अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी United Nations General Assembly में भाषण देने वाले हैं। न्यूयॉर्क में चल रही UN General Assembly की हाई-लेवल बैठक के बीच ट्रम्प का भाषण ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया कई बड़े अंतरराष्ट्रीय संकटों से गुजर रही है। मौजूदा UN बैठक में ईरान युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व की स्थिति, वैश्विक सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा में हैं। Associated Press के अनुसार ट्रम्प का इस बार का UN दौरा ऐसे अंतरराष्ट्रीय माहौल में हो रहा है, जिसमें अमेरिका-ईरान संघर्ष और UN की भविष्य की भूमिका को लेकर कई देशों की नजरें उनके भाषण पर हैं।
ट्रम्प के भाषण से पहले 2025 का UNGA भाषण भी चर्चा में आ गया है। पिछले साल 23 सितंबर 2025 को जब ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करना शुरू किया था, उसी समय उनका टेलीप्रॉम्प्टर काम नहीं कर रहा था। ट्रम्प ने पोडियम पर पहुंचकर खुद बताया था कि टेलीप्रॉम्प्टर काम नहीं कर रहा है और उन्होंने बिना टेलीप्रॉम्प्टर भाषण देने की बात कही थी। अमेरिकी सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनके 2025 के भाषण की शुरुआत में टेलीप्रॉम्प्टर खराब होने का उल्लेख दर्ज है।
2025 में ट्रम्प ने टेलीप्रॉम्प्टर की समस्या को लेकर मजाक भी किया था। उन्होंने कहा था कि वह बिना टेलीप्रॉम्प्टर भाषण देने में सहज हैं और यह भी कहा कि इस तरह वह ज्यादा दिल से बोल सकते हैं। इसके बाद उन्होंने टेलीप्रॉम्प्टर चलाने वाले व्यक्ति को लेकर टिप्पणी की, जिस पर सभा में मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। PBS NewsHour की रिपोर्ट के अनुसार टेलीप्रॉम्प्टर बंद होने के बाद ट्रम्प ने अपना बाइंडर खोला और भाषण आगे बढ़ाया। थोड़ी देर बाद टेलीप्रॉम्प्टर फिर काम करने लगा।
यह घटना सिर्फ तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं रही थी। 2025 में ट्रम्प के UN दौरे के दौरान एक एस्केलेटर भी रुक गया था। इसके बाद ट्रम्प और उनके प्रशासन की तरफ से इन घटनाओं को लेकर सवाल उठाए गए। ट्रम्प ने बाद में इन घटनाओं को लेकर “sabotage” का आरोप लगाया और जांच की मांग की थी। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प ने एस्केलेटर, टेलीप्रॉम्प्टर और ऑडियो से जुड़ी घटनाओं को लेकर जांच की बात कही थी।
हालांकि संयुक्त राष्ट्र की तरफ से इन घटनाओं को लेकर अलग जानकारी दी गई थी। UN के प्रवक्ता के अनुसार एस्केलेटर का सुरक्षा तंत्र संभवतः अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के एक वीडियोग्राफर की वजह से सक्रिय हुआ था। वहीं टेलीप्रॉम्प्टर को लेकर UN अधिकारियों ने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल होने वाला टेलीप्रॉम्प्टर White House की टीम संचालित करती थी। Associated Press ने भी UN के स्पष्टीकरण को रिपोर्ट किया था।
इसलिए 2025 की घटना को “UN ने ट्रम्प का टेलीप्रॉम्प्टर खराब कर दिया” कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार टेलीप्रॉम्प्टर अमेरिकी टीम के संचालन में था। इसी तरह एस्केलेटर को लेकर भी UN की ओर से sabotage की पुष्टि नहीं हुई थी। यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2025 की घटना के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे तेजी से फैले थे।
अब 2026 में जब ट्रम्प फिर UN General Assembly को संबोधित करने वाले हैं, तो पिछले साल की यह घटना स्वाभाविक रूप से चर्चा में है। इस बार उनके भाषण पर इसलिए भी नजर है क्योंकि अमेरिका की विदेश नीति से जुड़े कई बड़े मुद्दे इस समय अंतरराष्ट्रीय मंच पर मौजूद हैं।
Associated Press के अनुसार इस साल UN General Assembly ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया में कई बड़े संघर्ष और कूटनीतिक तनाव जारी हैं। ट्रम्प के एजेंडे में ईरान से जुड़ा संकट, मध्य पूर्व, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका के सहयोगियों के साथ संबंध जैसे मुद्दे शामिल हैं। उनके कार्यक्रम में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची और अन्य नेताओं के साथ मुलाकातें भी शामिल हैं।
ट्रम्प के आज के भाषण में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर होगा कि वह अमेरिका की विदेश नीति को किस तरह पेश करते हैं। मौजूदा परिस्थितियों में ईरान और मध्य पूर्व का मुद्दा खास महत्व रखता है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प ऐसे समय UN पहुंच रहे हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष लंबा खिंच चुका है और इसके कारण ऊर्जा बाजार तथा वैश्विक कूटनीति पर भी असर पड़ा है।
इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की भूमिका भी ट्रम्प के भाषण का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। ट्रम्प लंबे समय से UN की कार्यप्रणाली, खर्च और अमेरिका के योगदान को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। इस बार भी उनके प्रशासन की तरफ से UN में सुधार और अमेरिकी योगदान से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं। AP की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प का UN दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब संगठन की भूमिका और प्रभावशीलता पर भी बहस चल रही है।
ट्रम्प का UN से रिश्ता काफी पुराना है और उनके भाषणों में अमेरिका की “sovereignty” यानी संप्रभुता तथा “America First” नीति पर जोर दिखाई देता रहा है। 2018 का उनका UN भाषण इसका एक चर्चित उदाहरण है।
25 सितंबर 2018 को ट्रम्प ने UN General Assembly की 73वीं बैठक में भाषण दिया था। संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक रिकॉर्ड में उस भाषण को दर्ज किया गया है।
2018 के भाषण की शुरुआत में ट्रम्प ने अपने प्रशासन की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा था कि दो साल से कम समय में उनके प्रशासन ने अमेरिका के इतिहास के लगभग किसी भी प्रशासन से ज्यादा उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके बाद सभा में मौजूद नेताओं और प्रतिनिधियों की तरफ से हंसी की आवाज सुनाई दी। ट्रम्प ने उस समय प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उन्हें ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। यह घटना बाद में 2018 के UN भाषण की सबसे ज्यादा चर्चित घटनाओं में से एक बन गई।
यहां यह समझना जरूरी है कि “सभी विश्व नेता ट्रम्प का मजाक उड़ा रहे थे” कहना ज्यादा व्यापक दावा होगा। उपलब्ध वीडियो और रिपोर्टों में सभा में हंसी सुनाई देती है, लेकिन उस हंसी के पीछे मौजूद हर व्यक्ति की मंशा सार्वजनिक रूप से निर्धारित नहीं की जा सकती। Washington Post ने घटना को ट्रम्प के दावे के बाद आई हंसी के रूप में रिपोर्ट किया था, जबकि बाद में ट्रम्प ने खुद कहा था कि लोग उनके साथ हंस रहे थे, उन पर नहीं।
2018 की घटना इसलिए भी दिलचस्प थी क्योंकि ट्रम्प ने उसी समय अपनी बात जारी रखते हुए कहा था कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है। आधिकारिक UN रिकॉर्ड में उनके भाषण में अमेरिकी अर्थव्यवस्था, रोजगार, सैन्य खर्च, सीमा सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े कई दावों का उल्लेख दर्ज है।
आज के भाषण में 2018 जैसी कोई घटना होगी या नहीं, यह पहले से कहना संभव नहीं है। लेकिन ट्रम्प के भाषण की शैली को देखते हुए दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि वह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकटों और अमेरिका की विदेश नीति को किस तरह प्रस्तुत करते हैं।
2025 की घटना ने एक और सवाल सामने रखा था—क्या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर तकनीकी समस्या भाषण के प्रभाव को बदल सकती है? टेलीप्रॉम्प्टर खराब होने के बावजूद ट्रम्प ने भाषण जारी रखा था। आधिकारिक अमेरिकी रिकॉर्ड में भी यह दर्ज है कि उन्होंने टेलीप्रॉम्प्टर के बिना बोलने की बात कही थी।
टेलीप्रॉम्प्टर आम तौर पर बड़े भाषणों में वक्ता को तैयार किए गए भाषण की लाइनें पढ़ने में मदद करता है। UN General Assembly जैसे मंच पर भाषण काफी लंबा और विषयों से भरा हो सकता है। इसलिए तकनीकी खराबी की स्थिति में वक्ता को अपने नोट्स या याददाश्त पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है।
2025 में यही हुआ था। ट्रम्प ने टेलीप्रॉम्प्टर की खराबी के बाद अपने सामने रखे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और भाषण जारी रखा। PBS की रिपोर्ट के मुताबिक बाद में टेलीप्रॉम्प्टर फिर चालू हो गया था।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ लोगों ने इसे सामान्य तकनीकी खराबी बताया, जबकि ट्रम्प और उनके प्रशासन की तरफ से sabotage की संभावना पर सवाल उठाए गए। बाद में UN की ओर से एस्केलेटर की खराबी के बारे में सुरक्षा तंत्र सक्रिय होने की जानकारी दी गई। Teleprompter को लेकर UN ने यह स्पष्ट किया कि इसे White House संचालित करता था।
