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2027 वनडे वर्ल्ड कप फॉर्मेट पर विवाद: स्कॉटलैंड-नीदरलैंड्स ने ICC पर उठाए सवाल

2027 वनडे वर्ल्ड कप के नए फॉर्मेट को लेकर क्रिकेट जगत में विवाद शुरू हो गया है। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी ICC ने अगले पुरुष वनडे वर्ल्ड कप के लिए 14 टीमों वाला नया ढांचा घोषित किया है। इसके तहत टूर्नामेंट में तीन मुख्य प्रतिस्पर्धी चरण होंगे और सेमीफाइनल-फाइनल तक पहुंचने का रास्ता पहले की तुलना में काफी अलग होगा। लेकिन ICC के इस फैसले से स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स जैसे एसोसिएट देशों के क्रिकेट बोर्ड नाराज हैं।

क्रिकेट स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स क्रिकेट बोर्ड (KNCB) ने ICC के इस बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताई है। दोनों बोर्डों का कहना है कि इतने बड़े बदलाव से पहले एसोसिएट सदस्यों के साथ पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। उन्होंने इस रवैये को निराशाजनक और अपमानजनक बताया है। उनकी चिंता खास तौर पर इस बात को लेकर है कि नए सिस्टम में निचली रैंकिंग वाली टीमों के लिए वर्ल्ड कप के मुख्य चरण तक पहुंचना और मुश्किल हो सकता है।

ICC ने 15 जुलाई 2026 को नए फॉर्मेट की घोषणा की थी। 2027 का वर्ल्ड कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। टूर्नामेंट में कुल 14 टीमें शामिल होंगी। ICC का कहना है कि नए फॉर्मेट का उद्देश्य शुरुआती मुकाबलों से ही मैचों को ज्यादा प्रतिस्पर्धी और महत्वपूर्ण बनाना है।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पहले से तय दो ग्रुपों में 14 टीमों को सीधे बांटने के बजाय एक नया Super Series चरण जोड़ा गया है। 14 क्वालीफाई करने वाली टीमों में रैंकिंग के हिसाब से सबसे नीचे रहने वाली तीन टीमें इस चरण में एक-दूसरे के खिलाफ राउंड-रॉबिन मुकाबले खेलेंगी। इन तीन टीमों में से केवल शीर्ष टीम ही अगले चरण में जगह बना पाएगी।

यानी कागज पर वर्ल्ड कप में 14 टीमों की भागीदारी बनी रहेगी, लेकिन निचली रैंकिंग वाली तीन टीमों को मुख्य ग्रुप चरण में सीधे प्रवेश नहीं मिलेगा। उन्हें पहले आपस में मुकाबला करके अपनी जगह बचानी होगी।

यही बदलाव स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। एसोसिएट देशों का कहना है कि वे लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी जगह बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। ऐसे में वर्ल्ड कप जैसे सबसे बड़े मंच पर उनकी भागीदारी के रास्ते को अंतिम समय में बदलना उनके विकास के लिए चुनौती बन सकता है।

ICC के मुताबिक नए सिस्टम का उद्देश्य किसी टीम को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि टूर्नामेंट के हर मैच को अधिक महत्वपूर्ण बनाना है। क्रिकेट की वैश्विक संस्था का मानना है कि पिछले कुछ वर्ल्ड कप में कुछ मुकाबले ऐसे रहे हैं जिनमें टीमों के लिए आगे बढ़ने की संभावना खत्म होने के बाद मैच का महत्व कम हो गया था। नए फॉर्मेट में ऐसी स्थिति को कम करने की कोशिश की गई है।

लेकिन एसोसिएट देशों की चिंता अलग है। उनके लिए वर्ल्ड कप केवल एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि अपने देश में क्रिकेट को बढ़ावा देने, खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव देने, नए प्रशंसक बनाने और स्पॉन्सरशिप आकर्षित करने का बड़ा माध्यम है। इसलिए मुख्य टूर्नामेंट में लगातार खेलने का अवसर उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

दूसरे चरण में क्या होगा?

Super Series के बाद दूसरे चरण में 12 टीमें उतरेंगी। इन टीमों को दो ग्रुप में बांटा जाएगा और प्रत्येक ग्रुप में छह-छह टीमें होंगी। इस चरण में कुल 30 मैच खेले जाएंगे।

दोनों ग्रुप से शीर्ष तीन-तीन टीमें आगे बढ़ेंगी। इसके अलावा दोनों ग्रुप में चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों में से बेहतर प्रदर्शन करने वाली एक टीम भी अगले चरण में जगह बनाएगी। इस तरह कुल 7 टीमें Super 7 चरण में पहुंचेंगी।

