महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा की गई कार्रवाई में लगभग 23 लाख लीटर संदिग्ध और मिलावटी दूध का मामला सामने आने के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई है। दूध रोजमर्रा की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक लगभग हर आयु वर्ग के लोग इसका सेवन करते हैं। ऐसे में यदि दूध में मिलावट हो तो यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या बाजार में मिलने वाला दूध पूरी तरह सुरक्षित है और आम उपभोक्ता घर बैठे यह कैसे पहचान सकता है कि वह शुद्ध दूध पी रहा है या सिंथेटिक अथवा मिलावटी दूध।
विशेषज्ञों का कहना है कि हर दूध मिलावटी नहीं होता, लेकिन उपभोक्ताओं को सतर्क रहना चाहिए और केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही दूध खरीदना चाहिए। यदि दूध के रंग, स्वाद, गंध या व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई दे तो उसकी जांच कराना उचित होता है।
महाराष्ट्र में हुई कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने विभिन्न डेयरियों, परिवहन वाहनों और वितरण केंद्रों से दूध के नमूने लिए। जांच में बड़ी मात्रा में संदिग्ध दूध और दूध से जुड़े उत्पादों पर कार्रवाई की गई। इस अभियान का उद्देश्य उपभोक्ताओं तक सुरक्षित खाद्य पदार्थ पहुंचाना और मिलावट करने वालों पर रोक लगाना है।
सिंथेटिक दूध क्या होता है?
सिंथेटिक दूध वह होता है जिसे प्राकृतिक दूध के स्थान पर या उसमें मिलावट करके तैयार किया जाता है। इसमें कुछ मामलों में पानी, डिटर्जेंट, यूरिया, स्टार्च, रिफाइंड तेल, ग्लूकोज या अन्य रसायनों का उपयोग किया जा सकता है। ऐसे पदार्थ दूध की मात्रा बढ़ाने या उसकी बनावट को असली जैसा दिखाने के लिए मिलाए जाते हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी दूध में मिलावट का अंतिम प्रमाण केवल अधिकृत प्रयोगशाला की जांच से ही मिलता है। केवल देखने या स्वाद से पूरी तरह निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
मिलावटी दूध से स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि दूध में हानिकारक रसायनों या अन्य अनुपयुक्त पदार्थों की मिलावट हो तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
संभावित समस्याओं में शामिल हो सकते हैं—
- पेट दर्द और गैस
- उल्टी या दस्त
- पाचन संबंधी परेशानी
- बच्चों में पोषण की कमी
- लंबे समय तक सेवन करने पर किडनी और लीवर पर असर
- संक्रमण का बढ़ा जोखिम
बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
घर पर दूध की प्राथमिक जांच कैसे करें?
हालांकि अंतिम पुष्टि लैब टेस्ट से ही होती है, लेकिन कुछ सरल घरेलू तरीकों से दूध में असामान्य मिलावट का प्रारंभिक अंदाजा लगाया जा सकता है।
1. पानी की मिलावट की सामान्य जांच
किसी साफ और चिकनी सतह पर दूध की एक बूंद गिराएं।
यदि दूध धीरे-धीरे नीचे की ओर बहते हुए सफेद निशान छोड़ता है, तो यह अपेक्षाकृत गाढ़ा हो सकता है। यदि बूंद तुरंत बिना कोई निशान छोड़े बह जाए, तो उसमें पानी की मिलावट होने की संभावना हो सकती है।
यह केवल प्रारंभिक संकेत है, अंतिम प्रमाण नहीं।
2. उबालने पर व्यवहार देखें
शुद्ध दूध उबालने पर सामान्य रूप से ऊपर उठता है और मलाई की परत बनती है।
यदि दूध का व्यवहार असामान्य लगे, तेज झाग बने या गंध अलग महसूस हो तो सावधानी बरतनी चाहिए।
3. गंध पर ध्यान दें
ताजा दूध में हल्की प्राकृतिक दूध जैसी खुशबू होती है।
यदि दूध से साबुन, डिटर्जेंट या किसी रसायन जैसी तेज गंध आए तो उसका सेवन करने से पहले जांच कराना बेहतर रहेगा।
4. स्वाद में बदलाव
यदि दूध का स्वाद अत्यधिक कड़वा, खारा, साबुन जैसा या असामान्य लगे तो उसे पीने से बचें और संबंधित विक्रेता से संपर्क करें।
