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80 साल बाद पहली महिला बन सकती UN Chief: 8 उम्मीदवारों में 5 महिलाएं, Birkett सबसे आगे

संयुक्त राष्ट्र यानी UN के अगले महासचिव को लेकर इस समय दुनिया की नजरें एक ऐतिहासिक मुकाबले पर टिकी हैं। 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से अब तक कोई महिला इस संगठन की Secretary-General नहीं बनी है। लेकिन 2026 की मौजूदा रेस में तस्वीर पहले के मुकाबले काफी अलग दिखाई दे रही है। इस समय 8 आधिकारिक दावेदार मैदान में हैं, जिनमें 5 महिलाएं हैं। इनमें गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री और मौजूदा UN राजदूत कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट इस समय सबसे आगे चल रही हैं।

21 अगस्त 2026 को UN Security Council में हुए दूसरे अनौपचारिक straw poll में बिर्केट को 15 सदस्यीय परिषद में सबसे ज्यादा “encourage” वोट मिले। उन्हें 8 सदस्यों का समर्थन मिला, जबकि कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन और अर्जेंटीना के राफेल ग्रॉसी को 7-7 “encourage” वोट मिले। हालांकि यह अंतिम चुनाव नहीं है और किसी उम्मीदवार को अभी वह निर्णायक समर्थन नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके कि उनका चयन लगभग तय है।

इस बार की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ बिर्केट का आगे निकलना नहीं है। असली बात यह है कि आठ उम्मीदवारों में पांच महिलाएं हैं। यानी अगर इनमें से किसी एक को Security Council अंततः recommend करता है और General Assembly उनकी नियुक्ति करती है, तो UN के इतिहास में पहली बार दुनिया की सबसे बड़ी बहुपक्षीय संस्था की शीर्ष प्रशासनिक जिम्मेदारी किसी महिला के हाथ में होगी।

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र को बने 80 साल से ज्यादा हो चुके हैं। इस पूरे दौर में अलग-अलग महाद्वीपों, क्षेत्रों और राजनीतिक पृष्ठभूमियों से पुरुष महासचिव चुने गए, लेकिन महिला को यह पद नहीं मिला। 1945 से अब तक आधिकारिक रूप से दर्ज उम्मीदवारों में महिलाओं की संख्या भी बहुत कम रही है।

अब 2026 में परिस्थितियां बदलती हुई दिखाई दे रही हैं।

UN महासचिव की रेस में कौन-कौन?

संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक candidate list के अनुसार फिलहाल आठ नाम सामने हैं। इनमें पांच महिलाएं और तीन पुरुष हैं। महिलाओं में रेबेका ग्रिन्सपैन, कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट, मिशेल बैचेलेट, मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा और इवोन बाकि शामिल हैं।

पुरुष उम्मीदवारों में राफेल मारियानो ग्रॉसी, माकी साल और ओलारा ओटुनु शामिल हैं। UN ने सभी उम्मीदवारों की nomination, vision statement, CV और campaign financing disclosures को सार्वजनिक किया है।

सबसे नई उम्मीदवार इवोन बाकि हैं। उन्हें टोंगा ने अगस्त 2026 में nominate किया और इसके साथ उम्मीदवारों की संख्या आठ हो गई। बाकि इक्वाडोर की अनुभवी diplomat हैं और उन्होंने कई देशों में Ecuador की ambassador के रूप में काम किया है। वह Ecuador सरकार में minister भी रह चुकी हैं।

उनकी उम्मीदवारी ऐसे समय में आई जब पहले से चल रही race में कई उम्मीदवारों के बीच मुकाबला काफी कड़ा हो चुका था।

1. कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट — गुयाना

इस समय सबसे ज्यादा चर्चा कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट की है। वह गुयाना की पूर्व Foreign Minister रह चुकी हैं और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र में गुयाना की Permanent Representative हैं।

उनकी उम्मीदवारी को Caribbean क्षेत्र के संगठन CARICOM का समर्थन भी मिला है। बिर्केट का background diplomacy, development और international affairs से जुड़ा रहा है।

उनकी कहानी को इसलिए भी महत्व दिया जा रहा है क्योंकि वह Caribbean क्षेत्र से आने वाली पहली UN Secretary-General बनने की कोशिश कर रही हैं। यदि वह चुनी जाती हैं तो यह एक साथ दो ऐतिहासिक उपलब्धियां होंगी—पहली महिला UN chief और Caribbean क्षेत्र की पहली व्यक्ति इस पद पर।

