑडिशन का मौका मिला और 2012 में उन्होंने वरुण धवन और आलिया भट्ट के साथ अपना फिल्मी डेब्यू किया।
सिद्धार्थ के शुरुआती संघर्ष को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि वह फिल्मी परिवार से नहीं आए थे। मॉडलिंग के दौरान उन्होंने फिल्मों के लिए ऑडिशन देना शुरू किया था। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि दिल्ली में एक विज्ञापन एजेंसी के साथ मॉडलिंग करते समय उन्होंने एक फिल्म के लिए ऑडिशन दिया था। यह फिल्म अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनने वाली थी, लेकिन किसी कारण से वह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। इसके बाद उन्होंने मुंबई में रुकने और फिल्म निर्माण सीखने का फैसला किया।
यह फैसला उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। अगर वह पहली फिल्म बंद होने के बाद वापस लौट जाते तो शायद उनका सफर अलग होता। लेकिन उन्होंने सेट पर काम करने, फिल्म निर्माण की प्रक्रिया देखने और इंडस्ट्री को समझने का रास्ता चुना। असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करते हुए उन्हें कैमरे के पीछे से फिल्म बनाने की प्रक्रिया को समझने का मौका मिला।
करण जौहर की My Name Is Khan में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम करने का अनुभव भी उनके लिए महत्वपूर्ण रहा। इससे उन्हें बड़े फिल्म सेट का माहौल देखने, कलाकारों के साथ काम करने और शूटिंग की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला। बाद में यही अनुभव एक अभिनेता के तौर पर काम करते समय उनके लिए उपयोगी रहा।
सिद्धार्थ के संघर्ष की कहानी में भोजन का किस्सा भी काफी चर्चा में रहा है। उन्होंने बताया था कि मुंबई में संघर्ष के दौरान उनका जीवन बहुत साधारण था। एक बातचीत में उन्होंने बताया कि उनके साथ रहने वाले लोग अक्सर खुद ही खाने-पीने का इंतजाम करते थे और वह सुबह उठकर ब्रेड तथा अंडे खरीदकर लाते थे। वह अंडे उबालकर खाते और बाकी लोगों के लिए भी रखते थे। उन्होंने उस दौर को हॉस्टल जैसी जिंदगी के रूप में याद किया था।
एक अन्य इंटरव्यू में उन्होंने शकरकंद के बारे में बताया कि संघर्ष के दिनों में वह इसे नियमित रूप से खाते थे। सिद्धार्थ ने इसे अपना “पेटेंट ब्रेकफास्ट” बताया था। उनके मुताबिक शकरकंद सस्ता था और वह इसे प्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट intake के लिए इस्तेमाल करते थे।
यह दौर केवल पैसों की कमी का नहीं था। फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाना भी उनके लिए चुनौती था। एक नए अभिनेता के तौर पर उन्हें लगातार खुद को साबित करना था। ऑडिशन देना, रिजेक्शन का सामना करना और फिर अगले मौके की तलाश करना उस समय उनकी जिंदगी का हिस्सा था।
सिद्धार्थ ने कई मौकों पर यह भी कहा है कि वह अपने करियर में मिली असफलताओं से सीखते रहे हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने उन फिल्मों से भी काफी कुछ सीखा जो उनके पक्ष में नहीं गईं। उनके लिए किसी फिल्म का चलना या नहीं चलना पूरी तरह अभिनेता के हाथ में नहीं होता।
2012 में Student of the Year से उनका एक्टिंग करियर शुरू हुआ। फिल्म में उनके साथ वरुण धवन और आलिया भट्ट ने भी डेब्यू किया था। सिद्धार्थ ने फिल्म में अभिमन्यु सिंह का किरदार निभाया। फिल्म ने उन्हें इंडस्ट्री में पहचान दिलाई और इसके बाद उनके पास फिल्मों के नए मौके आने लगे।
हालांकि डेब्यू के बाद भी उनका सफर लगातार आसान नहीं रहा। Hasee Toh Phasee, Ek Villain, Brothers, Kapoor & Sons, Baar Baar Dekho, A Gentleman, Ittefaq, Aiyaary, Jabariya Jodi और Marjaavaan जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। इनमें कुछ फिल्मों को दर्शकों ने पसंद किया, जबकि कुछ उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं।
