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दलीप ट्रॉफी फाइनल: तिलक वर्मा 56* पर नाबाद, साउथ जोन 242/6; ईस्ट जोन से 466 रन पीछे

दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन ने मुकाबले पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली है। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे फाइनल के तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक साउथ जोन ने पहली पारी में 242 रन पर 6 विकेट गंवा दिए हैं। टीम अभी भी ईस्ट जोन से 466 रन पीछे है। साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने मुश्किल परिस्थितियों में शानदार धैर्य दिखाते हुए अर्धशतक पूरा किया और दिन का खेल खत्म होने तक 56 रन बनाकर नाबाद रहे। उनके साथ चामा मिलिंद 2 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। ईस्ट जोन की ओर से मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार ने गेंद से शानदार प्रदर्शन किया और साउथ जोन की रन गति तथा साझेदारियों दोनों पर लगातार दबाव बनाए रखा।

साउथ जोन ने दिन की शुरुआत उस स्थिति में की थी जहां उसे ईस्ट जोन के 708 रन के विशाल स्कोर का जवाब देना था। ईस्ट जोन ने पहली पारी में कप्तान ईशान किशन की 270 रन की ऐतिहासिक पारी और कुमार कुशाग्र की शतकीय पारी के दम पर 708 रन बनाए थे। ईशान ने 334 गेंदों पर 270 रन बनाए, जिसमें 30 चौके और 7 छक्के शामिल थे। कुमार कुशाग्र ने भी 101 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। इन दोनों के प्रदर्शन ने साउथ जोन के सामने पहले ही बहुत बड़ा लक्ष्य जैसा दबाव खड़ा कर दिया था।

ईस्ट जोन के 708 रन का जवाब देने उतरी साउथ जोन की टीम को शुरुआत से ही संभलकर बल्लेबाजी करनी थी। चेपॉक की पिच पर रन बनाना पूरी तरह असंभव नहीं था, लेकिन ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने अनुशासित लाइन और लेंथ के साथ बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। तीसरे दिन साउथ जोन ने कुछ अच्छी साझेदारियां जरूर कीं, लेकिन हर बार ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने विकेट लेकर दबाव वापस बना दिया। नतीजा यह रहा कि स्टंप्स तक साउथ जोन के छह बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे।

दिन की शुरुआत एन जगदीशन और रिकी भुई के साथ हुई। साउथ जोन को उम्मीद थी कि उसके बल्लेबाज लंबी साझेदारियां बनाकर ईस्ट जोन के 708 रन के पहाड़ को छोटा करने की कोशिश करेंगे। लेकिन रिकी भुई के विकेट ने ईस्ट जोन को शुरुआती सफलता दिलाई। मोहम्मद मुकेश की गेंद पर भुई को पहले नॉट आउट दिया गया, लेकिन ईस्ट जोन ने रिव्यू लिया और फैसला उसके पक्ष में गया। इस तरह साउथ जोन को शुरुआत में ही झटका लगा।

इसके बाद देवदत्त पडिक्कल ने मोर्चा संभाला। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की। उन्होंने मिडविकेट की दिशा में शानदार शॉट लगाकर अपनी पारी का खाता खोला और धीरे-धीरे पारी को आगे बढ़ाया। दूसरे छोर पर एन जगदीशन भी अच्छी लय में नजर आए। दोनों ने मिलकर 50 से ज्यादा रन की साझेदारी की और ऐसा लगा कि साउथ जोन अब पारी को संभाल सकता है।

लेकिन ईस्ट जोन के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि एक साझेदारी को बड़ी साझेदारी बनने से पहले तोड़ा जाए। जगदीशन के आउट होने के बाद भी पडिक्कल ने अपना सकारात्मक रवैया बनाए रखा। उन्होंने दूसरे छोर पर आए शेख रशीद के साथ भी उपयोगी साझेदारी की। पडिक्कल ने अपनी फिफ्टी पूरी की और साउथ जोन को उम्मीद दी कि वह कम से कम पहली पारी में बड़ा स्कोर बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

देवदत्त पडिक्कल आखिरकार 62 रन बनाकर आउट हुए। उनका विकेट साउथ जोन के लिए काफी महत्वपूर्ण था, क्योंकि वह अच्छी तरह सेट हो चुके थे। उन्होंने पारी के दौरान धैर्य और आक्रामकता का अच्छा संतुलन दिखाया, लेकिन बड़ी पारी खेलने से पहले उनका विकेट गिर गया। उनके आउट होने के बाद साउथ जोन की मुश्किलें फिर बढ़ गईं।