बिर्केट ने climate finance, development और global cooperation जैसे मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं सामने रखी हैं। Caribbean देशों के लिए climate change और climate financing बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, इसलिए इस क्षेत्र से आने वाली उनकी पृष्ठभूमि भी उनकी campaign identity का हिस्सा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 21 अगस्त के दूसरे straw poll में उन्होंने 8 encourage votes हासिल किए और बाकी सात उम्मीदवारों से आगे निकल गईं।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनका चयन हो चुका है। UN Secretary-General का चुनाव कई स्तरों वाली diplomatic प्रक्रिया है।

2. रेबेका ग्रिन्सपैन — कोस्टा रिका

रेबेका ग्रिन्सपैन इस race की शुरुआती frontrunner रही हैं। वह Costa Rica की economist और पूर्व Vice President हैं तथा वर्तमान में UNCTAD यानी United Nations Conference on Trade and Development की Secretary-General हैं।

पहले straw poll में ग्रिन्सपैन ने बढ़त बनाई थी। दूसरे poll में वह बिर्केट से थोड़ा पीछे चली गईं और उन्हें 7 encourage votes मिले।

ग्रिन्सपैन का अनुभव development economics, international cooperation और UN system से जुड़ा है। इसलिए उनके supporters उन्हें ऐसे उम्मीदवार के रूप में देखते हैं जिनके पास UN के भीतर काम करने का सीधा अनुभव है।

उनकी उम्मीदवारी यह भी दिखाती है कि Latin America और Caribbean region इस बार UN के शीर्ष पद के लिए मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है।

3. राफेल ग्रॉसी — अर्जेंटीना

तीसरे प्रमुख contender राफेल मारियानो ग्रॉसी हैं। वह International Atomic Energy Agency यानी IAEA के Director General हैं।

उनका सबसे बड़ा strength nuclear diplomacy और international security का अनुभव है। दुनिया में nuclear weapons, nuclear safety और geopolitical tensions जैसे मुद्दों के बीच IAEA का नेतृत्व करने का अनुभव UN Secretary-General की भूमिका के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

दूसरे straw poll में ग्रॉसी को भी 7 encourage votes मिले। यानी वह अभी भी race में बेहद मजबूत स्थिति में हैं।

अगर Security Council को किसी ऐसे candidate की जरूरत महसूस होती है जिसका अनुभव global security और complex international negotiations में हो, तो ग्रॉसी की candidature महत्वपूर्ण हो सकती है।

4. मिशेल बैचेलेट — चिली

मिशेल बैचेलेट Chile की पूर्व President और UN की पूर्व High Commissioner for Human Rights रह चुकी हैं।

उनका political और international experience काफी व्यापक है। वह देश की राष्ट्रपति रह चुकी हैं और मानवाधिकार के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष पद पर भी काम कर चुकी हैं।

बैचेलेट की उम्मीदवारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह Latin America की प्रमुख महिला नेताओं में रही हैं। अगर कोई महिला उम्मीदवार चुनी जाती है तो उनके पास national political leadership और international diplomacy दोनों का अनुभव है।

UN के interactive dialogue process में बैचेलेट ने भी हिस्सा लिया था। इस प्रक्रिया का उद्देश्य उम्मीदवारों को member states और civil society के सामने अपनी vision तथा leadership approach रखने का अवसर देना है।

5. मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा — इक्वाडोर

मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा Ecuador की diplomat और पूर्व Foreign Minister हैं। वह UN General Assembly की President भी रह चुकी हैं।

उनका अनुभव UN diplomacy से सीधे जुड़ा हुआ है। वह multilateral negotiations, development और international relations के क्षेत्र में काम कर चुकी हैं।

उनकी उम्मीदवारी का महत्व इस वजह से भी है कि UN की top leadership में gender representation के साथ-साथ Latin American और developing-country perspective का सवाल भी इस race में चर्चा का हिस्सा है।

6. इवोन बाकि — इक्वाडोर

इवोन बाकि इस race में सबसे नई उम्मीदवार हैं। उन्हें अगस्त 2026 में टोंगा ने nominate किया, जिससे आधिकारिक उम्मीदवारों की संख्या आठ हो गई।

बाकि ने Ecuador की ambassador के तौर पर कई देशों में काम किया है और सरकार में minister भी रही हैं। उन्होंने UN leadership में conflict prevention और institutional reform पर जोर दिया है।

उनकी entry के बाद race और ज्यादा competitive हो गई है। चूंकि वह पहले straw poll में शामिल नहीं थीं, इसलिए उनकी वास्तविक strength को आगे के polls में बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

