कई लोगों के लिए घर में पौधे लगाना एक शौक होता है, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की रहने वाली तूबा सिद्दीकी ने इसी शौक और प्रकृति से अपने लगाव को कारोबार में बदल दिया। बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने वाली तूबा ने कभी अपने घर में औषधीय पौधों का छोटा-सा बगीचा तैयार किया था। उस समय शायद यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि यही छोटा बगीचा आगे चलकर उनके उद्यमी बनने की नींव रखेगा और वे प्राकृतिक तथा पर्यावरण के अनुकूल पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स का अपना ब्रांड खड़ा करेंगी।
आज तूबा ‘Soil Concept’ से जुड़ी हैं, जो plant-based और sustainable personal care products पर काम करता है। उनकी कहानी सिर्फ एक महिला के बिजनेस शुरू करने की कहानी नहीं है। इसमें पढ़ाई, प्रकृति के प्रति रुचि, रिसर्च, ट्रेनिंग, शुरुआती प्रयोग, असफलताओं से सीख, परिवार का सहयोग, सरकारी योजनाओं से मिली मदद और दूसरी महिलाओं के लिए रोजगार तैयार करने जैसे कई पहलू शामिल हैं। यही वजह है कि उनका सफर उन युवाओं और महिलाओं के लिए एक उदाहरण बन रहा है, जो अपनी पढ़ाई या किसी छोटे शौक को बिजनेस में बदलना चाहते हैं।
तूबा सिद्दीकी ने लखनऊ की Integral University से Biotechnology Engineering की पढ़ाई पूरी की। Biotechnology की पढ़ाई के कारण उनकी दिलचस्पी पहले से ही पौधों, प्राकृतिक तत्वों और उनके उपयोग को समझने में थी। कॉलेज की पढ़ाई के बाद उन्होंने सीधे किसी बड़े बिजनेस की शुरुआत नहीं की। इसके बजाय उन्होंने अपने घर पर एक छोटा medicinal garden तैयार किया और उसका नाम रखा—‘Garden of Health’।
इस बगीचे में उन्होंने एलोवेरा, तुलसी की अलग-अलग किस्मों के साथ कई औषधीय पौधे लगाए। खास बात यह थी कि शुरुआत में इसके पीछे पैसा कमाने का लक्ष्य नहीं था। वे यह समझना चाहती थीं कि प्रकृति में मौजूद पौधों का रोजमर्रा की जिंदगी में किस तरह उपयोग किया जा सकता है।
धीरे-धीरे पौधों के साथ प्रयोग और उनकी जानकारी हासिल करने का यह शौक गंभीर रुचि में बदल गया। तूबा प्राकृतिक पौधों से जुड़े कार्यक्रमों के लिए रायपुर भी गईं और लखनऊ स्थित CSIR-Central Institute of Medicinal and Aromatic Plants यानी CIMAP से भी उनका जुड़ाव रहा। इसी दौरान उन्होंने product development से जुड़े कई training programmes में हिस्सा लिया।
यहीं से उनके मन में एक सवाल आया—जिन पौधों को इतनी मेहनत से उगाया जा रहा है, उनका इस्तेमाल किसी उपयोगी उत्पाद को बनाने में क्यों न किया जाए?
