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NEET PG 2026: जनरल मेडिसिन फिर बनी टॉप पसंद, रेडियोलॉजी दूसरे नंबर पर

NEET PG 2026 की काउंसलिंग में एक बार फिर जनरल मेडिसिन (MD General Medicine) ने मेडिकल ग्रेजुएट्स के बीच अपनी मजबूत जगह बनाई है। खास बात यह है कि इस बार सबसे अच्छी रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों में भी जनरल मेडिसिन को रेडियोलॉजी से ज्यादा पसंद किया गया है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) की राउंड-वन सीट अलॉटमेंट सूची के विश्लेषण में सामने आया कि टॉप 100 उम्मीदवारों में से 51 को जनरल मेडिसिन मिली, जबकि 28 उम्मीदवारों ने रेडियो-डायग्नोसिस यानी रेडियोलॉजी चुनी।

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में रेडियोलॉजी को भी टॉप रैंकर्स की पसंदीदा शाखाओं में गिना जाता रहा है। अब जनरल मेडिसिन की ओर बढ़ता रुझान बताता है कि मेडिकल स्टूडेंट्स पोस्टग्रेजुएशन में केवल एक डिग्री या शुरुआती कमाई को नहीं देख रहे, बल्कि भविष्य में सुपर स्पेशियलिटी बनने के रास्तों पर भी विचार कर रहे हैं।

जनरल मेडिसिन पढ़ने के बाद योग्य डॉक्टर कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी जैसे क्षेत्रों में आगे विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। इस वजह से कई उम्मीदवार इसे अपने मेडिकल करियर की मजबूत शुरुआत मान रहे हैं। हालांकि सुपर स्पेशियलिटी में प्रवेश के लिए अलग पात्रता, परीक्षा, सीट और काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी करनी होती है। केवल MD जनरल मेडिसिन करने से किसी सुपर स्पेशियलिटी में दाखिला अपने आप नहीं मिलता।

NEET PG 2026 में जनरल मेडिसिन सबसे आगे

NEET PG 2026 की राउंड-वन काउंसलिंग के आंकड़ों में जनरल मेडिसिन ने टॉप रैंकर्स के बीच सबसे अधिक पसंद हासिल की। उपलब्ध विश्लेषण के अनुसार, टॉप 100 उम्मीदवारों में 51 को MD General Medicine और 28 को MD Radio-Diagnosis मिला। यानी इन दोनों शाखाओं के बीच 23 उम्मीदवारों का अंतर रहा।

इसी समूह में डर्मेटोलॉजी तीसरे स्थान पर रही। इसके बाद पीडियाट्रिक्स और जनरल सर्जरी जैसी शाखाएं शामिल रहीं। ये आंकड़े दिखाते हैं कि टॉप रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा मेडिकल स्पेशियलिटी की ओर जा रहा है।

टॉप 501 अलॉटमेंट के विश्लेषण में भी जनरल मेडिसिन पहले स्थान पर रही। इस समूह में 233 उम्मीदवारों को MD General Medicine और 149 उम्मीदवारों को रेडियो-डायग्नोसिस मिला। दोनों शाखाओं को मिलाकर 382 अलॉटमेंट हुए, जो इस समूह के लगभग 76.2 प्रतिशत हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि टॉप 100 या टॉप 501 के आंकड़े सभी NEET PG उम्मीदवारों की पसंद का पूरा प्रतिनिधित्व नहीं करते। ये उच्च रैंक वाले उम्मीदवारों की सीट अलॉटमेंट सूची का विश्लेषण हैं। पूरे देश में सभी उम्मीदवारों की पसंद, उनकी रैंक, कॉलेज, कैटेगरी और उपलब्ध सीटों के आधार पर अलग हो सकती है।

पिछले वर्षों में भी बनी रही जनरल मेडिसिन की लोकप्रियता

जनरल मेडिसिन की लोकप्रियता अचानक नहीं बढ़ी है। पिछले काउंसलिंग चक्रों के आंकड़ों में भी यह शाखा टॉप रैंकर्स की पसंद में शामिल रही है। उपलब्ध तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में टॉप 100 उम्मीदवारों में 46 ने जनरल मेडिसिन और 40 ने रेडियोलॉजी को चुना था। 2024 में दोनों शाखाओं के बीच मुकाबला और करीबी था। उस साल जनरल मेडिसिन को 48 और रेडियोलॉजी को 45 उम्मीदवारों ने चुना था।