7. माकी साल — सेनेगल

माकी साल Senegal के पूर्व President हैं। वह African political leadership का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके पास national तथा international diplomacy का अनुभव है।

उनकी उम्मीदवारी इस सवाल को भी सामने लाती है कि अगला UN Secretary-General किस geographic region से होना चाहिए।

UN में regional representation हमेशा महत्वपूर्ण political consideration रहा है। हालांकि Charter में यह तय नहीं है कि हर term में किसी खास region की बारी होगी, लेकिन member states diplomatic tradition और regional balance को ध्यान में रखते हैं।

8. ओलारा ओटुनु — युगांडा

ओलारा ओटुनु Uganda के diplomat और UN के पूर्व Under-Secretary-General हैं। वह 2026 की race में शामिल होने वाले महत्वपूर्ण candidates में हैं।

Reuters के अनुसार उन्होंने UN reform, conflict prevention और संगठन की moral credibility को मजबूत करने पर जोर दिया है। 75 वर्ष की उम्र में वह इस race के सबसे उम्रदराज उम्मीदवारों में हैं।

उनका experience सीधे UN system से जुड़ा है, इसलिए वह organization की internal functioning को अच्छी तरह जानते हैं।

क्या बिर्केट का जीतना तय है?

नहीं। यह सबसे महत्वपूर्ण बात है।

21 अगस्त का straw poll final election नहीं है। यह Security Council के भीतर candidates की acceptability और support का informal assessment है। बिर्केट का आठ encourage votes हासिल करना निश्चित रूप से मजबूत प्रदर्शन है, लेकिन अभी उन्हें Security Council की formal recommendation हासिल करनी होगी।

Security Council में 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच permanent members हैं—United States, Russia, China, France और United Kingdom।

इन पांचों के पास veto power है।

इसलिए किसी candidate के लिए केवल ज्यादा “encourage” votes हासिल करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसा consensus बनाना होगा जिससे कोई permanent member उनकी recommendation को रोकने के लिए veto न करे।

यही कारण है कि UN Secretary-General की race अक्सर केवल popularity contest नहीं होती। यह बेहद जटिल diplomatic negotiation होती है।

किसी candidate को developing countries का support मिल सकता है, लेकिन अगर कोई permanent member उनका विरोध करता है तो उनकी candidature मुश्किल में पड़ सकती है।

इसी तरह किसी candidate को बड़े देशों का समर्थन मिल सकता है, लेकिन General Assembly में व्यापक acceptability भी जरूरी होती है।

UN Chief चुनने की प्रक्रिया क्या है?

संयुक्त राष्ट्र के Charter के Article 97 के अनुसार Secretary-General की नियुक्ति General Assembly करती है, लेकिन उससे पहले Security Council candidate की recommendation करता है।

यानी प्रक्रिया को आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं:

पहला चरण: Member States candidates को nominate करते हैं।

दूसरा चरण: उम्मीदवार अपनी vision, experience और priorities सामने रखते हैं।

तीसरा चरण: General Assembly President की ओर से interactive dialogues और public discussions होती हैं।

चौथा चरण: Security Council informal straw polls के जरिए candidates की acceptability का अंदाजा लगाता है।

पांचवां चरण: Security Council अंततः एक candidate की recommendation General Assembly को भेजता है।

छठा चरण: General Assembly उस candidate को Secretary-General appoint करती है।

इस बार की प्रक्रिया को ज्यादा transparent बनाने की कोशिश की गई है। उम्मीदवारों से vision statements, CV और campaign financing disclosures भी मांगे गए हैं।

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अतीत में Secretary-General selection को लेकर कई बार बंद दरवाजों के पीछे होने वाली diplomatic bargaining की आलोचना होती रही है।

पहली महिला UN Chief बनने का सवाल इतना बड़ा क्यों?