यह सवाल आगे चलकर बिजनेस आइडिया बन गया।
तूबा के सामने ऐसा क्षेत्र था जिसका इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है—शैम्पू, साबुन, लोशन, हेयर केयर और दूसरे personal care products। उन्होंने इसी category में प्राकृतिक विकल्प तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना शुरू किया।
इस सफर में उनके पति फैज सिद्दीकी की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। फैज ने Chemical Technology की पढ़ाई की थी और oils, oleochemicals तथा surfactants में विशेषज्ञता हासिल की। उन्होंने industry में scientist और quality manager के रूप में भी काम किया। तूबा की biotechnology की समझ और फैज की chemical technology की जानकारी ने दोनों को एक ऐसा मॉडल तैयार करने में मदद की जिसमें science और nature को एक साथ रखने की कोशिश की गई।
दोनों ने ऐसे रोजमर्रा के products पर ध्यान देने का फैसला किया जिन्हें लोग लगातार इस्तेमाल करते हैं। उनका विचार था कि shampoo, soap और lotion जैसी categories में plant-based alternatives उपलब्ध कराए जाएं।
इस entrepreneurial journey की शुरुआत भी सीधे Soil Concept नाम से नहीं हुई थी। 2014 में उन्होंने ‘Mitti Se’ नाम से अपना काम शुरू किया। शुरुआत rented manufacturing setup से हुई और उस समय चार co-founders जुड़े थे। कारोबार धीरे-धीरे आगे बढ़ा और बाद में परिस्थितियां बदलने तथा trademark से जुड़ी जटिलताओं के बाद जनवरी 2023 में तूबा और फैज ने Soil Concept और Ahinsa Care को अलग-अलग brand identity के साथ आगे बढ़ाया।
इसलिए Soil Concept की कहानी समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि इसके पीछे कई वर्षों का अनुभव मौजूद है। यह ऐसा startup नहीं था जिसे एक दिन idea आया और अगले दिन product market में उतार दिया गया। इसके पीछे medicinal plants के साथ शुरुआती प्रयोग, training, formulation, manufacturing और market को समझने का लंबा अनुभव था।
आज Soil Concept अपने आपको organic, eco-friendly और cruelty-free brand के रूप में पेश करता है। Integral University के incubation records में भी Humany Eco Innovations Private Limited के तहत Soil Concept को इसी तरह वर्णित किया गया है। इसके haircare और skincare products में प्राकृतिक ingredients तथा sustainable approach पर जोर दिया जाता है।
ब्रांड के portfolio में herbal shampoo, conditioner, hair serum, herbal hair oil, body wash, lotion और handmade soaps जैसे personal care products शामिल हैं। अलग-अलग रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कंपनी ने अपनी product range को धीरे-धीरे विस्तार दिया और आज इसके 25 से अधिक SKUs हैं।
तूबा और उनकी टीम का उद्देश्य केवल “natural” शब्द को packaging पर लिखना नहीं था। उनका academic background इस business model का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। Soil Concept की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक तूबा biotechnology background से आती हैं और उन्होंने CSIR-CIMAP Lucknow सहित कई संस्थानों के साथ काम या सहभागिता की है। वहीं फैज की chemical technology की विशेषज्ञता product development के दूसरे पहलू को मजबूत करती है।
कारोबार शुरू करना एक बात है, लेकिन उसे बड़े स्तर तक पहुंचाने के लिए पूंजी की जरूरत होती है। यही चुनौती तूबा के सामने भी आई। मशीनरी और raw material खरीदने के लिए पैसे चाहिए थे। शुरुआती entrepreneur के लिए bank financing हासिल करना अक्सर आसान नहीं होता, खासकर तब जब उसके पास बड़ा collateral या लंबा corporate experience न हो।
इसी दौरान Integrated Foundation के माध्यम से तूबा को उत्तर प्रदेश सरकार के ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया और रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 15 दिनों में ₹5 लाख का ब्याजमुक्त ऋण मिला। इसके लिए बैंक गारंटी की जरूरत नहीं पड़ी। इस रकम का इस्तेमाल मशीनरी खरीदने और manufacturing setup को मजबूत करने में किया गया।
तूबा का startup ‘Startup UP’ के तहत भी registered है। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें online marketing और business expansion के लिए करीब ₹11 लाख का marketing assistance fund भी मिला। यह मदद इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि छोटे manufacturing startups के सामने केवल product बनाना चुनौती नहीं होता, product को customers तक पहुंचाना भी उतना ही कठिन होता है।
