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इस हफ्ते सोना ₹2,742 और चांदी ₹2,461 महंगी: सोना ₹1.52 लाख, चांदी ₹2.34 लाख किलो

सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए इस हफ्ते कीमती धातुओं के बाजार से बड़ी खबर सामने आई है। भारत में इस सप्ताह सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट यानी 999 प्योरिटी वाला सोना सप्ताह की शुरुआत के मुकाबले करीब ₹2,742 प्रति 10 ग्राम महंगा हुआ और 14 अगस्त के बाजार बंद होने तक इसकी कीमत करीब ₹1,52,363 प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। वहीं चांदी की कीमत में करीब ₹2,461 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई और यह लगभग ₹2.34 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई।

यहां एक जरूरी सुधार भी है: दिए गए मूल शीर्षक में चांदी के लिए ₹2.31 लाख लिखा गया है, लेकिन उपलब्ध IBJA-आधारित रिपोर्ट के मुताबिक ₹2,461 की साप्ताहिक बढ़त के बाद कीमत करीब ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम रही। इसलिए खबर को प्रकाशित करते समय ₹2.34 लाख वाला आंकड़ा इस्तेमाल करना ज्यादा सही रहेगा।

इस सप्ताह सोने-चांदी की तेजी के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों के संकेत महत्वपूर्ण रहे। अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों में बदलाव, डॉलर की कमजोरी, महंगाई के आंकड़े और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव जैसी परिस्थितियों ने precious metals को support दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी शुक्रवार को सोने और चांदी में मजबूती देखी गई। Reuters के मुताबिक शुक्रवार को spot gold करीब 0.7% बढ़कर $4,379.95 प्रति औंस पर पहुंचा था और सप्ताह के दौरान सोना लगभग 0.9% ऊपर था।

भारतीय बाजार में सोने की कीमतों का लगातार ऊपर जाना उन लोगों के लिए खास मायने रखता है जो शादी, त्योहार या निवेश के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं। हालांकि bullion rate और jewellery shop पर मिलने वाली अंतिम कीमत एक जैसी नहीं होती। ज्वेलरी खरीदते समय इसमें making charges, GST और दुकान के अन्य charges जुड़ सकते हैं। इसलिए केवल IBJA या bullion rate देखकर jewellery की final cost तय नहीं करनी चाहिए।

इस सप्ताह की शुरुआत में 999 purity gold का भाव लगभग ₹1,49,621 प्रति 10 ग्राम बताया गया था। 14 अगस्त को बाजार बंद होने तक यह बढ़कर करीब ₹1,52,363 प्रति 10 ग्राम हो गया। यानी सप्ताह के दौरान करीब ₹2,742 की बढ़ोतरी हुई।

यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सोना पहले ही काफी ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा है। साल की शुरुआत की तुलना में भी precious metals में बड़ा बदलाव आया है। उपलब्ध IBJA आधारित रिपोर्ट के मुताबिक 31 दिसंबर 2025 को सोने की कीमत करीब ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम से ऊपर थी, जबकि अब यह ₹1.52 लाख के आसपास पहुंच चुकी है। यानी साल के दौरान सोने में काफी तेजी देखी गई है।

हालांकि सोने का रास्ता पूरे साल एकतरफा नहीं रहा। जनवरी में सोने ने लगभग ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम का उच्च स्तर भी छुआ था। इसके बाद कीमतों में correction आया और फिर बाजार में दोबारा तेजी देखने को मिली। इससे यह साफ होता है कि gold price में short-term volatility काफी ज्यादा है।

चांदी का प्रदर्शन भी इस सप्ताह मजबूत रहा। रिपोर्ट के मुताबिक चांदी करीब ₹2,461 प्रति किलो महंगी हुई। सप्ताह के दौरान इसका भाव लगभग ₹2.31 लाख से बढ़कर करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो हो गया।

चांदी में तेजी का असर industrial demand और investment demand दोनों से जुड़ा होता है। चांदी का इस्तेमाल केवल jewellery और investment में नहीं होता, बल्कि electronics, solar panels और कई industrial applications में भी होता है। इसलिए silver की कीमत पर gold की तुलना में अलग-अलग factors का असर पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी शुक्रवार को silver करीब 0.7% बढ़कर $64.88 प्रति औंस पर पहुंच गया। Reuters के अनुसार silver weekly gain की ओर बढ़ रही थी।

