भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल इन दिनों अपनी बल्लेबाजी के साथ विकेटकीपिंग का अभ्यास करने को लेकर चर्चा में हैं। मुंबई की रणजी ट्रॉफी टीम की तैयारियों के दौरान जायसवाल विकेटकीपिंग ग्लव्स पहने दिखाई दिए। उनके इस नए प्रयोग ने क्रिकेट प्रशंसकों और पूर्व खिलाड़ियों के बीच बहस छेड़ दी है। भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने जायसवाल के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए सलाह दी है कि उन्हें नई भूमिका सीखने के बजाय अपनी बल्लेबाजी को और मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। जाफर का मानना है कि विकेटकीपिंग एक ऐसा कौशल है, जिसे विकसित करने के लिए लंबे समय तक अभ्यास और विशेष तकनीक की जरूरत होती है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में यह जिम्मेदारी काफी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। <a href=”https://indianexpress.com/article/sports/cricket/yashasvi-jaiswal-wicketkeeper-joke-wasim-jaffer-mumbai-ranji-trophy-10915482/”>Indian Express की रिपोर्ट</a> और <a href=”https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/news/focus-on-your-batting-wasim-jaffer-questions-yashasvi-jaiswals-wicketkeeping-move/articleshow/134852485.cms”>Times of India की रिपोर्ट</a> के मुताबिक, जाफर ने जायसवाल को रणजी ट्रॉफी और न्यूजीलैंड दौरे से पहले अपनी बल्लेबाजी पर फोकस करने की सलाह दी है।
जायसवाल फिलहाल भारतीय टेस्ट टीम के अहम बल्लेबाजों में गिने जाते हैं, लेकिन वनडे और टी-20 अंतरराष्ट्रीय टीम में उनकी जगह नियमित रूप से पक्की नहीं हुई है। ऐसे में विकेटकीपिंग सीखने की उनकी कोशिश को कुछ लोग सीमित ओवरों की टीम में जगह बनाने के संभावित प्रयास के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, जायसवाल ने खुद सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्होंने विकेटकीपिंग का अभ्यास शुरू करने का फैसला किस खास उद्देश्य से लिया है। इसलिए इसे भारतीय टीम में जगह बनाने की उनकी घोषित रणनीति कहना सही नहीं होगा।
वसीम जाफर ने क्यों उठाए सवाल?
पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर ने अपने यूट्यूब चैनल पर जायसवाल की विकेटकीपिंग की कोशिश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस फैसले से हैरानी हुई। जाफर के अनुसार, अगर किसी खिलाड़ी ने बचपन से विकेटकीपिंग नहीं की है, तो 24 साल की उम्र में इस भूमिका में दक्षता हासिल करना आसान नहीं होता। विकेटकीपिंग सिर्फ ग्लव्स पहनकर गेंद पकड़ने तक सीमित नहीं है। इसमें तेज प्रतिक्रिया, पैरों की सही स्थिति, शरीर का संतुलन, गेंद की दिशा का अनुमान और लगातार एकाग्रता बनाए रखना जरूरी होता है।
जाफर ने यह भी सवाल उठाया कि अगर जायसवाल विकेटकीपर के तौर पर भारतीय व्हाइट-बॉल टीम में जगह बनाना चाहते हैं, तो उनके सामने पहले से कई अनुभवी विकल्प मौजूद हैं। इनमें ऋषभ पंत, संजू सैमसन और ईशान किशन जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों को विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी दोनों का अनुभव है। ऐसे में जायसवाल के लिए इस भूमिका में जगह बनाना अपने आप में बड़ी चुनौती होगी।
जाफर की टिप्पणी का मुख्य संदेश यही था कि जायसवाल को अपनी सबसे मजबूत क्षमता यानी बल्लेबाजी को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रणजी ट्रॉफी और न्यूजीलैंड दौरे से पहले बल्लेबाजी पर ध्यान देना अधिक उपयोगी होगा। जाफर की राय एक पूर्व खिलाड़ी का विश्लेषण है, न कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) या चयनकर्ताओं की ओर से जारी कोई आधिकारिक निर्देश।
जायसवाल विकेटकीपिंग का अभ्यास क्यों कर रहे हैं?