आज किसी consumer brand के लिए digital marketing, packaging, e-commerce listing, logistics और distribution पर बड़ा खर्च आता है। छोटे उद्यमियों के लिए इसी चरण में कारोबार रुक जाने का खतरा रहता है। तूबा की कहानी बताती है कि अगर entrepreneur को सही समय पर finance, incubation और marketing support मिले तो एक छोटे idea को ज्यादा बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।
Soil Concept के products अब केवल लखनऊ तक सीमित नहीं हैं। अप्रैल 2026 में प्रकाशित HerStory की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रांड के 25 से ज्यादा SKUs करीब 60 से 70 premium organic stores में उपलब्ध थे। इसके अलावा Amazon, Flipkart और Myntra जैसे बड़े online platforms के जरिए भी products बेचे जा रहे थे। दूसरी रिपोर्ट में मुंबई, चंडीगढ़ और जयपुर जैसे शहरों के offline stores में भी demand का जिक्र किया गया है।
तूबा के entrepreneurial journey में एक दिलचस्प मोड़ Shark Tank India Season 2 भी रहा। वे उस समय ‘Mitti Se’ brand के साथ शो में पहुंची थीं। भले ही टीवी पर किसी startup का दिखाई देना अपने आप में सफलता की गारंटी नहीं होता, लेकिन तूबा के मुताबिक वहां मिले feedback ने उन्हें business strategy पर दोबारा सोचने का मौका दिया।
Sharks और mentors की तरफ से उन्हें सलाह मिली कि उनका product portfolio बहुत ज्यादा diversified हो रहा है। Skin care, personal care और cleaners जैसी अलग-अलग categories में एक साथ काम करने के बजाय focus बढ़ाना बेहतर होगा। बाद में इसी सीख के आधार पर Soil Concept और Ahinsa Care की अलग-अलग brand identities बनाई गईं।
Soil Concept को personal care की दिशा में रखा गया, जबकि Ahinsa Care plant-based और non-toxic cleaning products पर केंद्रित हुआ। यह बदलाव startup journey का महत्वपूर्ण lesson भी दिखाता है—कई बार business में आगे बढ़ने का मतलब ज्यादा products जोड़ना नहीं, बल्कि सही category पर ज्यादा focus करना होता है।
तूबा के startup को कई मंचों पर पहचान भी मिली है। Integral University के Centre for Incubation and Entrepreneurship Development के रिकॉर्ड के मुताबिक Soil Concept वहां incubated startup है। 2025 के CM Yuva Conclave & Expo में तूबा को top five startups में चुना गया था और उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सामने अपनी entrepreneurial journey साझा की थी।
सितंबर 2025 में Soil Concept ने CSIR-Indian Institute of Toxicology Research यानी IITR के साथ non-toxic, plant-based personal care solutions में innovation को आगे बढ़ाने के लिए MoU भी किया। Integral University के incubation centre के मुताबिक यह MoU मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में formalise हुआ था।
तूबा को 2021 में ‘1000 Women Faces of Asia Award’ मिलने का उल्लेख Soil Concept की आधिकारिक वेबसाइट पर भी है। इसके अलावा Integral University के incubation centre के रिकॉर्ड में तूबा को G20 Lucknow Summit के दौरान top 75 women entrepreneurs में recognition मिलने का जिक्र है।
लेकिन तूबा की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा केवल awards, exhibitions या बड़े मंच नहीं हैं। उनका कारोबार दूसरी महिलाओं के लिए रोजगार भी तैयार कर रहा है।
जुलाई 2026 की रिपोर्ट्स के मुताबिक तूबा अपने प्रयास से सात अन्य महिलाओं को रोजगार दे रही थीं। HerStory की रिपोर्ट भी बताती है कि Soil Concept की टीम में महिलाओं की बड़ी भागीदारी है। इस तरह एक महिला entrepreneur की शुरुआत अब दूसरी महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से भी जुड़ रही है।
छोटे शहरों और घरों से बिजनेस शुरू करने वाली महिलाओं के सामने कई बार पूंजी के अलावा सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियां भी होती हैं। तूबा को इस मामले में परिवार का सहयोग मिला। उनके पति फैज business partner के तौर पर उनके साथ हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक शादी के बाद उनके ससुराल से भी उन्हें सहयोग मिला।
तूबा अपने परिवार में सबसे छोटी हैं और उनके पिता शक्ति भवन से सेवानिवृत्त हुए हैं। एक सामान्य परिवार से निकलकर पहले science की पढ़ाई और फिर entrepreneurship की तरफ जाना उनके सफर को उन युवतियों के लिए relatable बनाता है जो यह सोचती हैं कि business शुरू करने के लिए पहले से business family से होना जरूरी है।
उनकी कहानी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने अपनी academic degree को केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं बनाया। Biotechnology की जानकारी ने उन्हें product और ingredients को समझने की foundation दी। इसके बाद उन्होंने training programmes में हिस्सा लिया, medicinal plants पर अपनी समझ बढ़ाई और फिर उसे commercial product में बदलने की कोशिश की।