इन आंकड़ों से यह समझ आता है कि जनरल मेडिसिन लगातार लोकप्रिय विकल्प रही है। 2026 में इसके पक्ष में अंतर ज्यादा दिखाई दिया है। हालांकि किसी एक साल के आंकड़े से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि आने वाले सभी वर्षों में यही ट्रेंड बना रहेगा। उम्मीदवारों की पसंद सीटों की उपलब्धता, कॉलेजों की गुणवत्ता, प्रशिक्षण, भविष्य की संभावनाओं और व्यक्तिगत रुचि के अनुसार बदल सकती है।

मेडिकल शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, अब कई उम्मीदवार पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री को अंतिम मंजिल के बजाय आगे विशेषज्ञता हासिल करने का रास्ता मानते हैं। जनरल मेडिसिन इस लिहाज से कई विकल्प खोलती है, क्योंकि इसमें अलग-अलग बीमारियों और शरीर के विभिन्न अंगों से जुड़ी समस्याओं का व्यापक अध्ययन कराया जाता है।

जनरल मेडिसिन को क्यों पसंद कर रहे हैं टॉप रैंकर्स?

जनरल मेडिसिन की सबसे बड़ी खासियत इसका व्यापक दायरा है। इस शाखा में डॉक्टर को वयस्क मरीजों की कई तरह की बीमारियों की पहचान, जांच, इलाज और लंबे समय तक देखभाल का प्रशिक्षण मिलता है। इसमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय से जुड़ी समस्याएं, संक्रमण, फेफड़ों की बीमारियां, किडनी की समस्या और कई जटिल बीमारियों का प्रबंधन शामिल है।

इस शाखा को चुनने वाले डॉक्टरों को अलग-अलग लक्षणों के आधार पर बीमारी की वजह समझने और मरीज के लिए सही इलाज की योजना तैयार करने का अनुभव मिलता है। कई बार मरीज एक साथ कई बीमारियों से परेशान होते हैं। ऐसे मामलों में जनरल मेडिसिन विशेषज्ञ की भूमिका काफी अहम होती है।

इस कोर्स का एक और बड़ा आकर्षण आगे सुपर स्पेशियलिटी में जाने का अवसर है। MD General Medicine के बाद पात्रता और संबंधित प्रवेश नियमों के अनुसार डॉक्टर कई मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी क्षेत्रों में आगे की पढ़ाई कर सकते हैं। इससे करियर के विकल्प केवल सामान्य क्लिनिकल प्रैक्टिस तक सीमित नहीं रहते।

कई उम्मीदवारों के लिए यह लचीलापन महत्वपूर्ण है। MBBS के दौरान किसी छात्र की रुचि कार्डियोलॉजी में हो सकती है, जबकि आगे चलकर उसे न्यूरोलॉजी या क्रिटिकल केयर में दिलचस्पी पैदा हो सकती है। जनरल मेडिसिन का प्रशिक्षण ऐसी कई संभावनाओं की बुनियाद तैयार करता है।

MD General Medicine के बाद कौन-कौन से सुपर स्पेशियलिटी विकल्प?

जनरल मेडिसिन की पढ़ाई पूरी करने के बाद योग्य उम्मीदवार अलग-अलग सुपर स्पेशियलिटी क्षेत्रों में आगे प्रशिक्षण ले सकते हैं। इन कोर्सों का उद्देश्य किसी खास अंग, बीमारी या चिकित्सा क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता विकसित करना होता है।

कार्डियोलॉजी: इस क्षेत्र में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का अध्ययन और इलाज किया जाता है। हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, हृदय की धड़कन में गड़बड़ी और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं के इलाज में कार्डियोलॉजिस्ट की अहम भूमिका होती है।

न्यूरोलॉजी: इसमें दिमाग, रीढ़ की हड्डी और नसों से जुड़ी बीमारियों का इलाज किया जाता है। मिर्गी, पार्किंसन, स्ट्रोक, माइग्रेन और कई न्यूरोलॉजिकल समस्याएं इस क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं।

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी: इस सुपर स्पेशियलिटी में पेट, आंत, लिवर, पैंक्रियाज और पाचन तंत्र से संबंधित बीमारियों पर ध्यान दिया जाता है। लिवर की बीमारी, पेट और आंतों की जटिल समस्याओं के इलाज में इस विशेषज्ञता की जरूरत होती है।

नेफ्रोलॉजी: यह किडनी से संबंधित बीमारियों का विशेषज्ञ क्षेत्र है। किडनी फेलियर, क्रॉनिक किडनी डिजीज, डायलिसिस और किडनी से जुड़ी अन्य समस्याओं के इलाज में नेफ्रोलॉजिस्ट काम करते हैं।