जायसवाल की विकेटकीपिंग की चर्चा तब शुरू हुई, जब मुंबई की रणजी ट्रॉफी तैयारियों के दौरान उन्हें विकेट के पीछे अभ्यास करते देखा गया। मुंबई टीम के कप्तान सिद्धेश लाड ने भी इस बारे में जानकारी दी थी। उनके मुताबिक, जायसवाल विकेटकीपिंग सीखने की कोशिश कर रहे हैं और भविष्य में मुंबई या भारतीय टीम के लिए इस भूमिका को निभाने की इच्छा रख सकते हैं। हालांकि, लाड ने यह भी स्पष्ट किया था कि उन्हें जायसवाल की दीर्घकालिक योजना के बारे में पूरी जानकारी नहीं है।
इससे साफ है कि विकेटकीपिंग का अभ्यास फिलहाल एक संभावित अतिरिक्त कौशल के तौर पर देखा जा रहा है। क्रिकेट में कई खिलाड़ी अपनी उपयोगिता बढ़ाने के लिए बल्लेबाजी या गेंदबाजी के अलावा दूसरे कौशल पर भी काम करते हैं। कोई बल्लेबाज पार्ट-टाइम गेंदबाजी सीखता है, तो कोई फील्डिंग के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ाता है। जायसवाल पहले भी नेट्स में लेग-स्पिन गेंदबाजी का अभ्यास करते दिखाई दिए हैं।
लेकिन अतिरिक्त कौशल विकसित करने और किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी निभाने के बीच बड़ा अंतर है। अभ्यास में विकेटकीपिंग करना और लंबे मैच में लगातार विकेट के पीछे खड़े रहना दो अलग चुनौतियां हैं। खिलाड़ी को विकेटकीपिंग में बेहतर होने के लिए कैच पकड़ने, स्टंपिंग करने, तेज गेंदबाजों के सामने सही स्थिति बनाए रखने और स्पिनरों के खिलाफ गेंद की उछाल को समझने का लगातार अभ्यास करना पड़ता है।
व्हाइट-बॉल क्रिकेट में जगह बनाने की चुनौती
यशस्वी जायसवाल ने टेस्ट क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाई है। बाएं हाथ के इस सलामी बल्लेबाज की आक्रामक शैली, रन बनाने की क्षमता और लंबी पारियां खेलने की योग्यता ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के महत्वपूर्ण युवा खिलाड़ियों में शामिल किया है। लेकिन टेस्ट क्रिकेट में मजबूत प्रदर्शन करने के बावजूद वनडे और टी-20 अंतरराष्ट्रीय टीमों में नियमित जगह हासिल करना अलग चुनौती है।
वनडे और टी-20 क्रिकेट में टीम संयोजन, खिलाड़ियों की भूमिका और उपलब्ध विकल्पों का चयन काफी अहम होता है। शीर्ष क्रम में जगह बनाने के लिए जायसवाल को दूसरे बल्लेबाजों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। इसके अलावा टीम प्रबंधन को विकेटकीपर, मध्यक्रम के बल्लेबाज, ऑलराउंडर और गेंदबाजों के बीच संतुलन बनाना होता है।
यही वजह है कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में किसी खिलाड़ी के चयन का फैसला केवल उसकी बल्लेबाजी पर निर्भर नहीं करता। फॉर्म, टीम की जरूरत, विरोधी टीम के खिलाफ रणनीति और उपलब्ध खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी मायने रखता है। हालांकि, विकेटकीपिंग सीख लेने से जायसवाल को स्वतः भारतीय टीम में जगह मिल जाएगी, ऐसा मानने का कोई आधार नहीं है।
जाफर का मानना है कि जायसवाल को अपने मुख्य कौशल पर काम करना चाहिए। अगर वह घरेलू क्रिकेट में लगातार बड़ी पारियां खेलते हैं और अपनी तकनीक को मजबूत करते हैं, तो चयनकर्ताओं के सामने उनका दावा मजबूत हो सकता है। यह रास्ता उनकी मौजूदा पहचान यानी बल्लेबाज के तौर पर प्रदर्शन को और बेहतर बनाने से जुड़ा है।
विकेटकीपिंग इतनी मुश्किल क्यों होती है?
