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Mithun Manhas DOB Controversy: BCCI अध्यक्ष की जन्मतिथि पर विवाद, जम्मू कोर्ट ने जांच के आदेश दिए

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI के अध्यक्ष मिथुन मन्हास एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार मामला उनकी क्रिकेट उपलब्धियों या BCCI प्रशासन से जुड़ा नहीं, बल्कि उनकी जन्मतिथि को लेकर लगाए गए आरोपों से संबंधित है। जम्मू की एक अदालत ने उनकी जन्मतिथि में कथित गड़बड़ी को लेकर पुलिस को प्रारंभिक जांच करने का आदेश दिया है। पुलिस को जांच पूरी करके अपनी रिपोर्ट 3 सितंबर 2026 तक अदालत में पेश करने के लिए कहा गया है।

यह मामला पूर्व जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) अधिकारी सुदर्शन मेहता की शिकायत के बाद सामने आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मिथुन मन्हास ने अपने क्रिकेट करियर के शुरुआती दौर में अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग जन्मतिथियां इस्तेमाल कीं और इससे उन्हें जूनियर स्तर की क्रिकेट प्रतियोगिताओं में पात्रता का फायदा मिला। हालांकि यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि अदालत ने अभी यह साबित नहीं किया है कि मिथुन मन्हास ने जन्मतिथि में हेरफेर की है। फिलहाल अदालत ने केवल आरोपों की प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए हैं।

जम्मू की Sub-Judge/Special Railway Magistrate Court ने पुलिस को शिकायत में लगाए गए आरोपों की preliminary inquiry करने के लिए कहा है। अदालत के आदेश के मुताबिक Nowabad पुलिस स्टेशन के SHO को जांच करनी है और रिपोर्ट 3 सितंबर तक कोर्ट में जमा करनी है। अदालत ने यह निर्देश उस प्रक्रिया के तहत दिया जिसमें किसी cognizable offence की FIR दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच की आवश्यकता हो सकती है।

मामले में शिकायतकर्ता सुदर्शन मेहता जम्मू-कश्मीर क्रिकेट प्रशासन से जुड़े रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक वह JKCA के पूर्व Joint Honorary Secretary भी रह चुके हैं। उन्होंने अदालत में शिकायत दाखिल कर आरोप लगाया कि मिथुन मन्हास ने junior-level cricket में चयन और भागीदारी के लिए कथित तौर पर अपनी उम्र से संबंधित अलग-अलग रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया।

शिकायत में सबसे महत्वपूर्ण सवाल दो अलग-अलग जन्मतिथियों को लेकर उठाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार महाराजा हरि सिंह एग्रीकल्चर कॉलेजिएट स्कूल (MHAC), नागबनी, जम्मू के रिकॉर्ड में मिथुन मन्हास की जन्मतिथि 9 दिसंबर 1977 दर्ज होने का दावा किया गया है। दूसरी तरफ Delhi and District Cricket Association यानी DDCA की वेबसाइट पर उनकी जन्मतिथि 12 अक्टूबर 1979 बताई गई है।

यही अंतर शिकायत का मुख्य आधार बना है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि अलग-अलग क्रिकेट प्रतियोगिताओं में अलग-अलग जन्मतिथि का इस्तेमाल किया गया था, तो इससे junior और sub-junior categories में खेलने की eligibility प्रभावित हो सकती थी। हालांकि यह आरोप अभी जांच के स्तर पर है और पुलिस की preliminary inquiry के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रिकॉर्ड में अंतर क्यों है और इसके पीछे कोई जानबूझकर की गई गड़बड़ी थी या नहीं।

मामले को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि junior cricket में उम्र की सीमा काफी महत्वपूर्ण होती है। Under-16, Under-19 और दूसरी age-group competitions में खिलाड़ी की पात्रता उसकी आधिकारिक जन्मतिथि के आधार पर तय होती है। अगर किसी खिलाड़ी की उम्र निर्धारित सीमा से अधिक हो जाए तो वह उस category में खेलने के योग्य नहीं रहता।

इसी वजह से शिकायतकर्ता ने अदालत के सामने यह दावा किया कि कथित तौर पर अलग जन्मतिथि का इस्तेमाल करने से राष्ट्रीय स्तर की junior cricket में लाभ मिल सकता था। लेकिन फिलहाल यह केवल शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। पुलिस जांच को यह देखना होगा कि अलग-अलग रिकॉर्ड वास्तव में मौजूद हैं या नहीं, वे कब बनाए गए, किस संस्था के रिकॉर्ड में कौन-सी जानकारी है और क्या किसी दस्तावेज में जानबूझकर बदलाव किया गया था।

