त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों में मिठाइयों और खोया यानी मावा की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इसी बढ़ती मांग के बीच मिलावटी दूध और डेयरी उत्पादों को लेकर खाद्य सुरक्षा विभागों की कार्रवाई भी तेज हो जाती है। हाल की कार्रवाई में उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर संदिग्ध और मिलावटी खोया पकड़े जाने के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि आखिर बाजार से खरीदा गया मावा असली है या नकली, इसकी पहचान आम ग्राहक कैसे करे।
हाल की रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में मिलावटी डेयरी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हजारों किलो संदिग्ध खोया और दूसरे उत्पाद जब्त या नष्ट किए गए हैं। अलग-अलग कार्रवाइयों में मिलावट के लिए रिफाइंड ऑयल, डिटर्जेंट, टैल्कम पाउडर, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड और अन्य पदार्थों के इस्तेमाल की बात सामने आई है।
कानपुर देहात के रसूलाबाद इलाके में एक अवैध यूनिट से 3,300 किलो से ज्यादा मिलावटी खोया नष्ट किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक वहां संदिग्ध खोये में डिटर्जेंट, रिफाइंड ऑयल, टैल्कम पाउडर और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड जैसे पदार्थ पाए गए। मौके पर खोया बनाने वाली भट्टियां, क्रीम निकालने वाली मशीनें और स्किम्ड मिल्क पाउडर जैसी सामग्री भी मिली।
इसी तरह उत्तर प्रदेश में पिछले महीनों में analogue paneer, khoya और दूसरे दूध आधारित उत्पादों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक छह महीनों में 100 से अधिक enforcement operations के दौरान 22,000 क्विंटल से ज्यादा analogue paneer, khoya और दूसरे milk-based products जब्त या नष्ट किए गए।
इन कार्रवाइयों का मतलब यह नहीं है कि बाजार में बिकने वाला हर खोया नकली है। असली और मिलावटी खोये में फर्क करना कई बार केवल देखकर आसान नहीं होता। फिर भी कुछ संकेत ऐसे हैं जिनसे ग्राहक शुरुआती स्तर पर सावधानी बरत सकता है। विशेषज्ञ और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी गाइडलाइन यह भी बताती हैं कि घरेलू टेस्ट केवल प्रारंभिक संकेत दे सकते हैं; किसी खाद्य पदार्थ की पूर्ण शुद्धता की पुष्टि के लिए अधिकृत लैब टेस्ट ज्यादा भरोसेमंद होता है।
खोया आखिर होता क्या है और इसमें मिलावट क्यों होती है?
खोया या मावा मुख्य रूप से दूध को गर्म करके उसका पानी कम करने से तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल पेड़ा, बर्फी, गुलाब जामुन, गुझिया, कलाकंद और कई दूसरी मिठाइयों में किया जाता है।
त्योहारों के समय इसकी मांग अचानक बढ़ जाती है। मांग बढ़ने पर कुछ अवैध निर्माता लागत कम करके ज्यादा मात्रा में उत्पाद तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभाग त्योहारों से पहले खोया, पनीर, दूध, घी और तैयार मिठाइयों की जांच बढ़ाते हैं।
मिलावटी खोया बनाने में अलग-अलग जगहों पर अलग पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है। रिपोर्टों में synthetic milk, starch, milk powder, vegetable fat, refined oil और अन्य गैर-डेयरी सामग्री के इस्तेमाल की बात सामने आती रही है। हाल की उत्तर प्रदेश कार्रवाई में कुछ मामलों में डिटर्जेंट, टैल्कम पाउडर और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड जैसे पदार्थ मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
यही वजह है कि केवल खोये का रंग देखकर उसे असली मान लेना सुरक्षित तरीका नहीं है।
1. सबसे पहले रंग और बनावट देखें
अच्छे खोये का रंग सामान्य तौर पर हल्का क्रीम या ऑफ-व्हाइट हो सकता है। इसकी बनावट मुलायम होती है और इसमें प्राकृतिक दूध से बनी हल्की दानेदार संरचना दिखाई दे सकती है। बहुत ज्यादा चमकीला, असामान्य रूप से सफेद या रबड़ जैसा खोया देखकर सावधान होना बेहतर है।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—सिर्फ रंग देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि खोया मिलावटी है। दूध की गुणवत्ता, पकाने का समय और खोये की किस्म के कारण रंग और texture बदल सकते हैं।
इसलिए रंग को केवल पहला संकेत मानें, अंतिम फैसला नहीं।
अगर खोया हाथ में लेने पर बहुत ज्यादा चिपचिपा, असामान्य रूप से चिकना, रबड़ जैसा या बेहद सूखा महसूस हो तो उसे खरीदने से पहले दूसरे संकेत भी जरूर देखें।
2. खुशबू पर ध्यान दें
असली और ताजा खोये में सामान्य तौर पर दूध या हल्की प्राकृतिक डेयरी जैसी खुशबू हो सकती है। अगर किसी खोये से साबुन, केमिकल, तेज तेल या कोई अजीब गंध आ रही है तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है।
लेकिन खुशबू भी अपने आप में पक्की जांच नहीं है। कुछ मिलावटी उत्पादों में ऐसी गंध नहीं भी हो सकती।
इसलिए खरीदते समय खोये को केवल सूंघकर निर्णय लेने के बजाय उसके रंग, बनावट, स्रोत और पैकेजिंग को भी देखें।
अगर दुकानदार खुला खोया बेच रहा है और वह लंबे समय से खुले में रखा है, तो उसकी freshness पर भी ध्यान दें।
3. हथेली पर थोड़ा खोया रगड़कर देखें
एक छोटा सा हिस्सा लेकर हथेली या उंगलियों के बीच हल्के से रगड़ सकते हैं। सामान्य खोया मुलायम महसूस हो सकता है और दूध-घी जैसी हल्की प्राकृतिक महक आ सकती है। अगर यह बहुत ज्यादा चिपचिपा या असामान्य रूप से चिकना महसूस हो तो सावधानी बरतें।
यह तरीका केवल शुरुआती पहचान के लिए है। हथेली पर अच्छा महसूस होने वाला हर खोया जरूरी नहीं कि प्रयोगशाला परीक्षण में भी शुद्ध निकले।
इसलिए इसे केवल एक red flag check समझें।
4. पानी वाला टेस्ट क्या बताता है?
खोये की थोड़ी मात्रा लेकर पानी में मिलाकर उसकी बनावट देखी जा सकती है। अलग-अलग प्रकार के खोये पानी में अलग तरह से व्यवहार कर सकते हैं, इसलिए इंटरनेट पर बताए गए हर पानी वाले टेस्ट को शुद्धता की अंतिम गारंटी मानना ठीक नहीं है।
कुछ घरेलू गाइड में बताया जाता है कि असली खोया पानी में मिलाने पर दूधिया रूप ले सकता है, जबकि संदिग्ध खोया अलग-अलग दानों या असामान्य कणों में टूट सकता है।
लेकिन यह तरीका भी definitive adulteration test नहीं है।
अगर पानी में मिलाने पर अजीब गंध, असामान्य रंग या बहुत ज्यादा अलगाव दिखाई दे तो उस उत्पाद को इस्तेमाल न करना बेहतर है और संभव हो तो नमूना जांच के लिए अधिकृत खाद्य प्रयोगशाला या संबंधित विभाग से संपर्क करें।
5. आयोडीन टेस्ट से स्टार्च की शुरुआती जांच
घरेलू स्तर पर सबसे उपयोगी परीक्षणों में से एक आयोडीन टेस्ट है, लेकिन इसे सही तरीके से करना जरूरी है।
भारत सरकार के Eat Right India के DART कार्यक्रम के अनुसार दूध और दूध से बने उत्पादों जैसे खोया, छैना और पनीर में starch की मौजूदगी की जांच के लिए sample को पानी के साथ गर्म करके ठंडा करने के बाद tincture of iodine की कुछ बूंदें डाली जा सकती हैं। यदि मिश्रण नीला हो जाए तो starch की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है।
इस टेस्ट को करते समय केवल food-grade/appropriate testing iodine और सुरक्षित प्रक्रिया का इस्तेमाल करें। किसी भी रसायन को चखना नहीं चाहिए और बच्चों को इस प्रक्रिया से दूर रखना चाहिए।
सबसे जरूरी बात यह है कि आयोडीन टेस्ट केवल starch की मौजूदगी का संकेत देता है। अगर रंग नहीं बदलता, तो इसका मतलब यह नहीं कि खोया हर प्रकार की मिलावट से पूरी तरह मुक्त है।
6. स्वाद में असामान्यता मिले तो तुरंत रुकें
अगर दुकानदार स्वाद चखने की अनुमति देता है तो बहुत थोड़ी मात्रा से स्वाद का अंदाजा लगाया जा सकता है। सामान्य खोये में हल्का दूधिया और प्राकृतिक स्वाद हो सकता है।
अगर स्वाद कड़वा, साबुन जैसा, बहुत खट्टा, रासायनिक या सामान्य से बिल्कुल अलग लगे तो उसे न खरीदें।
हालांकि यहां भी सावधानी जरूरी है। केवल स्वाद के आधार पर किसी खाद्य पदार्थ को सुरक्षित घोषित नहीं किया जा सकता।
अगर आपको किसी उत्पाद पर संदेह है तो उसे चखते रहने के बजाय इस्तेमाल बंद कर दें।
7. बहुत सस्ता खोया देखकर लालच न करें
मिलावट से बचने का सबसे आसान तरीका है कि केवल कीमत देखकर खरीदारी न करें।
अगर किसी इलाके में सामान्य कीमत से बहुत कम दाम पर खोया उपलब्ध है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतनी कम कीमत पर उत्पाद कैसे तैयार किया जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं कि कम कीमत वाला हर उत्पाद नकली है, लेकिन असामान्य रूप से कम कीमत एक warning sign हो सकती है।
खोया खरीदते समय भरोसेमंद डेयरी, प्रतिष्ठित मिठाई दुकान या ऐसे विक्रेता को प्राथमिकता दें जिसके बारे में स्थानीय स्तर पर अच्छी जानकारी हो।
पैक्ड उत्पाद लेते समय निर्माता का नाम, batch number, manufacturing/packing date, best-before date, storage instructions और लेबल पर दी गई अन्य जानकारी जरूर देखें।
8. मिठाई खरीदते समय सिर्फ खोया नहीं, पूरी दुकान देखें
कई लोग मिठाई खरीदते समय सिर्फ मिठाई का रंग और कीमत देखते हैं। लेकिन food safety के लिए दुकान का वातावरण भी महत्वपूर्ण है।
मिठाइयां खुली धूल, मक्खियों या गंदे पानी के संपर्क में न हों। कर्मचारी साफ-सफाई का ध्यान रख रहे हों। मिठाइयों को सही तापमान और hygienic conditions में रखा गया हो।
अगर दुकान में बहुत पुरानी मिठाइयां, असामान्य गंध, गंदे बर्तन या खराब storage दिखाई दे तो दूसरी दुकान चुनना बेहतर है।
खास तौर पर दूध, खोया और क्रीम से बनी मिठाइयां जल्दी खराब हो सकती हैं। इसलिए ऐसी मिठाइयां जरूरत के मुताबिक खरीदें और उन्हें लंबे समय तक कमरे के तापमान पर न रखें।
सिर्फ घरेलू टेस्ट से क्यों नहीं हो सकती पूरी पहचान?
सोशल मीडिया पर असली और नकली खोया पहचानने के कई घरेलू तरीके बताए जाते हैं। लेकिन हर तरीका वैज्ञानिक रूप से हर तरह की मिलावट पकड़ ले, ऐसा जरूरी नहीं है।
उदाहरण के लिए आयोडीन टेस्ट starch का संकेत दे सकता है, लेकिन इससे डिटर्जेंट, कुछ chemicals, vegetable fat या दूसरी मिलावटों की पूरी जांच नहीं होती। भारत सरकार के Eat Right India के DART कार्यक्रम में भी ऐसे tests को specific adulterants की detection के लिए बताया गया है।
इसलिए अगर किसी खोये पर गंभीर संदेह है तो उसे खाने के बजाय संबंधित food safety authority को शिकायत करना ज्यादा सुरक्षित है।
मिलावटी खोया खाने से क्या नुकसान हो सकता है?
मिलावट में इस्तेमाल होने वाला पदार्थ क्या है और कितनी मात्रा में मौजूद है, इसके आधार पर स्वास्थ्य जोखिम अलग-अलग हो सकते हैं। दूषित या असुरक्षित खाद्य पदार्थ खाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और food poisoning जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
अगर किसी खाद्य पदार्थ में रासायनिक या गैर-खाद्य पदार्थ इस्तेमाल किए गए हों तो जोखिम और गंभीर हो सकता है। इसलिए संदिग्ध खोया या उससे बनी मिठाई को खाना जारी रखना समझदारी नहीं है।
विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों को संदिग्ध खाद्य पदार्थों से अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
मिठाई खरीदते समय एक और जरूरी बात
त्योहार के समय अक्सर लोग बड़ी मात्रा में मिठाई खरीद लेते हैं। लेकिन जितनी ज्यादा मिठाई खरीदी जाती है, उतना ही storage महत्वपूर्ण हो जाता है।
दुकान से मिठाई लेने के बाद उसे जल्द से जल्द उचित तरीके से रखें। दूध या खोया आधारित मिठाइयों को आवश्यकता के अनुसार खरीदना बेहतर है।
अगर मिठाई का स्वाद, smell, रंग या texture अचानक बदल गया है तो उसे खाने से बचें।
सिर्फ इसलिए कि मिठाई महंगी दुकान से खरीदी गई है, उसे हमेशा 100% सुरक्षित मान लेना भी सही नहीं है। भरोसेमंद विक्रेता चुनना जरूरी है, लेकिन food safety में storage और freshness भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
अगर खोया संदिग्ध लगे तो क्या करें?
सबसे पहले उसे खाने या उससे मिठाई बनाने से बचें।
अगर आपने पैक्ड खोया खरीदा है तो पैकेट, batch number, बिल और उत्पाद की जानकारी संभालकर रखें। संभव हो तो संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को शिकायत करें।
खुले खोये के मामले में दुकान का नाम, खरीद की तारीख और उपलब्ध बिल जैसी जानकारी शिकायत में मदद कर सकती है।
अगर खाने के बाद किसी व्यक्ति को उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
इस बार सबसे जरूरी सीख क्या है?
मिलावटी खोये की खबर सामने आने के बाद घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूर बढ़ानी चाहिए। त्योहारों में मिठाइयां भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और केवल कुछ मामलों में मिलावट सामने आने का मतलब यह नहीं कि हर मिठाई या हर खोया खराब है।
सही तरीका यह है कि भरोसेमंद दुकान चुनें, बहुत सस्ते उत्पाद से सावधान रहें, खुला खोया खरीदते समय रंग-बनावट-गंध देखें, पैक्ड उत्पाद का लेबल जांचें और किसी भी असामान्यता पर उसे न खाएं।
घरेलू टेस्ट केवल शुरुआती संकेत देने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। अगर आपको वास्तविक मिलावट का संदेह है तो अधिकृत खाद्य परीक्षण सबसे भरोसेमंद विकल्प है।
त्योहारों की मिठास बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि स्वाद के साथ सुरक्षा से समझौता न करें।
कुल मिलाकर, हालिया खाद्य सुरक्षा कार्रवाइयों ने एक बार फिर मिलावटी खोये और डेयरी उत्पादों को लेकर सावधानी की जरूरत सामने रखी है। उत्तर प्रदेश में हजारों किलो संदिग्ध/मिलावटी उत्पादों पर कार्रवाई हुई है और कुछ मामलों में डिटर्जेंट, रिफाइंड ऑयल, टैल्कम पाउडर और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड जैसे पदार्थ पाए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में खोया खरीदते समय रंग, बनावट, गंध और स्रोत पर ध्यान देना, पैक्ड उत्पाद का लेबल जांचना और जरूरत पड़ने पर starch के लिए आयोडीन टेस्ट जैसे प्रारंभिक परीक्षण करना मददगार हो सकता है। लेकिन किसी भी घरेलू टेस्ट को पूर्ण शुद्धता की गारंटी न मानें।
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