भारत में UPI से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक बड़ा सवाल इन दिनों चर्चा में है—क्या अब UPI से पैसे भेजने या दुकान पर पेमेंट करने पर 18% GST देना होगा? सोशल मीडिया और कई रिपोर्टों में UPI पर GST को लेकर अलग-अलग तरह की बातें सामने आ रही हैं। लेकिन यहां सबसे पहले एक बात साफ समझना जरूरी है कि 18% GST पूरे UPI payment amount पर नहीं लगाया जा रहा है। नए framework के तहत जहां eligible merchant transaction पर Merchant Discount Rate यानी MDR लगेगा, वहां GST उस MDR या payment-processing fee पर लागू होगा, न कि ग्राहक द्वारा भेजी गई पूरी रकम पर।
इसका मतलब यह है कि अगर कोई ग्राहक किसी दुकान पर ₹10,000 का UPI payment करता है, तो ऐसा नहीं है कि ₹10,000 पर 18% GST यानी ₹1,800 अतिरिक्त देना पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर अगर उस transaction पर 0.4% MDR लागू होता है, तो ₹10,000 पर MDR ₹40 होगा। 18% GST इस ₹40 पर लगेगा, जो ₹7.20 बनता है। यानी MDR और उसके GST को मिलाकर payment-processing cost ₹47.20 होगी।
यह बदलाव आम UPI users और merchants के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से UPI transactions को zero-MDR model के तहत चलाया जा रहा था। अब 15 अक्टूबर 2026 से कुछ निर्धारित merchant transactions पर MDR framework लागू किया जाना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सभी UPI transactions पर blanket charge नहीं है और Person-to-Person यानी P2P transactions इससे बाहर रहेंगे।
सबसे पहले समझते हैं कि MDR आखिर है क्या। Merchant Discount Rate वह fee है जो digital payment transaction को process करने वाले payment ecosystem में merchant-side transaction पर लागू होती है। यह ग्राहक से सीधे वसूला जाने वाला कोई सामान्य UPI tax नहीं है। सरकार के अनुसार MDR कोई सरकारी tax या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला charge नहीं है। यह payment ecosystem के अलग-अलग participants के बीच वितरित होता है, ताकि UPI infrastructure को चलाने और विस्तार देने की लागत को support किया जा सके।
यही वजह है कि UPI पर GST को लेकर चल रही चर्चा में MDR और GST को अलग-अलग समझना जरूरी है। GST किसी UPI transaction की मूल रकम पर नहीं लगाया जा रहा है। GST payment-processing service से जुड़े MDR या fee पर लागू होता है। Financial Express की रिपोर्ट में tax experts के हवाले से भी यही स्पष्ट किया गया है कि ₹10,000 के eligible UPI payment पर यदि MDR 0.4% है, तो MDR ₹40 होगा और 18% GST केवल ₹40 पर यानी ₹7.20 लगेगा।
अब सवाल आता है कि आखिर किन UPI transactions पर MDR लगेगा। 15 सितंबर 2026 को वित्त मंत्रालय ने बताया कि ₹2,000 तक के merchant UPI payments free रहेंगे। इसके अलावा छोटे merchants के लिए zero-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के मुताबिक इससे करीब 96% Person-to-Merchant यानी P2M transactions प्रभावित नहीं होंगे।
इसका मतलब है कि यदि कोई ग्राहक किसी दुकान पर ₹500, ₹1,000 या ₹2,000 का UPI payment करता है, तो इस framework के तहत उस payment पर MDR नहीं लगेगा। इसी तरह Person-to-Person payments यानी किसी दोस्त, रिश्तेदार या दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसे भेजने पर भी MDR नहीं लगेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि P2P UPI transactions amount की परवाह किए बिना free रहेंगे।
उदाहरण के लिए अगर आप अपने दोस्त को ₹20,000 UPI से भेजते हैं, तो इस transaction पर MDR नहीं लगेगा। यानी ₹20,000 भेजने पर केवल इसलिए कोई 0.4% MDR या उसके ऊपर GST नहीं लगाया जाएगा। P2P transactions इस नए MDR framework से बाहर हैं।
लेकिन merchant payment की स्थिति अलग हो सकती है। अगर आप किसी व्यापारी को ₹10,000 का payment करते हैं और वह transaction eligible category में आता है, तो merchant-side MDR लागू हो सकता है। सरकार के नए framework के अनुसार 0.4% MDR की दर कुछ eligible merchant transactions के लिए बताई गई है। इस MDR पर 18% GST लागू होगा।
