भारतीय क्रिकेट के युवा स्टार वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर घरेलू क्रिकेट में इतिहास रच दिया है। दलीप ट्रॉफी 2026 के सेमीफाइनल में ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए 15 वर्षीय वैभव ने सेंट्रल जोन के खिलाफ सिर्फ 81 गेंदों पर 92 रन की विस्फोटक पारी खेली। उनकी पारी में 7 चौके और 7 छक्के शामिल रहे। वह अपना शतक पूरा करने से महज 8 रन दूर रह गए, लेकिन इस पारी के दौरान उन्होंने दलीप ट्रॉफी इतिहास का एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वैभव अब इस टूर्नामेंट में अर्धशतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन गए हैं।
वैभव ने महज 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और इसके साथ 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में फिफ्टी लगाने का रिकॉर्ड लक्ष्मण सिंह के नाम था, जिन्होंने 1969 में 16 साल और 23 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। वैभव ने यह रिकॉर्ड 15 साल की उम्र में तोड़कर भारतीय घरेलू क्रिकेट में अपनी तेजी से बढ़ती पहचान को और मजबूत कर दिया।
यह मुकाबला बेंगलुरु के BCCI Centre of Excellence Ground 1 में ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच खेला जा रहा है। सेंट्रल जोन ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अपनी पहली पारी में 266 रन बनाए। जवाब में ईस्ट जोन के लिए पारी की शुरुआत वैभव सूर्यवंशी और अनुभवी बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन ने की। दोनों ने मिलकर टीम को तेज और मजबूत शुरुआत दिलाई।
वैभव की बल्लेबाजी में शुरुआत से ही उनका आक्रामक अंदाज दिखाई दिया। उन्होंने गेंदबाजों पर दबाव बनाने के लिए बड़े शॉट खेलने से परहेज नहीं किया। हालांकि यह लाल गेंद का क्रिकेट था, लेकिन उनका स्ट्रोकप्ले टी20 क्रिकेट जैसा आक्रामक नजर आया। 81 गेंदों में 92 रन बनाने का मतलब है कि उनका स्ट्राइक रेट 113.58 रहा। सात चौकों और सात छक्कों के साथ उन्होंने सेंट्रल जोन के गेंदबाजों को लगातार दबाव में रखा।
इस पारी की सबसे खास बात यह रही कि वैभव ने सिर्फ आक्रामक शॉट ही नहीं खेले, बल्कि जरूरत के मुताबिक गेंद को छोड़ने और डिफेंस करने का भी धैर्य दिखाया। उनके खेल को देखने वाले क्रिकेट विशेषज्ञों ने इस बात पर ध्यान दिया कि युवा बल्लेबाज अब केवल तेज रन बनाने के बजाय रेड-बॉल क्रिकेट की जरूरतों को भी समझता नजर आ रहा है। 92 रन की पारी में आक्रामकता के साथ-साथ शॉट चयन और परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करने की क्षमता भी दिखाई दी।
वैभव और अभिमन्यु ईश्वरन के बीच 161 रन की ओपनिंग साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने ईस्ट जोन को सेंट्रल जोन के 266 रन के जवाब में मजबूत शुरुआत दिलाई। अनुभवी ईश्वरन दूसरे छोर पर टिककर बल्लेबाजी कर रहे थे, जबकि वैभव ने गेंदबाजों पर हमला करने की जिम्मेदारी संभाली। दोनों की अलग-अलग शैली ने ईस्ट जोन के लिए प्रभावी संयोजन बनाया।
वैभव ने अपना अर्धशतक पूरा करने के लिए सरांश जैन की गेंद पर छक्का लगाया। उस समय वह केवल 42 गेंदों पर 50 रन तक पहुंच गए थे। इस छक्के के साथ ही दलीप ट्रॉफी के रिकॉर्ड बुक में उनका नाम दर्ज हो गया। 15 साल और 157 दिन की उम्र में फिफ्टी लगाने के साथ उन्होंने लक्ष्मण सिंह का 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया।