शेख रशीद ने भी कुछ अच्छे शॉट खेले और पारी को आगे बढ़ाने की कोशिश की। लेकिन मोहम्मद शमी ने लंच के बाद उन्हें एलबीडब्ल्यू कर दिया। शमी का यह विकेट उस समय आया जब साउथ जोन को अपनी पारी को स्थिर करने की जरूरत थी। इसके कुछ ही समय बाद पडिक्कल का विकेट भी गिर गया। इस तरह साउथ जोन की उम्मीदों को एक के बाद एक दो बड़े झटके लगे।

इस पूरे दिन मोहम्मद शमी की गेंदबाजी खास चर्चा में रही। अनुभवी भारतीय तेज गेंदबाज ने छोटे लेकिन प्रभावी स्पेल में साउथ जोन के बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा। दिन के अंत तक शमी के नाम दो विकेट रहे। उनके साथ मुकेश कुमार ने भी लगातार अच्छी गेंदबाजी की। दोनों गेंदबाजों ने बल्लेबाजों को आसानी से रन बनाने नहीं दिए।

साउथ जोन के लिए असली राहत कप्तान तिलक वर्मा की पारी से आई। जब टीम के शीर्ष और मध्यक्रम के कई बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे, तब तिलक ने जिम्मेदारी अपने ऊपर ली। उन्होंने शुरुआत में जोखिम कम लिया और विकेट बचाकर बल्लेबाजी की। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी पारी को आगे बढ़ाया और अंत में 123 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया।

तिलक का अर्धशतक इस पारी की परिस्थितियों को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण है। साउथ जोन को जहां 708 रन का जवाब देना है, वहीं एक के बाद एक विकेट गिरने से टीम पर दबाव लगातार बढ़ता गया। ऐसे में कप्तान का क्रीज पर टिके रहना टीम के लिए बड़ी राहत है। तिलक ने दिन के अंतिम सत्र में अपने खेल में धैर्य दिखाया और गेंद को उसकी मेरिट के आधार पर खेलने की कोशिश की।

तिलक के साथ स्मरण रविचंद्रन ने भी कुछ समय तक अच्छी साझेदारी की। दोनों बल्लेबाजों ने 100 से ज्यादा गेंदों तक ईस्ट जोन के गेंदबाजों का सामना किया। इस दौरान साउथ जोन ने विकेट बचाकर रखने की रणनीति अपनाई। लेकिन चाय से पहले शमी को वापस गेंदबाजी पर लाया गया और उनका यह फैसला ईस्ट जोन के लिए सफल रहा। स्मरण के बल्ले का हल्का किनारा लगा और विकेटकीपर ने कैच पकड़ लिया। ईस्ट जोन ने रिव्यू लिया और अल्ट्रा-एज में गेंद के बल्ले से लगने की पुष्टि हो गई।

इसके बाद तिलक वर्मा ने पारी को संभालने का जिम्मा और मजबूती से उठाया। उनके साथ शreyas गोपाल ने क्रीज पर समय बिताया। दोनों बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाने के बजाय गेंदबाजों का सामना करने और विकेट बचाने पर ध्यान दिया। साउथ जोन के लिए यह साझेदारी इसलिए भी जरूरी थी क्योंकि दिन के अंतिम हिस्से में एक और विकेट गिरने से टीम की स्थिति और खराब हो सकती थी।

तिलक ने पार्ट-टाइम स्पिन के खिलाफ चौका लगाकर अपना अर्धशतक पूरा किया। उनका 56 रन पर नाबाद रहना साउथ जोन के लिए दिन की सबसे बड़ी सकारात्मक बात रही। दूसरी ओर, शreyas गोपाल 6वें विकेट के बाद कुछ देर तक टिके रहे, लेकिन स्टंप्स से कुछ समय पहले वह भी आउट हो गए। इस विकेट के बाद साउथ जोन 242/6 पर पहुंच गया।

अब मुकाबले की तस्वीर काफी हद तक ईस्ट जोन के पक्ष में है। पहली पारी में 708 रन बनाने के बाद ईस्ट जोन के पास 466 रन की बढ़त है। साउथ जोन को पहले सिर्फ फॉलो-ऑन से बचने के लिए ही नहीं, बल्कि मैच में वास्तविक वापसी के लिए भी बहुत बड़ा स्कोर बनाना होगा। पांचवें दिन तक जाने वाले इस फाइनल में साउथ जोन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पहली पारी को लंबे समय तक खींचने की होगी।