यहां से टूर्नामेंट का मुकाबला और कठिन हो जाएगा। Super 7 चरण में सातों टीमें राउंड-रॉबिन आधार पर एक-दूसरे से मुकाबला करेंगी। इस चरण में कुल 21 मैच होंगे।

Super 7 में सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाली चार टीमें सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करेंगी। ICC ने सेमीफाइनल की जोड़ी भी निर्धारित की है। अंक तालिका में पहले स्थान पर रहने वाली टीम चौथे स्थान वाली टीम से भिड़ेगी, जबकि दूसरे स्थान की टीम तीसरे स्थान वाली टीम के खिलाफ खेलेगी।

इसके बाद दोनों सेमीफाइनल के विजेता फाइनल में आमने-सामने होंगे और वर्ल्ड कप चैंपियन का फैसला होगा।

इस तरह नए फॉर्मेट को समझें तो टूर्नामेंट का रास्ता मोटे तौर पर Super Series → Group Round → Super 7 → Semi-finals → Final रहेगा। ICC इसे तीन मुख्य प्रतिस्पर्धी चरणों के रूप में बताता है, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल अंतिम चरण होंगे।

पहले फॉर्मेट से कितना अलग है?

2021 में ICC ने 2027 वर्ल्ड कप के लिए 14 टीमों और 54 मैचों का फॉर्मेट घोषित किया था। उस समय योजना दो ग्रुप में सात-सात टीमों को रखने की थी। दोनों ग्रुप से तीन-तीन टीमें Super Six में पहुंचतीं और उसके बाद सेमीफाइनल और फाइनल खेला जाता।

अब ICC ने उस संरचना को बदल दिया है। नई व्यवस्था में Super Series और Super 7 को शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि 2027 वर्ल्ड कप की प्रतियोगिता पहले घोषित किए गए मॉडल से अलग होगी।

इस बदलाव से क्रिकेट प्रशंसकों के लिए टूर्नामेंट ज्यादा जटिल भी दिखाई दे सकता है, लेकिन ICC का तर्क है कि इससे हर मुकाबले का महत्व बढ़ेगा।

स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स को क्या आपत्ति है?

स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स लंबे समय से वनडे क्रिकेट में मजबूत एसोसिएट टीमों के रूप में पहचाने जाते हैं। दोनों देशों ने बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में कई बार मजबूत टीमों को चुनौती दी है।

नीदरलैंड्स के लिए 2027 वर्ल्ड कप तक पहुंचने की मौजूदा राह भी काफी लंबी है। KNCB के मुताबिक टीम ICC Cricket World Cup League 2 के जरिए क्वालीफिकेशन की दिशा में आगे बढ़ रही है। जुलाई 2026 में बोर्ड ने बताया था कि League 2 की शीर्ष चार टीमें क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में जाएंगी और वहां से चार टीमें 2027 वर्ल्ड कप के लिए जगह बनाएंगी।

ऐसे में एक टीम के लिए पहले League 2, फिर क्वालीफायर और उसके बाद वर्ल्ड कप के नए ढांचे से गुजरना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

स्कॉटलैंड की स्थिति भी इसी तरह महत्वपूर्ण है। टीम लगातार वनडे क्रिकेट खेल रही है और World Cup League 2 के मुकाबलों में हिस्सा ले रही है। क्रिकेट स्कॉटलैंड के मौजूदा कार्यक्रम में अगस्त 2026 में भी League 2 के मुकाबले शामिल हैं।

एसोसिएट बोर्डों का कहना है कि इस स्तर की अनिश्चितता से खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और प्रशासन के लिए लंबे समय की योजना बनाना मुश्किल हो सकता है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों बोर्डों ने ICC के साथ बदलावों पर चर्चा की थी और लिखित स्पष्टीकरण तथा निर्णय प्रक्रिया में बेहतर भागीदारी की मांग की थी।

‘अपमान’ वाली बात क्यों उठी?

स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स का मुख्य सवाल केवल फॉर्मेट पर नहीं बल्कि फैसला लेने की प्रक्रिया पर है।

दोनों बोर्डों का कहना है कि उन्होंने ICC के साथ बैठकें कीं और बदलावों को लेकर स्पष्ट जानकारी मांगी। उनके मुताबिक दूसरी बैठक के बाद दो सप्ताह से ज्यादा समय बीतने के बावजूद उन्हें ICC की ओर से कोई पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसी वजह से उन्होंने प्रक्रिया को निराशाजनक और अपमानजनक बताया।

यहां यह समझना जरूरी है कि “अपमान” का आरोप ICC पर संबंधित बोर्डों की ओर से लगाए गए विरोध का हिस्सा है। इसे किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ICC का तर्क क्या है?