UN की स्थापना 1945 में हुई थी। तब से संगठन के महासचिवों के रूप में केवल पुरुष ही चुने गए हैं।

यह स्थिति तब और ज्यादा चर्चा में आती है जब संयुक्त राष्ट्र स्वयं gender equality और women’s empowerment को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देता है।

UN के Sustainable Development Goals में gender equality को प्रमुख लक्ष्य बनाया गया है। दुनिया भर में महिलाओं की political representation बढ़ाने की बात संयुक्त राष्ट्र लगातार करता रहा है।

लेकिन संगठन के सर्वोच्च administrative पद पर अभी तक कोई महिला नहीं पहुंची।

इसलिए 2026 की race में पांच महिला candidates का होना अपने आप में ऐतिहासिक है।

यह जरूरी नहीं कि केवल महिला होने के कारण कोई candidate चुनी जाए। Secretary-General के लिए leadership, diplomatic experience, international relations, communication skills और member states के बीच consensus बनाने की क्षमता जैसे कई factors महत्वपूर्ण होते हैं।

लेकिन gender representation का मुद्दा इस बार की race से अलग नहीं किया जा सकता।

दुनिया में UN की भूमिका भी बदल रही है

अगला UN Secretary-General ऐसे समय में पद संभालेगा जब दुनिया कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।

Russia-Ukraine war, Middle East conflicts, climate change, humanitarian crises, migration, nuclear risks और geopolitical rivalry ने UN के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी की हैं।

इसके अलावा UN को financial pressure और institutional reform की जरूरतों से भी जूझना पड़ रहा है।

ऐसे में अगला Secretary-General केवल ceremonial international figure नहीं होगा। उसे अलग-अलग देशों के बीच संवाद बनाए रखने, conflicts में mediation करने और UN agencies को coordinate करने की भूमिका निभानी होगी।

यही कारण है कि candidate की foreign-policy experience बेहद महत्वपूर्ण है।

बिर्केट के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?

अगर बिर्केट race में आगे बनी रहती हैं तो उनकी सबसे बड़ी चुनौती Security Council के सभी महत्वपूर्ण power centres के बीच acceptability बनाना होगी।

Caribbean region का समर्थन उनकी ताकत है। Guyana का diplomatic profile भी पिछले वर्षों में international attention में रहा है।

लेकिन Secretary-General बनने के लिए regional support से आगे बढ़कर global consensus जरूरी है।

उन्हें permanent members समेत Security Council के सभी सदस्यों के साथ ऐसा diplomatic equation बनाना होगा जिसमें कोई देश उनकी candidature को veto न करे।

यही कारण है कि आने वाले straw polls बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

ग्रिन्सपैन और बिर्केट के बीच मुकाबला

इस समय race का एक दिलचस्प पहलू यह है कि पहले दौर में ग्रिन्सपैन आगे थीं, जबकि दूसरे दौर में बिर्केट उनसे आगे निकल गईं।

पहले straw poll में ग्रिन्सपैन narrowly lead कर रही थीं। इसके बाद बिर्केट ने दूसरे poll में बढ़त बना ली।

इससे यह संकेत मिलता है कि race अभी खुली हुई है।

अगर किसी candidate का support लगातार बढ़ता है और वह कई rounds में आगे रहता है तो उसके consensus candidate बनने की संभावना बढ़ सकती है।

लेकिन अगर votes अलग-अलग candidates में बंटे रहते हैं तो Security Council को नए compromise candidate की तलाश भी करनी पड़ सकती है।

अमेरिका, चीन, रूस और दूसरे देशों की भूमिका

Secretary-General की race में permanent members की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

United States, China, Russia, France और United Kingdom में से किसी एक का गंभीर विरोध candidate की राह रोक सकता है।

इसीलिए उम्मीदवारों को केवल General Assembly के व्यापक समर्थन की चिंता नहीं करनी होती, बल्कि Security Council के power dynamics को भी समझना पड़ता है।

यही वजह है कि किसी candidate की public popularity और उसकी actual election prospects हमेशा एक जैसी नहीं होतीं।

क्या इस बार महिला UN Chief बन सकती है?

हां, संभावना पहले से कहीं ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है।

इसका कारण सिर्फ पांच महिला candidates का होना नहीं है। इस बार एक महिला candidate—Carolyn Rodrigues-Birkett—दूसरे Security Council straw poll में सबसे आगे भी रही हैं।

इसके अलावा Rebeca Grynspan और Michelle Bachelet जैसी अनुभवी महिला leaders भी race में हैं। Maria Fernanda Espinosa और Ivonne Baki की मौजूदगी ने महिला candidates की संख्या पांच तक पहुंचा दी है।

लेकिन final result अभी खुला हुआ है।

किसी महिला के पहली बार UN Secretary-General बनने के लिए केवल historical momentum पर्याप्त नहीं होगा। उसे Security Council में consensus और General Assembly की नियुक्ति दोनों हासिल करनी होंगी।

फैसला कब तक हो सकता है?