सोने की कीमत में इस सप्ताह की तेजी को समझने के लिए अमेरिकी Federal Reserve की monetary policy expectations पर नजर डालना जरूरी है। अमेरिका में हालिया inflation data बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा। साथ ही जुलाई के nonfarm payrolls में अप्रत्याशित गिरावट ने भी अमेरिकी economy को लेकर कुछ संकेत दिए। इसके बाद सितंबर में Fed द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना कम हुई।

ब्याज दरों का सोने से सीधा संबंध माना जाता है। सोना खुद कोई interest income नहीं देता। इसलिए जब ब्याज दरें ज्यादा रहने की उम्मीद होती है तो investors के लिए interest-bearing assets आकर्षक हो सकते हैं। दूसरी तरफ जब rate cut या rate hold की संभावना बढ़ती है तो gold को support मिल सकता है।

इस समय बाजार में सितंबर की Federal Reserve meeting को लेकर भी नजर बनी हुई है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार rate hike की संभावना पिछले सप्ताह के 55% से घटकर करीब 33% रह गई थी। इसी बदलाव ने gold को कुछ support दिया।

दूसरा महत्वपूर्ण factor अमेरिकी डॉलर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में gold की कीमत आमतौर पर डॉलर में तय होती है। जब डॉलर कमजोर होता है तो दूसरे देशों के buyers के लिए gold अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है और demand को support मिल सकता है। शुक्रवार को dollar index करीब 0.3% कमजोर हुआ था।

भारत जैसे देश में इसका असर domestic bullion market पर भी दिखाई दे सकता है। हालांकि भारत में सोने का final rate केवल international gold price से तय नहीं होता। रुपये की exchange rate, import-related costs, domestic demand, taxes और local market conditions भी कीमत को प्रभावित करते हैं।

इस सप्ताह geopolitical tensions भी precious metals के लिए महत्वपूर्ण factor रहे। Middle East में तनाव और Strait of Hormuz से जुड़ी परिस्थितियों ने global markets में uncertainty बढ़ाई है। ऐसे माहौल में investors अक्सर gold को safe-haven asset के तौर पर देखते हैं।

लेकिन यही geopolitical uncertainty दूसरी तरफ inflation का खतरा भी बढ़ा सकती है। अगर oil prices लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो global inflation बढ़ सकता है और central banks पर interest rates ऊंचे रखने का दबाव आ सकता है। इससे gold के लिए तस्वीर कुछ जटिल हो सकती है। Reuters की रिपोर्ट में analysts ने भी oil prices बढ़ने की स्थिति को metals market के लिए संभावित bearish factor बताया है।

यानी आने वाले दिनों में सोने की कीमत केवल एक factor पर निर्भर नहीं करेगी। अमेरिका की monetary policy, dollar, inflation, oil prices, geopolitical tensions और investor demand सभी मिलकर direction तय कर सकते हैं।

भारत में आम ग्राहक के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या अभी सोना खरीदना चाहिए? इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। अगर किसी को शादी या किसी तय जरूरत के लिए jewellery खरीदनी है तो केवल short-term price prediction के आधार पर खरीदारी टालना हमेशा सही नहीं होता। लेकिन अगर उद्देश्य investment है तो एक ही दिन पूरी रकम gold में लगाने की बजाय risk और time horizon को ध्यान में रखना जरूरी है।

सोने की कीमतों में तेजी के दौरान investors को यह भी समझना चाहिए कि कोई भी asset लगातार ऊपर नहीं जाता। पिछले कुछ महीनों में gold ने तेजी के साथ-साथ correction भी देखा है। जनवरी में करीब ₹1.76 लाख का high छूने के बाद price में गिरावट आई थी और फिर recovery हुई।

इसलिए केवल यह देखकर कि सोना इस सप्ताह ₹2,742 महंगा हुआ है, यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि अगले सप्ताह भी उतनी ही तेजी निश्चित है।

चांदी में भी यही बात लागू होती है। Silver की कीमत gold की तुलना में ज्यादा volatile हो सकती है। इसमें industrial demand का बड़ा role है। अगर global manufacturing और technology-related demand मजबूत रहती है तो silver को support मिल सकता है, लेकिन economic slowdown की स्थिति में industrial demand प्रभावित हो सकती है।