अब ₹10,000 वाले उदाहरण को और आसानी से समझिए। मान लीजिए transaction eligible है और MDR 0.4% है। ₹10,000 का 0.4% यानी ₹40 MDR हुआ। ₹40 का 18% GST ₹7.20 होता है। इस तरह MDR और GST मिलाकर ₹47.20 payment-processing cost बनती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ₹10,000 पर 18% GST नहीं लगा। GST केवल ₹40 के MDR पर लगा।
इसी तरह अगर किसी eligible transaction पर MDR ₹100 है, तो 18% GST ₹18 होगा। कुल MDR-related cost ₹118 होगी। इसलिए व्यापारी और ग्राहक दोनों के लिए यह समझना जरूरी है कि GST की गणना transaction value के बजाय applicable MDR/fee पर होती है।
अब सबसे बड़ा सवाल—यह पैसा कौन देगा? उपलब्ध जानकारी के मुताबिक MDR merchant-side charge है। यानी payment accept करने वाले eligible merchant पर यह cost लागू होती है। ग्राहक को UPI transaction करते समय अलग से 18% GST देने की व्यवस्था नहीं बताई गई है। सरकार ने पहले भी स्पष्ट किया है कि consumers से UPI transaction charge नहीं लिया जाएगा और नए framework में P2P payments free रहेंगे।
सरकार ने यह भी बताया है कि छोटे merchants को सुरक्षा देने के लिए zero-MDR framework जारी रहेगा। खास तौर पर ऐसे छोटे merchants जो UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक receive करते हैं, उन्हें zero MDR category में रखा गया है। इससे street vendors, neighbourhood shops और छोटे कारोबारियों को नए MDR cost से राहत देने का उद्देश्य है।
इसका अर्थ यह हुआ कि हर दुकानदार को UPI payment पर MDR नहीं देना पड़ेगा। किसी merchant की category, transaction amount और लागू framework के आधार पर तय होगा कि MDR लगेगा या नहीं। इसलिए केवल यह कहना कि “15 अक्टूबर से हर UPI payment पर charge लगेगा” सही नहीं होगा।
इसी तरह यह भी गलत होगा कि “₹2,000 से ज्यादा हर UPI payment पर customer से 18% GST लिया जाएगा।” असल व्यवस्था इससे अलग है। ₹2,000 की सीमा merchant-side MDR framework से जुड़ी है और GST applicable MDR पर लगता है। P2P transactions इससे बाहर हैं।
अब सवाल आता है कि GST-registered merchants के लिए इसका क्या असर होगा। Tax experts के मुताबिक GST-registered businesses, applicable conditions पूरी होने पर, MDR पर दिए गए GST का Input Tax Credit यानी ITC claim कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि eligible registered business के लिए MDR पर दिया गया GST हमेशा final tax cost नहीं रह सकता।
हालांकि हर व्यापारी के लिए ITC की स्थिति समान नहीं होगी। यह merchant के GST registration, business use और लागू GST rules पर निर्भर करेगी। इसलिए किसी व्यापारी को अपने specific case में tax professional से सलाह लेकर ITC treatment तय करना चाहिए।
वहीं GST registration के दायरे में नहीं आने वाले छोटे या unregistered merchants के लिए MDR और उस पर GST का treatment अलग हो सकता है। ऐसे businesses के लिए payment-processing cost एक वास्तविक business expense बन सकती है, खासकर अगर वे eligible higher-value UPI merchant transactions का बड़ा volume लेते हैं।
सरकार का कहना है कि नए framework का उद्देश्य UPI ecosystem को financially sustainable बनाना है। पिछले कई वर्षों में UPI transactions की संख्या और value तेजी से बढ़ी है। UPI को operate करने के लिए banks, payment service providers और technology infrastructure की आवश्यकता होती है। सरकार के अनुसार MDR व्यवस्था इसी payment ecosystem को support करने के broader framework का हिस्सा है।
अगस्त 2026 में UPI ने 24.5 billion transactions process किए, जिनकी कुल value लगभग ₹29.8 trillion थी। Reuters के मुताबिक UPI भारत के digital payments ecosystem में बहुत बड़ा हिस्सा रखता है और real-time payments में भी इसकी वैश्विक भूमिका महत्वपूर्ण है।
