>

गॉल टेस्ट में टीम इंडिया ने फहराया तिरंगा: पडिक्कल का शतक, राहुल 77 पर दर्द से बाहर

भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट का पहला दिन भारतीय टीम के लिए कई वजहों से यादगार बन गया। 15 अगस्त 2026, यानी भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर टीम इंडिया ने गॉल में तिरंगा फहराकर दिन की शुरुआत की। मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल की अगुआई में खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय ध्वज के सामने स्वतंत्रता दिवस मनाया। इसके कुछ ही समय बाद भारतीय टीम अपने ऐतिहासिक 600वें टेस्ट में बल्लेबाजी करने उतरी।

दिन का अंत भारत के लिए काफी शानदार रहा। देवदत्त पडिक्कल ने नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हुए अपने टेस्ट करियर का पहला शतक जड़ दिया, जबकि केएल राहुल ने 77 रन की धैर्यपूर्ण पारी खेली। हालांकि बाद में राहुल को मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द के कारण मैदान छोड़ना पड़ा। दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने 73 ओवर में 2 विकेट पर 288 रन बना लिए थे और पडिक्कल 131 रन बनाकर नाबाद लौटे। उनके साथ ऋषभ पंत 27 रन पर नाबाद थे।

यह दिन भारतीय क्रिकेट के लिए इसलिए भी खास रहा क्योंकि पडिक्कल का शतक लंबे समय से खाली चल रही नंबर-3 की जगह के लिए बड़ी उम्मीद बनकर आया है। भारत के नंबर-3 बल्लेबाज के रूप में आखिरी टेस्ट शतक शुभमन गिल ने सितंबर 2024 में बांग्लादेश के खिलाफ चेन्नई टेस्ट में लगाया था। उसके बाद इस position पर कई खिलाड़ियों को आजमाया गया, लेकिन कोई भी शतक नहीं लगा सका। पडिक्कल ने गॉल में इस इंतजार को खत्म कर दिया।

पडिक्कल के लिए यह शतक सिर्फ आंकड़ा नहीं है। वह लंबे समय से भारतीय टेस्ट टीम में नियमित जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे। श्रीलंका दौरे के लिए उन्हें साई सुदर्शन की चोट के बाद मौका मिला और उन्होंने इस मौके को शानदार तरीके से भुना लिया। इससे पहले practice match में भी पडिक्कल ने अच्छी बल्लेबाजी की थी। अब गॉल में उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में लंबी पारी खेलकर अपनी दावेदारी और मजबूत कर दी है।

भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। कप्तान शुभमन गिल का यह फैसला शुरुआत में सही साबित हुआ। यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल ने पारी की शुरुआत की। दोनों ने भारतीय टीम को अच्छी शुरुआत देने की कोशिश की, लेकिन जायसवाल 32 रन बनाकर रन आउट हो गए। इसके बाद नंबर-3 पर देवदत्त पडिक्कल मैदान में उतरे।

यहीं से भारतीय पारी का रुख बदल गया। पडिक्कल ने शुरुआत में काफी संभलकर बल्लेबाजी की। गॉल की पिच पर श्रीलंकाई गेंदबाजों के पास स्पिन का विकल्प था और जैसे-जैसे टेस्ट आगे बढ़ना था, पिच से स्पिनरों को मदद मिलने की उम्मीद थी। ऐसे में पडिक्कल ने आक्रामक क्रिकेट खेलने के बजाय पहले परिस्थितियों को समझा और फिर धीरे-धीरे रन गति बढ़ाई।

केएल राहुल ने भी दूसरे छोर से उनका अच्छा साथ दिया। राहुल ने अपनी पारी में धैर्य दिखाया और 77 रन बनाए। दोनों के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी हुई, जिसने भारत को शुरुआती झटके से उबरने में मदद की। चाय तक भारत 197/1 के मजबूत स्कोर तक पहुंच चुका था।

राहुल और पडिक्कल के बीच साझेदारी भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि यशस्वी जायसवाल के जल्दी आउट होने के बाद भारतीय टीम को एक स्थिर साझेदारी की जरूरत थी। दोनों बल्लेबाजों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों को लगातार विकेट के लिए तरसाया।

पडिक्कल ने अपने शतक तक पहुंचने के दौरान कई आकर्षक शॉट लगाए, लेकिन उनकी पारी की सबसे बड़ी खासियत उनका नियंत्रण रहा। उन्होंने गेंद की लाइन को समझकर अपने शॉट खेले और स्पिन के खिलाफ अपने पैरों का अच्छा इस्तेमाल किया।