चांदी की कीमत इस साल भी काफी उतार-चढ़ाव से गुजरी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी में silver ने करीब ₹3.86 लाख प्रति किलो का high भी देखा था। वर्तमान कीमत उससे काफी नीचे है, लेकिन फिर भी पिछले साल के मुकाबले silver काफी महंगी बनी हुई है।

यह स्थिति बताती है कि silver में short-term trading करने वाले investors को ज्यादा volatility का सामना करना पड़ सकता है। वहीं long-term investors के लिए silver को portfolio diversification के एक हिस्से के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे पूरी savings का विकल्प नहीं मानना चाहिए।

अब अगर jewellery खरीदने की बात करें तो 24 कैरेट gold और jewellery में इस्तेमाल होने वाला gold एक जैसा नहीं होता। आम तौर पर jewellery के लिए 22 कैरेट gold ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। 24 कैरेट gold ज्यादा शुद्ध होता है लेकिन jewellery बनाने के लिए pure gold अपेक्षाकृत soft होने के कारण अन्य metals मिलाए जाते हैं।

14 अगस्त को अलग-अलग शहरों में gold rates में भी मामूली अंतर था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में 24K gold करीब ₹1,53,040 प्रति 10 ग्राम, मुंबई और कोलकाता में करीब ₹1,52,890, चेन्नई में करीब ₹1,53,170, पटना में करीब ₹1,52,940 और लखनऊ में करीब ₹1,53,040 बताया गया।

इन rates को jewellery की दुकान पर मिलने वाली final कीमत नहीं समझना चाहिए। Jeweller की selling price में purity, making charges, GST और अन्य applicable charges के कारण अंतर हो सकता है।

अगर कोई ग्राहक jewellery खरीदने जा रहा है तो उसे सिर्फ “आज सोना कितने का है” पूछने के बजाय कुछ और सवाल भी करने चाहिए। उदाहरण के लिए gold की purity कितनी है, hallmark है या नहीं, making charges कितने हैं, wastage charge कितना है और final bill में GST कितना है।

सोने की purity की जांच के लिए BIS hallmarking महत्वपूर्ण है। ग्राहक को jewellery खरीदते समय hallmark और संबंधित purity marking को जरूर देखना चाहिए।

इसके अलावा jewellery खरीदने से पहले कम से कम दो-तीन दुकानों पर final price compare करना बेहतर हो सकता है। कई बार gold rate समान होने के बावजूद making charges अलग होने के कारण कुल कीमत में बड़ा अंतर आ सकता है।

निवेश के नजरिए से physical gold के अलावा gold ETF, sovereign gold-related products और अन्य regulated investment options भी मौजूद होते हैं। हालांकि हर option के अपने risks, costs और rules हैं। इसलिए निवेश करने से पहले product को समझना जरूरी है।

Gold investment का एक फायदा यह माना जाता है कि यह portfolio diversification में मदद कर सकता है। लेकिन gold को हमेशा fixed-return investment नहीं समझना चाहिए। इसकी कीमत बाजार के अनुसार ऊपर-नीचे होती रहती है।

इसी तरह silver investment में भी price volatility को समझना जरूरी है। Physical silver खरीदने पर storage और purity verification जैसी practical समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए investment decision लेते समय इन सभी factors पर विचार करना चाहिए।

इस सप्ताह की तेजी को international market ने भी support किया। शुक्रवार को spot gold लगभग 0.7% ऊपर था और weekly gain की ओर बढ़ रहा था। Silver भी weekly gain के लिए तैयार थी।

लेकिन शुक्रवार को भारत में gold market में profit booking के संकेत भी देखने को मिले। कुछ घरेलू reports के अनुसार तेज rally के बाद investors ने मुनाफावसूली की, जिससे gold और silver में short-term गिरावट भी आई।

यह बात बताती है कि बाजार में तेजी होने के बावजूद हर दिन price ऊपर जाना जरूरी नहीं है। Gold में rally के बाद correction आ सकता है और silver में भी तेजी के बाद profit booking हो सकती है।

यही वजह है कि अगर कोई व्यक्ति investment के लिए gold या silver खरीदना चाहता है तो उसके लिए एक disciplined strategy ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है। बाजार का exact bottom या top पकड़ना मुश्किल होता है।