इतने बड़े payment network को maintain करने के लिए banks, payment apps और अन्य ecosystem participants की भूमिका रहती है। अब MDR framework को इसी आर्थिक sustainability से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि नए नियमों को लेकर merchants के बीच चिंता भी सामने आई है। कुछ व्यापारी संगठनों का कहना है कि MDR से उनकी payment acceptance cost बढ़ सकती है। अगर किसी business का profit margin पहले से कम है, तो payment-processing cost उसके लिए अतिरिक्त खर्च बन सकती है। सितंबर 2026 में मध्य प्रदेश के कई व्यापारी संगठनों की ओर से इस मुद्दे पर विरोध की खबरें भी सामने आई हैं।
इंदौर में भी व्यापारिक संगठनों द्वारा UPI MDR के विरोध में “No UPI Day” की घोषणा किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार 23 सितंबर को बड़ी संख्या में व्यापारी UPI QR codes को अस्थायी रूप से बंद रखने की योजना बना रहे हैं। यह व्यापारियों की ओर से नए MDR framework के प्रति व्यक्त की जा रही चिंता को दर्शाता है।
दूसरी ओर सरकार ने कहा है कि लगभग 96% P2M transactions नए MDR framework से unaffected रहेंगे। इसका कारण यह है कि ₹2,000 तक के merchant payments और zero-MDR category में आने वाले छोटे merchants के transactions free रहेंगे।
यहां एक और जरूरी सवाल है—क्या व्यापारी यह MDR customer से ले सकता है? उपलब्ध सरकारी framework में MDR merchant-side cost के रूप में बताया गया है और सरकार ने payment ecosystem participants के साथ यह सुनिश्चित करने की बात कही है कि merchant इस cost को customer पर न डाले। इसलिए ग्राहकों के लिए अलग से UPI surcharge की स्थिति को merchant द्वारा मनमाने तरीके से लागू करना इस framework का उद्देश्य नहीं है।
ग्राहकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि UPI app खोलकर payment करने पर आपको सामान्य तौर पर “18% GST” अलग से नहीं देना है। अगर कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को पैसे भेज रहा है, तो P2P transaction free रहेगा। अगर merchant payment ₹2,000 तक है, तो वह भी MDR-free category में रहेगा।
अगर payment ₹2,000 से अधिक है, तब भी हर transaction पर automatically customer से 18% GST नहीं लिया जाएगा। पहले यह देखा जाएगा कि transaction eligible MDR category में आता है या नहीं। उसके बाद applicable MDR और उस MDR पर GST की गणना होगी।
मान लीजिए किसी eligible merchant transaction की value ₹25,000 है और MDR rate 0.4% है। MDR ₹100 होगा। इस ₹100 पर 18% GST यानी ₹18 लगेगा। इस तरह MDR plus GST ₹118 होगा। यहां भी ₹25,000 की पूरी रकम पर 18% GST नहीं लगाया गया है।
इसी तरह ₹50,000 के eligible transaction पर 0.4% MDR ₹200 होगा। इसका 18% GST ₹36 होगा। कुल MDR-related charge ₹236 होगा। यह calculation केवल समझाने के लिए है; वास्तविक charge applicable category, cap और exemption पर निर्भर करेगा।
कुछ specified sectors के लिए अलग MDR treatment की जानकारी भी सामने आई है। Reports में telecom, insurance, fuel और public transport जैसी essential categories के लिए lower या flat MDR arrangements का उल्लेख है। इसलिए हर merchant category में एक जैसा calculation लागू नहीं होगा।
इसलिए व्यापारी के लिए यह जरूरी है कि वह अपने acquiring bank, payment service provider या payment aggregator से अपनी specific MDR category और applicable fee structure की पुष्टि करे।
UPI के नए framework को लेकर एक और confusion यह है कि कुछ लोग इसे “UPI पर नया GST” बता रहे हैं। वास्तव में GST कोई नया tax केवल UPI transaction value पर नहीं लगाया गया है। GST कानून के तहत payment-processing services से संबंधित applicable charges पर GST पहले से tax framework का हिस्सा रहा है। नई बात यह है कि अब eligible UPI merchant transactions पर MDR लागू होने के कारण उस MDR पर GST का सवाल सामने आया है।
अप्रैल 2025 में वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि ₹2,000 से अधिक के UPI transactions की पूरी रकम पर GST लगाने की कोई proposal नहीं थी और ऐसी खबरों को misleading बताया गया था। उस समय UPI पर MDR लागू नहीं था, इसलिए UPI transactions से संबंधित MDR-based GST भी नहीं था।