एंडोक्राइनोलॉजी: इसमें शरीर के हार्मोन और हार्मोन बनाने वाली ग्रंथियों से जुड़ी बीमारियों का अध्ययन होता है। डायबिटीज, थायरॉइड और हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी समस्याएं इसके प्रमुख क्षेत्र हैं।

क्रिटिकल केयर मेडिसिन: इस क्षेत्र में गंभीर रूप से बीमार मरीजों की देखभाल की जाती है। ICU में भर्ती मरीज, सांस लेने में गंभीर परेशानी, कई अंगों के प्रभावित होने और अन्य आपात स्थितियों में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इन विकल्पों के कारण जनरल मेडिसिन कई उम्मीदवारों के लिए एक ऐसा कोर्स बन गया है, जिससे आगे कई दिशाओं में करियर विकसित किया जा सकता है। लेकिन हर सुपर स्पेशियलिटी के लिए पात्रता और प्रवेश नियम अलग हो सकते हैं। उम्मीदवारों को आवेदन से पहले आधिकारिक नियमों की जांच करनी चाहिए।

रेडियोलॉजी दूसरे स्थान पर, फिर भी बनी हुई है मजबूत पसंद

जनरल मेडिसिन के बाद रेडियोलॉजी टॉप रैंकर्स की पसंद में दूसरे स्थान पर रही। रेडियोलॉजी को मेडिकल क्षेत्र की महत्वपूर्ण शाखा माना जाता है, क्योंकि इसमें एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन, MRI और अन्य इमेजिंग तकनीकों के जरिए बीमारी की पहचान की जाती है।

आधुनिक चिकित्सा में सही और समय पर जांच का महत्व बढ़ा है। कैंसर, चोट, मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं, हृदय रोगों और कई अन्य बीमारियों की पहचान में रेडियोलॉजी की भूमिका अहम होती है। इस क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान और मेडिकल समझ दोनों की जरूरत होती है।

रेडियोलॉजी को पसंद करने वाले उम्मीदवारों के लिए आधुनिक मशीनों और इमेजिंग तकनीकों के साथ काम करने का अवसर आकर्षण का कारण हो सकता है। कई मामलों में इस शाखा में मरीज की बीमारी का पता लगाने के लिए इमेज की व्याख्या करनी होती है। कुछ प्रक्रियाओं में रेडियोलॉजिस्ट सीधे इलाज में भी भूमिका निभाते हैं।

हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर इस क्षेत्र में चर्चा भी हो रही है। AI आधारित तकनीकें मेडिकल इमेज का विश्लेषण करने में डॉक्टरों की मदद कर सकती हैं। कुछ उम्मीदवार भविष्य में इस तकनीक के प्रभाव को लेकर सवाल कर रहे हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि AI रेडियोलॉजिस्ट की जगह पूरी तरह ले लेगा। मेडिकल निर्णय, मरीज की स्थिति, जांच के संदर्भ और इलाज की योजना में विशेषज्ञ डॉक्टर की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहती है।

टॉप 501 उम्मीदवारों की पसंद में भी बड़ा अंतर

टॉप 501 सीट अलॉटमेंट के विश्लेषण में जनरल मेडिसिन को 233 और रेडियोलॉजी को 149 अलॉटमेंट मिले। इन दोनों शाखाओं के बाद डर्मेटोलॉजी, जनरल सर्जरी और ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी जैसी शाखाएं प्रमुख विकल्पों में शामिल रहीं।

इस आंकड़े से पता चलता है कि उच्च रैंक वाले उम्मीदवारों में कुछ शाखाओं को लेकर काफी अधिक आकर्षण है। हालांकि सीट अलॉटमेंट को सीधे सभी उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पसंद नहीं माना जा सकता। किसी उम्मीदवार को उसकी पहली पसंद की सीट नहीं मिली हो, तो उसे उपलब्ध विकल्प के आधार पर दूसरी सीट मिल सकती है। इसलिए अलॉटमेंट डेटा को समझते समय रैंक, सीटों की संख्या, कैटेगरी और काउंसलिंग के नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है।

पूरे देश में MD General Medicine की सीटों की संख्या भी रेडियोलॉजी से अलग है। अलग-अलग कोर्स और संस्थानों में उपलब्ध सीटों की संख्या उम्मीदवारों के विकल्पों और सीट मिलने की संभावना को प्रभावित कर सकती है। इसलिए केवल लोकप्रियता देखकर किसी शाखा को चुनना सही फैसला नहीं होगा।

MCC की काउंसलिंग में सीट कैसे मिलती है?

