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400 साल पुराने मंदिर से निकली ‘द व्वान’ की कहानी, अरुणाभ बोले- जीभ कटी तो छोड़ दिया नॉन-वेज

बॉलीवुड में इन दिनों ऐसी कहानियों की चर्चा है, जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि भारतीय लोककथाओं, आस्था, रहस्य और संस्कृति को भी बड़े पर्दे पर लाने की कोशिश कर रही हैं। इसी कड़ी में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ (The Vvaan: Force of the Forest) लगातार चर्चा में है। फिल्म की कहानी किसी सामान्य फैंटेसी या काल्पनिक दुनिया से नहीं, बल्कि बिहार के एक प्राचीन वन देवी मंदिर से जुड़ी लोककथा से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म के लेखक और निर्माता अरुणाभ कुमार ने बताया है कि इस कहानी की जड़ें बिहार के बिहटा के पास स्थित करीब 400 साल पुराने वन देवी मंदिर से जुड़ी हैं। उनके मुताबिक, बचपन में अपनी मां के साथ मंदिर जाने के दौरान उन्होंने इस जगह और इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में जाना था। बाद में यही अनुभव एक ऐसी कहानी में बदल गया, जिसे अब बड़े पर्दे पर पेश किया जा रहा है।

फिल्म का आधिकारिक नाम The Vvaan: Force of the Forest है, जबकि इसके मूल नाम को ‘द वन’ के तौर पर भी जाना गया है। फिल्म का निर्देशन ‘पंचायत’ से जुड़े निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा ने किया है और कहानी व स्क्रीनप्ले अरुणाभ कुमार ने लिखा है। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया के अलावा सुनील ग्रोवर, मनीष पॉल, श्वेता तिवारी और अनूप सोनी जैसे कलाकार भी नजर आएंगे। फिल्म को बड़े सिनेमाई कैनवास पर बनाया गया है और इसका फोकस लोककथा, रहस्य, जंगल, आस्था और सुपरनैचुरल दुनिया के मेल पर है। फिल्म की थिएटर रिलीज 25 सितंबर 2026 तय है।

अरुणाभ कुमार के मुताबिक इस फिल्म का आइडिया अचानक नहीं आया था। इसके पीछे दो अलग-अलग स्रोत थे। पहला स्रोत एकता कपूर के साथ मंदिरों की यात्राओं के दौरान हुई बातचीत थी। अरुणाभ ने बताया कि वह और एकता कपूर कई बार मंदिरों में साथ गए हैं। नए साल पर सिद्धिविनायक मंदिर जाना हो या महाशिवरात्रि के दौरान मुक्तेश्वर मंदिर जाना, इन यात्राओं के दौरान मंदिरों और उनसे जुड़ी कहानियों पर बातचीत होती रहती थी। एकता कपूर ने उन्हें अलग-अलग मंदिरों से जुड़ी कुछ दिलचस्प और रहस्यमय कहानियां सुनाईं। इसके बाद अरुणाभ ने भी उन्हें बताया कि बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे कई मंदिर हैं, जिनके पीछे लोककथाओं और मान्यताओं की लंबी परंपरा मौजूद है। यही बातचीत धीरे-धीरे फिल्म के विचार की तरफ बढ़ी।

लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे व्यक्तिगत हिस्सा अरुणाभ कुमार की अपनी मां से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि उनकी मां दुर्गा पूजा के दौरान उन्हें देवी और शक्ति से जुड़े अलग-अलग मंदिरों में लेकर जाती थीं। पूजा करना, साड़ी चढ़ाना और कई दिनों तक मंदिरों में जाना उनके बचपन का हिस्सा रहा। इसी दौरान वह उन्हें पटना से लगभग 35 किलोमीटर दूर बिहटा के पास स्थित वन देवी मंदिर लेकर गई थीं। अरुणाभ के मुताबिक, इसी मंदिर की लोककथा ने उनके मन पर गहरा असर डाला और कई साल बाद वही अनुभव फिल्म की कहानी का आधार बना।