मिथुन मन्हास की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध क्रिकेट प्रोफाइल में भी उनकी जन्मतिथि को लेकर अलग-अलग जानकारी दिखाई देती रही है। IPL की आधिकारिक वेबसाइट पर उनकी जन्मतिथि 12 अक्टूबर 1979 दर्ज है। वहीं DDCA की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रोफाइल में अलग जन्मतिथि का उल्लेख मिलता है।

यानी इस विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि अलग-अलग क्रिकेट संस्थानों के रिकॉर्ड में जन्मतिथि को लेकर consistency की स्थिति क्या है। अदालत ने इसी तरह के आरोपों पर पुलिस को जांच करने को कहा है।

यह मामला इसलिए भी ज्यादा चर्चा में है क्योंकि मिथुन मन्हास वर्तमान में BCCI के अध्यक्ष हैं। उन्हें सितंबर 2025 में भारतीय क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष चुना गया था। वह इस पद पर पहुंचने वाले जम्मू-कश्मीर से जुड़े पहले व्यक्ति बने।

BCCI अध्यक्ष बनने से पहले मन्हास का लंबा घरेलू क्रिकेट करियर रहा है। उन्होंने दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के लिए First-Class क्रिकेट खेली और IPL में भी Delhi Daredevils, Pune Warriors India तथा Chennai Super Kings जैसी टीमों का हिस्सा रहे। IPL के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनके नाम 55 मैच दर्ज हैं।

First-Class cricket में उनका करियर भी काफी बड़ा रहा। उपलब्ध क्रिकेट रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 157 First-Class मैच खेले और करीब 9,700 रन बनाए। वह दिल्ली की टीम के कप्तान भी रहे और घरेलू क्रिकेट में लंबे समय तक एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी माने गए।

यही कारण है कि जन्मतिथि से जुड़े आरोप उनके पुराने क्रिकेट रिकॉर्ड पर सवाल खड़े करने की क्षमता रखते हैं। लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी पुराने रिकॉर्ड में अंतर मिलना अपने आप में forgery साबित नहीं करता। रिकॉर्ड में clerical error, बाद में correction, अलग संस्थाओं द्वारा इस्तेमाल किए गए documents या अन्य प्रशासनिक कारण भी हो सकते हैं।

अब पुलिस की जांच इसी अंतर को स्पष्ट करने की कोशिश करेगी।

अदालत ने फिलहाल सीधे FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दिया है। इसके बजाय preliminary inquiry का निर्देश दिया गया है। यह फर्क बहुत महत्वपूर्ण है। Preliminary inquiry का मतलब यह नहीं है कि आरोपी व्यक्ति दोषी पाया गया है। इसका उद्देश्य यह देखना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया जांच योग्य मामला बनता है या नहीं।

जम्मू कोर्ट के आदेश के मुताबिक Nowabad Police Station के SHO को जांच करनी है। पुलिस को संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच करनी पड़ सकती है। इनमें school admission records, birth certificate, cricket association records, junior tournament documents और संबंधित क्रिकेट संस्थाओं के रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं।

अगर जांच में रिकॉर्ड के बीच अंतर की पुष्टि होती है तो पुलिस यह भी देख सकती है कि यह अंतर किस समय से मौजूद था। इसके अलावा यह पता लगाना जरूरी होगा कि किसी व्यक्ति ने स्वयं कोई गलत जानकारी दी थी या किसी संस्था के स्तर पर रिकॉर्ड में गलती हुई थी।

शिकायतकर्ता ने अदालत में BNS के तहत fraud, cheating और forgery जैसे आरोपों से संबंधित कार्रवाई की मांग की है। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने BNSS की Section 175(3) के तहत अदालत का रुख किया था।

यह कानूनी प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायतकर्ता ने केवल जन्मतिथि के अंतर की जानकारी नहीं दी, बल्कि यह आरोप लगाया कि कथित अंतर का इस्तेमाल क्रिकेट eligibility में फायदा लेने के लिए किया गया था।

अब पुलिस को यह साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री तलाशनी होगी कि क्या ऐसा वास्तव में हुआ था।

मामले में एक और महत्वपूर्ण दस्तावेज MHAC School, Nagbani से संबंधित बताया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक स्कूल से email के जरिए मिली जानकारी में मन्हास की जन्मतिथि 9 दिसंबर 1977 होने का दावा किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया कि मन्हास पहले Presentation Convent School, Gandhi Nagar, Jammu में पढ़े और बाद में 27 जुलाई 1988 को MHAC School, Nagbani में Class 6 में दाखिल हुए।