NEET PG के जरिए MD, MS और अन्य मान्य पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्सों में प्रवेश मिलता है। ऑल इंडिया कोटा की सीटों के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग की जिम्मेदारी मेडिकल काउंसलिंग कमेटी यानी MCC के पास होती है। इसके अलावा राज्य कोटे की सीटों के लिए संबंधित राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी प्रक्रिया संचालित करती है।

काउंसलिंग में उम्मीदवार की NEET PG रैंक, कैटेगरी, कोटा, उपलब्ध सीटें और भरे गए कॉलेज तथा कोर्स के विकल्पों का महत्व होता है। उम्मीदवार को अपनी पसंद के अनुसार चॉइस फिलिंग करनी होती है। इसके बाद निर्धारित नियमों और उपलब्ध सीटों के आधार पर अलॉटमेंट जारी किया जाता है।

MCC की वेबसाइट पर NEET PG 2026 के राउंड-वन का फाइनल अलॉटमेंट रिजल्ट 24 अक्टूबर 2026 की तारीख के साथ उपलब्ध कराया गया है। काउंसलिंग पोर्टल पर उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन, सीट मैट्रिक्स और शेड्यूल से जुड़ी जानकारी भी जारी की गई है।

किसी उम्मीदवार को सीट मिलने के बाद उसे अलॉटेड कॉलेज में रिपोर्टिंग, दस्तावेजों के सत्यापन और फीस जमा करने जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। हर राउंड के लिए MCC की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

क्या जनरल मेडिसिन करने से सुपर स्पेशियलिटी में प्रवेश आसान हो जाता है?

जनरल मेडिसिन को आगे सुपर स्पेशियलिटी की तैयारी के लिए उपयोगी आधार माना जाता है। इसका कारण यह है कि इस कोर्स में कई तरह की बीमारियों का व्यापक अध्ययन कराया जाता है। आगे कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी जैसे क्षेत्रों में जाने वाले डॉक्टरों को इसी ज्ञान का लाभ मिलता है।

लेकिन सुपर स्पेशियलिटी में प्रवेश को आसान या निश्चित मानना सही नहीं होगा। MD या DNB की डिग्री के बाद उम्मीदवार को संबंधित प्रवेश परीक्षा, पात्रता और काउंसलिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। सीटों की संख्या सीमित होती है और अलग-अलग संस्थानों में प्रतिस्पर्धा भी रहती है।

इसलिए जनरल मेडिसिन को चुनने का फायदा यह है कि इससे आगे कई विकल्प खुल सकते हैं, न कि यह कि हर उम्मीदवार को अपनी पसंद का सुपर स्पेशियलिटी कोर्स आसानी से मिल जाएगा। उम्मीदवारों को अपनी रुचि, पढ़ाई की क्षमता और लंबे समय के करियर लक्ष्य के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।

मेडिकल करियर चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें?

किसी भी मेडिकल स्पेशियलिटी का चुनाव केवल इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि टॉप रैंकर्स ने कौन-सा कोर्स चुना है। हर शाखा का काम, प्रशिक्षण, जिम्मेदारी और जीवनशैली अलग होती है।

जनरल मेडिसिन में मरीजों से लगातार बातचीत, बीमारी की पहचान, कई जांचों का विश्लेषण और लंबे समय तक इलाज की योजना बनाना शामिल हो सकता है। वहीं रेडियोलॉजी में इमेजिंग तकनीक, रिपोर्टिंग और कुछ विशेष प्रक्रियाओं पर ज्यादा ध्यान रहता है। सर्जिकल शाखाओं में ऑपरेशन, हाथों का कौशल और लंबे समय तक अस्पताल में प्रशिक्षण की जरूरत हो सकती है।

उम्मीदवारों को यह भी देखना चाहिए कि जिस कॉलेज में सीट मिल रही है, वहां मरीजों की संख्या, क्लिनिकल एक्सपोजर, शिक्षकों की उपलब्धता, अस्पताल की सुविधाएं और प्रशिक्षण का स्तर कैसा है। केवल किसी लोकप्रिय शाखा में प्रवेश मिलना पर्याप्त नहीं है; अच्छी ट्रेनिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

आगे की पढ़ाई, सुपर स्पेशियलिटी की उपलब्धता, शहर और अस्पताल का माहौल, फीस और भविष्य में काम करने की योजना भी निर्णय को प्रभावित कर सकती है। सही चुनाव वही होगा जो उम्मीदवार की रुचि और क्षमता के साथ मेल खाता हो।

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