स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक यह मंदिर करीब 350 से 400 साल पुराना माना जाता है। कुछ रिपोर्टों में इसकी स्थापना को 16वीं सदी से जोड़ा गया है। अरुणाभ ने बातचीत में बताया कि मान्यता के अनुसार वैद्यनाथ मिश्रा नाम के व्यक्ति ने इस स्थान पर वन देवी की स्थापना की थी। उस समय आसपास के जंगलों को लेकर स्थानीय लोगों के बीच कई तरह की रहस्यमय मान्यताएं थीं। लोगों का मानना था कि जंगल में कुछ ऐसी शक्तियां मौजूद हैं, जिनसे बचने के लिए देवी के विभिन्न रूपों की आराधना की गई और उन्हीं में से वन देवी का स्वरूप वहां स्थापित हुआ। यह विवरण लोकमान्यता के तौर पर सामने आया है, इसे प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इस मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता फिल्म की कहानी को और रहस्यमय बनाती है। स्थानीय कथाओं के मुताबिक सूर्यास्त के बाद मंदिर और आसपास के जंगल में रुकना या प्रवेश करना मना माना जाता है। कुछ रिपोर्टों में यहां तक बताया गया है कि शाम के बाद मंदिर के मुख्य पुजारी भी वहां नहीं रुकते। यही विचार ‘द व्वान’ की दुनिया का एक अहम हिस्सा बन गया है। फिल्म के टीजर में भी एक चेतावनी दिखाई गई है कि सूर्यास्त के बाद व्वान में प्रवेश करना वर्जित है। फिल्म इस सवाल को रहस्य बनाए रखती है कि आखिर अंधेरा होते ही जंगल में ऐसा क्या बदल जाता है, जिसकी वजह से वहां जाना खतरनाक माना जाता है।

अरुणाभ ने बताया कि जब उन्होंने यह कहानी निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा को सुनाई तो उन्हें भी इसका कॉन्सेप्ट बेहद अलग लगा। दीपक मिश्रा अब तक ‘पंचायत’ जैसी जमीन से जुड़ी और आम जिंदगी के करीब कहानियों के लिए पहचाने जाते रहे हैं। ऐसे में लोककथा, फैंटेसी और रहस्य से भरी इस दुनिया में उनका जाना अपने आप में एक बड़ा बदलाव है। दीपक के मुताबिक कहानी लोककथा से निकली जरूर है, लेकिन इसके सवाल आज के समाज से भी जुड़े हैं। जब कोई इंसान किसी पुराने मंदिर या लोककथा को सुनता है तो उसके मन में यही सवाल उठता है कि ऐसी मान्यताएं कैसे बनीं, इनके पीछे क्या वजह रही होगी और क्या हर चीज को सिर्फ तर्क से समझा जा सकता है। यही जिज्ञासा उन्हें फिल्म की तरफ खींच लाई।

फिल्म की कहानी को लेकर मेकर्स ने अभी पूरी जानकारी सामने नहीं रखी है। टीजर भी कहानी का पूरा खुलासा करने के बजाय दर्शकों को रहस्य की दुनिया में ले जाता है। इसमें सिद्धार्थ मल्होत्रा का किरदार एक ऐसे जंगल की तरफ जाता दिखाई देता है, जहां सामान्य नियम काम नहीं करते। जंगल में मौजूद रहस्यमय शक्तियां, डरावने संकेत और एक अनजानी ताकत फिल्म के मुख्य संघर्ष की तरफ इशारा करती है। टीजर में यह भी संकेत मिलता है कि सिद्धार्थ का किरदार इस जंगल और वहां मौजूद शक्ति से किसी गहरे तरीके से जुड़ा हुआ है।