Ek Villain उनके करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में रही। इस फिल्म में उन्होंने एक अलग तरह का किरदार निभाया और फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला। सिद्धार्थ ने बाद में भी अपने करियर में अलग-अलग भूमिकाएं करने की कोशिश जारी रखी।
लेकिन उनके करियर में सबसे बड़ा बदलाव Shershaah से जुड़ा। 2021 में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने कारगिल युद्ध के शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार निभाया। फिल्म में उनके अभिनय को दर्शकों से काफी प्रतिक्रिया मिली और यह उनके करियर की सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली फिल्मों में शामिल हो गई।
Shershaah केवल एक सामान्य फिल्म नहीं थी, बल्कि वास्तविक जीवन के सैनिक की कहानी पर आधारित थी। सिद्धार्थ ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कैप्टन विक्रम बत्रा के परिवार ने काफी पहले ही उनके नाम पर विचार किया था। इसलिए उनके लिए इस भूमिका को सही तरीके से निभाना एक बड़ी जिम्मेदारी थी।
फिल्म की तैयारी के दौरान उन्होंने सैनिकों के जीवन और उनकी कठिनाइयों को समझने की कोशिश की। उन्होंने कहा था कि अभिनेता को शूटिंग में रीटेक का मौका मिलता है, लेकिन सीमा पर सैनिकों को ऐसा कोई मौका नहीं मिलता। उनके मुताबिक इस भूमिका ने उन्हें सैनिकों की जिम्मेदारियों और कठिन परिस्थितियों को करीब से समझने का अवसर दिया।
Shershaah के बाद सिद्धार्थ की पहचान में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। इससे पहले उन्हें मुख्य रूप से युवा और रोमांटिक भूमिकाओं के लिए जाना जाता था, लेकिन कैप्टन विक्रम बत्रा की भूमिका ने उन्हें एक गंभीर और वास्तविक किरदार के अभिनेता के तौर पर भी पहचान दिलाई।
सिद्धार्थ ने खुद भी Shershaah को अपने करियर के लिए खास फिल्म बताया था। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि यह उनके करियर की विशेष फिल्मों में से एक थी और कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन को पर्दे पर सही तरीके से दिखाना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी थी।
इस फिल्म की यात्रा भी पूरी तरह सीधी नहीं थी। सिद्धार्थ के अनुसार प्रोजेक्ट के दौरान निर्माता, निर्देशक और लेखक तक बदले थे, लेकिन उन्होंने फिल्म का हिस्सा बने रहने की इच्छा बनाए रखी। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने इस बदलाव का जिक्र करते हुए बताया था कि इसके बावजूद वह फिल्म से जुड़े रहना चाहते थे।
यही बात उनके करियर के उस हिस्से को समझने में मदद करती है जिसे वह अपने “ढीठपन” और “अड़ियलपन” से जोड़ते हैं। यहां इन शब्दों का मतलब किसी नकारात्मक व्यवहार से ज्यादा अपने लक्ष्य पर टिके रहने से है। शुरुआती प्रोजेक्ट बंद होने के बाद भी उन्होंने मुंबई नहीं छोड़ी, बल्कि कैमरे के पीछे काम किया और फिर अभिनेता बनने की कोशिश जारी रखी।
उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि फिल्म इंडस्ट्री में पहला मौका मिलने के बाद भी करियर अपने आप स्थापित नहीं हो जाता। एक अभिनेता को लगातार नए किरदार, नए निर्देशक और नई कहानियों के साथ खुद को साबित करना पड़ता है।
सिद्धार्थ ने अपने करियर में इस बदलाव को कई बार महसूस किया है। Student of the Year से शुरू हुई यात्रा Ek Villain और फिर Shershaah जैसे अलग-अलग प्रोजेक्ट तक पहुंची। इसके बाद उन्होंने Mission Majnu में जासूस की भूमिका निभाई और Indian Police Force में पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया। उनकी फिल्मोग्राफी में लगातार एक्शन, देशभक्ति और गंभीर भूमिकाओं की संख्या बढ़ी।