रिकॉर्ड बनाने के बाद भी वैभव की रफ्तार कम नहीं हुई। उन्होंने अपना स्कोर तेजी से आगे बढ़ाया और 90 के करीब पहुंच गए। उनके सामने दलीप ट्रॉफी का पहला शतक लगाने का मौका था। अगर वह 100 रन तक पहुंच जाते तो उनके नाम एक और ऐतिहासिक रिकॉर्ड जुड़ सकता था। वह दलीप ट्रॉफी में शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन सकते थे। यह रिकॉर्ड फिलहाल महान भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के नाम है, जिन्होंने 1990-91 सीजन में 17 साल और 262 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी शतक बनाया था।
लेकिन वैभव 92 रन के स्कोर पर आउट हो गए। बाएं हाथ के स्पिनर हर्ष दुबे की गेंद पर उन्होंने बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की और मिडविकेट पर कैच दे बैठे। इस तरह उनका शतक पूरा करने का सपना 8 रन पहले ही टूट गया। इसके तुरंत बाद हर्ष दुबे ने कुमार कुशाग्र को भी आउट कर दिया, जिससे सेंट्रल जोन को लगातार दो सफलताएं मिलीं।
हालांकि वैभव के लिए 92 रन की पारी किसी शतक से कम नहीं रही। उन्होंने अपने फर्स्ट-क्लास करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर भी बनाया। इससे पहले उनका फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में सर्वोच्च स्कोर 50 रन था। दलीप ट्रॉफी के इस मुकाबले में उन्होंने उस आंकड़े को काफी पीछे छोड़ दिया।
यह प्रदर्शन वैभव के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दलीप ट्रॉफी में उनका पिछला मुकाबला ज्यादा अच्छा नहीं रहा था। क्वार्टरफाइनल में नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ वह केवल 8 रन बना पाए थे। हालांकि गेंदबाजी में उन्होंने अच्छी वापसी की थी और दूसरी पारी में सिर्फ तीन ओवर में 11 रन देकर दो विकेट हासिल किए थे। इसके बाद सेमीफाइनल में उन्होंने बल्ले से जोरदार वापसी की।
युवा खिलाड़ी के लिए लाल गेंद के क्रिकेट में निरंतरता बनाना आसान नहीं होता। सफेद गेंद के क्रिकेट में वैभव ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से पहले ही काफी नाम कमाया है। लेकिन फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में लंबे समय तक बल्लेबाजी करना अलग चुनौती है। दलीप ट्रॉफी जैसी प्रतियोगिता में अनुभवी खिलाड़ियों के सामने इस तरह की पारी खेलना बताता है कि वह धीरे-धीरे अपने खेल के दूसरे पहलुओं पर भी काम कर रहे हैं।
वैभव की इस पारी का एक और खास पहलू उनका स्ट्राइक रेट रहा। 81 गेंदों पर 92 रन यानी 113.58 का स्ट्राइक रेट रेड-बॉल क्रिकेट में बेहद आक्रामक बल्लेबाजी को दर्शाता है। सात छक्कों के साथ उन्होंने अपनी पारी को तेजी से आगे बढ़ाया। हालांकि केवल आंकड़ों को देखकर यह मानना सही नहीं होगा कि वह हर लाल गेंद मैच में इसी अंदाज से बल्लेबाजी करेंगे। परिस्थितियों के अनुसार उनकी बल्लेबाजी में बदलाव भी देखने को मिला।
दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र की फिफ्टी का रिकॉर्ड तोड़ना भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रतियोगिता भारतीय घरेलू क्रिकेट में लंबे समय से बड़े खिलाड़ियों को सामने लाने का मंच रही है। इस टूर्नामेंट में भारत के कई महान बल्लेबाजों और गेंदबाजों ने अपनी क्षमता दिखाई है। ऐसे में 15 साल की उम्र में रिकॉर्ड बनाना वैभव के करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल होगा।