फिल्म की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें भारतीय लोककथा को केवल डर पैदा करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया है। मेकर्स ने इसके साथ भारतीय संस्कृति, छठ पर्व, ग्रामीण परिवेश, जंगल और धार्मिक मान्यताओं को भी जोड़ने की कोशिश की है। इससे फिल्म का संसार सिर्फ एक हॉरर कहानी जैसा नहीं बल्कि एक बड़ी लोक-फैंटेसी की तरह दिखाई देता है। ‘द व्वान’ का उद्देश्य भारतीय जड़ों से जुड़ी एक ऐसी दुनिया तैयार करना है, जिसमें रहस्य और रोमांच के साथ स्थानीय संस्कृति भी नजर आए।

अरुणाभ कुमार ने फिल्म से जुड़ा अपना एक बेहद निजी और अजीब अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह कहानी लिख रहे थे, उस दौरान एक बार उन्होंने नॉन-वेज खाना खाया और उसी समय उनकी जीभ कट गई। यह घटना उनके लिए इतनी अजीब थी कि उन्होंने मन में तय कर लिया कि जब तक वह इस कहानी पर काम करेंगे, तब तक नॉन-वेज नहीं खाएंगे। शुरुआत में यह सिर्फ कहानी लिखने तक का फैसला था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने पूरी तरह शाकाहारी भोजन अपनाना शुरू कर दिया। अरुणाभ ने इसे किसी धार्मिक नियम की तरह नहीं बल्कि कहानी में पूरी तरह डूब जाने से जुड़ा अपना व्यक्तिगत अनुभव बताया।

अरुणाभ का कहना था कि जब कोई लेखक किसी कहानी में बहुत ज्यादा डूब जाता है तो उसके आसपास की चीजें भी उस कहानी से जुड़ने लगती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई लेखक प्रेम कहानी लिखता है तो कई बार उसे अपना पुराना प्यार याद आने लगता है। माता-पिता पर कहानी लिखने वाला व्यक्ति अपने माता-पिता को अलग नजर से देखने लगता है। इसी तरह ‘द व्वान’ लिखते हुए वह भी कहानी की दुनिया में इतने गहरे उतर गए कि एक छोटी-सी घटना ने उनकी खाने की आदत तक बदल दी। यह किस्सा फिल्म के प्रमोशन के दौरान सामने आया और अब इसकी भी काफी चर्चा हो रही है।

फिल्म की शूटिंग भी आसान नहीं रही। दीपक कुमार मिश्रा ने बताया कि टीम ने करीब 35 से 40 रातों तक लगातार शूटिंग की। फिल्म की कहानी में रात को एक महत्वपूर्ण तत्व की तरह इस्तेमाल किया गया है, इसलिए कई एक्शन और एक्टिंग सीक्वेंस रात के समय शूट किए गए। कुछ दिनों में टीम सुबह करीब 6 बजे तक काम करती रही। लगातार रातों में शूटिंग के कारण कलाकारों और क्रू का रूटीन पूरी तरह बदल गया था। दीपक के मुताबिक एक समय ऐसा हो गया था कि शूटिंग खत्म होने के बाद भी टीम को रात में सामान्य तरीके से नींद आने में परेशानी होने लगी थी।

इस फिल्म में कलाकारों को भी सिर्फ सामान्य अभिनय से अलग तैयारी करनी पड़ी। दीपक मिश्रा ने बताया कि सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया अपने किरदारों को लेकर काफी गंभीर थे। दोनों बार-बार अपने सीन को बेहतर बनाने को लेकर चर्चा करते थे। खास तौर पर फिल्म की सांस्कृतिक दुनिया को वास्तविक दिखाने पर ध्यान दिया गया। तमन्ना का मानना था कि अगर फिल्म किसी खास संस्कृति और लोककथा से जुड़ी है तो उसकी दुनिया भी उतनी ही प्रामाणिक दिखाई देनी चाहिए। सिद्धार्थ ने अपने एक्शन सीन्स पर भी मेहनत की है।

सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की जोड़ी भी फिल्म के लिए खास है, क्योंकि दोनों पहली बार एक साथ इस तरह की लोक-फैंटेसी दुनिया में नजर आएंगे। अरुणाभ के मुताबिक सिद्धार्थ को कास्ट करने के पीछे एक खास वजह थी। उन्हें ऐसा कलाकार चाहिए था जो फिल्म की शुरुआत में पूरी तरह शहरी नजर आए और जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़े, गांव और जंगल की दुनिया में भी विश्वसनीय लगे। सिद्धार्थ से पहली मुलाकात करीब एक घंटे के लिए तय हुई थी, लेकिन कहानी और किरदारों पर बातचीत तीन से चार घंटे तक चलती रही। इसके बाद उन्हें लगा कि वह इस भूमिका के लिए सही कलाकार हैं।

तमन्ना भाटिया के किरदार को लेकर भी मेकर्स ने ज्यादा जानकारी नहीं दी है। हालांकि उनके बारे में इतना संकेत जरूर मिला है कि यह उनके अब तक के सामान्य किरदारों से अलग होने वाला है। फिल्म की दुनिया में उनका किरदार कहानी के रहस्य और भावनात्मक हिस्से को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता दिखाई दे सकता है। वहीं सुनील ग्रोवर, मनीष पॉल, श्वेता तिवारी और अनूप सोनी जैसे कलाकार भी फिल्म के संसार को विस्तार देते नजर आएंगे। फिल्म का पूरा कलाकार समूह यह संकेत देता है कि मेकर्स ने इसे सिर्फ एक गंभीर हॉरर फिल्म की तरह नहीं बल्कि रहस्य, एडवेंचर, फैंटेसी और मनोरंजन के मिश्रण के तौर पर तैयार किया है।

फिल्म के टीजर ने भी इसकी दुनिया को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। अगस्त 2026 में जारी किए गए टीजर में सिद्धार्थ मल्होत्रा का किरदार रहस्यमय जंगल की तरफ बढ़ता दिखाई देता है। जंगल में मौजूद एक अनजान शक्ति और उससे जुड़ी घटनाएं कहानी के बड़े संघर्ष की तरफ संकेत देती हैं। टीजर ने कहानी का पूरा राज खोलने के बजाय सवाल खड़े किए हैं—आखिर सूर्यास्त के बाद जंगल में ऐसा क्या होता है, वहां कौन-सी शक्ति मौजूद है और सिद्धार्थ का किरदार उससे क्यों जुड़ता है?

फिल्म को लेकर एक और खास बात यह है कि मेकर्स इसे भारतीय लोककथा पर आधारित एक बड़े सिनेमाई अनुभव के रूप में पेश कर रहे हैं। ‘तुम्बाड’, ‘कांतारा’ और अन्य भारतीय लोककथा आधारित फिल्मों के बाद दर्शकों के बीच जड़ों से जुड़ी कहानियों को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है। ‘द व्वान’ इसी ट्रेंड को एक अलग दुनिया में ले जाने की कोशिश करती नजर आ रही है। हालांकि फिल्म का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन अभी भविष्य की बात है, लेकिन इसकी कहानी का आधार और टीजर की रहस्यमय दुनिया दर्शकों के बीच उत्सुकता पैदा करने में सफल रही है।

अरुणाभ कुमार के लिए यह प्रोजेक्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह टीवीएफ की कहानियों से बड़े पर्दे की ओर एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि फिल्म किसी पहले से बनाई गई योजना के तहत शुरू नहीं हुई थी। मंदिरों और लोककथाओं पर बातचीत से एक विचार आया, फिर कहानी लिखी गई और धीरे-धीरे यह बड़े बजट की फिल्म में बदलती चली गई। टीवीएफ की कहानियों की सबसे बड़ी पहचान उनकी रिलेटेबलनेस रही है और अरुणाभ के मुताबिक यह गुण इस फिल्म में भी बनाए रखने की कोशिश की गई है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार कहानी को बड़े पर्दे के सिनेमाई पैमाने पर पेश किया जा रहा है।