अब 2026 के नए framework के बाद स्थिति बदल रही है क्योंकि कुछ merchant transactions पर MDR लागू किया जा रहा है। इसलिए 2025 की पुरानी “UPI पर GST नहीं” वाली जानकारी को 2026 के नए MDR framework के साथ context में समझना जरूरी है।
UPI users के लिए practical तौर पर सबसे आसान नियम यह है कि तीन चीजों को अलग-अलग समझें—UPI payment amount, MDR और GST। Payment amount वह रकम है जो आप merchant को देते हैं। MDR payment-processing से जुड़ी merchant-side fee है। GST applicable MDR या fee पर लगने वाला tax है।
यानी ₹10,000 का payment और ₹10,000 का taxable amount एक ही चीज नहीं हैं। अगर उस payment पर ₹40 MDR बनता है, तो GST ₹40 पर लगेगा, ₹10,000 पर नहीं।
छोटे दुकानदारों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है। अगर कोई street vendor या neighbourhood shop zero-MDR category में आता है, तो उसे eligible transactions पर MDR नहीं देना होगा और इसलिए MDR पर GST का सवाल भी नहीं उठेगा। सरकार ने छोटे merchants को इसी तरह के zero-MDR protection में रखने की बात कही है।
दूसरी ओर बड़े merchants या ऐसे businesses जिनके eligible UPI transactions नए MDR framework में आते हैं, उन्हें अपने accounts में payment-processing costs को सही तरीके से record करना होगा। GST-registered businesses को applicable GST का ITC treatment भी accounting system में सही तरीके से देखना होगा।
यह बदलाव payment apps के लिए भी महत्वपूर्ण है। PhonePe, Google Pay, Paytm और दूसरे UPI ecosystem participants merchant payments process करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। MDR से मिलने वाली रकम payment ecosystem के विभिन्न participants में distribute होती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई सरकारी tax collection नहीं है।
UPI का मूल उद्देश्य digital payments को आसान बनाना रहा है। नए framework में भी सरकार ने कहा है कि P2P payments पूरी तरह free रहेंगे और बड़ी संख्या में merchant transactions भी zero-MDR framework में रहेंगे। इसका अर्थ यह है कि UPI का सामान्य रोजमर्रा का उपयोग—जैसे दोस्त को पैसे भेजना, परिवार को रकम transfer करना या छोटी दुकान पर ₹500-₹2,000 का payment करना—इस MDR framework से सीधे प्रभावित नहीं होगा।
हालांकि high-value merchant payments में payment acceptance cost बढ़ सकती है। यही वजह है कि आने वाले समय में merchants और payment providers के बीच MDR structure को लेकर चर्चा जारी रहने की संभावना है।
ग्राहकों के लिए भी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि merchant किसी transaction पर अलग से surcharge या additional fee तो नहीं जोड़ रहा। अगर किसी payment को लेकर अतिरिक्त charge दिखाई देता है, तो customer को transaction receipt या payment statement जरूर देखना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात फिर से समझ लें—18% GST पूरे UPI transaction पर नहीं है। Eligible merchant transaction पर यदि MDR लगता है, तो GST उस MDR/fee पर लागू होगा। उदाहरण के तौर पर ₹10,000 payment पर 0.4% MDR ₹40 और उसका 18% GST ₹7.20 होगा। यानी MDR और GST मिलाकर ₹47.20, न कि ₹1,800।
इसके अलावा P2P UPI transactions free हैं, और ₹2,000 तक के merchant payments भी MDR से बाहर रखे गए हैं। छोटे merchants के लिए zero-MDR व्यवस्था भी जारी है। सरकार के अनुसार करीब 96% P2M transactions नए MDR framework से प्रभावित नहीं होंगे।
इसलिए UPI users को सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी पोस्ट से सावधान रहना चाहिए जिनमें दावा किया जा रहा हो कि “अब ₹2,000 से ज्यादा UPI payment पर 18% GST लगेगा।” यह दावा सही तरीके से नियम को नहीं समझाता। वास्तविक व्यवस्था में GST transaction की पूरी value पर नहीं, applicable MDR या payment-processing fee पर लगता है।
व्यापारियों को अपने payment provider से MDR rate, exemption category, applicable cap और GST invoice की जानकारी लेनी चाहिए। GST-registered businesses को ITC की eligibility भी अपने tax advisor से verify करनी चाहिए।
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