क्रिकेट में विकेटकीपर की भूमिका बेहद जिम्मेदारी वाली होती है। गेंदबाज के हर ओवर के दौरान विकेटकीपर को लगातार सतर्क रहना पड़ता है। तेज गेंदबाजों के सामने गेंद तेजी से आती है, जबकि स्पिनरों के खिलाफ गेंद की उछाल और दिशा में अचानक बदलाव हो सकता है। विकेटकीपर को कैच पकड़ने के साथ-साथ स्टंपिंग, रन आउट में सहयोग और गेंदबाजों को सही संकेत देने जैसे काम भी करने होते हैं।
टेस्ट क्रिकेट में यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, क्योंकि विकेटकीपर को लंबे समय तक मैदान पर सक्रिय रहना पड़ सकता है। पांच दिन तक चलने वाले मैच में शारीरिक फिटनेस, मानसिक एकाग्रता और तकनीकी दक्षता की जरूरत होती है। यदि कोई खिलाड़ी पहले से इस भूमिका का अभ्यास नहीं कर रहा है, तो उसे अपने फुटवर्क, हाथों की स्थिति और गेंद को पढ़ने की क्षमता पर विशेष मेहनत करनी पड़ती है।
यही वजह है कि जाफर ने जायसवाल के फैसले पर सवाल उठाए। उनका तर्क है कि विकेटकीपिंग एक ऐसा कौशल नहीं है, जिसे कुछ ही अभ्यास सत्रों में पूरी तरह सीखा जा सके। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं कि कोई खिलाड़ी बाद की उम्र में विकेटकीपिंग सीख ही नहीं सकता। सही प्रशिक्षण, समय और लगातार अभ्यास से सुधार संभव है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए मेहनत और मैच अनुभव की जरूरत होगी।
रणजी ट्रॉफी से पहले जायसवाल के सामने क्या चुनौती है?
मुंबई की टीम रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को वानखेड़े स्टेडियम में चंडीगढ़ के खिलाफ रणजी ट्रॉफी का शुरुआती मुकाबला खेलने वाली है। जायसवाल के इस मैच में खेलने की उम्मीद जताई गई है। घरेलू क्रिकेट उनके लिए अपनी बल्लेबाजी की लय बनाए रखने और लंबे प्रारूप में तैयारी करने का अवसर होगा। रिपोर्टों के मुताबिक, वह मुंबई के एक अभ्यास मैच में लगभग 10 ओवर तक विकेटकीपिंग भी कर चुके हैं।
रणजी ट्रॉफी भारतीय घरेलू क्रिकेट का प्रमुख प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट है। इसमें अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राष्ट्रीय चयन के लिए महत्वपूर्ण दावेदार माना जाता है। स्थापित अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए भी घरेलू क्रिकेट अपनी तकनीक सुधारने, मैच अभ्यास हासिल करने और अलग परिस्थितियों में प्रदर्शन करने का मौका देता है।
जायसवाल के लिए इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह अपनी बल्लेबाजी की निरंतरता कैसे बनाए रखते हैं। अगर वह रणजी मैचों में अच्छी पारियां खेलते हैं, तो इससे उनके आत्मविश्वास और घरेलू सत्र की शुरुआत को मजबूती मिल सकती है। वहीं, विकेटकीपिंग पर अतिरिक्त समय देने से उनकी बल्लेबाजी की तैयारी प्रभावित होती है या नहीं, यह आगे उनके अभ्यास और मैच प्रदर्शन से ही पता चलेगा।
जाफर की सलाह इसी संदर्भ में आई है। उनका कहना है कि आगामी घरेलू मुकाबलों से पहले बल्लेबाजी पर ध्यान देना अधिक जरूरी है। हालांकि, अंतिम निर्णय खिलाड़ी और उसकी टीम के प्रशिक्षण प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
न्यूजीलैंड दौरे से पहले क्या होगा?
जाफर ने जायसवाल को न्यूजीलैंड दौरे से पहले बल्लेबाजी पर ध्यान देने की सलाह भी दी है। इस दौरे को लेकर भारतीय टीम की तैयारियां और खिलाड़ियों की उपलब्धता महत्वपूर्ण रहेंगी। जायसवाल की भूमिका और चयन का फैसला टीम प्रबंधन तथा चयनकर्ताओं के निर्णय पर निर्भर करेगा।
किसी भी अंतरराष्ट्रीय दौरे से पहले खिलाड़ी को अपनी तकनीक, फिटनेस और मैच की परिस्थितियों के अनुसार तैयारी करनी होती है। बल्लेबाजों के लिए नई गेंद का सामना करना, ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों पर नियंत्रण, तेज गेंदबाजों के खिलाफ फुटवर्क और लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की क्षमता अहम होती है।
जायसवाल जैसे आक्रामक बल्लेबाज के लिए आक्रामकता और संयम के बीच संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा। घरेलू क्रिकेट में अच्छी पारियां उन्हें अपनी लय पर काम करने का मौका देंगी। यदि टीम प्रबंधन उन्हें आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए चुनता है, तो उनकी तैयारी का मुख्य आधार बल्लेबाजी और मैच फिटनेस ही होगा।
न्यूजीलैंड दौरे में उनकी भागीदारी, भूमिका और खेलने के अवसरों को लेकर अंतिम जानकारी आधिकारिक टीम घोषणा से ही स्पष्ट होगी। केवल जाफर की टिप्पणी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि जायसवाल को टीम में चुना जाएगा या नहीं।
क्या विकेटकीपिंग से चयन के अवसर बढ़ सकते हैं?