हाल के वर्षों में भी सिद्धार्थ लगातार फिल्मों का हिस्सा रहे हैं। उनकी फिल्मोग्राफी में Yodha और Param Sundari के साथ अब The Vvaan भी शामिल है। उपलब्ध फिल्मोग्राफी के अनुसार The Vvaan 25 सितंबर 2026 को रिलीज के लिए सूचीबद्ध है।
सिद्धार्थ की कहानी का एक पहलू यह भी है कि उन्होंने मॉडलिंग से एक्टिंग तक का रास्ता तय किया। मॉडलिंग ने उन्हें कैमरे के सामने रहने का अनुभव दिया, लेकिन फिल्म अभिनय के लिए उन्हें अलग तरह की तैयारी करनी पड़ी। Student of the Year के शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया था कि वह सेट पर काफी nervous थे। उनके सह-कलाकार वरुण और आलिया को फिल्म सेट की प्रक्रिया की ज्यादा समझ थी, जबकि सिद्धार्थ के लिए यह अनुभव नया था।
उन्होंने शुरुआती दिनों में यह भी अनुभव किया कि अभिनय केवल अच्छा दिखने या कैमरे के सामने खड़े होने का काम नहीं है। रिहर्सल, डांस, संवाद, भावनाओं और कैमरा एंगल को समझना भी जरूरी है। धीरे-धीरे उन्होंने इन चीजों को सीखा और अपने अभिनय में इस्तेमाल किया।
सिद्धार्थ के संघर्ष का यह हिस्सा आज इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि दर्शक अक्सर किसी अभिनेता को उसके स्टार बनने के बाद देखते हैं। पर्दे पर नजर आने वाला ग्लैमर उस समय की कठिनाइयों को छिपा देता है जब कलाकार ऑडिशन के लिए एक प्रोडक्शन हाउस से दूसरे प्रोडक्शन हाउस तक जाता है।
सिद्धार्थ के मामले में पहली फिल्म का बंद होना एक बड़ा झटका था, लेकिन वही घटना उन्हें फिल्म निर्माण के दूसरे रास्ते तक ले गई। असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम करना उनके लिए मजबूरी से शुरू हुआ रास्ता था, लेकिन बाद में यही अनुभव उनकी फिल्मी समझ का हिस्सा बन गया।
अंडे, ब्रेड और शकरकंद वाला दौर भी इसी संघर्ष का हिस्सा था। यह कहानी किसी फिल्मी कहानी की तरह अचानक सफलता की नहीं बल्कि छोटे-छोटे कदमों से आगे बढ़ने की कहानी है। सीमित खर्च में रहना, काम सीखना, ऑडिशन देना और मौके का इंतजार करना उनके शुरुआती करियर का हिस्सा रहा।
Shershaah के बाद उन्हें जिस तरह की पहचान मिली, वह उनके लंबे सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार निभाने के लिए उन्होंने वास्तविक जीवन की कहानी और सैनिकों के अनुभवों को समझने की कोशिश की। फिल्म को दर्शकों से मिली प्रतिक्रिया ने उनके करियर में एक नई पहचान जोड़ दी।
हालांकि किसी अभिनेता के करियर को केवल एक फिल्म से पूरी तरह परिभाषित करना सही नहीं होगा। सिद्धार्थ की फिल्मोग्राफी में अलग-अलग शैली की कई फिल्में हैं और उनके करियर में सफलता तथा असफलता दोनों चरण रहे हैं। खुद सिद्धार्थ ने भी अपने इंटरव्यू में असफल फिल्मों से सीखने की बात कही है।
आज जब वह इंडस्ट्री में लंबे समय से काम कर रहे हैं, तो उनके शुरुआती संघर्ष की बातें उनके सफर का अलग पक्ष सामने लाती हैं। पहली फिल्म का बंद होना, मुंबई में सीमित संसाधनों के साथ रहना, असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम करना और फिर Student of the Year से बतौर अभिनेता शुरुआत करना—इन सभी घटनाओं ने उनके करियर की नींव तैयार की।
उनकी कहानी का सबसे अहम हिस्सा शायद यही है कि पहला झटका उनके सफर का अंत नहीं बना। फिल्म बंद हुई तो उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने के बजाय उसे दूसरे नजरिए से समझने की कोशिश की। बाद में जब अभिनय का मौका मिला तो उन्होंने उस अवसर को अपने करियर की शुरुआत में बदल दिया।