यानी यहां पढ़ाई और entrepreneurship एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे को मजबूत करने वाले बने।
आज भारत में startup की चर्चा होते ही अक्सर technology apps, artificial intelligence या बड़े funding rounds की बात होती है। लेकिन तूबा का उदाहरण बताता है कि innovation केवल software में नहीं होता। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले shampoo, soap, lotion और cleaning products जैसी categories में भी science, sustainability और consumer needs को जोड़कर business तैयार किया जा सकता है।
यहां “प्रकृति से लगाव को कारोबार में बदलना” सिर्फ आकर्षक लाइन नहीं है। इसकी शुरुआत सचमुच घर के medicinal garden से हुई थी। Aloe vera और basil जैसे पौधों को उगाते हुए तूबा ने उनके उपयोग को समझने की कोशिश की। फिर training programmes ने product development की दिशा दिखाई और academic knowledge ने उन्हें science का आधार दिया।
इसके बाद बाजार ने उन्हें business की दूसरी सीख दी—अच्छा product बनाना पर्याप्त नहीं है। Branding, distribution, funding, customer feedback और product focus भी जरूरी हैं।
Mitti Se से Soil Concept तक की यात्रा इसी evolution को दिखाती है। शुरुआती brand ने market का अनुभव दिया, Shark Tank ने strategic feedback दिया, अलग-अलग institutions ने incubation और training support दिया, जबकि सरकारी योजनाओं से financing और marketing support मिला।
आज Soil Concept की कहानी उन लोगों के लिए खास संदेश देती है जो छोटे स्तर से अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं। शुरुआत हमेशा बड़ी factory या करोड़ों रुपये की funding से नहीं होती। कभी-कभी वह घर के एक छोटे garden, किसी hobby या उस समस्या से शुरू होती है जिसे आप अपने आसपास रोज देखते हैं।
तूबा ने प्रकृति में अपनी रुचि को Biotechnology की पढ़ाई से जोड़ा। फिर knowledge को training से मजबूत किया और धीरे-धीरे उसे products में बदल दिया। आगे जाकर finance की जरूरत आई तो सरकारी scheme का उपयोग किया। Market में feedback मिला तो business model में बदलाव भी किया।
यही adaptability किसी entrepreneur के लिए महत्वपूर्ण होती है।
उनका सफर महिलाओं के लिए इसलिए भी प्रेरक है क्योंकि आज वे केवल अपने लिए रोजगार पैदा नहीं कर रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी काम से जोड़ रही हैं। एक घर में शुरू हुआ विचार manufacturing unit, online marketplaces, organic stores, incubation ecosystem और बड़े startup मंचों तक पहुंच चुका है।
तूबा की कहानी यह भी बताती है कि entrepreneurship में सफलता एक सीधी रेखा नहीं होती। Brand बदल सकता है, co-founders अलग हो सकते हैं, trademark की समस्या आ सकती है, product portfolio बदलना पड़ सकता है और funding की जरूरत सामने आ सकती है। महत्वपूर्ण यह है कि entrepreneur इन बदलावों के बाद अपने मूल उद्देश्य को कैसे आगे बढ़ाता है।
तूबा और फैज के लिए वह मूल विचार sustainability और plant-based alternatives रहा है। Soil Concept की आधिकारिक जानकारी भी इसी vision को सामने रखती है—ऐसे personal care products तैयार करना जो skin और environment दोनों के प्रति ज्यादा जिम्मेदार approach अपनाएं।
लखनऊ के घर में ‘Garden of Health’ लगाने से शुरू हुआ यह सफर अब कई शहरों और online platforms तक पहुंच चुका है। तूबा सिद्दीकी की कहानी इसलिए केवल एक startup success story नहीं, बल्कि उस सोच का उदाहरण है जिसमें education, nature, science और entrepreneurship एक साथ दिखाई देते हैं।
आज जब बड़ी संख्या में युवा नौकरी तलाशने के साथ अपना कारोबार शुरू करने के विकल्प भी देख रहे हैं, तूबा का सफर बताता है कि अपनी रुचि को पहचानना पहला कदम हो सकता है। इसके बाद सही training, लगातार experimentation, financial support और market feedback उस रुचि को sustainable business में बदल सकते हैं।
एक समय जिन पौधों को तूबा अपने घर में केवल जिज्ञासा और प्रकृति के प्रति प्रेम के कारण उगा रही थीं, उन्हीं पौधों ने उनके entrepreneurial journey की दिशा तय करने में भूमिका निभाई। आज उनका Soil Concept brand और उससे जुड़ी महिला टीम इस बात का उदाहरण है कि छोटे से विचार को science, skill और सही support के साथ रोजगार पैदा करने वाले कारोबार में बदला जा सकता है।
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http://लखनऊ की महिला उद्यमी तूबा सिद्दीकी और उनका प्राकृतिक पर्सनल केयर ब्रांड Soil Concept