ICC का कहना है कि नए फॉर्मेट का उद्देश्य प्रतियोगिता को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना है। संस्था के अनुसार तीन चरणों की संरचना से शुरुआती मैचों से ही परिणामों का महत्व बढ़ेगा और टीमों के लिए आगे बढ़ने की लड़ाई ज्यादा स्पष्ट रहेगी।

ICC ने यह भी बताया है कि बोर्ड के निर्णय को Chief Executives’ Committee की सिफारिशों के आधार पर मंजूरी दी गई थी और बोर्ड में एसोसिएट देशों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

यानी ICC इसे क्रिकेट की प्रतिस्पर्धात्मक गुणवत्ता बढ़ाने वाला बदलाव मान रहा है, जबकि एसोसिएट देश इसे अपने लिए अवसर कम होने के रूप में देख रहे हैं।

क्या 14 टीमों की संख्या कम हुई है?

नहीं। 2027 वनडे वर्ल्ड कप में 14 टीमें ही खेलेंगी। विवाद टीमों की कुल संख्या को लेकर नहीं बल्कि प्रतियोगिता के रास्ते को लेकर है।

ICC के नए ढांचे में 14 योग्य टीमों में से निचली तीन रैंक वाली टीमों को Super Series खेलनी होगी। इनमें से सिर्फ एक टीम आगे बढ़ेगी और मुख्य 12-टीम चरण में शामिल होगी।

इसका अर्थ यह है कि वर्ल्ड कप में 14 टीमों की भागीदारी का लक्ष्य बरकरार है, लेकिन सभी टीमों को समान संख्या में शुरुआती मैच खेलने की गारंटी नहीं होगी।

एसोसिएट क्रिकेट के लिए इसका क्या मतलब?

क्रिकेट को दुनिया के ज्यादा देशों तक पहुंचाने के ICC के लक्ष्य के संदर्भ में यह विवाद महत्वपूर्ण है। एसोसिएट देश चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उन्हें नियमित रूप से बड़े क्रिकेट देशों के खिलाफ खेलने का मौका मिले।

2026 में नीदरलैंड्स ने भारत के खिलाफ टी-20 वर्ल्ड कप मुकाबले में शानदार प्रतिस्पर्धा दिखाई थी। KNCB ने उस मैच को लगभग 90 हजार दर्शकों के सामने हुआ यादगार मुकाबला बताया था। इससे पता चलता है कि छोटे क्रिकेट देशों के पास भी बड़े मंच पर दर्शकों को आकर्षित करने और मजबूत प्रदर्शन करने की क्षमता है।

इसी वजह से स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स जैसे देशों का मानना है कि वैश्विक क्रिकेट को बढ़ाने के लिए अवसरों का विस्तार जरूरी है।

दूसरी ओर ICC के सामने एक अलग चुनौती भी है। वनडे वर्ल्ड कप में मैचों की संख्या, प्रसारण अधिकार, टूर्नामेंट की अवधि और प्रतिस्पर्धात्मक स्तर के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है। ज्यादा टीमों को शामिल करने से टूर्नामेंट लंबा हो सकता है, जबकि कम टीमों से वैश्विक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।

फिलहाल 2027 वर्ल्ड कप का नया ढांचा ICC द्वारा घोषित किया जा चुका है। अब असली सवाल यह है कि क्या स्कॉटलैंड, नीदरलैंड्स और अन्य एसोसिएट सदस्य देशों की आपत्तियों के बाद ICC इस प्रक्रिया में कोई और बदलाव या स्पष्टीकरण देता है।

क्रिकेट की वैश्विक संस्था के लिए यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक तरफ वह खेल को नए देशों तक पहुंचाने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ एसोसिएट देशों को लगता है कि बड़े टूर्नामेंटों में उनके अवसर पर्याप्त नहीं हैं।

2027 वनडे वर्ल्ड कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में खेला जाना है। नामीबिया के लिए यह विशेष अवसर होगा क्योंकि वह पहली बार पुरुष वनडे वर्ल्ड कप की मेजबानी करेगा। टूर्नामेंट में 14 टीमों की भागीदारी और नया तीन-चरणीय ढांचा इसे पिछले संस्करणों से काफी अलग बना देगा।

कुल मिलाकर, 2027 वनडे वर्ल्ड कप का नया फॉर्मेट क्रिकेट की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के ICC के प्रयास और एसोसिएट देशों के अधिक अवसरों की मांग के बीच टकराव को सामने लाता है। ICC का दावा है कि नए सिस्टम से हर मैच का महत्व बढ़ेगा, लेकिन स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स को लगता है कि बदलाव की प्रक्रिया में उनकी आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं मिला। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में ICC और एसोसिएट बोर्ड इस विवाद का समाधान कैसे निकालते हैं और क्या 2027 वर्ल्ड कप का यह नया ढांचा बिना किसी और बदलाव के लागू होता है।

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http://2027 ODI Cricket World Cup format and Scotland Netherlands controversy

 

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