सैद्धांतिक तौर पर ऐसा अतिरिक्त कौशल किसी खिलाड़ी को अधिक बहुमुखी बना सकता है। अगर कोई बल्लेबाज विकेटकीपिंग में भी सक्षम हो, तो टीम संयोजन के कुछ विकल्प बढ़ सकते हैं। लेकिन इसके लिए उस खिलाड़ी का विकेटकीपिंग में भरोसेमंद होना जरूरी है। केवल अभ्यास में ग्लव्स पहन लेना चयन का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
भारत के पास पहले से विकेटकीपिंग करने वाले कई खिलाड़ी हैं। ऋषभ पंत, संजू सैमसन और ईशान किशन जैसे नामों के बीच प्रतिस्पर्धा के लिए जायसवाल को विकेटकीपिंग में भी उच्च स्तर की क्षमता दिखानी होगी। साथ ही, उन्हें अपनी बल्लेबाजी के स्तर को बनाए रखना होगा, क्योंकि चयनकर्ता किसी अतिरिक्त भूमिका के कारण प्राथमिक कौशल में गिरावट को नजरअंदाज करेंगे, इसकी गारंटी नहीं है।
इसलिए जाफर की टिप्पणी को जायसवाल की क्षमता पर अंतिम फैसला नहीं, बल्कि उनकी प्राथमिकताओं को लेकर एक क्रिकेट विशेषज्ञ की राय के रूप में देखना चाहिए। जायसवाल युवा हैं और अपने खेल में सुधार करने के लिए नए कौशल पर काम कर सकते हैं। लेकिन उनके लिए कौन-सा रास्ता सबसे उपयोगी होगा, यह उनके प्रदर्शन और टीम की जरूरतों से तय होगा।
क्रिकेट प्रशंसकों की नजर अब किस पर रहेगी?
जायसवाल की विकेटकीपिंग की तस्वीरें सामने आने के बाद प्रशंसकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या वह भविष्य में नियमित विकेटकीपर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं या यह केवल एक अतिरिक्त अभ्यास है। मुंबई के कप्तान सिद्धेश लाड ने उनकी कोशिश की जानकारी दी है, लेकिन जायसवाल की ओर से अभी इस बारे में कोई स्पष्ट सार्वजनिक घोषणा सामने नहीं आई है।
आने वाले दिनों में मुंबई के रणजी मैच, जायसवाल का बल्लेबाजी प्रदर्शन और टीम प्रबंधन की टिप्पणियां इस विषय पर और स्पष्टता दे सकती हैं। अगर वह विकेटकीपिंग का अभ्यास जारी रखते हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इसे कितनी नियमितता से करते हैं और क्या इसका उनके प्राथमिक खेल पर कोई असर पड़ता है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना ही कहा जा सकता है कि जायसवाल विकेटकीपिंग का अभ्यास कर रहे हैं और वसीम जाफर ने उन्हें अपनी बल्लेबाजी पर प्राथमिकता से ध्यान देने की सलाह दी है। व्हाइट-बॉल टीम में जगह बनाने के लिए विकेटकीपिंग सीखना उनका घोषित उद्देश्य है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यशस्वी जायसवाल की विकेटकीपिंग की कोशिश ने भारतीय क्रिकेट में नई चर्चा शुरू कर दी है। मुंबई की रणजी ट्रॉफी तैयारियों के दौरान विकेटकीपिंग ग्लव्स पहने नजर आने के बाद पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। जाफर के मुताबिक, विकेटकीपिंग एक कठिन और तकनीकी कौशल है, जिसे कम समय में सीखना आसान नहीं होता। उन्होंने जायसवाल को रणजी ट्रॉफी और न्यूजीलैंड दौरे से पहले अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान देने की सलाह दी है।
जायसवाल के लिए यह समय अपने मुख्य कौशल को मजबूत करने और घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने का है। विकेटकीपिंग उनके लिए भविष्य में अतिरिक्त विकल्प बन सकती है, लेकिन इससे भारतीय व्हाइट-बॉल टीम में जगह पक्की हो जाएगी, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।
अब सभी की नजर मुंबई के रणजी मुकाबले में उनके प्रदर्शन और आने वाले समय में उनकी तैयारी पर रहेगी। उनकी बल्लेबाजी, फिटनेस और टीम की जरूरतें ही यह तय करने में अहम होंगी कि भारतीय क्रिकेट में उनकी अगली भूमिका क्या होगी।