ईस्ट जोन के लिए पहली पारी में सबसे बड़ा योगदान कप्तान ईशान किशन का रहा। ईशान ने 270 रन की शानदार पारी खेलकर फाइनल में अपनी टीम को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया जहां गेंदबाजों को विपक्षी टीम पर दबाव बनाने के लिए काफी रन मिल गए। ईशान की पारी 334 गेंदों पर आई और उन्होंने 30 चौके तथा 7 छक्के लगाए। उन्होंने कुमार कुशाग्र के साथ 230 रन की बड़ी साझेदारी की।

ईशान की पारी का महत्व केवल 270 रन तक सीमित नहीं है। यह प्रदर्शन उनकी रेड-बॉल क्रिकेट की क्षमता को लेकर भी चर्चा का कारण बना है। लंबे समय से भारतीय टीम के टेस्ट सेटअप में वापसी की कोशिश कर रहे ईशान के लिए घरेलू क्रिकेट में इस तरह की बड़ी पारी निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है। 270 रन बनाने के दौरान उन्होंने आक्रामक बल्लेबाजी के साथ-साथ लंबे समय तक क्रीज पर टिकने की क्षमता भी दिखाई।

ईस्ट जोन की पहली पारी में कुमार कुशाग्र का योगदान भी कम महत्वपूर्ण नहीं था। उन्होंने 101 रन बनाकर ईशान का बेहतरीन साथ दिया। दोनों के बीच बनी साझेदारी ने साउथ जोन के गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया था। इससे पहले अभिमन्यु ईश्वरन ने 72 और शिखर मोहन ने 85 रन की उपयोगी पारियां खेली थीं। इस तरह ईस्ट जोन के शीर्ष और मध्यक्रम के कई बल्लेबाजों ने योगदान दिया और टीम 700 के पार पहुंच गई।

ईस्ट जोन का 708 रन का स्कोर इस टूर्नामेंट के फाइनल में बेहद बड़ा स्कोर है। उपलब्ध रिकॉर्ड रिपोर्टों के अनुसार यह दलीप ट्रॉफी फाइनल के इतिहास के सबसे बड़े टीम स्कोरों में शामिल है और ईस्ट जोन के लिए प्रतियोगिता में 600 से ज्यादा रन बनाने का पहला मौका रहा।

ईस्ट जोन की गेंदबाजी में मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार की जोड़ी ने तीसरे दिन सबसे ज्यादा प्रभाव डाला। शमी ने दो विकेट लिए, जबकि मुकेश ने भी दो महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। बाकी विकेटों ने भी साउथ जोन की पारी को लगातार दबाव में रखा। गेंदबाजों को एक ऐसी टीम के खिलाफ गेंदबाजी करनी थी जो 708 रन के बाद मानसिक रूप से दबाव में थी, और उन्होंने इस स्थिति का पूरा फायदा उठाया।

इस मैच में एक और दिलचस्प पहलू वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन है। ईस्ट जोन के युवा बल्लेबाज ने पहली पारी में 44 रन की उपयोगी पारी खेली थी। 15 वर्षीय वैभव को फाइनल में उप-कप्तान की भूमिका भी दी गई थी और तीसरे दिन रिकी भुई के खिलाफ DRS लेने के फैसले में उनकी सलाह महत्वपूर्ण रही। ईशान शुरू में रिव्यू लेने को लेकर आश्वस्त नहीं थे, लेकिन वैभव के सुझाव के बाद रिव्यू लिया गया और भुई के बल्ले का किनारा अल्ट्रा-एज में दिखाई दिया। इससे ईस्ट जोन को महत्वपूर्ण विकेट मिला।

अब सवाल यह है कि चौथे दिन साउथ जोन की रणनीति क्या होगी। सबसे पहले तिलक वर्मा को लंबी पारी खेलनी होगी। वह 56 रन पर नाबाद हैं और अगर वह शुरुआती सत्र में विकेट बचाकर बल्लेबाजी करते हैं तो साउथ जोन की पारी को कुछ हद तक स्थिरता मिल सकती है। उनके साथ चामा मिलिंद हैं और इसके बाद निचले क्रम के बल्लेबाजों को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

साउथ जोन की कोशिश सिर्फ 466 रन की बढ़त को खत्म करने की नहीं होगी। उसे यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पहली पारी में इतने रन बनाए जाएं कि ईस्ट जोन को दोबारा बल्लेबाजी के लिए बुलाने से पहले पर्याप्त समय खर्च हो। पांच दिन के फाइनल में समय भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितने रन और विकेट। हालांकि मौजूदा स्थिति में ईस्ट जोन के पास रन और समय दोनों के लिहाज से स्पष्ट बढ़त है।

अगर साउथ जोन के बल्लेबाज चौथे दिन तिलक के साथ बड़ी साझेदारियां बनाने में सफल होते हैं तो मुकाबला कुछ समय के लिए फिर रोमांचक हो सकता है। लेकिन अगर सुबह के सत्र में तिलक का विकेट गिर जाता है तो साउथ जोन की स्थिति बेहद मुश्किल हो सकती है। ईस्ट जोन के पास पहले ही 466 रन की बढ़त है और उसके गेंदबाजों ने तीसरे दिन दिखाया कि वे लगातार विकेट निकाल सकते हैं।

ईस्ट जोन के लिए फिलहाल सबसे बड़ा लक्ष्य साउथ जोन की पहली पारी को जल्द से जल्द समाप्त करना होगा। इसके बाद कप्तान ईशान किशन और टीम मैनेजमेंट के सामने मैच की रणनीति तय करने का विकल्प होगा। हालांकि प्रथम श्रेणी फाइनल में समय, मौसम, पिच और मैच की स्थिति को देखते हुए कप्तान को हर निर्णय सावधानी से लेना होगा।

अगर मुकाबला ड्रॉ की ओर जाता है तो पहली पारी की बढ़त भी बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार दलीप ट्रॉफी के मौजूदा नियमों में फाइनल ड्रॉ होने की स्थिति में पहली पारी में बढ़त हासिल करने वाली टीम को विजेता घोषित किया जा सकता है। इस लिहाज से 708 रन बनाने वाला ईस्ट जोन फिलहाल बहुत मजबूत स्थिति में है।

यही कारण है कि साउथ जोन के लिए चौथा दिन निर्णायक माना जा सकता है। अगर तिलक वर्मा और बाकी बल्लेबाज मिलकर पहली पारी को 400 या उससे ऊपर ले जाने में सफल होते हैं तो वे कम से कम मैच को लंबा खींच सकते हैं। लेकिन अगर ईस्ट जोन शुरुआती सत्र में कुछ विकेट निकाल लेता है तो 708 के जवाब में साउथ जोन का बड़ा स्कोर बनाना मुश्किल हो जाएगा।

तीसरे दिन की सबसे बड़ी कहानी इसलिए तिलक वर्मा का अर्धशतक और ईस्ट जोन की गेंदबाजी रही। कप्तान ने एक छोर संभालकर रखा, लेकिन दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे। देवदत्त पडिक्कल ने 62 रन की अच्छी पारी खेली, मगर उसे बड़ी पारी में नहीं बदल सके। मोहम्मद शमी ने महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट निकाले और मुकेश कुमार ने भी दबाव बनाए रखा। स्टंप्स तक स्कोर 242/6 था और साउथ जोन को अभी 466 रन और बनाने हैं ताकि वह ईस्ट जोन के पहली पारी के स्कोर की बराबरी कर सके।

चौथे दिन की शुरुआत इसलिए बेहद महत्वपूर्ण होगी। तिलक वर्मा 56 रन पर नाबाद हैं और साउथ जोन की उम्मीदें काफी हद तक उन्हीं पर टिकी हैं। अगर वह शतक तक पहुंचते हैं और निचले क्रम के साथ बड़ी साझेदारियां बनाते हैं तो टीम की पहली पारी का स्कोर सम्मानजनक स्तर तक पहुंच सकता है। लेकिन ईस्ट जोन के गेंदबाज उन्हें ज्यादा समय देना नहीं चाहेंगे।

कुल मिलाकर दलीप ट्रॉफी फाइनल में तीसरे दिन के बाद तस्वीर साफ तौर पर ईस्ट जोन के पक्ष में है। ईशान किशन की 270 रन की ऐतिहासिक पारी ने टीम को 708 तक पहुंचाया और अब शमी-मुकेश की गेंदबाजी ने साउथ जोन को 242/6 पर रोक दिया है। तिलक वर्मा की नाबाद 56 रन की पारी साउथ जोन के लिए उम्मीद की किरण जरूर है, लेकिन 466 रन की बड़ी कमी को पूरा करना अभी बहुत बड़ी चुनौती है। अगले दिन का पहला सत्र यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि साउथ जोन मुकाबले में वापसी की कोशिश कर पाएगा या ईस्ट जोन फाइनल पर अपनी पकड़ और मजबूत कर देगा।

ईशान किशन ने 334 गेंद पर 270 रन ठोके, ईस्ट जोन 708 पर ऑलआउट; कुशाग्र का शतक

http://दलीप ट्रॉफी फाइनल में साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा बल्लेबाजी करते हुए

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