फिटनेस की दुनिया में इन दिनों एक ऐसा वर्कआउट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसके लिए न महंगी जिम मेंबरशिप की जरूरत है और न ही किसी जटिल मशीन की। इस फिटनेस ट्रेंड का नाम है रकिंग (Rucking)। आसान भाषा में कहें तो पीठ पर वजन वाला बैग लेकर तेज गति से चलना रकिंग कहलाता है। इसकी जड़ें सैन्य प्रशिक्षण में हैं, जहां सैनिक लंबी दूरी तक जरूरी सामान से भरा रकसैक लेकर मार्च करते हैं। अब इसका हल्का और नियंत्रित रूप आम लोगों की फिटनेस रूटीन का हिस्सा बन रहा है।
सामान्य वॉक की तुलना में रकिंग शरीर से अधिक मेहनत कराती है। अतिरिक्त वजन के कारण पैरों, कूल्हों, पीठ, कंधों और कोर मसल्स को शरीर को स्थिर रखने और आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा काम करना पड़ता है। इसके साथ ही हृदय गति भी सामान्य वॉक की तुलना में बढ़ सकती है। हालांकि इसके फायदे इस बात पर निर्भर करते हैं कि वजन कितना है, दूरी और गति कैसी है तथा व्यक्ति की मौजूदा फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति क्या है। बहुत भारी वजन उठाकर शुरुआत करना फायदे की जगह चोट का कारण बन सकता है।
रकिंग को समझने के लिए सामान्य वॉक का उदाहरण लिया जा सकता है। मान लीजिए कि आप रोज 30 मिनट तेज चलते हैं। अब यदि सुरक्षित तरीके से फिट बैकपैक में थोड़ा अतिरिक्त वजन रखकर वही दूरी चलते हैं, तो शरीर को उस अतिरिक्त भार को संभालना पड़ता है। इससे उसी परिचित गतिविधि की तीव्रता बढ़ जाती है।
हालांकि सोशल मीडिया पर कई वीडियो में लोगों को बहुत भारी बैग लेकर दौड़ते हुए देखा जाता है, लेकिन शुरुआती व्यक्ति के लिए यह तरीका सही नहीं है। पारंपरिक रकिंग मूल रूप से वजन लेकर तेज चलने या हाइकिंग से जुड़ी गतिविधि है। वजन वाला बैकपैक पहनकर दौड़ने से जोड़ों पर तनाव बढ़ सकता है और रकिंग का कम-प्रभाव वाला लाभ कम हो जाता है।
रकिंग का पहला बड़ा फायदा है कि यह कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस को चुनौती दे सकती है। सामान्य चलने की तुलना में अतिरिक्त वजन शरीर की ऊर्जा की मांग बढ़ाता है। इससे हृदय और श्वसन प्रणाली को अधिक काम करना पड़ता है। यही वजह है कि नियंत्रित रकिंग सामान्य वॉक को अधिक चुनौतीपूर्ण कार्डियो गतिविधि में बदल सकती है।
दूसरा फायदा है मसल्स की भागीदारी बढ़ना। चलते समय पैर पहले से काम करते हैं, लेकिन अतिरिक्त भार के साथ क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग, ग्लूट्स, काफ और शरीर को स्थिर रखने वाली मांसपेशियों की मांग बढ़ सकती है। बैकपैक को संभालने के लिए ऊपरी पीठ और कंधे भी काम करते हैं। Cleveland Clinic रकिंग को पूरे शरीर की कंडीशनिंग और सहनशक्ति बढ़ाने वाली गतिविधि बताता है।
तीसरा संभावित फायदा है सामान्य वॉक की तुलना में अधिक ऊर्जा खर्च। यहां किसी एक निश्चित कैलोरी संख्या का दावा करना सही नहीं होगा, क्योंकि कैलोरी खर्च व्यक्ति के वजन, बैग के भार, गति, दूरी, ढलान और फिटनेस स्तर पर निर्भर करता है। लेकिन अतिरिक्त भार के कारण शरीर को समान दूरी तय करने में ज्यादा ऊर्जा खर्च करनी पड़ सकती है।
चौथा फायदा है सहनशक्ति में सुधार। यदि वजन, दूरी और समय को धीरे-धीरे बढ़ाया जाए, तो शरीर लंबे समय तक काम करने के लिए अनुकूलित हो सकता है। रकिंग पर उपलब्ध शोध और विशेषज्ञ समीक्षा बताते हैं कि load carriage शरीर की शारीरिक मांग बढ़ाती है; इसलिए प्रोग्रामिंग में progressive overload और recovery दोनों जरूरी हैं।
पांचवां फायदा है कोर की सक्रियता। वजन वाला बैग शरीर को पीछे की ओर खींच सकता है। इसे संतुलित करने के लिए पेट और धड़ की stabilizing muscles सक्रिय होती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रकिंग अलग से किए जाने वाले हर प्रकार के core exercise की जगह ले सकती है। इसे संपूर्ण फिटनेस प्रोग्राम का एक हिस्सा समझना बेहतर है।
छठा फायदा है फंक्शनल फिटनेस। रोजमर्रा की जिंदगी में हमें सामान उठाना, सीढ़ियां चढ़ना, यात्रा के दौरान बैग लेकर चलना और कई तरह की load-carrying गतिविधियां करनी पड़ती हैं। नियंत्रित रकिंग शरीर को भार के साथ चलने की क्षमता विकसित करने में मदद कर सकती है।
सातवां फायदा है कम उपकरण में वर्कआउट की सुविधा। शुरुआत के लिए एक अच्छी तरह फिट होने वाला मजबूत बैकपैक और सुरक्षित तरीके से स्थिर किया गया हल्का वजन पर्याप्त हो सकता है। विशेष रकसैक वजन को ऊंचा और शरीर के करीब स्थिर रखने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, जबकि ढीले सामान्य बैग में वजन हिलने या पीठ पर दबाव बनाने की संभावना अधिक हो सकती है।
आठवां फायदा है आउटडोर एक्टिविटी बढ़ना। रकिंग पार्क, वॉकिंग ट्रैक या सुरक्षित ट्रेल पर की जा सकती है। इससे व्यक्ति को नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ बाहर समय बिताने का मौका मिलता है। व्यायाम और बाहर समय बिताना मूड और तनाव प्रबंधन के लिए उपयोगी हो सकता है।
नौवां फायदा है वर्कआउट की तीव्रता को आसानी से बदल पाना। व्यक्ति गति, समय, दूरी, रास्ते की ढलान और वजन में से किसी एक तत्व को धीरे-धीरे बदल सकता है। हालांकि एक साथ वजन, गति और दूरी तीनों बढ़ाना खराब रणनीति हो सकती है।
दसवां फायदा है सामान्य वॉक को अधिक चुनौतीपूर्ण बनाना। जो लोग पहले से नियमित रूप से चलते हैं और जिन्हें चिकित्सकीय रोक नहीं है, उनके लिए हल्का रकिंग लोड एक परिचित गतिविधि में नया training stimulus जोड़ सकता है। लेकिन नए व्यक्ति को पहले सामान्य वॉक की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
इन फायदों के बीच कुछ गलतियां ऐसी हैं जो चोट का खतरा बढ़ा सकती हैं। सबसे आम गलती पहले दिन ही बहुत भारी बैग उठाना है। सोशल मीडिया पर किसी प्रशिक्षित व्यक्ति को 15 या 20 किलो वजन के साथ चलते देखकर उसकी नकल करना सुरक्षित नहीं है। सैन्य प्रशिक्षण में इस्तेमाल होने वाला भार आम नागरिकों के लिए शुरुआती मानक नहीं है।
दूसरी गलती वजन को बैग में ढीला छोड़ना है। यदि किताबें, डंबल या दूसरी भारी वस्तुएं हर कदम पर हिलती हैं तो शरीर को असमान भार संभालना पड़ सकता है। कठोर वस्तु पीठ पर दबाव भी बना सकती है। वजन को सुरक्षित, स्थिर और शरीर के करीब रखना चाहिए।
तीसरी गलती खराब पोश्चर है। वजन ज्यादा होने पर कुछ लोग बहुत आगे झुककर चलने लगते हैं या कंधों को गोल कर लेते हैं। यदि फॉर्म लगातार बिगड़ रही है, तो यह संकेत हो सकता है कि भार, गति या दूरी वर्तमान क्षमता से अधिक है।
चौथी गलती शुरुआती दिनों में वजन लेकर दौड़ना है। रकिंग को सामान्य running की तरह नहीं देखना चाहिए। अतिरिक्त वजन के साथ दौड़ने से घुटनों, टखनों और दूसरे जोड़ों पर अधिक तनाव पड़ सकता है।
पांचवीं गलती दर्द को नजरअंदाज करना है। मांसपेशियों की सामान्य थकान और तेज, लगातार या बढ़ता हुआ दर्द अलग चीजें हैं। घुटने, टखने, कूल्हे, पीठ या कंधे में नया दर्द हो तो गतिविधि रोककर कारण समझना चाहिए।
अब बात उन 8 जरूरी सावधानियों की, जिन्हें रकिंग शुरू करने से पहले ध्यान में रखना चाहिए।
पहली सावधानी है हल्के वजन से शुरुआत। शुरुआती सिफारिशों में अक्सर लगभग 10% body weight के आसपास से शुरू करने का उदाहरण दिया जाता है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नियम नहीं है। बिल्कुल नए, निष्क्रिय या स्वास्थ्य समस्या वाले व्यक्ति को इससे भी कम वजन या खाली बैग से शुरुआत करनी पड़ सकती है।
दूसरी सावधानी है एक समय में एक चीज बढ़ाना। पहले समय या दूरी में छोटा बदलाव करें और शरीर की प्रतिक्रिया देखें। हर सप्ताह भारी वजन जोड़ना जरूरी नहीं है। Cleveland Clinic gradual progression और recovery पर जोर देता है।
तीसरी सावधानी है सही बैकपैक चुनना। चौड़ी और आरामदायक shoulder straps, शरीर के अनुसार fit और वजन को स्थिर रखने की क्षमता महत्वपूर्ण है। बैग का वजन हर कदम पर उछलना नहीं चाहिए।
चौथी सावधानी है सही जूते और रास्ता। शुरुआती व्यक्ति को पहले समतल, परिचित और सुरक्षित रास्ते पर चलना चाहिए। बहुत ऊबड़-खाबड़ trail, तेज ढलान या फिसलन वाले रास्ते पर भारी बैग के साथ शुरुआत न करें।
पांचवीं सावधानी है वार्म-अप और कूल-डाउन। शुरुआत में कुछ मिनट सामान्य गति से चलें, फिर धीरे-धीरे pace बढ़ाएं। सत्र खत्म करते समय भी अचानक रुकने के बजाय गति कम करें।
छठी सावधानी है पानी और मौसम का ध्यान। अतिरिक्त वजन के कारण मेहनत और गर्मी का तनाव बढ़ सकता है। गर्म और उमस वाले मौसम में कम दूरी, हल्का वजन और पर्याप्त hydration महत्वपूर्ण है। Load-carriage research बताता है कि भारी भार शरीर की physiological strain बढ़ा सकता है।
सातवीं सावधानी है रिकवरी। हर दिन भारी रकिंग करना जरूरी नहीं है। शुरुआत में non-consecutive days पर sessions रखना और बीच में शरीर को recover करने देना समझदारी हो सकती है। फिटनेस स्तर के अनुसार walking, mobility और दूसरे exercise modes को भी routine में रखा जा सकता है।
आठवीं सावधानी है अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना। जिन लोगों को पहले से पीठ, घुटने, कूल्हे या टखने की समस्या है, या जिन्हें exercise से जुड़ी चिकित्सकीय पाबंदी है, उन्हें रकिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य physiotherapist से व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए। अतिरिक्त भार जोड़ों और पीठ पर तनाव बढ़ा सकता है।
एक शुरुआती व्यक्ति के लिए सरल तरीका यह हो सकता है कि पहले बिना वजन 20 से 30 मिनट आराम से चलने की क्षमता विकसित की जाए। इसके बाद बहुत हल्का और स्थिर भार जोड़कर समतल रास्ते पर छोटी अवधि की वॉक की जाए। शरीर की प्रतिक्रिया ठीक रहने पर धीरे-धीरे प्रगति की जा सकती है। यह कोई प्रतियोगिता नहीं है और सैन्य मानकों की नकल करने की जरूरत नहीं है।
यह भी समझना जरूरी है कि रकिंग कोई जादुई fat-loss formula नहीं है। शरीर की चर्बी कम करने में कुल calorie balance, भोजन की गुणवत्ता, नींद, नियमित activity और लंबे समय तक routine बनाए रखना महत्वपूर्ण है। रकिंग ऊर्जा खर्च बढ़ाने वाली गतिविधि हो सकती है, लेकिन खराब डाइट और अनियमित lifestyle का अकेला समाधान नहीं है।
इसी तरह muscle building के लिए भी केवल रकिंग पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। यह strength endurance और conditioning में मदद कर सकती है, लेकिन संतुलित resistance training में अलग-अलग movement patterns और progressive strength work की अपनी भूमिका है।
रकिंग की लोकप्रियता का एक कारण इसकी सादगी है। कई लोगों के लिए दौड़ना कठिन लगता है और सामान्य वॉक पर्याप्त चुनौतीपूर्ण नहीं लगती। ऐसे में नियंत्रित अतिरिक्त वजन दोनों के बीच एक विकल्प बन सकता है। लेकिन इसकी असली उपयोगिता तभी है जब व्यक्ति वजन की होड़ में पड़ने के बजाय technique, gradual progression और consistency को प्राथमिकता दे।
कुल मिलाकर, रकिंग एक सैन्य प्रशिक्षण पद्धति से निकली फिटनेस गतिविधि है, जिसमें वजन वाला बैग लेकर चला जाता है। सही तरीके से करने पर यह कार्डियो फिटनेस, मसल endurance, core stability, functional capacity और सामान्य वॉक की intensity बढ़ाने में उपयोगी हो सकती है। दूसरी तरफ गलत वजन, खराब बैग फिट, खराब posture, तेजी से progression और दर्द को नजरअंदाज करना चोट का जोखिम बढ़ा सकता है।
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