इन रिकॉर्ड्स की वास्तविक प्रमाणिकता और उनका पूरा संदर्भ अब जांच का हिस्सा हो सकता है। किसी school record में दर्ज जानकारी और cricket association के record में दर्ज जानकारी अलग होने पर यह भी देखा जाएगा कि official correction की कोई प्रक्रिया कभी हुई थी या नहीं।

मामला केवल जन्मतिथि तक सीमित नहीं रह सकता। अगर पुलिस को प्रथम दृष्टया किसी दस्तावेज में जानबूझकर बदलाव का संकेत मिलता है तो फिर मामला कानूनी रूप से ज्यादा गंभीर हो सकता है। दूसरी तरफ अगर अंतर पुराने administrative records में गलती के कारण पाया जाता है तो जांच का परिणाम अलग हो सकता है।

इसलिए इस समय “मिथुन मन्हास ने उम्र में धोखाधड़ी की” जैसी निश्चित भाषा इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा। ज्यादा सटीक भाषा होगी कि “मिथुन मन्हास पर जन्मतिथि में कथित हेरफेर के आरोप लगे हैं और जम्मू कोर्ट ने पुलिस को प्रारंभिक जांच का आदेश दिया है।”

यह अंतर पत्रकारिता और SEO दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। आरोप और सिद्ध तथ्य को एक ही तरह प्रस्तुत करने से खबर misleading हो सकती है।

इस विवाद का असर BCCI पर भी सवालों के रूप में देखा जा सकता है। BCCI देश में क्रिकेट का सबसे बड़ा प्रशासनिक संगठन है और उसके अध्यक्ष की व्यक्तिगत credibility भी महत्वपूर्ण होती है। हालांकि केवल किसी निजी या पुराने रिकॉर्ड को लेकर चल रही preliminary inquiry के आधार पर BCCI की कार्यप्रणाली पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा।

BCCI अध्यक्ष के रूप में मन्हास का कार्यकाल सितंबर 2025 में शुरू हुआ था। वह Roger Binny के बाद इस पद पर आए। उन्हें भारतीय क्रिकेट बोर्ड का 37वां अध्यक्ष बताया गया है।

मिथुन मन्हास का BCCI अध्यक्ष बनना जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए भी बड़ा क्षण माना गया था। वह जम्मू-कश्मीर से BCCI की शीर्ष leadership तक पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बने। इससे क्षेत्र के खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रशासन में उनकी पहचान और बढ़ी।

उनके करियर की शुरुआत जम्मू-कश्मीर से हुई थी और बाद में वह दिल्ली क्रिकेट से जुड़े। उन्होंने दिल्ली की कप्तानी भी की और घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन किया। बाद में वह coaching और cricket administration से भी जुड़े।

ऐसे में जन्मतिथि विवाद उनके शुरुआती cricket career से संबंधित है। इसलिए जांच का फोकस भी मुख्य रूप से पुराने age-group records पर रहने की संभावना है।

यहां यह सवाल भी उठ सकता है कि अगर जन्मतिथि में अंतर था तो इतने वर्षों तक यह मुद्दा सामने क्यों नहीं आया। इसका जवाब भी जांच के दौरान रिकॉर्ड की chronology से मिल सकता है। अलग-अलग संस्थाओं के दस्तावेज कब तैयार हुए और उनमें कौन-सी जन्मतिथि कब से दर्ज थी, इससे स्थिति ज्यादा साफ होगी।

अगर police inquiry में यह पाया जाता है कि कोई document बाद में बदला गया था या जानबूझकर गलत जानकारी दी गई थी, तो मामला आगे कानूनी कार्रवाई की दिशा में जा सकता है। लेकिन अगर दस्तावेजों में अंतर का कारण administrative correction या रिकॉर्डिंग error पाया जाता है, तो शिकायत का स्वरूप अलग हो जाएगा।

इसलिए 3 सितंबर 2026 की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। इसी तारीख तक पुलिस को अपनी preliminary inquiry report अदालत के सामने पेश करनी है।

यह जरूरी नहीं कि 3 सितंबर को पूरा मामला खत्म हो जाएगा। पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय कर सकती है। यदि रिपोर्ट में कोई cognizable offence बनता दिखाई देता है तो आगे FIR या अन्य कानूनी प्रक्रिया की दिशा खुल सकती है। अगर पर्याप्त आधार नहीं मिलता तो शिकायत की स्थिति अलग हो सकती है।

इस पूरे मामले में मिथुन मन्हास की ओर से किसी विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया की जानकारी अभी उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आई है। इसलिए उनके पक्ष को लेकर कोई अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

खबर लिखते समय BCCI अध्यक्ष की वर्तमान official profile और अदालत में चल रही inquiry को अलग-अलग रखना भी जरूरी है। उपलब्ध क्रिकेट profiles में जन्मतिथि को लेकर अलग-अलग entries दिखाई देती हैं, जबकि अदालत के सामने शिकायत में school records और DDCA records के अंतर का दावा किया गया है।

इस विवाद का एक बड़ा पहलू cricket age verification system भी है। युवा क्रिकेट में age fraud की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। इसलिए cricket boards के लिए जन्मतिथि के रिकॉर्ड को verify करना और अलग-अलग competitions में एक ही authenticated document का इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण होता है।

अगर किसी खिलाड़ी की जन्मतिथि एक संस्था के रिकॉर्ड में अलग और दूसरी में अलग हो तो भविष्य में विवाद पैदा हो सकता है। इसी कारण junior cricket में birth certificate और school records की verification पर काफी ध्यान दिया जाता है।

मिथुन मन्हास के मामले में अब जांच यह बताएगी कि क्या अलग-अलग dates वास्तव में official records में थीं और अगर थीं तो इसका कारण क्या था।

यह विवाद BCCI की governance के संदर्भ में भी चर्चा पैदा कर सकता है। BCCI अध्यक्ष देश के क्रिकेट प्रशासन के सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक है। ऐसे में transparency और record consistency से जुड़े सवाल स्वाभाविक रूप से ज्यादा ध्यान आकर्षित करते हैं।

लेकिन अदालत के आदेश को लेकर एक बात फिर दोहराना जरूरी है—यह दोष सिद्ध होने का फैसला नहीं है। कोर्ट ने पुलिस को preliminary inquiry का निर्देश दिया है। अदालत ने अभी यह फैसला नहीं सुनाया कि मिथुन मन्हास ने जन्मतिथि में फर्जीवाड़ा किया है।

यही वजह है कि इस मामले को “age fraud proven” की बजाय “DOB discrepancy allegations” के रूप में देखना चाहिए।

आने वाले दिनों में पुलिस स्कूल रिकॉर्ड, क्रिकेट संस्थाओं के दस्तावेज और अन्य संबंधित evidence की जांच कर सकती है। अगर शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला आगे बढ़ सकता है। अगर आरोपों की पुष्टि नहीं होती तो अदालत उसी आधार पर आगे निर्णय लेगी।

इस बीच क्रिकेट प्रशंसकों की नजर भी मामले पर रहेगी, क्योंकि यह विवाद BCCI के मौजूदा अध्यक्ष से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर इस तरह के मामलों में कई अपुष्ट दावे तेजी से फैल सकते हैं। इसलिए किसी भी नई जानकारी को आधिकारिक अदालत के आदेश, पुलिस रिपोर्ट या विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट से verify करना जरूरी होगा।

मिथुन मन्हास का क्रिकेट करियर काफी लंबा रहा है और उन्होंने घरेलू क्रिकेट में बड़ी संख्या में मैच खेले हैं। उनका BCCI अध्यक्ष बनना भी भारतीय क्रिकेट प्रशासन में महत्वपूर्ण बदलाव माना गया था। ऐसे में उनके पुराने career records से जुड़ी कोई भी कानूनी जांच स्वाभाविक रूप से ज्यादा चर्चा में आएगी।

फिलहाल मामले की सबसे महत्वपूर्ण तारीख 3 सितंबर है। उस दिन तक Nowabad Police को preliminary inquiry report अदालत में जमा करनी है। इसके बाद अदालत तय करेगी कि शिकायत में आगे किसी कानूनी कार्रवाई की जरूरत है या नहीं।

कुल मिलाकर, BCCI अध्यक्ष मिथुन मन्हास की जन्मतिथि को लेकर जम्मू की अदालत में शिकायत हुई है और कोर्ट ने पुलिस को प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। शिकायतकर्ता सुदर्शन मेहता ने आरोप लगाया है कि मन्हास ने अलग-अलग मौकों पर अलग जन्मतिथियों का इस्तेमाल किया और इससे उन्हें junior-level cricket में फायदा मिला। शिकायत में MHAC School के रिकॉर्ड में 9 दिसंबर 1977 और DDCA की वेबसाइट पर 12 अक्टूबर 1979 की जन्मतिथियों का हवाला दिया गया है।

अब पुलिस को इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच करनी है। 3 सितंबर 2026 तक रिपोर्ट मांगी गई है, लेकिन तब तक यह कहना सही नहीं होगा कि जन्मतिथि में फर्जीवाड़ा साबित हो गया है। मामले का अगला कदम पुलिस की जांच और उसके बाद अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।


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http://BCCI अध्यक्ष मिथुन मन्हास और जन्मतिथि विवाद से जुड़ी जम्मू कोर्ट जांच

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