सिद्धार्थ मल्होत्रा का संघर्ष इसलिए भी चर्चा में आता है क्योंकि इसमें बॉलीवुड की चमक के पीछे की वास्तविक मेहनत दिखाई देती है। अंडे और शकरकंद जैसे सस्ते भोजन से गुजारा करने की उनकी यादें बताती हैं कि आज की स्टार लाइफस्टाइल से पहले उन्होंने एक ऐसा दौर भी देखा था जब रोजमर्रा के खर्च और करियर की अनिश्चितता दोनों चुनौती थे।
Shershaah के बाद मिली पहचान ने इस यात्रा को एक नया मोड़ दिया। कैप्टन विक्रम बत्रा की भूमिका ने उन्हें दर्शकों के एक बड़े वर्ग तक पहुंचाया और उनकी इमेज में गंभीरता जोड़ी। इसके बाद उन्होंने एक्शन और वास्तविक घटनाओं से जुड़े कई किरदारों की ओर भी कदम बढ़ाया।
सिद्धार्थ की कहानी से जुड़ी उनकी अपनी बातों में एक चीज बार-बार सामने आती है—काम करते रहने की जरूरत। उनका कहना रहा है कि किसी फिल्म की सफलता या असफलता हमेशा कलाकार के नियंत्रण में नहीं होती। इसलिए असफलता पर लंबे समय तक रुकने के बजाय अगली फिल्म पर ध्यान देना जरूरी है।
यही वजह है कि पहली फिल्म बंद होने से लेकर Shershaah तक का सफर केवल एक अभिनेता की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि करियर में आने वाले उतार-चढ़ाव का उदाहरण भी है। शुरुआत में जिस प्रोजेक्ट से डेब्यू होने वाला था, वह आगे नहीं बढ़ा। फिर असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम मिला। इसके बाद Student of the Year से अभिनय की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे फिल्मों का सिलसिला आगे बढ़ा।
आज सिद्धार्थ मल्होत्रा की पहचान एक ऐसे अभिनेता के रूप में है जिसने रोमांटिक, एक्शन, कॉमेडी, जासूसी और वास्तविक जीवन से जुड़े किरदारों में काम किया है। उनकी फिल्मोग्राफी में Student of the Year, Ek Villain, Kapoor & Sons, Ittefaq, Marjaavaan, Shershaah, Mission Majnu, Yodha और अन्य फिल्में शामिल हैं।
उनके संघर्ष की कहानी में सबसे दिलचस्प बात यह है कि सफलता आने से पहले उन्होंने इंडस्ट्री के कई अलग-अलग हिस्सों को देखा। मॉडलिंग से शुरुआत, असिस्टेंट डायरेक्शन का अनुभव, ऑडिशन और फिर अभिनय—यह रास्ता धीरे-धीरे बना।
सिद्धार्थ द्वारा अपने संघर्ष के दिनों में बताए गए अंडे और शकरकंद के किस्से इसी यात्रा का एक छोटा लेकिन यादगार हिस्सा हैं। आज जब उनका नाम बड़े बजट की फिल्मों और बड़े सितारों के साथ लिया जाता है, तब उन शुरुआती दिनों को याद करना उनके करियर की पूरी तस्वीर समझने में मदद करता है।
**कुल मिलाकर, सिद्धार्थ मल्होत्रा की कहानी एक बंद हो चुकी पहली फिल्म से शुरू होकर एक सफल अभिनेता बनने तक पहुंचती है। उन्होंने शुरुआती असफलता के बाद मुंबई में रुककर फिल्म निर्माण सीखा, असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया और फिर Student of the Year से अभिनय की शुरुआत की। संघर्ष के दौरान अंडे, ब्रेड और शकरकंद जैसे साधारण भोजन से गुजारा करने की उनकी यादें भी उनके शुरुआती जीवन का हिस्सा रही हैं। बाद में Shershaah में कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हुआ और इस फिल्म ने उन्हें एक अलग तरह की पहचान दिलाई। **
सिद्धार्थ मल्होत्रा का यह सफर यह दिखाता है कि फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाने की प्रक्रिया लंबे समय, लगातार काम और कई असफलताओं से होकर गुजर सकती है। उनकी अपनी बातचीत में भी असफलता से सीखने और आगे बढ़ते रहने की बात सामने आती रही है।
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http://सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपने शुरुआती संघर्ष और करियर के सफर को लेकर कई बातें साझा की हैं।