जब उन्होंने टेस्ट करियर का पहला शतक पूरा किया तो भारतीय ड्रेसिंग रूम में खुशी का माहौल बन गया। यह उनके लिए तीसरे टेस्ट में पहला international hundred था। पहले दो टेस्ट मैचों में उन्हें अपनी क्षमता दिखाने के ज्यादा मौके नहीं मिले थे, लेकिन गॉल में उन्होंने मौका मिलते ही बड़ी पारी खेल दी।

पडिक्कल का शतक स्वतंत्रता दिवस पर आया, जिससे यह उपलब्धि और भी खास बन गई। वह स्वतंत्रता दिवस पर टेस्ट शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। इस तरह उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में लंबे समय तक याद किया जाएगा। इससे पहले स्वतंत्रता दिवस पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतक लगाने वाले भारतीयों में विराट कोहली का नाम था, लेकिन कोहली का शतक ODI में आया था।

पडिक्कल की पारी ने नंबर-3 को लेकर भारतीय टीम की चिंता भी कुछ समय के लिए कम कर दी है। पिछले लगभग दो साल में इस position पर लगातार बदलाव हुए हैं। शुभमन गिल के नंबर-3 से हटकर कप्तान और नंबर-4 की भूमिका में आने के बाद टीम को इस position पर स्थिर विकल्प नहीं मिला था।

पडिक्कल ने अब इस position पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर दी है। हालांकि एक शतक के बाद उन्हें स्थायी नंबर-3 घोषित करना जल्दबाजी होगी, लेकिन उनकी technique और temperament को देखते हुए टीम management के सामने एक अच्छा विकल्प जरूर आ गया है।

भारतीय बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने भी पडिक्कल की तैयारी और उनकी back-foot technique की तारीफ की। उन्होंने बताया कि पडिक्कल ने अपने खेल पर काम किया और उस तैयारी का फायदा गॉल में दिखाई दिया।

पडिक्कल की इस पारी की खासियत यह भी रही कि उन्होंने गॉल जैसी spin-friendly परिस्थितियों में अपने खेल को situation के मुताबिक बदला। वह शुरुआत में गेंद को अच्छी तरह देख रहे थे और बाद में gaps में शॉट लगाकर रन बनाते रहे।

उनकी पारी के दौरान श्रीलंका ने अलग-अलग गेंदबाजों का इस्तेमाल किया, लेकिन पडिक्कल ने विकेट नहीं दिया। दिन खत्म होने तक वह 131 रन बनाकर नाबाद थे। उन्होंने अपनी पारी में 9 चौके और 1 छक्का लगाया।

दूसरे छोर पर केएल राहुल की पारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण थी। राहुल ने 162 गेंदों का सामना करते हुए 77 रन बनाए। उनकी बल्लेबाजी में जल्दबाजी नजर नहीं आई। उन्होंने श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ काफी सावधानी से खेला और पडिक्कल के साथ मिलकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

लेकिन राहुल की पारी का अंत थोड़ा चिंता पैदा करने वाला रहा। चाय के बाद उन्हें ऐंठन और दर्द की शिकायत हुई। वह कुछ समय तक मैदान पर रहे, लेकिन परेशानी बढ़ने के बाद उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। टीम फिजियो उनके साथ थे और राहुल को ड्रेसिंग रूम की ओर ले जाया गया।

शुरुआत में राहुल की स्थिति को लेकर भारतीय फैंस के बीच चिंता बढ़ गई थी, क्योंकि वह अच्छी लय में बल्लेबाजी कर रहे थे। हालांकि बाद में भारतीय बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने राहत देते हुए बताया कि राहुल अब ठीक हैं और समस्या गंभीर चोट की बजाय cramps यानी ऐंठन से जुड़ी थी।

राहुल की फिटनेस पर भारतीय टीम की नजर रहेगी। दो टेस्ट मैचों की सीरीज में उनका योगदान महत्वपूर्ण है और WTC qualification की दौड़ में भारत के लिए हर मैच अहम है। अगर राहुल दूसरे दिन बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहते हैं तो भारतीय टीम के पास अपनी पहली पारी को और मजबूत करने का मौका होगा।

राहुल के बाहर जाने के बाद ऋषभ पंत मैदान पर आए। पंत ने दिन का खेल खत्म होने तक 27 रन बनाए और पडिक्कल के साथ नाबाद रहे। पंत के पास टेस्ट क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी करने की क्षमता है और अगर वह दूसरे दिन तेजी से रन बनाते हैं तो भारत बड़े स्कोर की ओर बढ़ सकता है।

शुभमन गिल का प्रदर्शन हालांकि इस पारी में ज्यादा बड़ा नहीं रहा। वह आउट होकर लौटे, लेकिन कप्तान के तौर पर उनका सबसे महत्वपूर्ण काम अब टीम को मजबूत position से आगे ले जाना होगा।

भारत ने दिन का खेल 288/2 पर समाप्त किया। इस स्कोर के बाद भारतीय टीम के पास दूसरे दिन बड़ा total खड़ा करने का मौका है। अगर पडिक्कल और पंत लंबी साझेदारी करते हैं तो भारत 400 या उससे ज्यादा के स्कोर की ओर बढ़ सकता है।

गॉल की पिच पर पहली पारी का बड़ा स्कोर बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। जैसे-जैसे टेस्ट आगे बढ़ता है, पिच में स्पिन बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में भारत अगर पहली पारी में बड़ा स्कोर बनाता है तो श्रीलंका के बल्लेबाजों पर दबाव बनाया जा सकता है।

भारत के लिए यह टेस्ट WTC 2025-27 का हिस्सा है। टीम पहले ही इस cycle में कुछ महत्वपूर्ण points गंवा चुकी है और अब हर जीत उसके लिए जरूरी हो गई है। श्रीलंका के खिलाफ 2-0 की जीत भारत के WTC campaign को मजबूत कर सकती है।

यही वजह है कि पडिक्कल का शतक सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह भारतीय टीम के लिए strategic advantage भी है। अगर नंबर-3 पर कोई बल्लेबाज लंबे समय तक स्थिर हो जाता है तो टीम का middle order ज्यादा संतुलित हो सकता है।

पडिक्कल का चयन पहले से ही चर्चा में था। घरेलू क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड मजबूत रहा है और उन्होंने रणजी ट्रॉफी में भी बड़ी पारियां खेली हैं। फरवरी 2026 में उन्होंने रणजी ट्रॉफी semifinal में उत्तराखंड के खिलाफ 148 रन की नाबाद पारी खेली थी और नंबर-3 की जगह के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी।

अब गॉल में उनकी international century ने उस domestic performance को एक बड़े मंच पर साबित करने का मौका दिया है।

पडिक्कल की सफलता भारतीय टीम के selection strategy के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है। टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ short-format performance के आधार पर नहीं बल्कि घरेलू red-ball cricket में consistency और technique को महत्व देना कितना जरूरी है, यह उनका career एक उदाहरण बन सकता है।

इस समय भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पडिक्कल इस प्रदर्शन को अगले टेस्ट में भी दोहरा पाएंगे। एक बड़ी पारी निश्चित रूप से confidence देती है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में असली पहचान लगातार प्रदर्शन से बनती है।

गॉल टेस्ट का पहला दिन बारिश से भी प्रभावित रहा। बारिश और slow over-rate के कारण पूरे दिन निर्धारित overs नहीं हो सके। इसके बावजूद भारत ने 73 overs में 288 रन बना लिए, जो बल्लेबाजी के लिहाज से मजबूत स्थिति है।

श्रीलंका के गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि उन्हें लंबे समय तक विकेट नहीं मिला। यशस्वी जायसवाल का विकेट रन आउट के रूप में मिला, जबकि राहुल और पडिक्कल ने गेंदबाजों को काफी देर तक परेशान किया।

श्रीलंका की टीम ने spin को अपने मुख्य हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। गॉल में यह रणनीति स्वाभाविक भी है। लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने पहले दिन spin के खिलाफ अच्छी तैयारी दिखाई।

अब दूसरे दिन श्रीलंका के गेंदबाजों को पडिक्कल और पंत के खिलाफ नई रणनीति बनानी होगी। अगर वे सुबह जल्दी विकेट लेते हैं तो मैच में वापसी की संभावना बनेगी। दूसरी तरफ भारत 350-400 के आसपास पहुंच जाता है तो श्रीलंका पर दबाव बढ़ सकता है।

इस मुकाबले में भारतीय गेंदबाजी भी बाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जसप्रीत बुमराह इस सीरीज में उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए भारतीय attack को मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और spin options पर अधिक निर्भर रहना होगा।

रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव जैसे गेंदबाजों के लिए गॉल की परिस्थितियां खास महत्व रख सकती हैं। अगर pitch पर turn बढ़ता है तो भारतीय spin attack श्रीलंकाई बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