सोने के बाजार में एक और महत्वपूर्ण factor seasonal demand है। भारत में त्योहारी और शादी के सीजन के दौरान jewellery demand बढ़ सकती है। लेकिन demand का असर हर साल समान नहीं होता। Gold price बहुत ज्यादा होने पर कुछ consumers खरीदारी को टाल सकते हैं या कम मात्रा में jewellery खरीद सकते हैं।

इस समय gold करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, इसलिए सामान्य परिवार के लिए jewellery खरीदना पहले की तुलना में महंगा हो गया है। शादी-ब्याह में बड़े weight की jewellery खरीदने वालों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

उदाहरण के तौर पर अगर किसी परिवार को 100 ग्राम 24K equivalent gold खरीदना हो तो केवल bullion rate के हिसाब से इसकी कीमत करीब ₹15.2 लाख हो सकती है। इसके ऊपर jewellery बनवाने पर making charges और taxes अलग से लग सकते हैं। इसलिए high gold prices household budgets पर असर डाल सकती हैं।

चांदी के मामले में भी यही बात है। करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो के भाव पर बड़ी मात्रा में silver खरीदना भी महंगा हो गया है। हालांकि silver jewellery और छोटे investment products की कीमत gold की तुलना में अलग होती है।

इस सप्ताह की तेजी को देखते हुए आने वाले दिनों में investors की नजर अमेरिकी economic data और Federal Reserve की policy expectations पर रहेगी। इसके साथ Middle East developments और oil prices भी important रहेंगे।

अगर dollar कमजोर रहता है और interest-rate hike expectations कम होती हैं तो gold को आगे भी support मिल सकता है। दूसरी तरफ अगर inflation बढ़ता है और central banks ज्यादा restrictive policy अपनाते हैं तो gold पर pressure आ सकता है।

Silver के लिए industrial demand और gold की direction दोनों महत्वपूर्ण रहेंगे। अगर global economic activity मजबूत रहती है तो silver को additional support मिल सकता है।

इसलिए आने वाले सप्ताह में gold और silver की कीमतों में volatility बनी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि किसी निश्चित price target की भविष्यवाणी करना जोखिमपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर इस सप्ताह भारत में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी रही। IBJA के अनुसार 999 purity gold लगभग ₹2,742 बढ़कर ₹1,52,363 प्रति 10 ग्राम हो गया। Silver करीब ₹2,461 बढ़कर लगभग ₹2.34 लाख प्रति किलो पहुंची।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी gold और silver में weekly gains देखने को मिले। कमजोर dollar और अमेरिकी interest-rate expectations में बदलाव ने gold को support किया। वहीं geopolitical uncertainty ने safe-haven demand को भी प्रभावित किया।

हालांकि ऊंची कीमतों के बीच buyers को जल्दबाजी से बचना चाहिए। Jewellery खरीदने वालों को purity, hallmark, making charges और final bill पर ध्यान देना चाहिए। वहीं investors को अपनी risk capacity और investment horizon के हिसाब से फैसला करना चाहिए।

सोने का भाव: करीब ₹1,52,363 प्रति 10 ग्राम, 999 purity के लिए IBJA आधारित सप्ताहांत भाव।
साप्ताहिक बढ़त: करीब ₹2,742 प्रति 10 ग्राम।
चांदी का भाव: करीब ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम।
साप्ताहिक बढ़त: करीब ₹2,461 प्रति किलोग्राम।

ध्यान रखें कि bullion/IBJA rates और आपके शहर के jeweller के retail rates अलग हो सकते हैं। Jewellery की कीमत में making charges और GST सहित दूसरे charges जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले अपने स्थानीय jeweller से उसी समय का final rate जरूर पूछें।

आने वाले दिनों में gold की दिशा के लिए अमेरिका की monetary policy, dollar और global geopolitical situation महत्वपूर्ण रहेंगे। अगर इन factors से precious metals को support मिलता रहा तो prices ऊंचे बने रह सकते हैं, लेकिन profit booking और correction की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

निवेश के लिहाज से सबसे जरूरी बात यह है कि केवल एक सप्ताह की तेजी देखकर कोई बड़ा फैसला न लें। सोना और चांदी दोनों बाजार आधारित assets हैं और इनकी कीमतें तेजी से बदल सकती हैं। जरूरत के हिसाब से खरीदारी और लंबी अवधि की investment strategy को अलग-अलग नजरिए से देखना बेहतर रहेगा।


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