2026 के भाषण से पहले इन पुरानी घटनाओं का जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि ट्रम्प के UN भाषण अक्सर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बड़े पैमाने पर कवर किए जाते हैं। 2018 में उनका भाषण उपलब्धियों के दावे और उस पर आई हंसी के कारण चर्चा में रहा था, जबकि 2025 का भाषण टेलीप्रॉम्प्टर और एस्केलेटर से जुड़ी तकनीकी घटनाओं के कारण सुर्खियों में आया।
इस बार ट्रम्प के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की वर्तमान भूमिका को स्पष्ट करना होगी। रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान संघर्ष, मध्य पूर्व, ऊर्जा सुरक्षा, चीन-अमेरिका संबंध और AI जैसे विषयों पर दुनिया के कई देश अमेरिका की नीति को ध्यान से देख रहे हैं।
AI भी इस बार UN General Assembly की चर्चाओं में एक महत्वपूर्ण विषय है। दुनिया में artificial intelligence तेजी से विकसित हो रही है और इससे जुड़ी regulation, security, jobs और international governance पर अलग-अलग देशों के बीच चर्चा बढ़ रही है। AP ने इस साल की UN बैठक के प्रमुख मुद्दों में AI के भविष्य और वैश्विक governance को भी शामिल किया है।
भारत के लिए भी ट्रम्प के भाषण पर नजर रहेगी। अमेरिका और भारत के बीच व्यापार, तकनीक, रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दे पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण रहे हैं। ट्रम्प अपने भाषण में भारत का सीधे उल्लेख करते हैं या नहीं, यह भाषण के दौरान ही स्पष्ट होगा। इसलिए पहले से किसी विशेष घोषणा का दावा करना उचित नहीं होगा।
UN General Assembly में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति का भाषण केवल अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और वैश्विक कूटनीति में उसकी बड़ी भूमिका है।
आज के भाषण में ट्रम्प किन मुद्दों पर जोर देते हैं, किन देशों या संगठनों का उल्लेख करते हैं और कौन-सी नीतियों को आगे बढ़ाने की बात करते हैं, इन सब पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजर रहेगी।
2018 की घटना और 2025 की तकनीकी खराबी दोनों से एक बात स्पष्ट है कि UN में ट्रम्प के भाषण केवल उनके आधिकारिक संदेश के कारण ही चर्चा में नहीं रहते, बल्कि भाषण के दौरान होने वाली अप्रत्याशित घटनाएं भी सुर्खियां बन जाती हैं। 2018 में उनके प्रशासन की उपलब्धियों वाले दावे के बाद सभा में हंसी सुनाई दी थी। 2025 में टेलीप्रॉम्प्टर की खराबी ने भाषण की शुरुआत को अलग बना दिया था।
अब 2026 में दुनिया यह देखना चाहती है कि ट्रम्प इस बार UN के मंच से क्या संदेश देते हैं। क्या वह अमेरिका की विदेश नीति, ईरान, यूक्रेन, मध्य पूर्व, चीन, व्यापार और AI पर विस्तार से बात करेंगे या UN की कार्यप्रणाली पर ज्यादा ध्यान देंगे—यह भाषण के दौरान सामने आएगा।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि भाषण से पहले मीडिया रिपोर्टों में संभावित विषयों का अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन जब तक राष्ट्रपति स्वयं भाषण में कोई बात नहीं कहते, उसे अंतिम घोषणा नहीं माना जा सकता। इसलिए आज की रिपोर्टिंग में confirmed statements और संभावित agenda को अलग-अलग रखना जरूरी होगा।
कुल मिलाकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का आज UN General Assembly में होने वाला भाषण ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक राजनीति में कई बड़े संकट मौजूद हैं। 2025 में उनके भाषण की शुरुआत टेलीप्रॉम्प्टर की खराबी से हुई थी और उस घटना के बाद sabotage को लेकर विवाद भी हुआ था। वहीं 2018 में उनके प्रशासन की उपलब्धियों को लेकर किए गए एक दावे के बाद सभा में हंसी सुनाई दी थी। इन दोनों घटनाओं ने उनके UN भाषणों को अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया था।
अब 2026 का भाषण एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल में हो रहा है। ईरान, मध्य पूर्व, रूस-यूक्रेन युद्ध, AI, वैश्विक अर्थव्यवस्था और UN सुधार जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। ट्रम्प का भाषण इन मुद्दों पर अमेरिका की स्थिति समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा। भाषण के बाद सामने आने वाले आधिकारिक बयान और नीतिगत घोषणाएं ही यह स्पष्ट करेंगी कि अमेरिका किस दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दे रहा है।
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