लेकिन उससे पहले भारत को अपनी पहली पारी पूरी करनी होगी।

15 अगस्त की सुबह भारतीय टीम ने तिरंगा फहराकर जिस भावना के साथ दिन की शुरुआत की थी, उसी दिन पडिक्कल ने शतक लगाकर इसे क्रिकेट के लिहाज से भी यादगार बना दिया। भारतीय टीम के लिए यह दिन इतिहास और प्रदर्शन दोनों का मिश्रण रहा।

एक तरफ भारत अपना 600वां टेस्ट खेल रहा था, दूसरी तरफ स्वतंत्रता दिवस था और तीसरी तरफ WTC की महत्वपूर्ण सीरीज का पहला मैच था। ऐसे में खिलाड़ियों पर भावनात्मक और क्रिकेट दोनों तरह का दबाव था।

लेकिन पहले दिन भारत ने दबाव को अच्छी तरह संभाला।

पडिक्कल की century ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, जबकि राहुल की 77 रन की पारी ने भारत की नींव मजबूत की। राहुल के cramps के कारण बाहर जाने से जरूर थोड़ी चिंता बढ़ी, लेकिन टीम management ने इसे गंभीर injury नहीं बताया है।

अब दूसरे दिन भारतीय टीम की नजर बड़े स्कोर पर होगी। अगर पडिक्कल अपने 131 रन को 150 या उससे आगे ले जाते हैं और पंत भी अर्धशतक बनाते हैं तो भारत के पास मैच पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल करने का मौका होगा।

पडिक्कल के लिए भी यह दिन करियर का turning point साबित हो सकता है। भारत में नंबर-3 की जगह लंबे समय से महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। राहुल द्रविड़, चेतेश्वर पुजारा और शुभमन गिल जैसे बल्लेबाजों ने इस position को अलग-अलग दौर में मजबूती दी है। अब पडिक्कल ने भी इस position पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है।

हालांकि उन्हें अभी लंबा सफर तय करना है। एक शतक से जगह पक्की नहीं होती, लेकिन जिस तरह उन्होंने मुश्किल विदेशी परिस्थितियों में बल्लेबाजी की है, उससे टीम management के पास उन्हें आगे मौका देने का मजबूत कारण जरूर बन गया है।

कुल मिलाकर गॉल टेस्ट का पहला दिन भारत के नाम रहा। टीम ने पहले तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाया, फिर 600वें टेस्ट में बल्लेबाजी करते हुए मजबूत शुरुआत की। यशस्वी जायसवाल 32 रन पर रन आउट हुए, लेकिन केएल राहुल ने 77 और देवदत्त पडिक्कल ने नाबाद 131 रन बनाकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। राहुल को cramps के कारण रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा, लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार मामला गंभीर injury का नहीं है।

पडिक्कल का शतक इस दिन की सबसे बड़ी कहानी रहा। वह भारत के नंबर-3 बल्लेबाज के रूप में लंबे अंतराल के बाद century लगाने वाले बल्लेबाज बने और स्वतंत्रता दिवस पर टेस्ट शतक लगाने वाले पहले भारतीय भी रहे।

भारत अब दूसरे दिन इसी momentum को आगे बढ़ाना चाहेगा। अगर टीम पहली पारी में बड़ा स्कोर बनाती है तो WTC campaign की शुरुआत भी जीत की दिशा में बढ़ सकती है।

गॉल में अभी मैच के चार दिन बाकी हैं, लेकिन पहले दिन के प्रदर्शन ने यह जरूर बता दिया है कि भारत ने श्रीलंका दौरे की शुरुआत मजबूत इरादे के साथ की है।


रोहित शर्मा TV पर करेंगे डेब्यू, गेम शो करेंगे होस्ट: 2 परिवारों के बीच होगा मुकाबला

http://Team India flag hoisting and Devdutt Padikkal century in Galle Test 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ऑपरेशन हॉर्नेट पार्ट-2: प्रेमी-प्रेमिका बनकर जासूसी, लाहौर में ISI एजेंट पर हमला हनुमान अंश ने ₹2 करोड़ में कमाए ₹42 करोड़? टॉक्सिक से स्क्रीन मिलने की पूरी कहानी Elon Musk का सबसे बड़ा Rocket Launch Complex: Louisiana में बनेगा Starbase, 100 अरब डॉलर निवेश नेपाल में भीषण बाढ़: सैकड़ों लापता, 133 भारतीयों का पता नहीं; कैलाश मानसरोवर यात्री भी शामिल पुतिन सितंबर में आएंगे भारत? मोदी से जल्द मुलाकात, जयशंकर ने दिया BRICS Summit का न्योता