मौजूदा Secretary-General António Guterres का कार्यकाल 2026 के अंत में पूरा हो रहा है। नया Secretary-General जनवरी 2027 में पद संभालेगा।

इसलिए अगले कुछ महीनों में diplomatic activity और तेज होने की संभावना है।

Security Council आगे भी informal polls कर सकता है। Candidates के समर्थन में बदलाव हो सकते हैं और कुछ member states अपनी preferences बदल सकते हैं।

अंतिम recommendation से पहले कई rounds की बातचीत होना असामान्य नहीं है।

भारत के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है UN का नया प्रमुख?

भारत संयुक्त राष्ट्र का महत्वपूर्ण सदस्य है और लंबे समय से Security Council reform तथा developing countries की बेहतर representation की मांग करता रहा है।

अगले Secretary-General के सामने Global South की आवाज को मजबूत करने, development financing, climate change और international institutions में reform जैसे मुद्दे होंगे।

भारत के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि UN में कई मुद्दों पर भारत की diplomatic priorities developing countries और Global South की concerns से जुड़ी रहती हैं।

यदि नया Secretary-General Global South, development और institutional reform पर अधिक जोर देता है तो भारत सहित कई developing economies के लिए यह महत्वपूर्ण हो सकता है।

महिला नेतृत्व से क्या बदलेगा?

यदि पहली महिला UN Secretary-General चुनी जाती हैं तो यह सिर्फ symbolic achievement नहीं होगी।

यह UN के भीतर gender representation को लेकर एक बड़ा संदेश होगा। हालांकि किसी व्यक्ति की policies केवल उसके gender से तय नहीं होतीं, लेकिन leadership diversity decision-making में अलग अनुभव और perspectives ला सकती है।

महिला leadership का symbolic importance भी बड़ा है, खासकर तब जब UN खुद दुनिया में महिलाओं की राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने की बात करता है।

लेकिन नए Secretary-General की सफलता इस बात से तय होगी कि वह wars, humanitarian crises, climate change, development और institutional reform जैसे वास्तविक मुद्दों पर कितना प्रभावी नेतृत्व कर पाता या पाती हैं।

आने वाले समय में चार चीजें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहेंगी।

पहली—Security Council का अगला straw poll।

दूसरी—क्या बिर्केट अपनी बढ़त कायम रख पाती हैं।

तीसरी—क्या ग्रिन्सपैन या ग्रॉसी फिर से मजबूत comeback करते हैं।

चौथी—क्या कोई नया candidate race में प्रवेश करता है या मौजूदा आठ उम्मीदवारों में से ही final consensus बनता है।

21 अगस्त के दूसरे poll में किसी candidate को 9 “encourage” votes नहीं मिले, इसलिए race अभी निर्णायक स्थिति में नहीं पहुंची है।

यानी headline भले ही “80 साल बाद पहली महिला UN Chief” की संभावना को सामने ला रही हो, लेकिन final answer आने में अभी diplomatic प्रक्रिया बाकी है।

कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट फिलहाल सबसे आगे हैं, लेकिन उन्हें अभी लंबी राजनीतिक और कूटनीतिक परीक्षा से गुजरना होगा।

संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव की race 2026 में एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गई है। आठ उम्मीदवारों में पांच महिलाएं हैं और गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट दूसरे Security Council straw poll में सबसे आगे निकल चुकी हैं। उन्हें 8 encourage votes मिले, जबकि रेबेका ग्रिन्सपैन और राफेल ग्रॉसी को 7-7 वोट मिले।

अगर बिर्केट या किसी अन्य महिला उम्मीदवार को अंततः Security Council की recommendation और General Assembly की मंजूरी मिलती है, तो संयुक्त राष्ट्र के 80 साल से ज्यादा लंबे इतिहास में पहली बार कोई महिला Secretary-General बनेगी।

लेकिन अभी किसी का चयन तय नहीं है। UN Secretary-General की नियुक्ति Security Council की recommendation और General Assembly की appointment से होती है। Permanent members की veto power इस प्रक्रिया को बेहद जटिल बनाती है।

इसलिए आने वाले straw polls, diplomatic negotiations और member states के बीच consensus इस race की दिशा तय करेंगे।

फिलहाल तस्वीर साफ है—महिला उम्मीदवारों के लिए इस बार का मौका ऐतिहासिक रूप से सबसे मजबूत है, और गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट इस समय उस ऐतिहासिक दौड़ में सबसे आगे दिखाई दे रही हैं।


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http://UN Secretary General की रेस में Carolyn Rodrigues Birkett और महिला उम्मीदवार

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