5. स्टार्च की जांच
यदि संदेह हो तो ठंडे दूध में आयोडीन की कुछ बूंदें डालकर प्राथमिक परीक्षण किया जा सकता है।
यदि रंग गहरा नीला हो जाए तो स्टार्च की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है। हालांकि इसकी पुष्टि प्रयोगशाला परीक्षण से ही होती है।
दूध खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि—
- हमेशा भरोसेमंद ब्रांड या विश्वसनीय डेयरी से दूध खरीदें।
- पैकेट पर निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट जरूर देखें।
- पैकेट फूला हुआ या क्षतिग्रस्त हो तो उसे न खरीदें।
- खुले दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित न हो तो उससे बचें।
- दूध को खरीदने के बाद जल्द से जल्द फ्रिज में रखें।
खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका
भारत में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) तथा राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग करते हैं।
समय-समय पर विभिन्न राज्यों में दूध, मसाले, मिठाइयों, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच की जाती है। यदि किसी उत्पाद में मिलावट पाई जाती है तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
त्योहारों के समय बढ़ जाती है निगरानी
विशेषज्ञ बताते हैं कि त्योहारों और मांग बढ़ने वाले मौसम में दूध और दूध से बने उत्पादों की खपत बढ़ जाती है।
इसी कारण खाद्य सुरक्षा विभाग इन अवधियों में विशेष जांच अभियान चलाता है ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री मिल सके।
क्या हर खुला दूध मिलावटी होता है?
नहीं।
यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर खुला दूध मिलावटी होता है। कई स्थानीय डेयरी और पशुपालक पूरी तरह शुद्ध दूध भी उपलब्ध कराते हैं।
इसी तरह यह भी जरूरी नहीं कि हर पैकेट वाला दूध पूरी तरह सुरक्षित ही हो। इसलिए गुणवत्ता की निगरानी और नियमित जांच दोनों आवश्यक हैं।
यदि मिलावट का संदेह हो तो क्या करें?
यदि आपको किसी दूध या डेयरी उत्पाद पर संदेह हो तो—
- उसका सेवन तुरंत रोक दें।
- संबंधित विक्रेता से संपर्क करें।
- स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।
- आवश्यकता होने पर अधिकृत प्रयोगशाला में नमूना जांच के लिए दें।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सोशल मीडिया पर वायरल दावों या घरेलू परीक्षणों के आधार पर किसी दूध को मिलावटी घोषित नहीं करना चाहिए।
घरेलू परीक्षण केवल प्रारंभिक संकेत दे सकते हैं। कानूनी और वैज्ञानिक पुष्टि हमेशा प्रमाणित प्रयोगशाला द्वारा किए गए परीक्षण से ही होती है।
उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह
दूध हमारे दैनिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए गुणवत्ता को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
यदि दूध की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, स्वाद या गंध असामान्य लगे, या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस हो तो उसका सेवन बंद कर देना चाहिए और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
महाराष्ट्र में बड़ी मात्रा में संदिग्ध और मिलावटी दूध पर हुई कार्रवाई इस बात का संकेत है कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था लगातार निगरानी कर रही है। उपभोक्ताओं की भी जिम्मेदारी है कि वे जागरूक रहें, विश्वसनीय स्रोतों से ही दूध खरीदें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की जानकारी संबंधित विभाग तक पहुंचाएं। सतर्कता, वैज्ञानिक जांच और सही जानकारी ही सुरक्षित भोजन की सबसे मजबूत गारंटी है।
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