इस फिल्म में बिहार की संस्कृति और छठ पर्व को भी महत्वपूर्ण जगह मिलने वाली है। मेकर्स का प्रयास है कि दर्शकों को सिर्फ रहस्य और रोमांच न मिले बल्कि बिहार और पूर्वांचल की संस्कृति, परंपराओं और लोकविश्वासों की झलक भी बड़े पर्दे पर दिखाई दे। यही वजह है कि फिल्म को लेकर बिहार से जुड़े दर्शकों में भी खास उत्सुकता देखी जा रही है।

फिल्म की रिलीज डेट अब 25 सितंबर 2026 तय है। यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी। अगस्त में जारी टीजर के बाद मेकर्स ने फिल्म की दुनिया की पहली झलक दर्शकों को दे दी है, लेकिन कहानी का असली रहस्य अभी पर्दे के पीछे रखा गया है।

दिलचस्प बात यह भी है कि अरुणाभ कुमार और दीपक कुमार मिश्रा की जोड़ी आगे किस तरह की कहानियों पर काम करती है, इसे लेकर भी सवाल पूछे जा रहे हैं। बातचीत में अरुणाभ ने कहा कि ‘ट्रिपलिंग’ और ‘सपने वर्सेस एवरीवन’ जैसी कहानियों पर फिल्म बनाई जा सकती है। उन्होंने यह भी माना कि ‘पंचायत’ की कहानी को भी फिल्म के रूप में आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इन प्रोजेक्ट्स की आधिकारिक घोषणा हो चुकी है; यह केवल अरुणाभ की बातचीत में व्यक्त की गई संभावनाएं हैं।

वहीं ‘पंचायत’ के फैंस के लिए दीपक कुमार मिश्रा ने यह जरूर कहा कि सीजन 5 आने वाला है और वह खुद भी इसका इंतजार कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने इसकी रिलीज डेट या कहानी को लेकर कोई बड़ा खुलासा नहीं किया। ऐसे में अभी फैंस को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

कुल मिलाकर ‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ की कहानी की सबसे दिलचस्प बात यही है कि इसकी शुरुआत एक वास्तविक जगह से जुड़ी लोकमान्यता और अरुणाभ कुमार के व्यक्तिगत अनुभव से हुई, लेकिन इसे बड़े पर्दे के लिए फैंटेसी, एक्शन, रहस्य और सुपरनैचुरल दुनिया में बदला गया है। करीब 400 साल पुराने बताए जाने वाले वन देवी मंदिर की कहानी, सूर्यास्त के बाद जंगल में प्रवेश पर रोक की स्थानीय मान्यता, अरुणाभ का कहानी लिखते समय जीभ कटने के बाद नॉन-वेज छोड़ देना और 35-40 रातों तक चली शूटिंग—इन सभी बातों ने फिल्म के आसपास एक अलग तरह की उत्सुकता पैदा कर दी है।

अब असली सवाल यह है कि बिहार की इस लोककथा को दीपक कुमार मिश्रा और अरुणाभ कुमार बड़े पर्दे पर कितना प्रभावशाली बना पाते हैं। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की मौजूदगी, विशाल जंगल की दुनिया, रहस्यमय शक्तियां, भारतीय लोकविश्वास और बड़े पैमाने के विजुअल इफेक्ट्स फिल्म को एक अलग पहचान देने की कोशिश कर रहे हैं। 25 सितंबर 2026 को जब फिल्म सिनेमाघरों में पहुंचेगी, तब यह पता चलेगा कि 400 साल पुराने बताए जाने वाले इस मंदिर की लोककथा और ‘व्वान’ की रहस्यमय दुनिया दर्शकों को कितना प्रभावित कर पाती है।


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http://सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म द व्वान का पोस्टर

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