Advertisement

दिल्ली में दुनिया की सबसे बड़ी AI Summit, 135+ देशों के डेलीगेट्स जुटेंगे

भारत एक बार फिर वैश्विक टेक नक्शे पर सुर्खियों में है। राजधानी दिल्ली में होने जा रही देश की अब तक की सबसे बड़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बैठक ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पांच दिनों तक चलने वाला यह महाआयोजन सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि उस बदलते दौर का संकेत है जिसमें एआई अर्थव्यवस्था, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और गवर्नेंस—हर क्षेत्र की दिशा तय करने जा रहा है।

इस समिट में 100 से ज्यादा सीईओ, 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि, और 135 से ज्यादा देशों के डेलीगेट्स भाग लेने वाले हैं। इतने बड़े पैमाने पर किसी टेक इवेंट में वैश्विक भागीदारी अपने आप में ऐतिहासिक मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य साफ है—भारत को एआई इनोवेशन, रिसर्च, टैलेंट और जिम्मेदार उपयोग के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों की कतार में खड़ा करना।

उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री का संबोधन इस बात का संकेत देगा कि आने वाले वर्षों में एआई को लेकर भारत की रणनीति क्या रहने वाली है। नीति निर्माताओं से लेकर स्टार्टअप फाउंडर्स तक, हर किसी की नजर इस बात पर होगी कि डेटा, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट और रेगुलेशन के मोर्चे पर क्या नए ऐलान होते हैं।

दुनिया इस समय एआई की दौड़ में तेज रफ्तार से भाग रही है। बड़े मॉडल, जनरेटिव एआई, ऑटोमेशन और रक्षा तकनीकों में निवेश रिकॉर्ड स्तर पर है। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह सिर्फ उपभोक्ता बनकर न रहे, बल्कि निर्माता और निर्यातक की भूमिका में भी आए। यही संदेश इस समिट के जरिए देने की कोशिश होगी।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में एआई अपनाने की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। कंपनियां ग्राहक सेवा से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीकल्चर तक में एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी एआई आधारित समाधानों की बाढ़ सी आ गई है। हेल्थकेयर में डायग्नोस्टिक्स, फिनटेक में फ्रॉड डिटेक्शन, एजुकेशन में पर्सनलाइज्ड लर्निंग—हर जगह नए प्रयोग हो रहे हैं।

समिट के दौरान कई बड़े समझौते और पार्टनरशिप की उम्मीद है। वैश्विक टेक दिग्गज भारतीय कंपनियों और संस्थानों के साथ मिलकर रिसर्च लैब, डेटा सेंटर और ट्रेनिंग हब स्थापित कर सकते हैं। इससे निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा टैलेंट है। हर साल लाखों इंजीनियर और टेक प्रोफेशनल्स तैयार होते हैं। अगर उन्हें सही प्लेटफॉर्म, रिसर्च सपोर्ट और फंडिंग मिलती है, तो वे दुनिया के लिए समाधान बना सकते हैं। इस समिट में स्किलिंग और अपस्किलिंग पर विशेष फोकस रखा गया है।

एक बड़ा मुद्दा जिम्मेदार एआई का भी है। जैसे-जैसे तकनीक ताकतवर होती जा रही है, वैसे-वैसे गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और गलत इस्तेमाल की चिंताएं भी बढ़ रही हैं। इसलिए नीति, नैतिकता और पारदर्शिता पर चर्चा अहम रहने वाली है। भारत कोशिश करेगा कि विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जाए।

महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अलग सत्र रखे जा सकते हैं। उद्देश्य यह है कि एआई का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती, मौसम पूर्वानुमान और सप्लाई चेन सुधारने में भी एआई की बड़ी भूमिका हो सकती है।

स्टार्टअप्स के लिए यह मंच बेहद खास है। निवेशकों के सामने अपने आइडिया पेश करने, फंडिंग पाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने का मौका मिलेगा। कई यूनिकॉर्न कंपनियां भी यहां अपने अनुभव साझा कर सकती हैं कि कैसे उन्होंने शुरुआती चुनौतियों को पार किया।

वैश्विक प्रतिनिधियों की मौजूदगी भारत की कूटनीतिक ताकत को भी दर्शाती है। टेक्नोलॉजी अब सिर्फ बिजनेस का विषय नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का आधार बन चुकी है। सेमीकंडक्टर, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और एआई—इन सब पर सहयोग भविष्य की राजनीति तय करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में एआई से भारत की जीडीपी में बड़ा योगदान जुड़ सकता है। ऑटोमेशन से उत्पादकता बढ़ेगी, नई इंडस्ट्री पैदा होंगी और डिजिटल सेवाओं का विस्तार होगा। हालांकि इसके साथ नौकरी के स्वरूप में बदलाव भी आएगा, इसलिए रिस्किलिंग जरूरी होगी।

दिल्ली में होने वाला यह आयोजन देश के लिए प्रतिष्ठा का सवाल भी है। सफल प्रबंधन और ठोस नतीजे यह संदेश देंगे कि भारत बड़े वैश्विक टेक इवेंट्स की मेजबानी करने में सक्षम है।

समिट का एक पहलू यह भी होगा कि सरकार, उद्योग और अकादमिक जगत एक साथ बैठकर भविष्य का रोडमैप तैयार करें। विश्वविद्यालयों में रिसर्च को बढ़ावा, सुपरकंप्यूटिंग संसाधनों की उपलब्धता और ओपन इनोवेशन प्लेटफॉर्म जैसे कदमों पर चर्चा हो सकती है।

दुनिया की नजर इस बात पर भी रहेगी कि भारत एआई के लोकतांत्रिक उपयोग की कैसी मिसाल पेश करता है। क्या तकनीक आम नागरिक के जीवन को आसान बना पाती है? क्या इससे सरकारी सेवाएं तेज और पारदर्शी होती हैं? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में तय होंगे।

फिलहाल इतना तय है कि यह समिट भारत के टेक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय लिखने जा रहा है। पांच दिनों तक दिल्ली में विचार, विजन और भविष्य की तस्वीर तैयार होगी।

http://india-ai-summit-delhi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *