IIT दिल्ली में MSc Physics के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद कैंपस में छात्रों का गुस्सा सामने आया है। 22 अगस्त को हुई घटना के बाद 24 अगस्त को बड़ी संख्या में छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और Lecture Hall Complex के बाहर प्रदर्शन किया। छात्रों ने मामले की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और संस्थान की student-support व्यवस्था में बदलाव की मांग की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रशासन से जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि इसे केवल एक व्यक्तिगत घटना मानकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।
मृतक छात्र की पहचान 31 वर्षीय ऋषिकेश कुमार के रूप में हुई है। वह IIT दिल्ली के MSc Physics कार्यक्रम में पढ़ रहे थे। पुलिस के मुताबिक 22 अगस्त की सुबह IIT दिल्ली कैंपस में एक छात्र की मौत की सूचना मिली थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मौके से कोई suicide note बरामद नहीं हुआ। जांच में छात्र के counselling records, mobile phone और अन्य संबंधित सामग्री को भी देखा जा रहा है।
इस घटना के बाद छात्रों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि क्या ऋषिकेश को संस्थान की तरफ से पर्याप्त academic और residential support मिल रहा था। परिवार और छात्रों की ओर से कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसलिए इस पूरे मामले में यह अंतर समझना जरूरी है कि कौन-सी बातें पुलिस या संस्थान द्वारा बताई गई हैं और कौन-सी बातें परिवार या छात्रों के आरोप हैं।
ऋषिकेश के भाई अभिषेक ने India Today से बातचीत में आरोप लगाया कि उनके भाई को कैंपस में hostel accommodation नहीं मिल पाया था। परिवार ने कथित तौर पर हॉस्टल के साथ-साथ campus के family quarter में रहने की सुविधा के लिए भी अनुरोध किया था। परिवार का कहना है कि accommodation से जुड़ी समस्या लगातार बनी रही।
छात्रों ने भी protest के दौरान accommodation के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उनका आरोप है कि ऋषिकेश के लिए रहने की व्यवस्था से जुड़ी समस्या उनकी परिस्थितियों को और कठिन बना रही थी। कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया कि campus से बाहर रहने के कारण वह अपने साथियों और academic environment से अलग-थलग पड़ गए थे। हालांकि यह कहना कि किसी एक कारण से उनकी मौत हुई, जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
Academic project को लेकर भी छात्रों और परिवार की तरफ से सवाल उठाए गए हैं। ऋषिकेश के भाई ने दावा किया कि medical break के बाद वापस लौटने पर उन्हें एक academic research project दिया गया, लेकिन वह अकेले काम कर रहे थे। परिवार के अनुसार उन्होंने किसी दूसरे ऐसे student के साथ project करने का अनुरोध किया था जो भी individual project कर रहा था, लेकिन यह अनुरोध स्वीकार नहीं हुआ।
छात्रों ने भी project allocation को अपने protest की प्रमुख मांगों में शामिल किया। उनके मुताबिक academic support में आने वाली कठिनाइयों को केवल administrative matter मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अगर किसी छात्र को project, accommodation या academic guidance में समस्या हो तो उसे समय पर grievance mechanism के जरिए समाधान मिलना चाहिए।
इस पूरे मामले में IIT दिल्ली ने अपनी तरफ से अलग तस्वीर पेश की है। संस्थान की ओर से जारी जानकारी के अनुसार ऋषिकेश जुलाई 2025 में MSc Physics programme में शामिल हुए थे और शुरुआत में Shivalik Hostel में रह रहे थे। IIT के मुताबिक पहले semester में उनका academic performance अच्छा था।
संस्थान ने बताया कि मार्च 2026 में ऋषिकेश से जुड़ी mental-health concerns सामने आई थीं। IIT के अनुसार counsellor और psychiatrist ने उन्हें लगातार parental supervision में रहने की सलाह दी थी। इसके बाद उनका second semester withdrawal approve किया गया और वह campus से बाहर अपने parent के साथ रहने लगे।
IIT के मुताबिक जुलाई 2026 में जब वह वापस आए तो उनके medical records की counsellor और psychiatrist द्वारा समीक्षा की गई। संस्थान ने कहा कि उस समय भी उन्हें parental supervision में रहने की सलाह दी गई। इसके बाद Physics Department ने उनके third semester से withdrawal के अनुरोध को भी approve किया था।
यही जानकारी अब छात्रों के सवालों का केंद्र बन गई है। छात्रों का कहना है कि अगर किसी छात्र को पहले से support की आवश्यकता थी तो संस्थान को accommodation, academic guidance और grievance handling के स्तर पर ज्यादा प्रभावी व्यवस्था करनी चाहिए थी। वहीं IIT का कहना है कि उसने medical advice के आधार पर parental supervision की व्यवस्था की थी। इन दोनों पक्षों के बीच मौजूद अंतर को बाहरी जांच समिति के जरिए स्पष्ट करने की मांग की गई है।
24 अगस्त को छात्रों ने Lecture Hall Complex में प्रदर्शन किया और classes का boycott किया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने मांग की कि प्रशासन इस मामले में independent investigation कराए और जिन अधिकारियों की भूमिका में लापरवाही सामने आए, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। छात्रों ने senior officials के resignation की मांग भी उठाई।
प्रदर्शन के कारण IIT दिल्ली ने 24 अगस्त को scheduled classes cancel कर दी थीं। संस्थान की ओर से communication जारी कर बताया गया कि उस दिन की सभी classes unavoidable circumstances के कारण cancelled रहेंगी।
छात्रों की मांग केवल इस एक घटना तक सीमित नहीं रही। उन्होंने campus में student welfare, mental-health support, hostel management और academic grievance system को लेकर व्यापक सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि students को ऐसी स्थिति में नहीं पहुंचना चाहिए जहां उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कई अलग-अलग offices के चक्कर लगाने पड़ें।
छात्रों ने senior officials की जवाबदेही की मांग करते हुए Dean, Student Affairs Office से जुड़े अधिकारियों और Physics Department के Head के resignation की मांग उठाई। इसके साथ ही उन्होंने मृतक छात्र के परिवार को ₹1 करोड़ compensation देने की मांग भी रखी।
एक और महत्वपूर्ण मांग यह थी कि protest करने वाले छात्रों के खिलाफ disciplinary action न लिया जाए। छात्रों का कहना था कि वे किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक उद्देश्य से प्रदर्शन नहीं कर रहे, बल्कि student welfare और institutional accountability की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने campus के अलग-अलग हिस्सों में एकजुट होकर प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शन Lecture Hall Complex से आगे बढ़कर Director के office के आसपास भी पहुंचा। छात्रों का कहना था कि जिस जगह घटना हुई, वहां protest करने के बाद वे उस जगह पहुंचे जहां institutional decisions लिए जाते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए IIT दिल्ली ने अब external inquiry committee बनाने की घोषणा की है। समिति का उद्देश्य ऋषिकेश कुमार की मौत से जुड़े हालात की जांच करना और recommendations देना है। समिति में उत्तराखंड के पूर्व DGP और IIT दिल्ली alumnus अशोक कुमार, AIIMS दिल्ली के psychiatry department के head प्रोफेसर प्रताप शर्मा, दो student representatives और IIT Delhi के Registrar शामिल किए गए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार समिति को करीब दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने का लक्ष्य दिया गया है। समिति छात्रों, faculty और administration से जुड़े records, protocols और processes की समीक्षा करेगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि घटना से पहले और उसके दौरान institutional systems ने किस तरह काम किया।
IIT Delhi ने external inquiry के साथ student support system को मजबूत करने की भी बात कही है। संस्थान ने external ombudsperson नियुक्त करने और ऐसे छात्रों के लिए अतिरिक्त faculty-student mentor system बनाने की योजना बताई है जिन्हें parental supervision जैसी विशेष सहायता की जरूरत हो।
संस्थान ने परिवार के लिए financial assistance और इलाज से जुड़े खर्चों की reimbursement की बात भी कही है। इसके साथ grievance-redressal mechanism को मजबूत करने की योजना सामने आई है।
हालांकि students का एक वर्ग अभी भी प्रशासन के जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। छात्रों का कहना है कि केवल committee बनाना पर्याप्त नहीं होगा। वे चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष हो, उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।
परिवार की तरफ से भी यही मांग सामने आई है कि जांच यह स्पष्ट करे कि आखिर किन परिस्थितियों में ऋषिकेश इतने कठिन दौर से गुजर रहे थे। उनके भाई ने बताया कि परिवार ने कथित तौर पर प्रशासन को उनकी मानसिक स्थिति को लेकर चिंता के बारे में जानकारी दी थी। परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त सहायता नहीं मिली। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होना अभी बाकी है।
यहां यह बात भी जरूरी है कि किसी student suicide को सिर्फ academic pressure या hostel problem का परिणाम बताना वैज्ञानिक और तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है। आत्महत्या आमतौर पर कई जटिल परिस्थितियों से जुड़ी हो सकती है। इसलिए इस मामले में accommodation, academic project, health support और अन्य परिस्थितियों को जांच के हिस्से के रूप में देखना जरूरी है, लेकिन किसी एक कारण को अंतिम कारण बताना जांच पूरी होने से पहले सही नहीं होगा।
IIT जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों में academic competition काफी intense हो सकता है। Students को coursework, research, examinations, projects, internships और career expectations के साथ कई व्यक्तिगत चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे माहौल में effective counselling, accessible grievance redressal और supportive faculty-student relationships महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Hostel accommodation भी कई students के लिए केवल रहने की सुविधा नहीं होती। Campus में रहने से peer network, academic discussions और social support उपलब्ध होता है। लेकिन यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हर student की जरूरत अलग होती है और accommodation policy medical तथा administrative परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। इसलिए इस मामले में policy और individual circumstances दोनों की जांच आवश्यक है।
Academic project का मुद्दा भी इसी तरह महत्वपूर्ण है। MSc जैसे postgraduate programmes में research project छात्र की पढ़ाई का अहम हिस्सा होता है। Project allocation, supervisor support, laboratory access और peer collaboration में आने वाली समस्याओं का academic progress पर असर पड़ सकता है। लेकिन इस मामले में project-related difficulties ने किस तरह छात्र की स्थिति को प्रभावित किया, यह external inquiry से ही स्पष्ट हो सकेगा।
छात्रों के protest ने IIT Delhi में mental-health support को लेकर पुरानी बहस को भी फिर सामने ला दिया है। India Today की एक रिपोर्ट के अनुसार हाल के IIT-related student deaths के बाद campus mental-health safeguards को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं।
ऋषिकेश के मामले में students का कहना है कि institutional system में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहां कोई student अपनी परेशानी लेकर जाए तो उसे अलग-अलग departments के बीच भेजने के बजाय coordinated support मिले।
एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि students के लिए counselling services कितनी accessible हैं। कई students मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर stigma के कारण मदद लेने से बच सकते हैं। इसलिए केवल counselling centre होना पर्याप्त नहीं माना जा सकता; students को यह भरोसा भी होना चाहिए कि मदद लेने पर उनकी academic या social स्थिति प्रभावित नहीं होगी।
IIT Delhi ने अब support system में सुधार के कुछ कदमों की घोषणा की है। External ombudsperson और mentor system जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य unresolved grievances को एक अतिरिक्त स्तर पर address करना है। यदि ये mechanisms प्रभावी तरीके से लागू होते हैं तो भविष्य में students की समस्याओं को पहले ही पहचानने और समाधान करने में मदद मिल सकती है।
लेकिन students की मांग है कि reforms केवल घोषणा तक सीमित न रहें। उन्हें implementation, accountability और transparency भी चाहिए। यही कारण है कि external inquiry की रिपोर्ट इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस की जांच भी जारी है। पुलिस ने बताया है कि घटना से संबंधित परिस्थितियों की जांच की जा रही है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार मौके से कोई suicide note नहीं मिला। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस जांच और external inquiry दोनों के findings का इंतजार करना जरूरी है।
इस मामले ने IIT Delhi के students के बीच भावनात्मक माहौल पैदा किया है। छात्रों ने protest के अलावा candlelight march भी आयोजित किया। कई students ने “Justice for Rishikesh” जैसे slogans के साथ अपनी मांगें रखीं।
प्रदर्शन का एक बड़ा संदेश यह रहा कि students चाहते हैं कि administration उनके academic और personal welfare को केवल rules और procedures के नजरिए से न देखे, बल्कि कठिन परिस्थितियों में individual support भी उपलब्ध कराए।
दूसरी तरफ IIT Delhi के लिए चुनौती यह है कि वह student welfare और institutional policies के बीच संतुलन बनाए और साथ ही जांच को निष्पक्ष तरीके से पूरा करे। External committee का गठन इसी दिशा में एक कदम माना जा सकता है।
अब आगे की नजर समिति की जांच पर रहेगी। अगर समिति records और procedures की समीक्षा के बाद किसी administrative lapse की पहचान करती है तो वह recommendations दे सकती है। अगर ऐसा नहीं मिलता, तो भी यह जांच स्पष्टता प्रदान कर सकती है कि अलग-अलग स्तरों पर क्या हुआ था और भविष्य में क्या सुधार किए जाने चाहिए।
छात्रों के लिए भी यह घटना एक बड़ा reminder है कि campus में mental-health support और grievance mechanisms को मजबूत करना कितना जरूरी है। किसी भी student को गंभीर मानसिक परेशानी महसूस हो तो उसे अकेले इसका सामना करने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति, परिवार, faculty member या professional mental-health service तक पहुंचने का विकल्प मिलना चाहिए।
यह भी जरूरी है कि educational institutions students को यह संदेश दें कि academic performance, project completion या किसी administrative समस्या से ज्यादा महत्वपूर्ण उनका जीवन और wellbeing है।
फिलहाल IIT दिल्ली में छात्रों का विरोध केवल ऋषिकेश कुमार की मौत की जांच तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में hostel accommodation, academic project, mental-health support, grievance redressal और institutional accountability जैसे सवाल हैं। प्रशासन ने external inquiry committee बनाने समेत कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन छात्रों की नजर अब जांच की निष्पक्षता और उसके नतीजे पर है।
ऋषिकेश कुमार की मौत के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा। परिवार के आरोप, छात्रों की शिकायतें और IIT दिल्ली का पक्ष—तीनों को साथ रखकर ही पूरे मामले को समझना होगा। अभी सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि जांच तथ्यों के आधार पर हो और उससे मिले सबक के आधार पर campus में ऐसी support व्यवस्था तैयार की जाए जिससे परेशान students समय रहते मदद तक पहुंच सकें।
IIT कानपुर छात्र ने एक दिन में ₹77 करोड़ कमाए, दो दोस्तों के साथ बनाया ₹415 करोड़ का स्टार्टअप
http://IIT दिल्ली में छात्र की मौत के बाद प्रदर्शन करते छात्र