पिछला रिकॉर्ड लक्ष्मण सिंह के नाम था। उन्होंने 1969 में 16 साल और 23 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी अर्धशतक लगाया था। यह रिकॉर्ड पांच दशक से ज्यादा समय तक कायम रहा। इसके बाद पीयूष चावला ने भी कम उम्र में इस टूर्नामेंट में फिफ्टी लगाई थी। चावला ने 16 साल और 307 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। अब वैभव ने दोनों को पीछे छोड़ दिया है।
वैभव की बल्लेबाजी के दौरान एक मौका ऐसा भी आया जब उन्हें जीवनदान मिला। कुछ रिपोर्टों के अनुसार उनका कैच यश राठौड़ से छूटा था। इसके बाद वैभव ने अपनी पारी को आगे बढ़ाया और 92 रन तक पहुंचे। क्रिकेट में ऐसे मौकों का फायदा उठाना भी बल्लेबाज की क्षमता का हिस्सा होता है। हालांकि अंत में वह शतक पूरा नहीं कर सके।
इस मैच में ईस्ट जोन की कप्तानी भी वैभव के लिए एक अलग चुनौती रही। नियमित कप्तान ईशान किशन के उपलब्ध नहीं होने के कारण 15 वर्षीय वैभव को टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी दी गई। यानी वह सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर नहीं, बल्कि कप्तान के रूप में भी इस सेमीफाइनल में नजर आए। इतनी कम उम्र में घरेलू क्रिकेट के बड़े टूर्नामेंट में कप्तानी करना अपने आप में असाधारण अनुभव है।
कप्तानी के दौरान भी वैभव ने मैदान पर सक्रियता दिखाई। सेंट्रल जोन की पहली पारी में उन्होंने एक महत्वपूर्ण DRS निर्णय लेने में भी भूमिका निभाई। आर्यन जुयाल के खिलाफ अंतिम क्षण में लिया गया DRS ईस्ट जोन के पक्ष में गया। इस तरह उनका योगदान सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं रहा।
सेंट्रल जोन की पहली पारी 266 रन पर खत्म हुई। टीम की तरफ से रिंकू सिंह ने 60 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। हर्ष दुबे ने भी 50 से ज्यादा रन बनाकर टीम के स्कोर को संभाला। गेंदबाजी में सेंट्रल जोन की ओर से हर्ष दुबे ने बाद में वैभव का विकेट लेकर अपनी टीम को बड़ी सफलता दिलाई।
ईस्ट जोन की तरफ से वैभव और ईश्वरन ने शुरुआत में ही मुकाबले का रुख बदलने की कोशिश की। 161 रन की साझेदारी के बाद वैभव के आउट होने से सेंट्रल जोन को राहत मिली। लेकिन ईस्ट जोन की स्थिति तब तक मजबूत हो चुकी थी। वैभव की पारी ने टीम को जरूरी रन गति दी और विरोधी गेंदबाजों पर दबाव बनाया।
वैभव के 92 रन में 7 चौके और 7 छक्के शामिल रहे। यानी उनके 92 में से 70 रन सिर्फ बाउंड्री से आए। बाकी 22 रन उन्होंने दौड़कर और अन्य शॉट्स के जरिए बनाए। यह आंकड़ा उनकी पारी की आक्रामकता को साफ दिखाता है। उनका 113 से ज्यादा का स्ट्राइक रेट भी बताता है कि उन्होंने विपक्षी गेंदबाजों को लगातार आक्रमण का सामना करने पर मजबूर किया।
हालांकि शतक से चूकने के बाद वैभव के चेहरे पर निराशा जरूर दिखाई दी, लेकिन उनकी पारी पहले ही इतिहास में दर्ज हो चुकी थी। 15 साल की उम्र में दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र का अर्धशतक और 92 रन की विस्फोटक पारी ने एक बार फिर उन्हें घरेलू क्रिकेट के केंद्र में ला दिया।
वैभव के लिए यह पारी उनके रेड-बॉल क्रिकेट विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। उनका क्रिकेट करियर अभी शुरुआती दौर में है और उनके सामने आने वाले वर्षों में लंबा रास्ता है। इस उम्र में लगातार रिकॉर्ड बनाने के साथ सबसे बड़ी चुनौती प्रदर्शन को लंबे समय तक बनाए रखना होगी।
