हाल ही में पल्मोनरी एम्बॉलिज्म के कारण प्रतीक यादव की मौत की खबर सामने आने के बाद यह बीमारी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार Pulmonary Embolism बेहद गंभीर और कई बार जानलेवा स्थिति बन सकती है। कई लोगों को इसके शुरुआती लक्षणों की जानकारी नहीं होती, जिसके कारण समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
डॉक्टरों के मुताबिक पल्मोनरी एम्बॉलिज्म तब होता है जब शरीर में बना ब्लड क्लॉट यानी खून का थक्का फेफड़ों की धमनी में जाकर फंस जाता है। इससे फेफड़ों तक खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है और सांस लेने में गंभीर परेशानी पैदा हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी अचानक भी सामने आ सकती है। कई बार मरीज को शुरुआत में सामान्य सांस फूलने या सीने में दर्द जैसी समस्या महसूस होती है, लेकिन स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है।
डॉक्टर बताते हैं कि पल्मोनरी एम्बॉलिज्म का सबसे बड़ा कारण शरीर में बनने वाले खून के थक्के होते हैं। अक्सर ये थक्के पैरों की नसों में बनते हैं और बाद में खून के जरिए फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं।
Blood Clot शरीर में सामान्य रूप से चोट लगने पर खून रोकने के लिए बनता है, लेकिन जब यह नसों में अनियंत्रित रूप से बनने लगे तो खतरनाक हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, मोटापा, धूम्रपान, सर्जरी, गंभीर चोट और कुछ पुरानी बीमारियां इस समस्या का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक यात्रा करने वाले लोगों में भी यह खतरा बढ़ सकता है। लगातार कई घंटों तक बैठे रहने से पैरों में खून का प्रवाह प्रभावित होता है।
पल्मोनरी एम्बॉलिज्म के सामान्य लक्षणों में अचानक सांस फूलना, सीने में दर्द, तेज धड़कन, चक्कर आना और खांसी के साथ खून आना शामिल हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य थकान या गैस की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।
Deep Vein Thrombosis यानी DVT को पल्मोनरी एम्बॉलिज्म का बड़ा कारण माना जाता है। जब पैरों की नसों में बना थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंचता है तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति के पैरों में सूजन, दर्द या लालिमा हो तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह DVT का संकेत हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और इलाज से इस बीमारी से बचाव संभव है। कई मामलों में ब्लड थिनर दवाएं और मेडिकल निगरानी मरीज की जान बचा सकती हैं।
सोशल मीडिया पर भी इस बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ी है। कई डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट्स लोगों को इसके लक्षण और जोखिम के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
Cardiology से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्याओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लंबे समय तक बैठे रहने से बचें और बीच-बीच में शरीर को सक्रिय रखें। ऑफिस में काम करने वाले लोगों और लंबे सफर करने वालों को खास सावधानी बरतनी चाहिए।
नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त पानी पीना और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना भी ब्लड क्लॉट के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।
Walking जैसी सामान्य गतिविधियां भी शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रखने में मदद करती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि धूम्रपान और अत्यधिक मोटापा ब्लड क्लॉट बनने के जोखिम को काफी बढ़ा सकते हैं। इसलिए स्वस्थ वजन बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
कुछ मामलों में आनुवंशिक कारणों से भी लोगों में खून के थक्के बनने की संभावना ज्यादा हो सकती है। ऐसे लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने की सलाह दी जाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक सर्जरी या लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने वाले मरीजों में भी पल्मोनरी एम्बॉलिज्म का खतरा बढ़ सकता है।
Blood Circulation शरीर के सभी अंगों के सही काम करने के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया मानी जाती है। इसमें रुकावट गंभीर स्वास्थ्य समस्या पैदा कर सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को अचानक सांस लेने में परेशानी या सीने में तेज दर्द महसूस हो तो तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए। समय पर इलाज जीवन बचा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों में इस बीमारी को लेकर जागरूकता अभी भी काफी कम है। इसलिए इसके लक्षणों और जोखिम कारकों के बारे में जानकारी फैलाना जरूरी है।
फिलहाल प्रतीक यादव की मौत के बाद यह बीमारी फिर चर्चा में आ गई है और डॉक्टर लोगों से अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं।
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