उनके लिए यह भी जरूरी होगा कि रिकॉर्ड और सोशल मीडिया की चर्चा से ज्यादा अपने खेल के विकास पर ध्यान दें। 15 साल की उम्र में मिलने वाली लोकप्रियता जितनी बड़ी है, उतना ही महत्वपूर्ण है कि वह फिटनेस, तकनीक, मानसिक मजबूती और लाल गेंद की बल्लेबाजी पर लगातार काम करते रहें।
दलीप ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन यह संकेत देता है कि वह केवल तेज रन बनाने वाले बल्लेबाज नहीं हैं। उन्होंने जरूरत के हिसाब से गेंद को छोड़ने, डिफेंस करने और लंबी साझेदारी बनाने की क्षमता भी दिखाई। यही गुण आगे चलकर फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में उनकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अगर वह इसी तरह धीरे-धीरे अपने खेल को विकसित करते रहे तो आने वाले वर्षों में उनके सामने कई बड़े रिकॉर्ड होंगे। लेकिन फिलहाल उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि उन्होंने दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में सिर्फ 15 साल की उम्र में इतिहास बना दिया है।
इस पारी ने यह भी साबित किया कि वैभव दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। क्वार्टरफाइनल में 8 रन पर आउट होने के बाद सेमीफाइनल में 92 रन बनाना उनके आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती को दिखाता है। उन्होंने पिछले मैच की निराशा को पीछे छोड़ते हुए नई पारी में शुरुआत से ही सकारात्मक क्रिकेट खेला।
अब ईस्ट जोन की नजरें सेमीफाइनल में मजबूत स्थिति हासिल करने और फाइनल का टिकट पक्का करने पर होंगी। वैभव का 92 रन का योगदान टीम को मजबूत आधार देने में महत्वपूर्ण रहा है। वह खुद भले ही शतक से चूक गए, लेकिन उनकी पारी ने टीम के लिए जरूरी गति पैदा की।
क्रिकेट फैंस के लिए भी यह पारी खास रही क्योंकि एक 15 वर्षीय बल्लेबाज ने अनुभवी घरेलू गेंदबाजों के खिलाफ जिस तरह बड़े शॉट खेले, वह देखने लायक था। सात छक्कों की मदद से वैभव ने मैदान के अलग-अलग हिस्सों में गेंद पहुंचाई और अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
कुल मिलाकर, दलीप ट्रॉफी 2026 के सेमीफाइनल में वैभव सूर्यवंशी ने 81 गेंदों पर 92 रन बनाकर एक बार फिर इतिहास रच दिया। उन्होंने 7 चौके और 7 छक्के लगाए तथा 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। 15 साल और 157 दिन की उम्र में वह दलीप ट्रॉफी में फिफ्टी लगाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बने और लक्ष्मण सिंह का 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। वह शतक से सिर्फ 8 रन दूर रह गए, लेकिन उनकी पारी फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर बन गई। अभिमन्यु ईश्वरन के साथ 161 रन की साझेदारी ने ईस्ट जोन को मजबूत शुरुआत दी। वैभव का यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह क्वार्टरफाइनल में सिर्फ 8 रन बना पाए थे। सेमीफाइनल में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए दिखाया कि वह लाल गेंद के क्रिकेट में भी तेजी और धैर्य का संतुलन सीख रहे हैं।
Vaibhav Suryavanshi ने रचा इतिहास: 15 साल में बने Youngest Player of the Series, सचिन का रिकॉर्ड भी तोड़ा
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